Breaking News

डिलीवरी के समय खुली बड़ी लापरवाही! गर्भवती महिला का हीमोग्लोबिन निकला सिर्फ 4, डॉक्टर भी रह गईं हैरान

 


नई दिल्ली। गर्भावस्था किसी भी महिला के जीवन का बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण दौर होता है। इस दौरान मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों की सेहत का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है। डॉक्टर नियमित जांच, समय-समय पर ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड और जरूरी सप्लीमेंट लेने की सलाह देते हैं ताकि किसी भी स्वास्थ्य समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके। लेकिन आज भी कई परिवार गर्भावस्था के दौरान मेडिकल जांचों को गंभीरता से नहीं लेते, जिसका खामियाजा कभी-कभी जानलेवा परिस्थितियों के रूप में सामने आता है।

ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला हाल ही में गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. गरिमा सिंह के सामने आया, जिसे उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा किया। यह मामला न केवल गर्भावस्था के दौरान लापरवाही के खतरों को उजागर करता है, बल्कि परिवारों में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता की कमी को भी सामने लाता है।

लेबर पेन के दौरान अस्पताल पहुंची महिला

डॉ. गरिमा सिंह के अनुसार, हाल ही में एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा (लेबर पेन) होने के बाद अस्पताल लाया गया। महिला गर्भावस्था के अंतिम चरण यानी नौवें महीने में थी और डिलीवरी का समय काफी करीब था।

अस्पताल पहुंचने के बाद जब डॉक्टरों ने उसकी प्रारंभिक जांच शुरू की तो एक बेहद गंभीर तथ्य सामने आया। जांच रिपोर्ट में पता चला कि महिला का हीमोग्लोबिन स्तर मात्र 4 ग्राम प्रति डेसीलीटर था।

सामान्य तौर पर स्वस्थ महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर 12 ग्राम या उससे अधिक माना जाता है, जबकि गर्भावस्था के दौरान 11 ग्राम से कम होने पर एनीमिया की आशंका मानी जाती है। ऐसे में केवल 4 ग्राम हीमोग्लोबिन का स्तर बेहद खतरनाक स्थिति को दर्शाता है।

मां और बच्चे दोनों की जान को था खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान शरीर में खून की भारी कमी मां और बच्चे दोनों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। कम हीमोग्लोबिन के कारण शरीर के विभिन्न अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती।

इससे समयपूर्व प्रसव, बच्चे का कम वजन, अत्यधिक रक्तस्राव और कई अन्य जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। गंभीर मामलों में मां और बच्चे दोनों की जान भी खतरे में पड़ सकती है।

डॉ. सिंह के मुताबिक, मरीज की हालत इतनी नाजुक थी कि डिलीवरी से पहले तत्काल ब्लड ट्रांसफ्यूजन की आवश्यकता महसूस हुई।

डॉक्टर ने मांगा रक्तदान, परिवार ने किया इनकार

स्थिति को देखते हुए डॉक्टर ने महिला के परिजनों को बुलाया और उन्हें समझाया कि सुरक्षित डिलीवरी के लिए कम से कम चार यूनिट रक्त की आवश्यकता होगी।

लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया।

डॉ. सिंह के अनुसार, जब उन्होंने परिवार के सदस्यों से रक्तदान करने की बात कही तो महिला की सास ने कहा कि उनका बेटा बहुत कमजोर है और वह रक्तदान नहीं कर सकता।

इस पर डॉक्टर ने सुझाव दिया कि यदि बेटा रक्तदान नहीं कर सकता तो परिवार का कोई अन्य सदस्य रक्त दे सकता है। डॉक्टर ने महिला की सास से भी रक्तदान करने का अनुरोध किया।

हालांकि सास ने अपनी उम्र का हवाला देते हुए कहा कि वह 50 वर्ष की हैं और इस उम्र में रक्तदान नहीं कर सकतीं।

'बाहर से खरीद लेंगे खून'

जब डॉक्टर ने पूछा कि फिर रक्त की व्यवस्था कैसे होगी, तो परिवार का जवाब और भी चौंकाने वाला था।

