गरबा की रातों में कंडोम की बिक्री क्यों बढ़ जाती है? 30% वाले दावे ने छेड़ी नई बहस, जानिए पूरी कहानी
गुजरात की नवरात्रि और गरबा सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान का भी अहम हिस्सा हैं। नौ रातों तक चलने वाले गरबा में लाखों लोग शामिल होते हैं। अहमदाबाद से लेकर वडोदरा, सूरत और राजकोट तक देर रात तक गरबा और डांडिया के आयोजन होते हैं। इस साल भी 11 अक्टूबर 2026 से गुजरात में नवरात्रि उत्सव शुरू हुआ और हजारों स्थानों पर गरबा के आयोजन किए गए।
लेकिन इसी बीच सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्टों में एक पुराना दावा फिर चर्चा में आ गया है। दावा है कि नवरात्रि और गरबा के दौरान गुजरात में कंडोम की बिक्री सामान्य दिनों की तुलना में करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। इस दावे ने एक बार फिर धार्मिक आयोजन, युवाओं की बदलती सामाजिक आदतों और सुरक्षित यौन संबंधों को लेकर बहस छेड़ दी है।
हालांकि इस पूरे मामले को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि 30 प्रतिशत का आंकड़ा कोई नया सरकारी सर्वे नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इस तरह की बिक्री वृद्धि का दावा कई सालों से सामने आता रहा है।
30 प्रतिशत बढ़ी बिक्री का दावा कहां से आया?
गुजरात में नवरात्रि के दौरान कंडोम और गर्भनिरोधक उत्पादों की बिक्री बढ़ने की चर्चा कम से कम पिछले एक दशक से मीडिया में होती रही है।
2017 में Times of India ने गुजरात स्टेट फेडरेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन (GSFCDA) के हवाले से रिपोर्ट किया था कि नवरात्रि के दौरान कंडोम और गर्भनिरोधक उत्पादों के बाजार में करीब 30 से 35 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी गई थी। संगठन के तत्कालीन चेयरमैन जशवंत पटेल ने बताया था कि त्योहार के दौरान देर रात तक खुले रहने वाली दुकानों में भी कंडोम की मांग बढ़ रही थी।
गुजरात के गरबा ने एक नई बहस छेड़ दी है। नवरात्रि एवं गरबा के समय में कंडोम की बिक्री में बढ़ोतरी बताई गई है जहां पर कंडोम की बिक्री 30% तक बढ़ गई है , इस खुशी से मनाए जाने वाले त्यौहार पर प्रश्न चिह्न लगने लगे है। इसमें ज्यादातर संख्या में महिलाओं...view more https://t.co/97Ix5XRH4G
— Pradeep Chaudhary (@pradeepgr63) October 14, 2026
यही आंकड़ा बाद के वर्षों में अलग-अलग रिपोर्टों और सोशल मीडिया चर्चाओं में अलग-अलग प्रतिशत के साथ दोहराया जाता रहा।
2022 में VICE ने गुजरात के अलग-अलग शहरों की कई फार्मेसियों से बातचीत के आधार पर रिपोर्ट किया था कि नवरात्रि के दौरान कंडोम की बिक्री में 15 से 60 प्रतिशत तक अलग-अलग वृद्धि बताई गई। अहमदाबाद की एक फार्मेसी ने करीब 20 से 30 प्रतिशत और सूरत की एक फार्मेसी ने लगभग 30 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान बताया था।
इससे यह जरूर पता चलता है कि कुछ इलाकों में नवरात्रि के दौरान गर्भनिरोधक उत्पादों की मांग बढ़ने की बात लंबे समय से सामने आती रही है। लेकिन इससे यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि पूरे गुजरात में हर साल बिल्कुल 30 प्रतिशत की आधिकारिक वृद्धि होती है।
क्या 2026 में भी बिक्री 30 प्रतिशत बढ़ी है?
2026 में नवरात्रि शुरू होने के साथ ही यह दावा फिर सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ है। कुछ हालिया रिपोर्टों ने भी पुराने आंकड़ों का हवाला देते हुए 20 से 50 प्रतिशत तक बिक्री बढ़ने की बात लिखी है।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।
हालिया सोशल मीडिया दावे और पुराने व्यापारिक अनुमानों को 2026 के आधिकारिक आंकड़े के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।
अभी उपलब्ध विश्वसनीय सार्वजनिक स्रोतों में ऐसा कोई नया सरकारी सर्वे या राज्यव्यापी आधिकारिक बिक्री डेटा सामने नहीं आया है, जिससे यह प्रमाणित हो कि 2026 की नवरात्रि में गुजरात में कंडोम की बिक्री ठीक 30 प्रतिशत बढ़ी है।
इसलिए खबर का सही निष्कर्ष यह है कि नवरात्रि के दौरान कंडोम की बिक्री बढ़ने का ट्रेंड कई वर्षों से रिपोर्ट होता रहा है, जबकि 2026 के लिए 30 प्रतिशत का आंकड़ा स्वतंत्र रूप से सत्यापित राज्यव्यापी आधिकारिक आंकड़ा नहीं है।
आखिर गरबा और कंडोम की बिक्री का क्या संबंध है?
