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हर 10 में से 1 भारतीय पर मंडरा रहा कैंसर का खतरा! WHO के अनुमान ने बढ़ाई चिंता, जानिए किन आदतों से बढ़ रहा है जोखिम

 


नई दिल्ली: भारत में कैंसर के बढ़ते मामलों को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुमान के अनुसार, भारत में लगभग हर 10 में से 1 व्यक्ति को 75 वर्ष की आयु से पहले कैंसर होने का जोखिम हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक चिकित्सा चुनौती नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू का सेवन, बदलती जीवनशैली, बढ़ता मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी, प्रदूषण, कुछ पुराने संक्रमण और समय पर जांच न कराना कैंसर के बढ़ते मामलों के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। हालांकि डॉक्टर यह भी स्पष्ट करते हैं कि सभी प्रकार के कैंसर को रोका नहीं जा सकता, लेकिन सही जीवनशैली अपनाकर और समय पर जांच कराकर कई मामलों में जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

भारत दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है

कैंसर विशेषज्ञों के अनुसार भारत इस समय दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है।

एक ओर तंबाकू से होने वाले कैंसर अभी भी बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आधुनिक जीवनशैली से जुड़े कैंसर के मामलों में भी लगातार वृद्धि हो रही है।

पहले जहां मुंह, गले और फेफड़ों के कैंसर अधिक देखे जाते थे, वहीं अब स्तन (Breast), कोलोरेक्टल (Colorectal) और प्रोस्टेट कैंसर के मामलों में भी तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

डॉक्टरों का कहना है कि बदलती जीवनशैली और खानपान ने इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

तंबाकू अब भी सबसे बड़ा खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि तंबाकू आज भी कैंसर का सबसे बड़ा रोके जा सकने वाला कारण है।

भारत में बड़ी संख्या में लोग—

  • सिगरेट

  • बीड़ी

  • गुटखा

  • खैनी

  • पान मसाला

  • सुपारी

का सेवन करते हैं।

इन उत्पादों का नियमित सेवन विशेष रूप से मुंह, गले और भोजन नली के कैंसर का खतरा काफी बढ़ा देता है।

भारत में ओरल कैंसर आज भी सबसे अधिक पाए जाने वाले कैंसरों में शामिल है।

बदलती जीवनशैली भी बढ़ा रही खतरा

डॉक्टरों का कहना है कि आधुनिक जीवनशैली भी कैंसर के मामलों में वृद्धि का बड़ा कारण बन रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार निम्न कारण जोखिम बढ़ा सकते हैं—

  • मोटापा

  • शारीरिक गतिविधि की कमी

  • लंबे समय तक बैठे रहना

  • फास्ट फूड का अधिक सेवन

  • असंतुलित भोजन

  • अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड

  • देर से शादी या गर्भधारण (कुछ विशेष कैंसरों के संदर्भ में)

  • हार्मोनल बदलाव

  • लंबे समय तक तनाव

हालांकि इन सभी कारकों का प्रभाव व्यक्ति विशेष की स्वास्थ्य स्थिति और अन्य जोखिमों पर भी निर्भर करता है।

शराब और प्रदूषण भी चिंता का विषय

विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक शराब का सेवन कई प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है।

इसके अलावा लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में रहना भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है।

विशेषकर बड़े शहरों में वायु प्रदूषण को लेकर लगातार शोध किए जा रहे हैं।

हालांकि किसी व्यक्ति में कैंसर का कारण केवल एक कारक नहीं होता, बल्कि कई जोखिम मिलकर बीमारी की संभावना बढ़ा सकते हैं।

भोजन को लेकर भी चल रही रिसर्च

वैज्ञानिक अब भोजन में मौजूद कुछ संभावित हानिकारक तत्वों का भी अध्ययन कर रहे हैं।

इनमें शामिल हैं—

  • फलों और सब्जियों पर कीटनाशकों के अवशेष

  • खाद्य पदार्थों में मिलावट

  • अनाज और दालों में प्रदूषक तत्व

  • पशु उत्पादों में एंटीबायोटिक या हार्मोन के अवशेष

हालांकि विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि इन विषयों पर अभी भी शोध जारी है और इन्हें संभावित जोखिम के रूप में देखा जा रहा है।

माइक्रोबायोम पर बढ़ रही रिसर्च

हाल के वर्षों में वैज्ञानिक शरीर के माइक्रोबायोम पर भी विशेष अध्ययन कर रहे हैं।

माइक्रोबायोम से आशय शरीर में मौजूद लाभकारी और अन्य सूक्ष्म जीवों के संतुलन से है।

