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नासिक में टिटनेस का इंजेक्शन लगने के कुछ मिनट बाद किशोरी की मौत, क्या Td वैक्सीन खतरनाक है? जानिए पूरी सच्चाई

 


महाराष्ट्र के नासिक से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने लोगों के मन में टिटनेस (Td) वैक्सीन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। 17 वर्षीय किशोरी श्रावणी पाटिल की नियमित टिटनेस-डिप्थीरिया (Td) बूस्टर डोज लगने के कुछ ही मिनट बाद अचानक तबीयत बिगड़ने और बाद में मौत हो जाने से पूरे इलाके में चिंता का माहौल है। घटना का वीडियो सीसीटीवी कैमरे में भी रिकॉर्ड हुआ है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं और अफवाहें फैलने लगी हैं।

हालांकि स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर न पहुंचें। विशेषज्ञों का कहना है कि टिटनेस की वैक्सीन दुनिया की सबसे सुरक्षित वैक्सीनों में गिनी जाती है और गंभीर दुष्प्रभाव बेहद दुर्लभ होते हैं। फिलहाल इस मामले की विस्तृत जांच 'एडवर्स इवेंट फॉलोइंग इम्युनाइजेशन' (AEFI) के तहत की जा रही है।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार 24 जून 2026 को नासिक नगर निगम द्वारा आयोजित एक स्वास्थ्य शिविर में 17 वर्षीय श्रावणी पाटिल को नियमित Td बूस्टर डोज दी गई थी। टीका लगने के कुछ मिनट बाद किशोरी ने चक्कर आने की शिकायत की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वह अचानक सड़क पर गिर गई।

उसे तुरंत जिला सिविल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस अप्रत्याशित घटना ने स्वास्थ्य विभाग को भी सतर्क कर दिया और तुरंत जांच शुरू कर दी गई।

घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने एहतियात के तौर पर उस विशेष वैक्सीन बैच के उपयोग पर तत्काल रोक लगा दी।

उसी शीशी से कई अन्य लोगों को भी लगा था टीका

स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि जिस वैक्सीन शीशी से श्रावणी को टीका लगाया गया था, उसी शीशी से पांच अन्य लोगों को भी टीका लगाया गया। इनमें से किसी भी व्यक्ति में किसी प्रकार की प्रतिकूल प्रतिक्रिया नहीं देखी गई।

इतना ही नहीं, उसी वैक्सीन बैच से संबंधित लगभग 120 लोगों को उसी स्वास्थ्य केंद्र पर टीकाकरण किया गया था और उनमें भी कोई गंभीर दुष्प्रभाव सामने नहीं आया।

यही कारण है कि विशेषज्ञ अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रहे हैं और विस्तृत वैज्ञानिक जांच का इंतजार किया जा रहा है।

AEFI जांच क्या होती है?

किसी भी वैक्सीन के बाद यदि कोई असामान्य या गंभीर स्वास्थ्य समस्या सामने आती है तो उसकी जांच 'Adverse Event Following Immunization (AEFI)' के तहत की जाती है।

इस जांच का उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि घटना का वास्तविक कारण क्या था। इसमें कई संभावनाओं की जांच की जाती है, जैसे—

  • क्या यह वैक्सीन से संबंधित प्रतिक्रिया थी?

  • क्या मरीज को पहले से कोई गंभीर बीमारी थी?

  • क्या यह अचानक हुई एलर्जी (Anaphylaxis) का मामला था?

  • क्या गिरने से सिर में गंभीर चोट लगी?

  • या फिर मौत का कारण पूरी तरह अलग था?

नासिक मामले में भी पोस्टमार्टम, विसरा परीक्षण, रासायनिक विश्लेषण तथा फोरेंसिक जांच जारी है। पुणे से विशेषज्ञों की विशेष टीम पूरे मामले की निगरानी कर रही है।

क्या टिटनेस (Td) वैक्सीन सुरक्षित है?

विशेषज्ञों का कहना है कि टिटनेस और डिप्थीरिया से बचाव के लिए दी जाने वाली Td वैक्सीन का सुरक्षा रिकॉर्ड बेहद मजबूत माना जाता है।

विश्व स्तर पर करोड़ों लोगों को यह वैक्सीन दी जाती है। मेडिकल आंकड़ों के अनुसार लगभग 10 लाख डोज में केवल एक या दो मामलों में ही गंभीर प्रतिकूल प्रतिक्रिया देखने को मिलती है।

नासिक में भी हर वर्ष लगभग 30 हजार किशोरों और 30 हजार गर्भवती महिलाओं को यह वैक्सीन नियमित रूप से लगाई जाती है और अधिकांश मामलों में किसी गंभीर समस्या की सूचना नहीं मिलती।

टिटनेस का इंजेक्शन क्यों जरूरी होता है?

