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एक मैसेज ने उजाड़ दी जिंदगी! गोल्ड ट्रेडिंग के नाम पर 12 करोड़ की ठगी, मुंबई से महिला डायरेक्टर गिरफ्तार



साइबर अपराधियों के नए-नए तरीके लगातार लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। अब राजस्थान से सामने आया एक मामला इस बात का बड़ा उदाहरण है कि किस तरह एक साधारण WhatsApp मैसेज के जरिए शुरू हुई बातचीत करोड़ों रुपये की ठगी में बदल गई। राजस्थान स्टेट साइबर क्राइम थाना पुलिस ने ऐसे हाईटेक साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने ऑनलाइन गोल्ड ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालच देकर एक निवेशक से 12 करोड़ 9 लाख 65 हजार 512 रुपये की ठगी कर ली।

मामले में पुलिस ने मुंबई से फर्जी फाइनेंस कंपनी गोल्डन लीजेंड लीजिंग एंड फाइनेंस लिमिटेड (GLLFL) की निदेशक दिव्या सिंह कुशवाहा को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क केवल राजस्थान तक सीमित नहीं था, बल्कि देश के कई राज्यों में लोगों को इसी तरह निशाना बनाया गया हो सकता है।

एक WhatsApp मैसेज से शुरू हुआ करोड़ों का खेल

पुलिस जांच के अनुसार पूरे मामले की शुरुआत एक साधारण WhatsApp मैसेज से हुई। साइबर ठगों ने पीड़ित से संपर्क कर उसे ऑनलाइन गोल्ड ट्रेडिंग में निवेश करने का प्रस्ताव दिया। दावा किया गया कि कम समय में कई गुना मुनाफा कमाया जा सकता है।

विश्वास पैदा करने के लिए पीड़ित को एक आकर्षक वेबसाइट और कथित ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया। वहां उसके वर्चुअल वॉलेट में लगातार बढ़ता हुआ मुनाफा दिखाया जाता रहा। स्क्रीन पर बढ़ती रकम देखकर पीड़ित को लगा कि उसका निवेश सुरक्षित है और उसे अच्छा रिटर्न मिल रहा है।

यही भरोसा बाद में उसके लिए सबसे बड़ी गलती साबित हुआ।

धीरे-धीरे जमा करा दिए 12 करोड़ से ज्यादा रुपये

जांच में सामने आया कि कथित मुनाफे को देखकर पीड़ित ने अलग-अलग चरणों में कई बैंक खातों और वर्चुअल मर्चेंट खातों में पैसे जमा कराए।

कुल मिलाकर उसने 12 करोड़ 9 लाख 65 हजार 512 रुपये निवेश कर दिए।

साइबर अपराधियों की रणनीति ऐसी थी कि शुरुआत में छोटे निवेश पर अच्छा वर्चुअल लाभ दिखाकर भरोसा जीता गया और फिर धीरे-धीरे बड़ी रकम जमा कराई गई।

जब पैसे निकालने की बारी आई, तब शुरू हुआ नया जाल

असल ठगी तब सामने आई जब पीड़ित ने अपनी निवेश राशि और मुनाफा वापस निकालने की कोशिश की।

पुलिस के अनुसार आरोपियों ने हर बार कोई नया बहाना बनाकर उससे और पैसे जमा कराए।

कभी कहा गया—

  • आयकर जमा करना होगा,

  • प्रोसेसिंग फीस देनी होगी,

  • अकाउंट अनफ्रीज कराने के लिए शुल्क देना होगा,

  • या अन्य तकनीकी चार्ज का भुगतान करना पड़ेगा।

हर भुगतान के बाद यह भरोसा दिलाया जाता कि अब पूरी रकम खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी।

लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ।

आखिरकार जब पीड़ित को महसूस हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है, तब उसने 9 दिसंबर 2025 को राजस्थान स्टेट साइबर क्राइम थाना, जयपुर में शिकायत दर्ज कराई।

जांच में सामने आया बड़ा साइबर नेटवर्क

शिकायत मिलने के बाद साइबर पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू की।

जांच केवल बैंक खातों तक सीमित नहीं रही बल्कि तकनीकी साक्ष्य, डिजिटल लेनदेन और वित्तीय रिकॉर्ड की भी विस्तार से पड़ताल की गई।

इसी दौरान पुलिस को पता चला कि जिन वर्चुअल मर्चेंट खातों के जरिए लेनदेन किया जा रहा था, वे प्राइम इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से संचालित हो रहे थे।

जांच में यह भी सामने आया कि इन खातों के संचालन में गोल्डन लीजेंड लीजिंग एंड फाइनेंस लिमिटेड (GLLFL) की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