इस सवाल का जवाब केवल एक कारण में नहीं छिपा है।
गुजरात में नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में युवा रात तक घर से बाहर रहते हैं। गरबा आयोजन देर रात तक चलते हैं और इन आयोजनों में दोस्त, परिवार और युवा समूह बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।
ऐसे त्योहार सामाजिक मेल-जोल के अवसर भी बनते हैं। युवाओं को लंबे समय तक घर से बाहर रहने और दोस्तों के साथ समय बिताने का अवसर मिलता है।
VICE की 2022 की रिपोर्ट में गुजरात की कई फार्मेसियों ने नवरात्रि के दौरान कंडोम की बिक्री बढ़ने की बात कही थी। रिपोर्ट में समाजशास्त्री और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसके पीछे सामाजिक मेल-जोल, युवा आबादी और सुरक्षित यौन संबंधों की जरूरत जैसे कई पहलुओं पर चर्चा की थी।
इसलिए बिक्री बढ़ने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि गरबा में शामिल हर व्यक्ति यौन संबंध बना रहा है। बाजार में मांग बढ़ने के पीछे कई सामाजिक और व्यावसायिक कारण हो सकते हैं।
महिलाओं की संख्या को लेकर क्या है सच्चाई?
आपके दिए गए दावे में कहा गया है कि इस बढ़ी हुई बिक्री में महिलाओं की संख्या ज्यादा है। लेकिन उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में ऐसा कोई ठोस राज्यव्यापी आंकड़ा नहीं मिला जो यह साबित करता हो कि नवरात्रि के दौरान कंडोम खरीदने वालों में महिलाएं बहुमत में हैं।
इसलिए इस हिस्से को तथ्य के रूप में प्रकाशित करना उचित नहीं होगा।
हालांकि महिलाओं की ओर से गर्भनिरोधक उत्पादों को लेकर जागरूकता और खरीदारी पर चर्चा जरूर होती रही है। विशेषज्ञों ने यह भी बताया है कि कई युवा महिलाएं गर्भनिरोधक और आपातकालीन गर्भनिरोधक विकल्पों को लेकर जानकारी तलाशती हैं।
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात सुरक्षित यौन संबंध और सही स्वास्थ्य जानकारी है।
कंडोम की बिक्री बढ़ना अपने आप में किसी त्योहार के धार्मिक या सांस्कृतिक स्वरूप के बदलने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
क्या इससे गरबा की संस्कृति पर सवाल उठता है?
यही वह बिंदु है जहां से सबसे ज्यादा बहस शुरू होती है।
एक पक्ष का मानना है कि गरबा देवी की आराधना और गुजरात की परंपरा से जुड़ा धार्मिक उत्सव है। इसलिए इसे केवल मनोरंजन या युवा संबंधों से जोड़कर देखना गलत है।
दूसरी ओर, आधुनिक समय में गरबा का स्वरूप काफी बदल चुका है। अब बड़े शहरों में हजारों लोगों वाले विशाल गरबा आयोजन होते हैं। इनमें संगीत, सेलिब्रिटी परफॉर्मेंस, फैशन, फूड स्टॉल और व्यावसायिक गतिविधियां भी शामिल होती हैं।
Indian Express की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात का गरबा अब गांवों और पारंपरिक धार्मिक आयोजनों से आगे बढ़कर करोड़ों रुपये की अर्थव्यवस्था से जुड़ा बड़ा सांस्कृतिक आयोजन बन चुका है। इसके व्यावसायीकरण को लेकर पारंपरिक और आधुनिक सोच के बीच बहस भी होती रही है।
इसलिए केवल कंडोम बिक्री के आंकड़े को आधार बनाकर पूरे गरबा उत्सव के चरित्र पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
2017 में कंडोम विज्ञापन ने भी मचाया था बवाल
नवरात्रि और कंडोम की चर्चा नई नहीं है।
2017 में गुजरात में नवरात्रि थीम पर एक कंडोम विज्ञापन को लेकर विवाद हुआ था। विज्ञापन में अभिनेत्री सनी लियोनी की तस्वीर और नवरात्रि से जुड़ा संदेश इस्तेमाल किया गया था। कई संगठनों ने इसका विरोध किया और बाद में होर्डिंग हटा दिए गए। इसी विवाद के दौरान गुजरात में नवरात्रि के समय कंडोम और गर्भनिरोधक बिक्री बढ़ने के आंकड़े भी चर्चा में आए थे।
यानी कंडोम और गरबा का यह मीडिया कनेक्शन अचानक 2026 में पैदा नहीं हुआ है। इसकी चर्चा पिछले कई वर्षों से अलग-अलग रूपों में होती रही है।
गरबा के दौरान सुरक्षित संबंधों पर चर्चा क्यों जरूरी?
