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सेना में खत्म हुई अंग्रेजों की एक और निशानी! यूनिफॉर्म से लेकर मूंछों तक बदले नियम, जानिए क्या-क्या हुआ नया

 


 भारतीय सेना ने अपनी वर्दी, ग्रूमिंग और औपचारिक परंपराओं में बड़े बदलाव करते हुए एक नया अध्याय शुरू किया है। सेना द्वारा जारी किए गए Army Uniforms-2026 मैनुअल में कई ऐसे ऐतिहासिक फैसले शामिल हैं, जिनका उद्देश्य औपनिवेशिक काल की बची हुई परंपराओं को समाप्त कर सेना को आधुनिक भारतीय पहचान के अनुरूप ढालना है। 174 पन्नों के इस विस्तृत मैनुअल में यूनिफॉर्म, ड्रेस कोड, ग्रूमिंग स्टैंडर्ड और औपचारिक कार्यक्रमों से जुड़े कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल वर्दी बदलने का मामला नहीं है, बल्कि भारतीय सेना की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहचान को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सेना ने स्पष्ट किया है कि इन बदलावों का उद्देश्य सैन्य परंपराओं की गरिमा बनाए रखते हुए उन्हें आधुनिक भारत की भावना के अनुरूप बनाना है।

औपनिवेशिक दौर की परंपराओं को अलविदा

ब्रिटिश शासन के दौरान सेना में कई ऐसी परंपराएं और शब्दावली शामिल हुई थीं जो दशकों बाद भी विभिन्न रूपों में मौजूद थीं। अब भारतीय सेना ने इन परंपराओं को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का फैसला किया है।

नए मैनुअल में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सेना की वर्दी और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं को भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय भावना और वर्तमान जरूरतों के अनुरूप बनाया जा रहा है। सेना का मानना है कि आधुनिक भारत की सेना को अपनी विशिष्ट पहचान के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

मैनुअल की प्रस्तावना में एडजुटेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल वीपीएस कौशिक ने कहा कि यह कदम औपनिवेशिक काल की बची हुई प्रथाओं और प्रतीकों को हटाकर सेना को समकालीन भारतीय लोकाचार के अनुरूप ढालने का प्रयास है।

फॉर्मल कार्यक्रमों में अब पहन सकेंगे बंडी जैकेट

नए नियमों के तहत अधिकारियों को पहली बार औपचारिक आयोजनों में बंद गले की बंडी जैकेट पहनने की अनुमति दी गई है। यह बदलाव भारतीय परिधान संस्कृति को सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बंडी जैकेट को पूरी आस्तीन वाली शर्ट के ऊपर पहना जा सकेगा। मैनुअल के अनुसार जैकेट का रंग सौम्य और सादा होना चाहिए। इसे हुक के साथ या बिना हुक के दोनों डिजाइनों में पहना जा सकता है।

सेना के जानकारों का कहना है कि यह परिवर्तन भारतीय पहचान को औपचारिक सैन्य आयोजनों में अधिक प्रमुखता देने का प्रयास है।

तलवार की अनिवार्यता भी हुई खत्म

अब तक कई औपचारिक परेडों और समीक्षा कार्यक्रमों में अधिकारियों के लिए तलवार धारण करना परंपरा का हिस्सा माना जाता था। हालांकि नए नियमों के तहत इसे अनिवार्य नहीं रखा गया है।

सेना ने इसे अब वैकल्पिक बना दिया है। यानी परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुसार अधिकारी तलवार के बिना भी औपचारिक कार्यक्रमों में भाग ले सकेंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव सेना को अधिक व्यावहारिक और आधुनिक बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है।

पाउच बेल्ट को हटाने का फैसला

सेना की औपचारिक ड्रेस से जुड़ी एक और बड़ी परंपरा में बदलाव किया गया है। मेस ड्रेस नंबर 5 और 6 में उपयोग होने वाली चमकीली पाउच बेल्ट को हटा दिया गया है।

ये ड्रेस आमतौर पर राष्ट्रपति भवन, राजभवन, प्रधानमंत्री आवास और सेना कमांडरों के आधिकारिक भोज जैसे विशेष कार्यक्रमों में पहनी जाती हैं।

हालांकि कुछ विशेष सैन्य इकाइयों जैसे आर्मर्ड कोर, मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री, आर्टिलरी रेजिमेंट, राइफल रेजिमेंट और सिग्नल्स कोर के अधिकारियों को कुछ रेजिमेंटल कार्यक्रमों में इसका उपयोग करने की छूट दी गई है।

महिला अधिकारियों के लिए नए दिशा-निर्देश

Army Uniforms-2026 में महिला अधिकारियों और सैनिकों के लिए भी नए नियम निर्धारित किए गए हैं।

