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अमेरिका मिड-टर्म चुनाव: डूब जाएगी रिपब्लिकन पार्टी की नैया या फिर चलेगा ट्रंप का जादू?



अमेरिका की राजनीति इस समय बेहद दिलचस्प और तनावपूर्ण दौर से गुजर रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नवंबर 2026 के मध्यावधि चुनाव से पहले लगातार रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर रहे हैं। लेकिन चुनावी रैलियों में उनके भाषणों का अंदाज एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। नीतियों, अर्थव्यवस्था और विकास के साथ-साथ ट्रंप अब विरोधियों और पत्रकारों की शारीरिक बनावट, निजी टिप्पणियों और चुटीले अंदाज वाले बयानों को भी अपने भाषणों का हिस्सा बना रहे हैं।

इसी बीच सबसे बड़ा सवाल रिपब्लिकन पार्टी के सामने यह है कि क्या ट्रंप की यह शैली चुनाव में पार्टी के लिए वोट जुटाने में मदद करेगी या फिर कुछ मतदाताओं को उनसे दूर कर सकती है?

अमेरिका में अगला नियमित संघीय चुनाव 3 नवंबर 2026 को होना है और यही मध्यावधि चुनाव कांग्रेस में सत्ता के संतुलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे।

28 दिनों की लगातार रैलियों से ट्रंप भी परेशान?

ट्रंप की चुनावी गतिविधियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने हाल ही में फ्लोरिडा की एक रैली में लगातार प्रचार अभियान को लेकर अपनी थकान का जिक्र किया। 30 अक्टूबर की डेटोना बीच रैली में ट्रंप ने कहा कि वह लगातार 28 दिनों तक कार्यक्रम कर चुके हैं और यह उनके लिए काफी थकाऊ रहा है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में यह भी कहा कि उनकी आवाज लगभग 49.2 प्रतिशत क्षमता पर चल रही है।

दिलचस्प बात यह रही कि ट्रंप ने अपनी ही लगातार रैलियों को लेकर बेहद अनौपचारिक भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें आयोवा और कंसास में बड़ी भीड़ वाली रैलियों के लिए बुलाया जा रहा है, जबकि वह खुद कुछ समय आराम करना चाहते थे।

लेकिन चुनावी मुकाबला ऐसा है कि ट्रंप को आराम का मौका मिलता दिखाई नहीं दे रहा। रिपब्लिकन उम्मीदवारों को उनकी लोकप्रियता और समर्थक आधार से फायदा दिलाने के लिए उन्हें लगातार अलग-अलग राज्यों में जाना पड़ रहा है।

पत्रकार से भिड़े ट्रंप, शरीर पर कर दी टिप्पणी

हाल के दिनों में ट्रंप की शारीरिक बनावट और व्यक्तिगत टिप्पणियों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा उस समय हुई जब उन्होंने रॉयटर्स के पत्रकार जैकब बोगेज के सवाल का जवाब देते हुए उनकी शारीरिक बनावट पर टिप्पणी कर दी।

पत्रकार ने ट्रंप से कंसास और आयोवा की प्रस्तावित रैलियां रद्द करने को लेकर सवाल किया था और पूछा था कि क्या लगातार यात्रा से थकान इसका कारण हो सकती है। ट्रंप ने पहले सवाल को लेकर नाराजगी जताई और फिर पत्रकार के शरीर पर टिप्पणी करते हुए उन्हें फिट होने की सलाह दी।

यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि ट्रंप खुद लगातार यात्रा और रैलियों के दबाव की बात कर चुके थे। इसके बाद उनका पत्रकार की शारीरिक बनावट पर टिप्पणी करना राजनीतिक बहस का विषय बन गया।

रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप ने बाद में पत्रकार पर दोबारा निशाना साधा और सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीर के साथ व्यक्तिगत टिप्पणी की।

