भीड़ के बीच युवक को दी गई तालिबानी सजा, थप्पड़ों की गूंज से कांप उठा कैराना, वीडियो वायरल होते ही मच गई सनसनी!

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हाइलाइट्स

  • यूपी के शामली जिले में एक युवक को Talibani Justice दी गई, वीडियो वायरल।
  • अंसारी समाज पर टिप्पणी को लेकर पंचायत ने युवक को थप्पड़ मारे और हाथ जोड़कर माफी मंगवाई।
  • आरोपी खुर्शीद को भीड़ के सामने दी गई सजा, कानून व्यवस्था पर उठे सवाल।
  • पंचायत ने पुलिस को दी जानकारी से पहले ही सुना दी सजा, प्रशासन मौन।
  • सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही पुलिस हरकत में आई, जांच शुरू।

कानून की खुली धज्जियां: पंचायत में ‘Talibani Justice’

उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को ताक पर रखकर पंचायतों के फैसले कई बार विवादों का विषय बनते रहे हैं, लेकिन इस बार शामली के कैराना कस्बे से जो वीडियो सामने आया है, उसने सबको चौंका दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो में दिख रहा है कि कैसे भीड़ के बीच एक युवक से जबरन Talibani Justice दिलवाई जा रही है — न कोई पुलिस, न कोई कानूनी प्रक्रिया, सिर्फ भीड़ और पंचायत का फरमान।

पूरा मामला क्या है?

घटना कैराना कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला अफगानान की बताई जा रही है। यहां रहने वाले खुर्शीद नामक युवक पर आरोप लगाया गया कि उसने अंसारी समाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की। इससे गुस्साए समाज के लोगों ने पंचायत बुला ली। बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के पंचायत ने फैसला सुनाया और भीड़ के बीच युवक को थप्पड़ मारकर सजा दी गई। इतना ही नहीं, उससे हाथ जोड़कर माफी मंगवाई गई — यह सब कुछ कैमरे में रिकॉर्ड हुआ और Talibani Justice की मिसाल बन गया।

कैसे वायरल हुआ वीडियो?

एक स्थानीय युवक द्वारा रिकॉर्ड किया गया यह वीडियो कुछ ही घंटों में वायरल हो गया। वीडियो में साफ-साफ देखा जा सकता है कि किस तरह पंचायत के नाम पर कानून की धज्जियां उड़ाई गईं। वीडियो में दिख रहा है कि युवक को कई बार थप्पड़ मारे जा रहे हैं और उससे जबरन माफी मंगवाई जा रही है।

कानून के खिलाफ सीधी चुनौती

Talibani Justice का यह मामला सिर्फ सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो नहीं है, बल्कि यह यूपी की कानून व्यवस्था को सीधी चुनौती है। सवाल यह है कि जब भारत में लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था है, तो फिर ऐसी तालिबानी हरकतें कैसे हो रही हैं? क्या पंचायतें अब कोर्ट और पुलिस से ऊपर हो चुकी हैं?

पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

जब वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तब जाकर पुलिस ने मामले को संज्ञान में लिया। कैराना थाना पुलिस ने अब मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब यह घटना सार्वजनिक स्थान पर हुई, तो पुलिस को पहले से जानकारी क्यों नहीं थी?

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया है। कुछ लोग पंचायत के इस फैसले को सही ठहरा रहे हैं तो कुछ इसे Talibani Justice करार दे रहे हैं। मोहल्ले के एक बुजुर्ग ने कहा, “हमारे समाज में पंचायतें पहले से फैसले करती आई हैं, लेकिन ऐसा सार्वजनिक अपमान और मारपीट सही नहीं है।”

कानून विशेषज्ञों की राय

कानून विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल संविधान के खिलाफ हैं बल्कि मानवाधिकारों का उल्लंघन भी हैं। सुप्रीम कोर्ट पहले ही Mob Justice और Talibani Justice को लेकर सख्त निर्देश दे चुका है। ऐसे में प्रशासन की चुप्पी समझ से परे है।

क्या है ‘Talibani Justice’?

Talibani Justice एक ऐसा शब्द है जो तालिबान शासन की कठोर और बर्बर न्याय व्यवस्था को दर्शाता है। यह व्यवस्था किसी कानूनी प्रक्रिया को मान्यता नहीं देती और सीधे भीड़ या पंचायत के द्वारा सजा दी जाती है। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में ऐसी व्यवस्था असंवैधानिक मानी जाती है।

पिछले मामलों से तुलना

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब यूपी में पंचायत ने कानून को हाथ में लिया हो। पिछले कुछ वर्षों में बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर और बागपत में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां पंचायतों ने Talibani Justice का सहारा लिया। लेकिन इनमें से बहुत कम मामलों में सख्त कार्रवाई हुई।

प्रशासन का जवाब

जब इस वीडियो की पुष्टि मीडिया ने पुलिस अधीक्षक शामली से की, तो उन्होंने कहा, “मामले की जांच शुरू कर दी गई है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।” हालांकि स्थानीय लोग यह भी कह रहे हैं कि पुलिस की कार्रवाई अक्सर सोशल मीडिया के दबाव में ही होती है।

मानसिक प्रभाव और सामाजिक संदेश

ऐसी घटनाओं का समाज पर गलत असर पड़ता है। एक ओर यह संदेश जाता है कि भीड़ अपना फैसला खुद सुना सकती है, वहीं दूसरी ओर पीड़ित का मानसिक उत्पीड़न भी होता है। इस घटना में खुर्शीद नामक युवक न सिर्फ अपमानित हुआ बल्कि उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा भी प्रभावित हुई।

अब वक्त है बदलाव का

Talibani Justice जैसे मामलों को रोकने के लिए न केवल कानून को सख्ती से लागू करना होगा, बल्कि पंचायत व्यवस्था की सीमाएं भी तय करनी होंगी। सोशल मीडिया पर वायरल होना एक चेतावनी है कि अब जनता सब देख रही है और कानून की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी

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