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सर्दियों में रोजाना करते हैं ये 7 गलतियां? चुपचाप शरीर को घेर सकती हैं ये खतरनाक बीमारियां!



नई दिल्ली। सर्दियों का मौसम धीरे-धीरे दस्तक दे रहा है। सुबह और रात के तापमान में गिरावट के साथ ही लोगों को सर्दी, खांसी, गले में खराश, नाक बहने और बुखार जैसी समस्याएं परेशान करने लगती हैं। मौसम बदलते ही अस्पतालों और क्लीनिकों में सर्दी-जुकाम के मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगती है। खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा या सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को इस मौसम में अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

अक्सर लोग मानते हैं कि ठंड लगने से ही सर्दी-जुकाम होता है, लेकिन इसकी वजह केवल कम तापमान नहीं है। सर्दियों में लोग लंबे समय तक बंद कमरों में रहते हैं, खिड़कियां और दरवाजे बंद रखते हैं तथा एक-दूसरे के संपर्क में ज्यादा आते हैं। ऐसे वातावरण में श्वसन संबंधी वायरस के फैलने की संभावना बढ़ सकती है। इसके अलावा कुछ रोजमर्रा की आदतें भी संक्रमण से बचाव को मुश्किल बना देती हैं।

मेडफर्स्ट ईएनटी सेंटर के सलाहकार डॉ. (मेजर) राजेश भारद्वाज ने न्यूज9 डिजिटल से बातचीत में मौसम बदलने के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया। उनके अनुसार, कुछ सामान्य गलतियों से बचकर सर्दियों में श्वसन संबंधी संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

आइए जानते हैं सर्दियों में की जाने वाली ऐसी 7 गलतियों के बारे में, जिन्हें नजरअंदाज करना आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है।

1. मौसम के हिसाब से कपड़े नहीं पहनना

सर्दियों में सबसे आम गलती है तापमान के अनुसार कपड़े न पहनना। कई लोग सुबह और रात की ठंड को हल्के में लेते हैं। दिन में धूप निकलने पर वे गर्म कपड़े उतार देते हैं और शाम होते ही अचानक ठंड के संपर्क में आ जाते हैं।

हालांकि ठंड लगना अपने आप में वायरल संक्रमण का कारण नहीं है, लेकिन मौसम के उतार-चढ़ाव में शरीर को आरामदायक तापमान में रखना जरूरी है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को सुबह-शाम बाहर निकलते समय पर्याप्त गर्म कपड़े पहनने चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार, कपड़ों की कई हल्की परतें पहनना एक मोटे कपड़े की तुलना में अधिक उपयोगी हो सकता है। इससे जरूरत के अनुसार कपड़े कम या ज्यादा किए जा सकते हैं। सिर, कान, हाथ और पैरों को भी ठंड से बचाना चाहिए।

2. सर्दियों में कम पानी पीना

गर्मियों में लोग बार-बार पानी पीते हैं, लेकिन सर्दियों में प्यास कम लगने के कारण पानी का सेवन घटा देते हैं। यह एक ऐसी आदत है, जो शरीर को प्रभावित कर सकती है।

सर्दियों में भी शरीर को पर्याप्त पानी की जरूरत होती है। पानी की कमी से मुंह और गला सूख सकता है। नाक और गले की श्लेष्मा झिल्ली यानी म्यूकस मेम्ब्रेन को नम बनाए रखना भी जरूरी है, क्योंकि यह शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है।

इसलिए ठंड के मौसम में भी दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। सामान्य पानी के अलावा सूप और अन्य तरल पदार्थ भी लिए जा सकते हैं। हालांकि बहुत ज्यादा मीठे पेय पदार्थों से बचना बेहतर है। यदि किसी व्यक्ति को डॉक्टर ने किसी बीमारी के कारण तरल पदार्थ सीमित करने की सलाह दी है, तो उसे उसी निर्देश का पालन करना चाहिए।

