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लखनऊ अग्निकांड : धू-धू कर जलती इमारत के बीच मसीहा बने पुलिस के जांबाज, हथौड़े से दीवार तोड़कर बच्चों को निकाला बाहर; 15 की मौत, 9 घायल

 


लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज थाना क्षेत्र स्थित पुरनिया इलाके में मंगलवार को हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। बहुमंजिला इमारत में लगी आग देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर गई और पूरा परिसर घने काले धुएं से भर गया। इस दर्दनाक हादसे में दम घुटने और आग की चपेट में आने से 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि नौ अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। मृतकों में कई युवा और मासूम बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और चीख-पुकार से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।

हालांकि इस भयावह हादसे के बीच मड़ियांव पुलिस के दो जांबाज अधिकारियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना जो साहस दिखाया, उसने कई लोगों को नई जिंदगी दे दी। थाना प्रभारी शिवानंद मिश्रा और पुरनिया चौकी प्रभारी शुभम तिवारी ने संकट की इस घड़ी में ऐसा फैसला लिया, जिसकी बदौलत कई मासूम बच्चों और अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका।

आग ने कुछ ही मिनटों में ले लिया विकराल रूप

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोपहर के समय अचानक इमारत के भीतर धुआं उठता दिखाई दिया। कुछ ही देर में आग तेजी से फैलने लगी और पूरा भवन धुएं के गुबार से भर गया। लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागना शुरू कर दिया, लेकिन आग इतनी तेजी से फैली कि कई लोग अंदर ही फंस गए।

स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही दमकल की कई गाड़ियां और पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। लेकिन तब तक आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया था और मुख्य प्रवेश द्वार से अंदर जाना लगभग असंभव हो गया था।

जब मुख्य रास्ता बंद हुआ तो पुलिस ने उठाया साहसिक कदम

मौके पर पहुंची मड़ियांव थाने की पुलिस ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिना समय गंवाए बचाव अभियान शुरू कर दिया। थाना प्रभारी शिवानंद मिश्रा और पुरनिया चौकी इंचार्ज शुभम तिवारी ने देखा कि आग और घने धुएं के कारण मुख्य रास्ते से अंदर प्रवेश करना संभव नहीं है।

ऐसे में दोनों अधिकारियों ने जोखिम उठाते हुए बगल की पक्की दीवार को तोड़कर अंदर पहुंचने का फैसला किया। उन्होंने खुद हथौड़ा उठाया और जवानों के साथ मिलकर दीवार को तोड़ना शुरू कर दिया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद लगातार प्रयास के बाद दीवार में एक बड़ा रास्ता तैयार किया गया।

दीवार में बनाए गए रास्ते से बचाई गई कई जिंदगियां

जैसे ही दीवार में रास्ता बना, दमकल कर्मियों ने उसी रास्ते से इमारत के भीतर प्रवेश किया। अंदर फंसे लोगों को एक-एक कर बाहर निकालने का अभियान शुरू किया गया। सबसे पहले बच्चों और महिलाओं को सुरक्षित बाहर लाया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि पुलिस और दमकल कर्मियों ने यह साहसिक निर्णय न लिया होता, तो मृतकों की संख्या कहीं अधिक हो सकती थी। कई बच्चों को बेहोशी की हालत में बाहर निकाला गया और उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।

स्थानीय निवासियों ने पुलिस के इस साहसिक कार्य की जमकर सराहना की। लोगों का कहना है कि संकट की घड़ी में पुलिसकर्मियों ने जिस बहादुरी का परिचय दिया, वह काबिल-ए-तारीफ है।

15 लोगों की मौत, नौ घायल

प्रशासन के अनुसार हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। वहीं नौ अन्य घायल लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसके कारण मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

अस्पतालों के बाहर परिजनों की भारी भीड़ जुटी रही। कई परिवार अपने प्रियजनों की तलाश में इधर-उधर भटकते नजर आए। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर का दृश्य बेहद भावुक और दर्दनाक था। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।

शॉर्ट सर्किट को माना जा रहा प्रारंभिक कारण

प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। हालांकि पुलिस और फायर विभाग की टीमें पूरे मामले की विस्तृत जांच में जुटी हुई हैं। विशेषज्ञ यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि आग इतनी तेजी से कैसे फैली और क्या भवन में अग्निशमन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम मौजूद थे या नहीं।

सूत्रों के मुताबिक भवन में सुरक्षा मानकों की अनदेखी किए जाने की भी आशंका जताई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने जताया दुख

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए घायलों के समुचित इलाज के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रशासन को राहत और बचाव कार्य में किसी प्रकार की कमी न रहने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात भी कही है।

जांबाज पुलिसकर्मियों की हो रही सराहना

इस हादसे के बाद जहां एक ओर पूरे शहर में शोक का माहौल है, वहीं दूसरी ओर मड़ियांव थाने के थाना प्रभारी शिवानंद मिश्रा और चौकी प्रभारी शुभम तिवारी की बहादुरी की चर्चा हर तरफ हो रही है। सोशल मीडिया पर लोग दोनों अधिकारियों की प्रशंसा करते हुए उन्हें वास्तविक नायक और मसीहा बता रहे हैं।

धू-धू कर जलती इमारत, चारों तरफ फैला काला धुआं और मौत का भयावह मंजर… इन सबके बीच अपनी जान की परवाह किए बिना हथौड़ा उठाकर दीवार तोड़ने वाले इन जांबाज पुलिसकर्मियों ने साबित कर दिया कि वर्दी केवल जिम्मेदारी का प्रतीक नहीं, बल्कि मानवता और साहस का भी दूसरा नाम है।

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