अगर वास्तव में किसी त्योहार के दौरान गर्भनिरोधक उत्पादों की मांग बढ़ती है तो इसे केवल नैतिक बहस का विषय बनाने के बजाय स्वास्थ्य जागरूकता के नजरिए से भी देखा जा सकता है।
कंडोम का सही इस्तेमाल अनचाही गर्भावस्था के जोखिम को कम करने के साथ-साथ कई यौन संचारित संक्रमणों से बचाव में मदद करता है।
लेकिन इसके लिए युवाओं को सिर्फ उत्पाद उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। उन्हें सही जानकारी भी मिलनी चाहिए।
2022 की रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने गुजरात में उम्र के अनुरूप यौन स्वास्थ्य शिक्षा और STI जागरूकता की कमी पर भी चिंता जताई थी।
यही वजह है कि नवरात्रि के दौरान कंडोम बिक्री की चर्चा को सिर्फ सनसनीखेज खबर बनाने के बजाय सुरक्षित यौन स्वास्थ्य, सहमति और जिम्मेदार व्यवहार के संदर्भ में समझना ज्यादा उपयोगी होगा।
इस साल गुजरात में गरबा का माहौल कैसा है?
2026 की नवरात्रि में गुजरात में बड़े पैमाने पर गरबा आयोजन हो रहे हैं। राज्य में सुरक्षा के लिए भी बड़े इंतजाम किए गए हैं। News On AIR के अनुसार इस साल राज्यभर में 22,000 से अधिक गरबा स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था की गई है और महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष 'She Teams' तथा पुलिस बल तैनात किया गया है।
इससे साफ है कि गरबा आज भी गुजरात के लिए मुख्य रूप से एक बड़ा सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन है।
इसके साथ ही युवाओं की भागीदारी, रात तक चलने वाले कार्यक्रम और बदलती सामाजिक परिस्थितियां इस उत्सव को आधुनिक सामाजिक बहस का हिस्सा भी बना रही हैं।
एक और नया ट्रेंड, जिसने बढ़ाई चर्चा
इस साल नवरात्रि से पहले अहमदाबाद में सोशल मीडिया पर 'Rent A Garba Partner' नाम से पोस्ट वायरल होने की खबर भी सामने आई थी।
इन पोस्ट में लोगों को पैसे देकर गरबा पार्टनर उपलब्ध कराने की पेशकश की जा रही थी। अहमदाबाद साइबर क्राइम सेल ने लोगों को अज्ञात प्रोफाइलों को पैसे भेजने से सावधान किया था और इसे संभावित ऑनलाइन फ्रॉड के नजरिए से देखने की सलाह दी थी।
इससे पता चलता है कि गरबा अब सिर्फ मैदान में होने वाला नृत्य आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि सोशल मीडिया और डिजिटल कारोबार का भी हिस्सा बन चुका है।
आंकड़ा बड़ा है, लेकिन कहानी उससे भी बड़ी
गुजरात में नवरात्रि के दौरान कंडोम बिक्री बढ़ने की चर्चा कोई नई बात नहीं है। 2017 में गुजरात के केमिस्ट संगठन से जुड़े अनुमान में 30 से 35 प्रतिशत वृद्धि की बात सामने आई थी। बाद की रिपोर्टों में भी कुछ शहरों की फार्मेसियों ने नवरात्रि के दौरान बिक्री बढ़ने की पुष्टि की।
लेकिन 2026 में पूरे गुजरात में कंडोम की बिक्री ठीक 30 प्रतिशत बढ़ने का कोई स्वतंत्र आधिकारिक राज्यव्यापी आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है। इसी तरह महिलाओं की खरीदारी संख्या पुरुषों से ज्यादा होने का दावा भी उपलब्ध विश्वसनीय आंकड़ों से साबित नहीं होता।
इसलिए इस कहानी का असली पहलू सिर्फ कंडोम की बिक्री नहीं है। इसके पीछे बदलती युवा संस्कृति, देर रात तक चलने वाले सामाजिक आयोजन, सुरक्षित यौन संबंधों की जरूरत, स्वास्थ्य शिक्षा और पारंपरिक त्योहारों के बदलते स्वरूप जैसे कई सवाल जुड़े हैं।
गरबा अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है, लेकिन उसके आसपास बदलती सामाजिक आदतों की चर्चा भी अब उतनी ही तेजी से हो रही है। यही वजह है कि हर नवरात्रि में कंडोम बिक्री वाला यह आंकड़ा एक बार फिर सुर्खियों में लौट आता है।

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