3. हाथों की सफाई को नजरअंदाज करना

सर्दियों में वायरल संक्रमण से बचने के लिए हाथों की सफाई बेहद महत्वपूर्ण है। बाजार, बस, ट्रेन, स्कूल, कार्यालय और भीड़भाड़ वाली जगहों पर कई लोग एक ही सतहों को छूते हैं। ऐसे में हाथों पर वायरस और अन्य रोगाणु पहुंच सकते हैं।

अगर आप बिना हाथ धोए अपनी आंख, नाक या मुंह को छूते हैं, तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए बाहर से घर लौटने के बाद, खाना खाने से पहले और शौचालय का इस्तेमाल करने के बाद साबुन से हाथ अच्छी तरह धोना चाहिए।

यदि पानी और साबुन उपलब्ध न हों, तो कम से कम 60 प्रतिशत अल्कोहल वाला हैंड सैनिटाइजर इस्तेमाल किया जा सकता है। बच्चों को भी बचपन से हाथ धोने की आदत सिखानी चाहिए। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को टिश्यू या कोहनी से ढकना भी जरूरी है।

4. ठंड के डर से कमरों की खिड़कियां हमेशा बंद रखना

सर्दियों में ठंडी हवा से बचने के लिए लोग घरों और कार्यालयों की खिड़कियां हर समय बंद रखते हैं। इससे कमरे में ताजी हवा का आना-जाना कम हो सकता है।

जब एक ही कमरे में कई लोग लंबे समय तक रहते हैं, तो सांस के जरिए निकलने वाले छोटे कण हवा में जमा हो सकते हैं। यदि उनमें कोई व्यक्ति श्वसन संक्रमण से प्रभावित है, तो बंद और कम हवादार कमरे में वायरस फैलने की संभावना बढ़ सकती है।

इसलिए मौसम और बाहरी वायु गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए घर में उचित वेंटिलेशन बनाए रखना चाहिए। जब बाहर की हवा साफ हो, तब कुछ समय के लिए खिड़कियां खोलकर ताजी हवा आने दें। यदि बाहर प्रदूषण बहुत अधिक है, तो खिड़कियां खोलने से पहले स्थानीय वायु गुणवत्ता की स्थिति जरूर देखें।

5. सर्दी-खांसी के शुरुआती लक्षणों को हल्के में लेना

कई लोग छींक, गले में खराश, हल्की खांसी और नाक बहने को सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। कुछ लोग तो बुखार होने के बावजूद रोजाना की तरह काम करते रहते हैं और दूसरों के संपर्क में भी आते रहते हैं।

अधिकतर सामान्य सर्दी-जुकाम कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन हर संक्रमण एक जैसा नहीं होता। फ्लू, कोविड-19 और अन्य श्वसन संक्रमणों के लक्षण भी सामान्य सर्दी-जुकाम से मिलते-जुलते हो सकते हैं।

यदि खांसी या बुखार बढ़ रहा है, लक्षण लंबे समय तक बने हुए हैं या व्यक्ति की स्थिति बिगड़ रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। बीमार होने पर दूसरों से उचित दूरी रखें, जरूरत के अनुसार मास्क पहनें और खांसते-छींकते समय स्वच्छता का ध्यान रखें।

6. पर्याप्त नींद न लेना और खानपान में लापरवाही

सर्दियों में शरीर को स्वस्थ रखने के लिए केवल गर्म कपड़े पहनना पर्याप्त नहीं है। अच्छी नींद और संतुलित भोजन भी महत्वपूर्ण हैं।

नींद की कमी शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित कर सकती है। लगातार देर रात तक जागना, अनियमित दिनचर्या और पर्याप्त आराम न लेना शरीर की कार्यक्षमता पर असर डाल सकता है।

इसी तरह, यदि भोजन में जरूरी पोषक तत्वों की कमी है, तो शरीर की सामान्य सेहत प्रभावित हो सकती है। इसलिए रोजाना के भोजन में हरी सब्जियां, मौसमी फल, दालें, साबुत अनाज और प्रोटीन के अच्छे स्रोत शामिल करें।

