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45 दिन के मासूम के गायब होने की कहानी में आया खतरनाक ट्विस्ट! बैंक खाते में ₹1.30 लाख पहुंचते ही खुल गया मां का राज…



UP Crime News: उत्तर प्रदेश के कासगंज से सामने आया एक मामला रिश्तों और भरोसे को झकझोर देने वाला है। यहां महज 45 दिन के एक मासूम बच्चे के गायब होने की सूचना ने पुलिस को ऐसी जांच तक पहुंचा दिया, जहां बच्चे के अपहरण की कहानी के पीछे कथित खरीद-फरोख्त का मामला सामने आया। पुलिस के मुताबिक, बच्चे की मां ने अपने बेटे को दूसरे लोगों के हाथों सौंपने की साजिश में कथित तौर पर भूमिका निभाई और बाद में बस स्टैंड से बच्चे के गायब होने की कहानी बताई।

मामले का खुलासा बच्चे के पिता की शिकायत के बाद हुआ। जांच के दौरान पुलिस को पैसों के लेनदेन से जुड़े सुराग मिले। इसके बाद पूछताछ और पुलिस कार्रवाई में बच्चे को बरामद कर लिया गया। बाद की पुलिस कार्रवाई में बच्चे की मां, डॉक्टर दंपती और कथित खरीदार दंपती समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है।

बस स्टैंड से बच्चे के गायब होने की बताई कहानी

मामला कासगंज जिले के सोरों थाना क्षेत्र के बनूपुर पुख्ता गांव से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, बच्चे के पिता अरविंद फरीदाबाद में एक कंपनी में काम करते हैं, जबकि उनकी पत्नी क्रांति गांव में अपने बच्चों के साथ रहती हैं।

बताया गया कि 16 अक्टूबर को क्रांति अपने करीब 45 दिन के छोटे बेटे को दवा दिलाने के लिए कासगंज आई थी। इसके बाद उसने परिवार को बताया कि कासगंज रोडवेज बस स्टैंड पर वह शौचालय जाने के लिए बच्चे को एक अज्ञात महिला के पास छोड़कर गई थी। जब वह वापस लौटी तो महिला और बच्चा दोनों वहां नहीं थे।

बच्चे के गायब होने की सूचना पुलिस को भी दी गई। परिवार के लिए यह बेहद चिंता का विषय था, क्योंकि बच्चा अभी सिर्फ डेढ़ महीने का था। बच्चे के पिता को घटना की जानकारी मिलने के बाद वह फरीदाबाद से कासगंज पहुंचे और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

पिता की शिकायत के बाद पुलिस को हुआ शक

पुलिस ने बच्चे की तलाश शुरू की और घटना से जुड़े लोगों से पूछताछ की। जांच के दौरान बच्चे की मां के बयानों को लेकर पुलिस को कुछ संदेह हुआ। इसके बाद मामले में परिवार के लोगों और कथित रूप से जुड़े अन्य व्यक्तियों से पूछताछ की गई।

इसी दौरान कथित पैसों के लेनदेन का सुराग सामने आया। रिपोर्टों के अनुसार, बच्चे की मां के बैंक खाते में बड़ी रकम पहुंची थी। शुरुआती रिपोर्टों में यह रकम करीब 1.20 लाख रुपये ऑनलाइन और 10 हजार रुपये नकद, यानी कुल 1.30 लाख रुपये बताई गई। बाद की पुलिस जानकारी में सौदे की कुल रकम को लेकर अलग विवरण भी सामने आया है। पुलिस कथित लेनदेन की पूरी कड़ी की जांच कर रही है।

यही बैंकिंग ट्रेल इस मामले की जांच में अहम कड़ी बन गई। पुलिस को शक हुआ कि बच्चे के गायब होने की कहानी के पीछे कोई दूसरी वजह हो सकती है।

डॉक्टर दंपती की भूमिका भी जांच के घेरे में

पुलिस जांच में सोरों क्षेत्र में क्लीनिक चलाने वाले अरुण और उनकी पत्नी पिंकी की कथित भूमिका सामने आई। आरोप है कि दोनों ने बच्चे की मां और दूसरे दंपती के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई।

पुलिस के अनुसार, कथित सौदे में बच्चे को हाथरस जिले के सिकंदराराऊ क्षेत्र के एक दंपती को सौंपे जाने की बात सामने आई। पुलिस ने पूछताछ और अन्य सुरागों के आधार पर इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश शुरू की।

बाद की रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने बच्चे की मां, डॉक्टर दंपती और कथित खरीदार दंपती समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपियों से जुड़े पैसों में से करीब 80 हजार रुपये बरामद किए गए और बैंक खाते में मौजूद रकम पर भी कार्रवाई की गई।

24 घंटे के भीतर बरामद हुआ मासूम

मामले की गंभीरता को देखते हुए सोरों थाना पुलिस के साथ एसओजी और सर्विलांस टीम को जांच में लगाया गया। पुलिस ने बच्चे की तलाश के लिए अलग-अलग स्थानों पर छानबीन की।

जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस टीम उस स्थान तक पहुंची जहां कथित तौर पर बच्चे को रखा गया था। इसके बाद करीब 45 दिन के मासूम को बरामद कर लिया गया।

पुलिस के मुताबिक, बच्चे को सकुशल बरामद किया गया। शुरुआती रिपोर्टों में बच्चे की तबीयत खराब होने की बात सामने आई थी और उसे चिकित्सकीय देखभाल की जरूरत बताई गई थी। मामले में बच्चे की सुरक्षा को सबसे प्राथमिकता दी गई।

सौदा कितना था? जांच में सामने आई अलग-अलग रकम

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू कथित पैसों का लेनदेन है। अलग-अलग पुलिस और मीडिया रिपोर्टों में रकम को लेकर अलग विवरण सामने आया है।

कुछ रिपोर्टों के अनुसार, मां को कथित तौर पर 1.30 लाख रुपये मिले थे। इसमें 1.20 लाख रुपये बैंक खाते में और 10 हजार रुपये नकद दिए जाने की बात कही गई। वहीं बाद की रिपोर्टों में पुलिस के हवाले से यह भी सामने आया कि कथित खरीदार दंपती से डॉक्टर दंपती ने लगभग 2 लाख रुपये लिए थे और इसमें से करीब 1.30 से 1.50 लाख रुपये मां तक पहुंचने की बात जांच में सामने आई।

इसलिए मामले में वास्तविक सौदे की रकम, किसने कितनी रकम दी और किसके पास कितनी राशि पहुंची—इन सभी पहलुओं की पुलिस जांच कर रही है।

पांचों आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी

शुरुआती रिपोर्टों में मां और डॉक्टर दंपती की गिरफ्तारी तथा कथित खरीदार दंपती के फरार होने की बात कही गई थी। हालांकि, बाद में सामने आई पुलिस कार्रवाई की रिपोर्टों में पांचों आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई।

हिंदुस्तान टाइम्स और इंडिया टुडे की रिपोर्टों के मुताबिक, बच्चे की मां, डॉक्टर दंपती और कथित रूप से बच्चे को खरीदने वाले दंपती को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि सभी आरोपियों को अदालत के सामने पेश किया गया और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

मानव तस्करी और बाल संरक्षण कानूनों के तहत जांच

पुलिस ने इस मामले को सिर्फ बच्चे के गायब होने की घटना के तौर पर नहीं देखा, बल्कि कथित खरीद-फरोख्त और साजिश के एंगल से भी जांच की। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने आपराधिक साजिश, मानव तस्करी और किशोर न्याय कानून की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की है।

हालांकि, किसी भी आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अदालत में साबित होना अभी बाकी है। पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

बैंक खाते से खुला ऐसा राज जिसने सबको चौंका दिया

पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी कथित बैंक लेनदेन को माना जा रहा है। जिस बच्चे के गायब होने की शिकायत की गई थी, उसकी तलाश के दौरान पुलिस ने जब पैसों के लेनदेन की जांच की तो कहानी का दूसरा पहलू सामने आया।

एक तरफ बच्चे के गायब होने की कहानी थी, वहीं दूसरी तरफ कथित तौर पर मां के खाते में बड़ी रकम पहुंचने की जानकारी थी। पुलिस ने दोनों घटनाओं को जोड़कर जांच आगे बढ़ाई और इसके बाद कथित खरीद-फरोख्त का खुलासा हुआ।

यह मामला एक बार फिर बताता है कि बच्चों से जुड़े मामलों में छोटी से छोटी वित्तीय जानकारी भी जांच के लिए बेहद महत्वपूर्ण सुराग बन सकती है।

पुलिस ने बरामद किए रुपये, जांच अभी जारी

पुलिस ने कथित सौदे से जुड़े करीब 80 हजार रुपये बरामद किए जाने की जानकारी दी है। साथ ही मां के खाते में जमा रकम की निकासी पर रोक लगाए जाने की बात भी सामने आई है। डॉक्टर दंपती की भूमिका और उनकी चिकित्सकीय योग्यता से जुड़े पहलुओं की भी जांच किए जाने की जानकारी पुलिस ने दी है।

पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे मामले में केवल पांच लोग शामिल थे या इसके पीछे कोई और नेटवर्क भी काम कर रहा था।

मासूम की बरामदगी से परिवार को मिली राहत

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे राहत भरा पहलू यह रहा कि करीब 45 दिन का बच्चा पुलिस ने बरामद कर लिया। उसके गायब होने की खबर से परेशान परिवार को बच्चे के मिलने के बाद राहत मिली।

हालांकि, इस घटना ने कई गंभीर सवाल भी खड़े किए हैं। आखिर इतनी कम उम्र के बच्चे को कथित तौर पर पैसों के बदले दूसरे लोगों को सौंपने की योजना कैसे बनी? इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे? कथित सौदे में वास्तविक रकम कितनी थी? और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क था?

इन सवालों के जवाब पुलिस की आगे की जांच और अदालत में होने वाली कानूनी प्रक्रिया के दौरान सामने आएंगे।

यह खबर उपलब्ध पुलिस बयानों और प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय में साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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