दिवाली से पहले ही मध्य प्रदेश में सांसों पर संकट! ग्वालियर में AQI 348 के पार, भोपाल-इंदौर समेत कई शहरों की हवा हुई जहरीली
दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही मध्य प्रदेश के कई शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ने लगा है। त्योहार की तैयारियों के बीच आसमान में धुएं और धूल का असर दिखाई देने लगा है। प्रदेश के कई शहरों में हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंच चुकी है, जबकि ग्वालियर की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है। यहां तीन अलग-अलग निगरानी केंद्रों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI 300 के पार दर्ज किया गया है। ग्वालियर के दीनदयाल नगर में AQI 348 तक पहुंचने से लोगों की चिंता बढ़ गई है।
सिर्फ ग्वालियर ही नहीं, बल्कि राजधानी भोपाल, औद्योगिक शहर इंदौर, उज्जैन और मंडीदीप में भी वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ है। इन शहरों के कई इलाकों में हवा खराब श्रेणी में दर्ज की गई है। ऐसे में दिवाली से पहले प्रदूषण का बढ़ता स्तर लोगों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी परेशानियों से जूझ रहे लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
हालांकि, राहत की बात यह है कि प्रदेश के किसी भी निगरानी केंद्र पर AQI 400 के पार नहीं पहुंचा है। इसका मतलब है कि फिलहाल किसी भी स्थान पर वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में दर्ज नहीं हुई है। इसके बावजूद कई शहरों में प्रदूषण का स्तर सामान्य से काफी अधिक है।
ग्वालियर में सबसे ज्यादा प्रदूषण, तीन इलाकों में AQI 300 के पार
मध्य प्रदेश में वायु प्रदूषण के ताजा आंकड़ों के मुताबिक ग्वालियर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब बनी हुई है। शहर के तीन प्रमुख निगरानी केंद्रों पर AQI 300 से ऊपर दर्ज किया गया है। दीनदयाल नगर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 348 रहा, जबकि महाराज बाड़ा में यह आंकड़ा 334 तक पहुंच गया। वहीं सिटी सेंटर में AQI 316 दर्ज किया गया।
ये तीनों स्थान बहुत खराब वायु गुणवत्ता की श्रेणी में आते हैं। इसका मतलब है कि इन इलाकों में रहने वाले लोगों को प्रदूषित हवा के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। खासकर पहले से अस्थमा, एलर्जी और सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए ऐसी हवा परेशानी बढ़ा सकती है।
ग्वालियर के दीनदयाल नगर और सिटी सेंटर में PM 2.5 प्रमुख प्रदूषक के रूप में सामने आया है। वहीं महाराज बाड़ा में PM 10 का प्रभाव अधिक दर्ज किया गया। PM 2.5 बेहद छोटे कण होते हैं, जो सांस के जरिए फेफड़ों के अंदर तक पहुंच सकते हैं। वहीं PM 10 के कण भी श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं।
दिवाली से पहले ग्वालियर में प्रदूषण का यह स्तर प्रशासन और आम नागरिकों दोनों के लिए चिंता बढ़ाने वाला है।
भोपाल में भी बिगड़ने लगी हवा की गुणवत्ता
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी वायु प्रदूषण का असर दिखाई देने लगा है। शहर के पर्यावरण परिसर में AQI 261 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है। यहां PM 2.5 मुख्य प्रदूषक के रूप में सामने आया है।
हालांकि, भोपाल के अन्य निगरानी केंद्रों पर स्थिति कुछ बेहतर रही। टीटी नगर में AQI 183 और ईदगाह हिल्स में 141 दर्ज किया गया। ये दोनों आंकड़े मध्यम श्रेणी में आते हैं।
इसके बावजूद राजधानी के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण का स्तर एक जैसा नहीं है। पर्यावरण परिसर में खराब हवा और अन्य स्थानों पर मध्यम श्रेणी दर्ज होने से यह स्पष्ट होता है कि शहर के कुछ हिस्सों में प्रदूषण का प्रभाव अधिक है।
दिवाली के दौरान पटाखों का इस्तेमाल बढ़ने से हवा की गुणवत्ता पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। ऐसे में लोगों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने की जरूरत है।
इंदौर, उज्जैन और मंडीदीप में भी प्रदूषण का असर
प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों में भी वायु गुणवत्ता की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। औद्योगिक गतिविधियों और शहरी यातायात के बीच कई स्थानों पर प्रदूषण का स्तर खराब श्रेणी में दर्ज किया गया है।
मंडीदीप के सेक्टर-D औद्योगिक क्षेत्र में AQI 251 दर्ज हुआ। यहां PM 10 प्रमुख प्रदूषक रहा। औद्योगिक गतिविधियों वाले इस क्षेत्र में धूल और बारीक कणों का प्रभाव वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।
इंदौर के छोटी ग्वालटोली इलाके में AQI 233 दर्ज किया गया। यहां भी PM 10 मुख्य प्रदूषक के रूप में सामने आया। वहीं उज्जैन के महाश्वेता नगर में AQI 229 रहा, जहां PM 2.5 का प्रभाव अधिक पाया गया।
सिंगरौली में NCL के सूर्यकिरण भवन के पास AQI 206 दर्ज किया गया। यहां PM 10 प्रमुख प्रदूषक रहा। इन सभी स्थानों पर हवा खराब श्रेणी में दर्ज की गई।