वयस्कों को सामान्य तौर पर रोजाना 7 से 9 घंटे की नींद लेने की सलाह दी जाती है। बच्चों और किशोरों को उम्र के अनुसार इससे अधिक नींद की जरूरत हो सकती है। नियमित समय पर सोना और जागना भी अच्छी नींद के लिए मददगार है।

7. डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं और एंटीबायोटिक्स लेना

सर्दी-जुकाम होने पर कई लोग बिना डॉक्टर से पूछे दवाएं लेना शुरू कर देते हैं। कुछ लोग एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल भी करने लगते हैं, जबकि सामान्य सर्दी-जुकाम के ज्यादातर मामले वायरस के कारण होते हैं।

एंटीबायोटिक्स बैक्टीरिया के संक्रमण के इलाज के लिए होती हैं। ये वायरस पर काम नहीं करतीं। बिना जरूरत एंटीबायोटिक्स लेने से दुष्प्रभाव हो सकते हैं और एंटीबायोटिक प्रतिरोध यानी एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की समस्या बढ़ सकती है।

इसलिए सर्दी, खांसी या बुखार होने पर अपनी मर्जी से एंटीबायोटिक्स न लें। दवा की जरूरत, उसकी मात्रा और इलाज की अवधि के बारे में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। बच्चों को भी बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं नहीं देनी चाहिए।

किन लोगों को सर्दियों में ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है?

सर्दियों में कुछ लोगों को श्वसन संक्रमण और उसकी जटिलताओं का जोखिम अधिक हो सकता है। इनमें शामिल हैं:

  • छोटे बच्चे और बुजुर्ग।

  • अस्थमा से पीड़ित लोग।

  • सीओपीडी जैसी फेफड़ों की बीमारी वाले मरीज।

  • हृदय रोग से जूझ रहे लोग।

  • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले व्यक्ति।

  • लंबे समय से गंभीर बीमारी से प्रभावित लोग।

इन लोगों को मौसम बदलने के दौरान अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार फ्लू, कोविड-19 और अन्य अनुशंसित टीकाकरण करवाना भी संक्रमण और गंभीर बीमारी के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत लें मेडिकल सहायता

सर्दी-खांसी के ज्यादातर सामान्य मामले गंभीर नहीं होते, लेकिन कुछ लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द, लगातार तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी या तेजी से बिगड़ती हालत महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

बच्चों में सांस तेज चलना, पसलियों के बीच त्वचा का अंदर खिंचना, असामान्य सुस्ती या पानी न पी पाना भी गंभीर संकेत हो सकते हैं। ऐसे मामलों में घरेलू उपायों के भरोसे इंतजार नहीं करना चाहिए।

सर्दियों में स्वस्थ रहने के लिए याद रखें ये जरूरी बातें

ठंड के मौसम में बीमारियों से बचने के लिए बहुत बड़े बदलाव करने की जरूरत नहीं होती। कुछ छोटी-छोटी आदतें भी मददगार साबित हो सकती हैं। मौसम के अनुसार गर्म कपड़े पहनें, पर्याप्त पानी पिएं, हाथों की सफाई रखें, घर में उचित वेंटिलेशन बनाए रखें और नियमित नींद लें।

इसके साथ ही संतुलित आहार लें, जरूरत के अनुसार टीकाकरण करवाएं और बीमार होने पर दूसरों को संक्रमण से बचाने के लिए सावधानी बरतें।

सबसे जरूरी बात यह है कि सर्दियों में होने वाली हर सर्दी-खांसी को मामूली समझकर नजरअंदाज न करें। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों में लक्षण गंभीर होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। थोड़ी सी सावधानी और सही दिनचर्या अपनाकर सर्दियों को ज्यादा सुरक्षित और स्वस्थ बनाया जा सकता है।

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