KYC और फ्रॉड मॉनिटरिंग में मिली गंभीर अनियमितताएं

पुलिस जांच में ऑनबोर्डिंग, KYC सत्यापन, ड्यू डिलिजेंस, रिस्क मॉनिटरिंग और फ्रॉड डिटेक्शन जैसी प्रक्रियाओं में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले।

इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल 1930 पर भी इन्हीं खातों के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों से शिकायतें दर्ज मिलीं।

इससे जांच एजेंसियों को आशंका हुई कि यह कोई अकेला मामला नहीं, बल्कि एक बड़े संगठित साइबर नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।

मुंबई से महिला डायरेक्टर गिरफ्तार

मामले में पहले आरोपी इकबाल अहमद के खिलाफ जांच पूरी कर पुलिस आरोप पत्र अदालत में पेश कर चुकी है।

इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया तो कंपनी के निदेशकों की भूमिका सामने आई।

राजस्थान स्टेट साइबर क्राइम थाना की टीम मुंबई पहुंची और वहां से कंपनी की निदेशक दिव्या सिंह कुशवाहा को गिरफ्तार कर लिया।

अदालत ने आरोपी महिला को पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

फरार मुख्य आरोपी की तलाश जारी

पुलिस पूछताछ के दौरान—

  • मनी ट्रेल,

  • डिजिटल डिवाइस,

  • बैंक खातों,

  • मोबाइल नंबर,

  • ईमेल,

  • डिजिटल साक्ष्य,

की जांच कर रही है।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

मामले का मुख्य आरोपी जयंता रॉय फिलहाल फरार बताया जा रहा है और उसकी तलाश जारी है।

कई राज्यों तक फैला हो सकता है नेटवर्क

राजस्थान के एडीजी साइबर क्राइम संजय अग्रवाल के अनुसार शुरुआती जांच से संकेत मिले हैं कि यह गिरोह केवल राजस्थान तक सीमित नहीं था।

जिन बैंक खातों और वर्चुअल मर्चेंट अकाउंट का उपयोग किया गया, उनके खिलाफ कई राज्यों से शिकायतें सामने आई हैं।

अब पुलिस अन्य राज्यों की एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर उन पीड़ितों की भी पहचान कर रही है जो इसी तरह के फर्जी गोल्ड ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए ठगी का शिकार हुए हो सकते हैं।

बदल रहा है साइबर अपराध का तरीका

विशेषज्ञों का कहना है कि अब साइबर अपराध केवल OTP, बैंक कॉल या फर्जी लिंक तक सीमित नहीं रह गया है।

अपराधी अब—

  • ऑनलाइन ट्रेडिंग,

  • निवेश,

  • शेयर बाजार,

  • क्रिप्टो,

  • गोल्ड इन्वेस्टमेंट,

जैसे आकर्षक विकल्पों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं।

पहले नकली मुनाफा दिखाया जाता है, फिर निवेश बढ़वाया जाता है और अंत में निकासी के नाम पर लगातार नई-नई फीस वसूली जाती है।

इसी वजह से पढ़े-लिखे और आर्थिक रूप से जागरूक लोग भी कई बार इनके झांसे में आ जाते हैं।

कैसे बचें ऐसे साइबर फ्रॉड से?

साइबर विशेषज्ञ लोगों को कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां अपनाने की सलाह देते हैं—

  • केवल WhatsApp या सोशल मीडिया के आधार पर किसी निवेश योजना पर भरोसा न करें।

  • किसी भी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की वैधता की जांच करें।

  • केवल अधिकृत और नियामक संस्थाओं से मान्यता प्राप्त प्लेटफॉर्म पर ही निवेश करें।

  • असामान्य रूप से अधिक मुनाफे के दावों से सतर्क रहें।

  • निकासी के लिए बार-बार फीस मांगी जाए तो तुरंत सावधान हो जाएं।

  • साइबर ठगी की आशंका होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।

पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद

राजस्थान स्टेट साइबर क्राइम थाना के थानाधिकारी गजेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में पुलिस निरीक्षक अमृता सिंह, उप निरीक्षक मुकेश कुमार और कॉन्स्टेबल बोदूराम की टीम ने इस हाईटेक साइबर नेटवर्क का खुलासा किया।

पुलिस का मानना है कि आगे की पूछताछ में इस गिरोह से जुड़े कई और लोगों की पहचान हो सकती है। साथ ही करोड़ों रुपये की ठगी के अन्य मामलों का भी खुलासा होने की संभावना है।

यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि डिजिटल निवेश के नाम पर तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों से बचने के लिए सतर्कता, सत्यापन और सावधानी सबसे बड़ा बचाव है।

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