परिजनों ने कहा कि वे बाहर से खून खरीद लेंगे।

यह सुनकर डॉक्टर ने उन्हें समझाया कि रक्त कोई सामान्य वस्तु नहीं है जिसे बाजार से खरीद लिया जाए। रक्त केवल स्वस्थ व्यक्तियों द्वारा रक्तदान करने से ही उपलब्ध होता है।

डॉक्टर ने परिवार को बताया कि ब्लड बैंक में उपलब्ध रक्त भी किसी न किसी व्यक्ति द्वारा किए गए रक्तदान का परिणाम होता है। इसलिए आवश्यकता पड़ने पर परिवार के योग्य सदस्यों को आगे आकर रक्तदान करना चाहिए।

गर्भावस्था के दौरान नहीं कराई कोई जांच

मामले की जांच के दौरान यह भी सामने आया कि महिला ने गर्भावस्था के दौरान नियमित चिकित्सा परामर्श नहीं लिया था।

डॉ. गरिमा सिंह के अनुसार, महिला न तो किसी गायनेकोलॉजिस्ट के नियमित संपर्क में थी और न ही उसने समय-समय पर जरूरी स्वास्थ्य जांच करवाई थी।

परिवार का मानना था कि अच्छा भोजन कर लेने से गर्भावस्था आसानी से पूरी हो जाएगी। इसी सोच के कारण उन्होंने आयरन, कैल्शियम और अन्य जरूरी सप्लीमेंट्स को गंभीरता से नहीं लिया।

परिणामस्वरूप महिला के शरीर में लगातार बढ़ रही खून की कमी का समय रहते पता नहीं चल पाया।

एनीमिया क्यों है गंभीर समस्या?

भारत में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती माना जाता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षणों में भी यह सामने आया है कि बड़ी संख्या में महिलाएं गर्भावस्था के दौरान खून की कमी से जूझती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, आयरन की कमी एनीमिया का सबसे बड़ा कारण है। गर्भावस्था के दौरान शरीर को सामान्य से अधिक आयरन की आवश्यकता होती है क्योंकि मां और बच्चे दोनों के लिए अतिरिक्त रक्त का निर्माण होता है।

यदि इस आवश्यकता को पूरा नहीं किया जाता, तो धीरे-धीरे हीमोग्लोबिन का स्तर गिरने लगता है और गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

क्यों जरूरी हैं नियमित जांच?

स्त्री रोग विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच बेहद आवश्यक होती है। इन जांचों के माध्यम से हीमोग्लोबिन स्तर, रक्तचाप, शुगर लेवल और अन्य स्वास्थ्य संकेतकों की निगरानी की जाती है।

यदि किसी समस्या का शुरुआती चरण में पता चल जाए तो उसका इलाज आसानी से किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, खून की कमी होने पर डॉक्टर समय रहते आयरन सप्लीमेंट, आहार संबंधी बदलाव और अन्य उपचार शुरू कर सकते हैं।

लेकिन जब जांच ही नहीं कराई जाती, तो बीमारी का पता अक्सर तब चलता है जब स्थिति गंभीर हो चुकी होती है।

विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण सलाह

डॉक्टरों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को नियमित रूप से प्रसूति विशेषज्ञ के संपर्क में रहना चाहिए। सभी निर्धारित जांच समय पर करानी चाहिए और डॉक्टर द्वारा बताए गए आयरन, कैल्शियम तथा अन्य सप्लीमेंट्स का सेवन करना चाहिए।

इसके अलावा परिवार के सदस्यों को भी गर्भवती महिला की सेहत को लेकर जागरूक और जिम्मेदार होना चाहिए। केवल घरेलू उपायों या अच्छी डाइट पर निर्भर रहने के बजाय वैज्ञानिक और चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता देना जरूरी है।

सीख देने वाला मामला

डॉ. गरिमा सिंह द्वारा साझा किया गया यह मामला समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है। गर्भावस्था के दौरान छोटी सी लापरवाही भी गंभीर परिणाम ला सकती है।

समय पर जांच, उचित पोषण, नियमित डॉक्टर परामर्श और आवश्यक उपचार न केवल मां की जान बचा सकते हैं बल्कि बच्चे के स्वस्थ जन्म को भी सुनिश्चित कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और समय पर चिकित्सा देखभाल ही ऐसी परिस्थितियों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।

कोई टिप्पणी नहीं