स्कूल में आखिर अरशद से ऐसा क्या करवाया गया कि बुझ गया घर का चिराग? 11 साल के बच्चे की मौत पर 3 शिक्षक गिरफ्तार!
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस विद्यालय में 11 वर्षीय अरशद पढ़ने के लिए जाता था, वहीं उसकी जिंदगी का अंत हो गया। आरोप है कि स्कूल के शिक्षकों ने उसे बांस की सीढ़ी के सहारे रसोईघर की छत पर लौकी तोड़ने के लिए भेज दिया। छत के पास से गुजर रहे हाईटेंशन बिजली के तार की चपेट में आने से छात्र की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम पसर गया और गांव के लोगों में भारी आक्रोश फैल गया।
मामले में पुलिस ने बड़ा कदम उठाते हुए विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक, एक सहायक अध्यापक और एक शिक्षामित्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं, बिजली विभाग के अवर अभियंता (जेई) के खिलाफ भी गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। बिजली विभाग के अन्य अधिकारियों और शिक्षा विभाग की भूमिका की भी जांच की मांग उठ रही है।
यह घटना सोमवार को शिक्षा क्षेत्र गड़वार के प्राथमिक विद्यालय नवीन पोखरा (कनैला) में हुई। मृतक छात्र की पहचान बिसुकिया निवासी इजहार अहमद के 11 वर्षीय बेटे अरशद के रूप में हुई है। वह विद्यालय में कक्षा चार का छात्र था।
पढ़ने गया था स्कूल, छत पर लौकी तोड़ने के लिए भेजे जाने का आरोप
मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार को अरशद रोज की तरह स्कूल पहुंचा था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विद्यालय पहुंचने के बाद उसे बांस की सीढ़ी के सहारे रसोईघर की छत पर चढ़ाया गया। वहां लौकी तोड़ने के लिए कहा गया था।
अरशद जब छत पर लौकी तोड़ रहा था, उसी दौरान वह पास से गुजर रहे हाईटेंशन बिजली के तार की चपेट में आ गया। करंट का झटका इतना तेज था कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना से विद्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक 11 वर्षीय बच्चे को पढ़ाई के समय छत पर सब्जी तोड़ने के लिए क्यों भेजा गया? क्या विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा को लेकर जरूरी सावधानियां बरती जा रही थीं? छत के इतने पास से हाईटेंशन तार गुजरने के बावजूद सुरक्षा के क्या इंतजाम थे? अब इन सवालों के जवाब जांच के दौरान तलाशे जाएंगे।
सात घंटे तक स्कूल परिसर में चला हंगामा
अरशद की मौत की खबर जैसे ही उसके परिजनों और गांव के लोगों तक पहुंची, वहां गुस्सा फैल गया। आक्रोशित ग्रामीणों और परिवार के सदस्यों ने विद्यालय परिसर में पहुंचकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। घटना को लेकर लोगों में इतनी नाराजगी थी कि करीब सात घंटे तक स्कूल परिसर में हंगामा चलता रहा।
ग्रामीणों ने घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उनका कहना था कि बच्चों को स्कूल में सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए। माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ने के लिए विद्यालय भेजते हैं, न कि ऐसे कामों के लिए जिनमें उनकी जान को खतरा हो।
मृतक के भाई सलमान की तहरीर पर पुलिस ने प्रभारी प्रधानाध्यापक विजय शंकर, सहायक अध्यापक अनिल कुमार, शिक्षामित्र दीपचंद राम और बिजली विभाग के अवर अभियंता राजनारायण यादव के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने तीनों शिक्षाकर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जेई के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।
चेन्नई से घर पहुंचे पिता, बेटे का शव देखकर टूट गए
अरशद के पिता इजहार अहमद पिछले करीब पांच वर्षों से चेन्नई में रहकर सिलाई का काम करते हैं। परिवार की बेहतर परवरिश और बच्चों की पढ़ाई के लिए वह घर से दूर रहकर मेहनत कर रहे थे। बेटे की मौत की सूचना मिलने के बाद वह मंगलवार दोपहर चेन्नई से अपने गांव पहुंचे।
जिला अस्पताल में उनकी मौजूदगी में अरशद का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद गांव में बच्चे के शव को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। परिवार के लिए यह दुख सहना बेहद मुश्किल था। चार बेटों में अरशद सबसे छोटा था और पिता के अनुसार वह पूरे परिवार का लाडला था।
पोस्टमार्टम हाउस पर पिता का दर्द देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। उन्होंने कहा कि परिवार ने अपने बेटे को पढ़ने के लिए स्कूल भेजा था, लेकिन वहां उसे लौकी तोड़ने के लिए छत पर चढ़ा दिया गया। उनका आरोप है कि यह शिक्षकों की लापरवाही है और बिजली विभाग की जिम्मेदारी भी कम नहीं है।