रैलियों में उम्मीदवारों की शक्ल-सूरत भी चर्चा में

ट्रंप के भाषणों में शारीरिक बनावट से जुड़ी टिप्पणियां कोई बिल्कुल नई बात नहीं हैं। हाल की रैलियों में उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवारों की शक्ल-सूरत और शरीर के अलग-अलग हिस्सों को लेकर भी टिप्पणियां की हैं।

23 और 24 अक्टूबर की रैलियों के ट्रांसक्रिप्ट में भी ट्रंप को उम्मीदवारों की शारीरिक बनावट और आकर्षक दिखने पर टिप्पणी करते देखा जा सकता है।

ऐसे बयानों से ट्रंप की रैलियों का माहौल समर्थकों के बीच मनोरंजक जरूर बनता है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषण का सवाल यह है कि क्या यही शैली उन मतदाताओं को भी आकर्षित करेगी जो चुनाव में महंगाई, रोजगार, स्वास्थ्य सेवा, सीमा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दे रहे हैं?

'मैं सबसे मूर्खतापूर्ण बात भी कहूं तो आप तालियां बजाएंगे'

ट्रंप की रैलियों में उनके और समर्थकों के रिश्ते को लेकर भी कई बयान चर्चा में रहे हैं। हाल ही में उन्होंने अपने समर्थकों के उत्साह का जिक्र करते हुए कहा कि वह बेहद मूर्खतापूर्ण बात भी कह दें तो उनके समर्थक हंसेंगे और तालियां बजाएंगे।

यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ट्रंप का राजनीतिक आधार लंबे समय से उनके बेहद वफादार MAGA समर्थकों पर टिका हुआ माना जाता है। उनके समर्थक अक्सर उनके विवादित बयानों को भी राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ उनकी बेबाक शैली के रूप में देखते हैं।

लेकिन विरोधियों का सवाल है कि क्या व्यक्तिगत हमलों और उत्तेजक बयानबाजी की यह शैली नवंबर के चुनाव में व्यापक मतदाताओं को भी प्रभावित कर पाएगी?

दक्षिण कैरोलिना की रैली में हुआ अजीबोगरीब वाकया

29 अक्टूबर को दक्षिण कैरोलिना के रॉक हिल में ट्रंप की रैली के दौरान एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरीं।

फॉक्स न्यूज के रिपोर्टर लुकास टॉमलिंसन ने रैली में मौजूद एक व्यक्ति से पूछा कि वह वहां क्यों आया है। व्यक्ति ने ऐसा जवाब दिया जिसकी शायद रिपोर्टर ने कल्पना भी नहीं की थी।

उसने 1978 के जॉनस्टाउन नरसंहार का जिक्र करते हुए कहा कि वह उस समय वहां जाने के लिए बहुत छोटा था और अब ट्रंप की रैली में आकर उसे एक कल्ट को करीब से देखने का मौका मिल रहा है। रिपोर्टर तुरंत समझ गया कि सामने वाला व्यक्ति ट्रंप समर्थक नहीं है।

यहां एक जरूरी तथ्य यह है कि बाद में उस व्यक्ति की पहचान टॉम हॉयल के रूप में सामने आई और उसने खुद को ट्रंप तथा MAGA आंदोलन का विरोधी बताया। यानी इस घटना को ट्रंप समर्थकों की वास्तविक राय के उदाहरण के तौर पर पेश करना सही नहीं होगा। यह मूल रूप से एक राजनीतिक विरोधी द्वारा किया गया व्यंग्यात्मक हस्तक्षेप था।

जॉनस्टाउन का जिक्र क्यों हुआ?

जॉनस्टाउन की घटना अमेरिकी इतिहास की सबसे भयावह सामूहिक मौत की घटनाओं में से एक मानी जाती है। 1978 में गुयाना में पीपल्स टेंपल से जुड़े 900 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।

दक्षिण कैरोलिना रैली में उस व्यक्ति ने इसी घटना का संदर्भ लेते हुए ट्रंप के आंदोलन की तुलना एक कल्ट से करने की कोशिश की। हालांकि यह बयान उस

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