कुछ शोध यह संकेत देते हैं कि माइक्रोबायोम में बदलाव कुछ प्रकार के कैंसर के जोखिम को प्रभावित कर सकता है।

हालांकि इस विषय पर अभी निर्णायक वैज्ञानिक निष्कर्ष उपलब्ध नहीं हैं और आगे व्यापक शोध की आवश्यकता है।

कुछ संक्रमण भी बढ़ाते हैं कैंसर का खतरा

विशेषज्ञ बताते हैं कि कुछ संक्रमण लंबे समय बाद कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

इनमें प्रमुख हैं—

HPV (Human Papillomavirus)

यह वायरस सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण माना जाता है।

Hepatitis B और Hepatitis C

ये संक्रमण लिवर कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं।

Helicobacter pylori

यह बैक्टीरिया पेट के कैंसर से जुड़ा माना जाता है।

इसी कारण विशेषज्ञ समय पर टीकाकरण और संक्रमण का उपचार कराने की सलाह देते हैं।

देर से जांच सबसे बड़ी समस्या

डॉक्टरों के अनुसार भारत में कैंसर के इलाज में सबसे बड़ी चुनौती बीमारी का देर से पता चलना है।

कई लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं—

  • जागरूकता की कमी

  • जांच कराने का डर

  • सामाजिक झिझक

  • आर्थिक कारण

  • नियमित स्क्रीनिंग न कराना

जब तक मरीज डॉक्टर के पास पहुंचता है, कई बार बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है।

शुरुआती पहचान क्यों जरूरी?

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कैंसर शुरुआती अवस्था में पकड़ में आ जाए तो उपचार की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है।

कई प्रकार के कैंसर का इलाज शुरुआती चरण में अधिक प्रभावी होता है।

इसी कारण नियमित स्वास्थ्य जांच और स्क्रीनिंग को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?

डॉक्टरों के अनुसार निम्न लक्षण दिखाई देने पर बिना देर किए चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए—

  • बिना कारण वजन कम होना

  • शरीर में गांठ महसूस होना

  • मुंह में लंबे समय तक घाव या छाला

  • असामान्य रक्तस्राव

  • कई सप्ताह तक लगातार खांसी

  • मल या पेशाब की आदतों में बदलाव

  • लगातार कमजोरी या अत्यधिक थकान

यह जरूरी नहीं कि ये लक्षण हमेशा कैंसर के ही हों, लेकिन इनकी चिकित्सकीय जांच कराना आवश्यक है।

कैंसर से बचाव के लिए क्या करें?

विशेषज्ञ निम्न उपाय अपनाने की सलाह देते हैं—

  • किसी भी प्रकार का तंबाकू बिल्कुल न लें।

  • शराब का सेवन सीमित रखें या पूरी तरह छोड़ दें।

  • प्रतिदिन कम से कम 30–45 मिनट व्यायाम करें।

  • स्वस्थ वजन बनाए रखें।

  • भोजन में फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर शामिल करें।

  • अत्यधिक तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड कम खाएं।

  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार HPV और Hepatitis B का टीकाकरण कराएं।

  • उम्र और जोखिम के अनुसार ब्रेस्ट, सर्वाइकल, कोलोरेक्टल और मुंह के कैंसर की नियमित स्क्रीनिंग कराएं।

  • यदि परिवार में कैंसर का इतिहास है तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच कराते रहें।

20 वर्ष की उम्र के बाद हेल्थ चेकअप जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि 20 वर्ष की आयु के बाद नियमित स्वास्थ्य जांच की आदत डालनी चाहिए।

यदि किसी व्यक्ति के परिवार में कैंसर का इतिहास है या अन्य जोखिम मौजूद हैं, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार विशेष जांच और स्क्रीनिंग करानी चाहिए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के अनुसार भारत में कैंसर का जोखिम एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि तंबाकू, अस्वास्थ्यकर जीवनशैली, प्रदूषण, कुछ संक्रमण और देर से जांच इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। हालांकि यह भी महत्वपूर्ण है कि हर व्यक्ति को कैंसर होगा, ऐसा नहीं है। कई जोखिमों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर और समय पर जांच कराकर काफी हद तक कम किया जा सकता है।

डॉक्टरों के अनुसार जागरूकता, नियमित स्वास्थ्य जांच, तंबाकू से दूरी, संतुलित आहार और शारीरिक सक्रियता जैसे कदम न केवल कैंसर बल्कि कई अन्य गंभीर बीमारियों के जोखिम को भी कम करने में मदद कर सकते हैं।

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