Breaking News

बच्चों की पसंदीदा ड्रिंक बन सकती है खामोश खतरा! बढ़ सकता है मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर का जोखिम, डॉक्टरों ने दी चेतावनी

 


नई दिल्ली। गर्मी के मौसम में बच्चे अक्सर कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड जूस और मीठे पेय पदार्थों की मांग करते हैं। माता-पिता भी कई बार इन्हें सामान्य पेय मानकर बच्चों को बिना किसी चिंता के दे देते हैं। लेकिन हाल ही में विशेषज्ञों और स्वास्थ्य अध्ययनों में सामने आई जानकारी ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों की पसंदीदा मीठी ड्रिंक्स भविष्य में उनके स्वास्थ्य के लिए एक खामोश खतरा साबित हो सकती हैं। नियमित रूप से ऐसे पेय पदार्थों का सेवन मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी समस्याओं के खतरे को बढ़ा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या केवल कोल्ड ड्रिंक्स तक सीमित नहीं है। बाजार में मिलने वाले कई पैकेज्ड जूस, एनर्जी ड्रिंक और फ्लेवर्ड पेय पदार्थों में भी बड़ी मात्रा में अतिरिक्त चीनी मौजूद होती है। बच्चों को इनका स्वाद पसंद आता है, लेकिन लंबे समय तक लगातार सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। यही वजह है कि डॉक्टर अब अभिभावकों को बच्चों के खानपान और पेय पदार्थों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं।

बड़े अध्ययन में सामने आई चौंकाने वाली बात

हाल ही में किए गए एक बड़े अध्ययन में 5.4 लाख से अधिक लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इस अध्ययन में पाया गया कि जो बच्चे नियमित रूप से शुगर युक्त पेय पदार्थों का सेवन करते हैं, उनमें बॉडी मास इंडेक्स (BMI) बढ़ने की संभावना अधिक होती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि रोजाना एक अतिरिक्त मीठी ड्रिंक का सेवन वजन बढ़ने के जोखिम को और अधिक बढ़ा देता है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि जिन लोगों ने मीठे पेय पदार्थों का सेवन कम किया, उनमें वजन नियंत्रण बेहतर देखा गया।

विशेषज्ञों के अनुसार, बचपन में विकसित होने वाली खानपान की आदतें जीवनभर स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। यदि शुरुआती उम्र में ही बच्चे अत्यधिक चीनी का सेवन करने लगते हैं, तो आगे चलकर मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

हाई ब्लड प्रेशर का भी बढ़ सकता है खतरा

डॉक्टरों का कहना है कि अधिक चीनी वाले पेय पदार्थ केवल वजन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे शरीर में सूजन, इंसुलिन प्रतिरोध और रक्तचाप से जुड़ी समस्याओं को भी बढ़ा सकते हैं। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि नियमित रूप से मीठी ड्रिंक्स पीने वाले बच्चों में भविष्य में हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर को अक्सर "साइलेंट किलर" कहा जाता है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण आसानी से दिखाई नहीं देते। यदि बचपन में ही गलत खानपान की आदतें विकसित हो जाएं, तो युवावस्था और वयस्क जीवन में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं सामने आ सकती हैं।

सिर्फ शरीर ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य भी हो सकता है प्रभावित

कुछ शोधों में यह भी संकेत मिले हैं कि अत्यधिक मीठे पेय पदार्थ किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर में बार-बार बढ़ने और घटने वाला ब्लड शुगर स्तर तनाव, चिड़चिड़ापन और चिंता जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है। हाल ही में सामने आए एक विश्लेषण में पाया गया कि अत्यधिक शुगर युक्त पेय पदार्थों का सेवन करने वाले किशोरों में चिंता संबंधी समस्याओं का जोखिम अधिक पाया गया।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि इस संबंध पर अभी और शोध की आवश्यकता है, लेकिन संतुलित आहार और कम चीनी वाले पेय पदार्थों को अपनाना बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभदायक माना जाता है।

डॉक्टरों ने दी स्वस्थ विकल्प अपनाने की सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को पूरी तरह से स्वादिष्ट चीजों से दूर रखना समाधान नहीं है, बल्कि स्वस्थ विकल्प उपलब्ध कराना ज्यादा जरूरी है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि बच्चों को पानी, दूध और ताजे फलों का सेवन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। यदि जूस देना ही हो तो ताजे फलों से बने बिना अतिरिक्त चीनी वाले जूस को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

इसके अलावा अभिभावकों को स्वयं भी स्वस्थ खानपान की आदतें अपनानी चाहिए, क्योंकि बच्चे अक्सर अपने माता-पिता की आदतों का अनुसरण करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार के स्तर पर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से बच्चों में बेहतर स्वास्थ्य आदतें विकसित की जा सकती हैं।

दुनिया के कई देशों में बढ़ी चिंता

बच्चों में बढ़ते मोटापे और चीनी के अधिक सेवन को देखते हुए कई देशों में शुगर टैक्स और एनर्जी ड्रिंक्स की बिक्री पर प्रतिबंध जैसे कदमों पर विचार किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल व्यक्तिगत स्तर पर ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों के माध्यम से भी बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा की आवश्यकता है।

छोटी सावधानी, बड़ा फायदा

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बचपन से ही सही खानपान और स्वस्थ पेय पदार्थों की आदत डाली जाए, तो भविष्य में कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम किया जा सकता है। इसलिए अगली बार जब बच्चा कोल्ड ड्रिंक या मीठे पेय की मांग करे, तो अभिभावकों के लिए यह समझना जरूरी है कि स्वाद के कुछ पल भविष्य के स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि पानी, दूध और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देकर बच्चों को स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य दिया जा सकता है। यही छोटी-छोटी आदतें आगे चलकर उन्हें मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग जैसी गंभीर समस्याओं से बचाने में मदद कर सकती हैं।

कोई टिप्पणी नहीं