यदि किसी व्यक्ति को जंग लगे लोहे, गंदे औजार, मिट्टी या दूषित वस्तु से गहरी चोट लग जाती है तो डॉक्टर अक्सर टिटनेस से बचाव के लिए Td वैक्सीन या आवश्यकता पड़ने पर टिटनेस इम्यूनोग्लोबुलिन लगाने की सलाह देते हैं।

टिटनेस एक गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण है जो Clostridium tetani नामक बैक्टीरिया से फैलता है। यह शरीर की नसों पर हमला करता है और मांसपेशियों में गंभीर ऐंठन पैदा कर सकता है।

यदि समय पर इलाज न मिले तो यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार टिटनेस के गंभीर मामलों में मृत्यु दर 10 से 20 प्रतिशत तक हो सकती है।

इसी वजह से समय-समय पर बूस्टर डोज लेना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

वैक्सीन के सामान्य साइड इफेक्ट

Td वैक्सीन लगने के बाद अधिकांश लोगों में केवल हल्के और अस्थायी लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे—

  • इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द

  • हल्की सूजन

  • लालिमा

  • हल्का बुखार

  • थकान

  • शरीर या मांसपेशियों में दर्द

  • कुछ समय के लिए चक्कर आना

ये लक्षण सामान्यतः एक-दो दिन में अपने आप ठीक हो जाते हैं।

गंभीर प्रतिक्रिया कब हो सकती है?

हालांकि संभावना अत्यंत कम होती है, लेकिन किसी भी दवा या वैक्सीन की तरह Td वैक्सीन के बाद भी दुर्लभ मामलों में गंभीर प्रतिक्रिया हो सकती है।

एनाफिलेक्सिस (Anaphylaxis)

यह अत्यंत दुर्लभ लेकिन गंभीर एलर्जिक प्रतिक्रिया होती है, जो वैक्सीन लगने के कुछ मिनटों के भीतर हो सकती है।

इसके प्रमुख लक्षण हैं—

  • सांस लेने में कठिनाई

  • अचानक ब्लड प्रेशर गिरना

  • पूरे शरीर पर एलर्जी

  • बेहोशी

यदि तुरंत एपिनेफ्रिन (Epinephrine) दिया जाए तो अधिकांश मामलों में मरीज को बचाया जा सकता है।

वासोवागल सिंकोप (Vasovagal Syncope)

कुछ लोगों को इंजेक्शन के डर, तनाव या दर्द के कारण अचानक चक्कर आ सकता है या वे बेहोश हो सकते हैं।

यह स्थिति आमतौर पर जानलेवा नहीं होती, लेकिन यदि व्यक्ति गिरते समय सिर में गंभीर चोट लगा बैठे तो स्थिति गंभीर हो सकती है।

जांच पूरी होने तक निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि अभी यह कहना गलत होगा कि किशोरी की मौत सीधे वैक्सीन के कारण हुई।

मेडिकल बोर्ड की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौत की वास्तविक वजह क्या थी। इसलिए लोगों से अपील की गई है कि सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट जानकारी या अफवाहों पर भरोसा न करें।

कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में इसे किसी अन्य वैक्सीन या कैंसर से जुड़ी दवा बताया गया, जिसे अधिकारियों ने पूरी तरह गलत बताया है।

डॉक्टर कब दिखाएं?

यदि टीका लगने के बाद निम्न लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी अस्पताल या डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए—

  • सांस लेने में परेशानी

  • लगातार तेज बुखार

  • पूरे शरीर पर गंभीर एलर्जी

  • बार-बार बेहोशी

  • तेज सूजन

  • लगातार उल्टी

  • दौरे पड़ना

  • अत्यधिक कमजोरी

समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से अधिकांश जटिलताओं का सफल उपचार संभव होता है।

विशेषज्ञों की सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एक अकेली घटना के आधार पर पूरे टीकाकरण कार्यक्रम पर सवाल उठाना उचित नहीं होगा। दुनिया भर में करोड़ों लोगों को हर वर्ष Td वैक्सीन सुरक्षित रूप से दी जाती है और इसने लाखों लोगों को टिटनेस जैसी जानलेवा बीमारी से बचाया है।

नासिक की घटना निश्चित रूप से दुखद और गंभीर है, लेकिन इसकी वास्तविक वजह वैज्ञानिक जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। तब तक लोगों को घबराने के बजाय चिकित्सकों की सलाह का पालन करना चाहिए और नियमित टीकाकरण जारी रखना चाहिए।

स्वास्थ्य विभाग का भी कहना है कि टिटनेस जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए वैक्सीन सबसे प्रभावी उपाय है। इसलिए किसी भी अफवाह पर विश्वास करने के बजाय केवल आधिकारिक जानकारी और डॉक्टरों की सलाह पर ही भरोसा करें।

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