इंदौर में एक ही शहर के अलग-अलग इलाकों में अलग तस्वीर
इंदौर में वायु प्रदूषण की स्थिति सभी इलाकों में एक जैसी नहीं है। छोटी ग्वालटोली में जहां AQI 233 दर्ज किया गया, वहीं मगोड़ा नगर में यह आंकड़ा 188 रहा। रेजिडेंसी एरिया में AQI 172 दर्ज किया गया।
दूसरी तरफ एयरपोर्ट क्षेत्र में AQI 101 रहा, जो मध्यम श्रेणी में आता है। सबसे राहत भरी स्थिति रीजनल पार्क में देखने को मिली, जहां AQI केवल 48 दर्ज किया गया। यह अच्छी वायु गुणवत्ता की श्रेणी में आता है।
उपलब्ध आंकड़ों में रीजनल पार्क का AQI पूरे प्रदेश में सबसे कम रहा। इससे साफ है कि एक ही शहर के भीतर भी अलग-अलग क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता में काफी अंतर हो सकता है।
जबलपुर में प्रदूषण का स्तर मध्यम श्रेणी में
जबलपुर में वायु गुणवत्ता की स्थिति प्रदेश के कई अन्य शहरों की तुलना में बेहतर रही। यहां के चारों निगरानी केंद्रों पर AQI मध्यम श्रेणी में दर्ज किया गया।
मार्हताल में AQI 164, गुप्तेश्वर में 131, सुहागी में 108 और गोविंद भवन कॉलोनी में 74 दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से पता चलता है कि शहर के कुछ इलाकों में हवा अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है।
हालांकि, गोविंद भवन कॉलोनी में AQI 74 होने के बावजूद प्रदूषण के प्रति लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। मौसम, हवा की गति और स्थानीय गतिविधियों के कारण प्रदूषण का स्तर बदल सकता है।
सागर, कटनी और देवास में भी सामने आए आंकड़े
प्रदेश के अन्य शहरों में भी वायु गुणवत्ता के अलग-अलग स्तर देखने को मिले हैं। सागर के सिविल लाइंस में AQI 154 दर्ज किया गया, जबकि दीनदयाल नगर में यह आंकड़ा 80 रहा।
कटनी के गोल बाजार में AQI 197 दर्ज किया गया। वहीं देवास के भोपाल चौराहे पर वायु गुणवत्ता सूचकांक 162 रहा। पीथमपुर के सेक्टर-2 औद्योगिक क्षेत्र में AQI 167 दर्ज किया गया।
रतलाम के शास्त्री नगर में AQI 132 रहा। यहां PM 2.5 और PM 10 के बजाय NO2 यानी नाइट्रोजन डाइऑक्साइड प्रमुख प्रदूषक के रूप में दर्ज हुआ।
इन शहरों में हवा रही अपेक्षाकृत साफ
जहां प्रदेश के कई शहर प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं, वहीं कुछ स्थानों पर हवा की गुणवत्ता अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है।
दमोह की श्रीवास्तव कॉलोनी में AQI 59 दर्ज किया गया। मैहर के साहिलारा में यह आंकड़ा 61 और सतना की बांधवगढ़ कॉलोनी में 70 रहा। सागर के दीनदयाल नगर में AQI 80 दर्ज किया गया।
ये सभी स्थान संतोषजनक श्रेणी में आते हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि प्रदेश के सभी शहरों में प्रदूषण का असर एक जैसा नहीं है।
PM 2.5 और PM 10 ने बढ़ाई चिंता
वायु प्रदूषण के आंकड़ों में ग्वालियर सबसे आगे रहा। PM 2.5 के मामले में दीनदयाल नगर का AQI 348 दर्ज किया गया। इसके बाद ग्वालियर का सिटी सेंटर 316 और भोपाल का पर्यावरण परिसर 261 के साथ शामिल रहे।
PM 10 के मामले में ग्वालियर का महाराज बाड़ा 334 के साथ सबसे ऊपर रहा। इसके बाद मंडीदीप के औद्योगिक क्षेत्र में 251, इंदौर की छोटी ग्वालटोली में 233 और सिंगरौली में 206 दर्ज किया गया।
गैसीय प्रदूषकों की बात करें तो रतलाम के शास्त्री नगर में NO2 प्रमुख प्रदूषक के रूप में सामने आया। हालांकि, उपलब्ध आंकड़े प्रदेश के सभी शहरों में गैसीय प्रदूषण की व्यापक तुलना करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
दिवाली पर बढ़ सकता है प्रदूषण का खतरा, लोगों को बरतनी होगी सावधानी
दिवाली के दौरान पटाखों के इस्तेमाल से हवा में धुआं और सूक्ष्म कण बढ़ सकते हैं। पहले से प्रदूषण का सामना कर रहे शहरों में इसका असर और अधिक महसूस हो सकता है। इसके अलावा वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों की धूल, औद्योगिक गतिविधियां और मौसम की परिस्थितियां भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं।
ऐसे में लोगों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए। खराब वायु गुणवत्ता वाले इलाकों में सुबह और शाम के समय लंबे समय तक खुले में व्यायाम करने से बचना बेहतर हो सकता है। जरूरत पड़ने पर अच्छी गुणवत्ता वाले मास्क का इस्तेमाल किया जा सकता है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
साथ ही लोगों को कचरा और पत्तियां जलाने से बचना चाहिए। पटाखों का कम से कम इस्तेमाल करना और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से त्योहार मनाना भी जरूरी है।
फिलहाल मध्य प्रदेश के प्रदूषण आंकड़े एक बड़ा संकेत दे रहे हैं। दिवाली से पहले ही ग्वालियर, भोपाल, इंदौर और मंडीदीप जैसे शहरों में हवा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। अब देखने वाली बात होगी कि आने वाले दिनों में मौसम और स्थानीय परिस्थितियों के बीच AQI का स्तर कितना बदलता है और प्रशासन प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए क्या कदम उठाता है।

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