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रात में मोबाइल चलाने की आदत पड़ सकती है भारी, विशेषज्ञों ने बताया कैसे बिगड़ रही है नींद और बढ़ रहा तनाव

 


नई दिल्ली। स्मार्टफोन आज लोगों की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक अधिकांश लोग घंटों मोबाइल स्क्रीन पर बिताते हैं। सोशल मीडिया, वीडियो स्ट्रीमिंग और चैटिंग की वजह से कई लोग देर रात तक फोन का इस्तेमाल करते रहते हैं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत धीरे-धीरे शरीर और मानसिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। हाल के वर्षों में हुए कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि रात में अधिक समय तक मोबाइल स्क्रीन देखने से नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है और मानसिक तनाव का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार स्मार्टफोन, टैबलेट और लैपटॉप की स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट शरीर में मेलाटोनिन नामक हार्मोन के निर्माण को प्रभावित करती है। यही हार्मोन शरीर को यह संकेत देता है कि अब आराम और नींद का समय है। लेकिन देर रात तक मोबाइल चलाने से शरीर की जैविक घड़ी गड़बड़ा जाती है, जिससे नींद आने में देरी होती है और कई बार व्यक्ति पूरी रात करवटें बदलता रह जाता है।

युवाओं में तेजी से बढ़ रही समस्या

डॉक्टरों का कहना है कि देर रात मोबाइल चलाने की समस्या सबसे ज्यादा युवाओं और किशोरों में देखी जा रही है। सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय रहने की इच्छा और वीडियो देखने की आदत के कारण कई लोग आधी रात तक जागते रहते हैं। इसके कारण अगले दिन थकान, सुस्ती और काम में ध्यान न लगने जैसी समस्याएं सामने आती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार लगातार खराब नींद का असर केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि पर्याप्त नींद न लेने वाले लोगों में तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं का खतरा अधिक होता है।

क्यों जरूरी है अच्छी नींद?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छी नींद शरीर के लिए किसी दवा से कम नहीं है। जब व्यक्ति गहरी नींद लेता है, तब शरीर खुद को रिपेयर करता है और मस्तिष्क दिनभर की सूचनाओं को व्यवस्थित करता है। पर्याप्त नींद प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में भी मदद करती है।

यदि कोई व्यक्ति लगातार कम सोता है तो उसका असर शरीर के कई अंगों पर पड़ सकता है। डॉक्टरों के अनुसार नींद की कमी से हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ हर दिन सात से आठ घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लेने की सलाह देते हैं।

मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा असर

विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल पर लगातार सोशल मीडिया स्क्रॉल करने की आदत मानसिक तनाव को बढ़ा सकती है। कई लोग देर रात तक दूसरों की जिंदगी से जुड़ी पोस्ट और वीडियो देखते रहते हैं, जिससे उनके मन में तुलना और चिंता की भावना पैदा हो सकती है।

इसके अलावा लगातार नोटिफिकेशन आने से मस्तिष्क को आराम नहीं मिल पाता। इससे व्यक्ति बेचैनी, चिड़चिड़ापन और तनाव महसूस करने लगता है। कुछ मामलों में यह समस्या अवसाद और नींद न आने की बीमारी तक पहुंच सकती है।

बच्चों और किशोरों के लिए ज्यादा खतरनाक

डॉक्टरों के अनुसार बच्चों और किशोरों में मोबाइल की लत तेजी से बढ़ रही है। ऑनलाइन गेम्स और सोशल मीडिया के कारण कई बच्चे देर रात तक जागते रहते हैं। इससे उनकी पढ़ाई, याददाश्त और एकाग्रता पर बुरा असर पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि माता-पिता को बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नजर रखनी चाहिए। बच्चों को सोने से पहले मोबाइल से दूर रहने की आदत डालनी चाहिए ताकि उनकी नींद और मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

कैसे करें बचाव?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए। इसके अलावा रात में बेडरूम में कम रोशनी रखना और शांत वातावरण बनाना भी बेहतर नींद के लिए फायदेमंद माना जाता है।

डॉक्टरों का कहना है कि यदि सोने से पहले किताब पढ़ने, हल्का संगीत सुनने या ध्यान लगाने जैसी आदतें अपनाई जाएं तो नींद की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है। साथ ही रात के समय चाय, कॉफी और कैफीन युक्त पेय पदार्थों का सेवन कम करना भी जरूरी है।

डिजिटल डिटॉक्स बन रहा नया ट्रेंड

हाल के दिनों में डिजिटल डिटॉक्स का चलन तेजी से बढ़ा है। लोग अपने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए कुछ समय के लिए मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बना रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि दिन में कुछ समय बिना मोबाइल के बिताना तनाव को कम करने और जीवन में संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकता है।

कई फिटनेस और लाइफस्टाइल विशेषज्ञ भी लोगों को सलाह दे रहे हैं कि वे अपने दिन की शुरुआत मोबाइल देखने की बजाय योग, ध्यान और हल्की एक्सरसाइज से करें। इससे न केवल मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है बल्कि पूरे दिन ऊर्जा भी बनी रहती है।

छोटी आदतें बदल सकती हैं जिंदगी

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक जीवन में मोबाइल से पूरी तरह दूरी बनाना संभव नहीं है, लेकिन उसके इस्तेमाल को नियंत्रित करना जरूर संभव है। छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके बेहतर नींद और स्वस्थ जीवनशैली अपनाई जा सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी नींद और संतुलित जीवनशैली केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि मानसिक शांति के लिए भी बेहद जरूरी है। इसलिए यदि आप भी देर रात तक मोबाइल चलाने के आदी हैं, तो समय रहते अपनी इस आदत को बदलना आपके बेहतर स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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