महिला अधिकारियों को औपचारिक अवसरों पर सादे और सौम्य रंगों की साड़ी, कुर्ता-सलवार तथा दुपट्टे के साथ टखनों तक की सीधी पैंट पहनने की अनुमति दी गई है।

हालांकि कुछ आधुनिक और कैजुअल परिधानों पर रोक लगा दी गई है। स्लीवलेस कुर्ते, प्लाजो और सिगरेट पैंट जैसे परिधान अब सेना के निर्धारित ड्रेस कोड का हिस्सा नहीं होंगे।

सेना का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य पेशेवर और अनुशासित सैन्य छवि बनाए रखना है।

नई विंटर ड्रेस की शुरुआत

सभी रैंकों के लिए एक नई विंटर ड्रेस "3B" भी पेश की गई है। इस ड्रेस में अंगोला शर्ट, बैटल जैकेट और बेरेट कैप शामिल होगी।

सेना के अनुसार यह ड्रेस अधिक व्यावहारिक, आरामदायक और विभिन्न मौसम परिस्थितियों के अनुकूल बनाई गई है।

नए डिजाइन में सैनिकों की कार्यक्षमता और सुविधा दोनों को ध्यान में रखा गया है।

मूंछों को लेकर भी सख्त नियम

नए मैनुअल में सैनिकों की ग्रूमिंग को लेकर भी विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं। मूंछ रखने की अनुमति पहले की तरह बनी रहेगी, लेकिन उनकी लंबाई और आकार निर्धारित सीमा के भीतर होना चाहिए।

मैनुअल के अनुसार किसी सैनिक की मूंछ 12 सेंटीमीटर से अधिक नहीं हो सकती। सेना का मानना है कि ग्रूमिंग में एकरूपता और अनुशासन बनाए रखना आवश्यक है।

इसके अलावा बालों और व्यक्तिगत साज-सज्जा के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए हैं।

टैटू और बॉडी पियर्सिंग पर रोक

सेना ने शरीर पर टैटू और बॉडी पियर्सिंग को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है।

नए नियमों के अनुसार सैनिकों को नए टैटू बनवाने और बॉडी पियर्सिंग कराने की अनुमति नहीं होगी। वर्दी में रहते हुए किसी भी प्रकार का ब्रेसलेट पहनना भी प्रतिबंधित रहेगा।

हालांकि धार्मिक आस्था के तहत पूजा के अवसर पर कलाई में कलावा बांधने की छूट दी गई है।

परफ्यूम और डियोड्रेंट पर भी नियम

मैनुअल में वर्दी पहनते समय डियोड्रेंट और परफ्यूम के उपयोग पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

हालांकि आफ्टर-शेव लोशन का उपयोग किया जा सकता है। सेना का कहना है कि यह नियम पेशेवर सैन्य वातावरण बनाए रखने के उद्देश्य से लागू किया गया है।

महिला सैनिकों के लिए मेकअप संबंधी नियम

महिला सैनिकों और अधिकारियों के लिए भी ग्रूमिंग को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।

रंगीन नेल पॉलिश, लिपस्टिक, बिंदी और नोज पिन पहनने पर रोक लगाई गई है। हालांकि विवाहित महिला कर्मियों को सिंदूर लगाने की अनुमति होगी, लेकिन यह इस तरह लगाया जाना चाहिए कि बेरेट या कैप पहनने के बाद दिखाई न दे।

सेना का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य सभी कर्मियों के लिए एक समान और पेशेवर सैन्य छवि बनाए रखना है।

भारतीय सेना की नई पहचान की ओर कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि Army Uniforms-2026 केवल एक ड्रेस कोड दस्तावेज नहीं बल्कि भारतीय सेना की बदलती पहचान का प्रतीक है। यह मैनुअल सेना को आधुनिक, पेशेवर और भारतीय मूल्यों के अधिक करीब लाने का प्रयास करता है।

औपनिवेशिक प्रतीकों को हटाने, भारतीय परिधान तत्वों को शामिल करने और अनुशासन से जुड़े नियमों को स्पष्ट करने के जरिए सेना अपनी विशिष्ट राष्ट्रीय पहचान को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

भारतीय सेना द्वारा जारी Army Uniforms-2026 मैनुअल ने यूनिफॉर्म और ग्रूमिंग नियमों में कई ऐतिहासिक बदलाव किए हैं। बंडी जैकेट की अनुमति, पाउच बेल्ट को हटाना, तलवार की अनिवार्यता समाप्त करना और ब्रिटिशकालीन परंपराओं से दूरी बनाना इस बदलाव के प्रमुख पहलू हैं। सेना का मानना है कि ये सुधार उसकी गरिमा और परंपराओं को बनाए रखते हुए उसे आधुनिक भारत की भावना के अनुरूप ढालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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