VIDEO: सरकारी स्कूल की छत गिरने से 4 मासूमों की मौत, रणविजय सिंह बोले – “इन बच्चों में कोई भी मंत्री या अधिकारी का बच्चा नहीं था”

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हाइलाइट्स

  • सरकारी स्कूल की छत गिरने से 4 बच्चों की दर्दनाक मौत, कई घायल
  • रणविजय सिंह ने सोशल मीडिया पर उठाए गंभीर सवाल, वीडियो शेयर कर कहा – “किसी मंत्री का बच्चा नहीं था”
  • हादसा राजस्थान के एक गांव में हुआ, स्कूल की बिल्डिंग जर्जर हालत में थी
  • बच्चों के परिजन आक्रोशित, प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
  • मामले की जांच के लिए कमेटी गठित, शिक्षा विभाग और PWD के अफसरों पर गिरेगी गाज

राजस्थान के सरकारी स्कूल में बड़ा हादसा, मासूमों पर टूटी मौत की छत

राजस्थान के झुंझुनूं जिले के एक गांव में स्थित सरकारी स्कूल की छत गिरने से 4 मासूम छात्रों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा उस वक्त हुआ जब बच्चे कक्षा में पढ़ाई कर रहे थे।

हादसे के तुरंत बाद पूरे गांव में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों ने मलबा हटाकर बच्चों को बाहर निकाला और जिला अस्पताल पहुंचाया। लेकिन तब तक चार बच्चों ने दम तोड़ दिया था।

रणविजय सिंह ने X पर जताया आक्रोश

इस दर्दनाक हादसे को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता रणविजय सिंह ने X (पूर्व ट्विटर) पर एक मार्मिक वीडियो शेयर किया। उन्होंने लिखा –

“राजस्थान में सरकारी स्कूल की छत गिर गई। इसमें दबकर 4 बच्चों की मौत हो गई। बड़ी संख्या में बच्चे घायल हैं। इन बच्चों में कोई भी मंत्री या अधिकारी का बच्चा नहीं है।”

उनकी इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। लोग सरकार की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।

जर्जर भवन में चल रही थी पढ़ाई

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह सरकारी स्कूल वर्षों पुरानी इमारत में चल रहा था, जिसकी छत में पहले से ही दरारें थीं। कई बार ग्रामीणों और शिक्षकों ने शिक्षा विभाग से शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

हादसे के दिन तेज बारिश के कारण छत और कमजोर हो गई और अचानक गिर पड़ी, जिसमें पहली से चौथी कक्षा के छात्र दब गए।

घायलों का इलाज जारी, कई की हालत गंभीर

हादसे में घायल बच्चों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय कुमार ने बताया कि 8 बच्चों की हालत गंभीर है, जिन्हें जयपुर के SMS अस्पताल रेफर किया गया है। प्रशासन ने घायलों के इलाज का पूरा खर्च उठाने की बात कही है।

परिजनों का फूटा गुस्सा, प्रशासन पर लापरवाही का आरोप

मृतक बच्चों के परिजनों ने सरकारी स्कूल की स्थिति को लेकर प्रशासन पर सीधा आरोप लगाया है। एक मां ने रोते हुए कहा –

“अगर स्कूल की छत ठीक होती, तो आज मेरा बेटा जिंदा होता। गरीबों के बच्चों की ज़िंदगी की कोई कीमत नहीं है।”

ग्रामीणों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया और शिक्षा अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग की।

जांच कमेटी गठित, लापरवाही पर कार्रवाई के संकेत

राज्य सरकार ने घटना की जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी गठित कर दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से बयान जारी कर कहा गया कि अगर किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

PWD विभाग, जिसने स्कूल की मरम्मत का कार्य देखना था, उसकी भूमिका की भी जांच की जा रही है।

सरकारी स्कूलों की बदहाली पर फिर उठे सवाल

इस हादसे ने एक बार फिर भारत में सरकारी स्कूलों की दुर्दशा को उजागर कर दिया है। जहां एक ओर निजी स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूल जर्जर भवनों, बिना शौचालयों, और बिना पेयजल के संचालित हो रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक शिक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी और बजट को ईमानदारी से खर्च नहीं किया जाएगा, तब तक इस तरह की घटनाएं रुकेंगी नहीं।

सोशल मीडिया पर उठी आवाज़ – “क्या आपके बच्चों के लिए यही स्कूल होते?”

रणविजय सिंह के वीडियो के बाद हजारों लोगों ने सोशल मीडिया पर सरकार से जवाब माँगा। एक यूज़र ने लिखा –

“अगर ये सरकारी स्कूल किसी विधायक के क्षेत्र का होता, तो इसकी मरम्मत 5 साल पहले हो जाती।”

एक अन्य ने सवाल उठाया –

“मंत्री और अफसरों के बच्चे बड़े-बड़े कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़ते हैं, लेकिन गरीब बच्चों को मलबे के नीचे मरना पड़ता है।”

शिक्षकों की स्थिति भी चिंताजनक

इस स्कूल में कुल तीन शिक्षक कार्यरत थे, जिनमें से दो उस समय स्कूल में मौजूद थे। एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया –

“हमने कई बार शिक्षा विभाग को इमारत की जर्जर हालत की जानकारी दी थी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। आज बच्चों की मौत ने हमारी आत्मा झकझोर दी है।”

शिक्षा मंत्रालय की चुप्पी पर सवाल

अब तक केंद्र या राज्य के शिक्षा मंत्रालय की ओर से कोई सीधा बयान नहीं आया है। सिर्फ एक प्रेस नोट जारी कर संवेदना प्रकट की गई है, जिसे लेकर लोग नाराज़ हैं।

 कब सुधरेगा सरकारी स्कूलों का भविष्य?

हर बार किसी सरकारी स्कूल में हादसा होता है, कुछ दिन बहस होती है, फिर सब कुछ भूल जाते हैं। इस बार फर्क सिर्फ इतना है कि रणविजय सिंह जैसे लोगों की आवाज़ ने मामले को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा दिया है।

सरकार को अब सिर्फ जांच या मुआवज़ा नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई करनी होगी – ताकि अगली बार कोई गरीब मां अपने बच्चे की लाश लेकर अस्पताल न भागे।

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