'हमने अपना बेटा खो दिया, अब किसी और का चिराग न बुझे'
इजहार अहमद ने रुंधे गले से कहा कि वह अपने बेटे को वापस नहीं ला सकते, लेकिन चाहते हैं कि इस मामले में ऐसी कार्रवाई हो जो भविष्य के लिए मिसाल बने। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल अपने परिवार के लिए इंसाफ पाना नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि किसी दूसरे पिता को ऐसा दर्द न झेलना पड़े।
पिता ने कहा कि बच्चों को स्कूल में पढ़ने के लिए भेजा जाता है। वहां उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी विद्यालय के लोगों की होती है। अगर किसी बच्चे को ऐसी जगह भेजा जाता है जहां हाईटेंशन तार का खतरा मौजूद है, तो यह बेहद गंभीर मामला है।
उन्होंने बिजली विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि विद्यालय के ऊपर से बिजली का तार गुजर रहा था, लेकिन सुरक्षा को लेकर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
इजहार अहमद ने यह भी कहा कि अभी परिवार बेटे के अंतिम संस्कार और उससे जुड़े कार्यों में लगा हुआ है। उनके मुताबिक, घटना के बाद उस समय तक कोई अधिकारी उनसे मिलने नहीं पहुंचा था। उन्होंने दोहराया कि उन्हें इंसाफ चाहिए और ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए जिससे भविष्य में किसी बच्चे की जान खतरे में न पड़े।
सोमवार के मिड-डे मील मेन्यू में लौकी शामिल नहीं थी
इस घटना के बाद विद्यालय में मध्याह्न भोजन यानी मिड-डे मील की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। शासन की ओर से स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन का मेन्यू निर्धारित किया जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सोमवार को रोटी, सोयाबीन की सब्जी और ताजा फल देने की व्यवस्था थी।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सोमवार के निर्धारित मेन्यू में लौकी शामिल नहीं थी, तो छात्र को लौकी तोड़ने के लिए छत पर क्यों भेजा गया? विद्यालय परिसर में लौकी का पौधा किसने लगाया था? छत पर चढ़ने के लिए बांस की सीढ़ी कहां से आई और बच्चे को वहां भेजने का निर्णय किसने लिया?
इन सवालों के साथ रसोई व्यवस्था से जुड़े लोगों की भूमिका को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चर्चा हो रही है। हालांकि, इस संबंध में किसी की भूमिका को जांच और प्रमाण के बिना जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। पुलिस और संबंधित विभागों को पूरे घटनाक्रम की जांच कर तथ्यों को स्पष्ट करना होगा।
जेई, एसडीओ और बीईओ की भूमिका की भी जांच की मांग
अरशद की मौत का मामला अब केवल विद्यालय तक सीमित नहीं रह गया है। बिजली विभाग और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विद्यालय के ऊपर से हाईटेंशन तार गुजर रहा था, तो बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम क्यों नहीं उठाए गए?
बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जेई और एसडीओ के खिलाफ विभागीय स्तर पर चार्जशीट तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं, लोगों ने खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) की भूमिका और जिम्मेदारी तय करने की भी मांग की है।
अब जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि विद्यालय परिसर के ऊपर से गुजर रहे बिजली के तार की स्थिति क्या थी, सुरक्षा संबंधी शिकायतें पहले कभी की गई थीं या नहीं और संबंधित विभागों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई थी या नहीं।
स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
बलिया की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। विद्यालय में बच्चों से ऐसा कोई काम नहीं कराया जाना चाहिए, जिसमें उनकी जान को खतरा हो। बिजली के तार, जर्जर भवन, असुरक्षित छत और अन्य जोखिमों को लेकर समय-समय पर जांच जरूरी है।
अरशद की मौत ने उसके परिवार से एक मासूम बेटा छीन लिया है। पिता इजहार अहमद की गुहार अब पूरे मामले का सबसे भावुक पहलू बन गई है। वह चाहते हैं कि दोषियों पर कार्रवाई हो और भविष्य में किसी दूसरे परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
फिलहाल पुलिस की जांच और विभागीय कार्रवाई पर सबकी नजर है। इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि आखिर एक बच्चे को पढ़ाई के लिए स्कूल भेजने के बाद उसकी सुरक्षा सुनिश्चित क्यों नहीं हो सकी? जांच में सामने आने वाले तथ्य ही तय करेंगे कि इस दर्दनाक हादसे के लिए किसकी कितनी जिम्मेदारी बनती है।

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