नाना पाटेकर ने 8 दिन पहले फोन पर क्या कहा था? तुकाराम मुंढे ने खोला आखिरी बातचीत का राज
कभी-कभी किसी अपने के साथ हुई कुछ मिनटों की बातचीत जिंदगी की सबसे अनमोल याद बन जाती है। उस वक्त इंसान को जरा भी अंदाजा नहीं होता कि जिस आवाज को वह रोजमर्रा की तरह सुन रहा है, शायद वही आवाज आखिरी बार सुनाई दे रही है। कुछ ऐसा ही दर्द महाराष्ट्र के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे के साथ जुड़ा है।
दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद तुकाराम मुंढे ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा की। उन्होंने बताया कि नाना से उनकी मौत से करीब आठ दिन पहले फोन पर बातचीत हुई थी। दोनों के बीच हमेशा की तरह अपनापन और स्नेह था। बातचीत खत्म होने से पहले नाना पाटेकर ने उनसे कहा था- ‘लव यू, बाला।’
उस समय शायद नाना और मुंढे दोनों में से किसी ने भी नहीं सोचा होगा कि यह उनकी आखिरी बातचीत बन जाएगी। लेकिन नाना के अचानक निधन के बाद वही कुछ शब्द तुकाराम मुंढे के लिए जिंदगीभर की याद बन गए हैं।
‘लव यू, बाला’... आखिरी बातचीत के वो शब्द
तुकाराम मुंढे ने नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि देते हुए बताया कि दोनों की बातचीत नाना के निधन से आठ दिन पहले हुई थी। उन्होंने लिखा कि उस समय उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि यह उनकी दोस्त से आखिरी बातचीत होगी।
मुंढे के मुताबिक, बातचीत खत्म करते समय नाना ने बेहद आत्मीय अंदाज में कहा था, ‘लव यू, बाला।’ यही शब्द अब उनके मन में हमेशा के लिए बस गए हैं।
एक दोस्त की कही गई ये छोटी-सी बात नाना के जाने के बाद अचानक बेहद बड़ी याद बन गई। मुंढे ने अपनी पोस्ट में यह भी कहा कि ये शब्द उनके साथ जिंदगीभर रहेंगे।
उनकी पोस्ट से साफ झलकता है कि नाना पाटेकर और तुकाराम मुंढे के बीच रिश्ता केवल एक अभिनेता और प्रशासनिक अधिकारी का नहीं था, बल्कि दोनों के बीच गहरी दोस्ती और व्यक्तिगत अपनापन भी था।
‘मैंने सिर्फ कलाकार नहीं, एक शानदार इंसान खो दिया’
तुकाराम मुंढे ने नाना पाटेकर को याद करते हुए कहा कि उनके जाने से उन्होंने सिर्फ एक बेहतरीन कलाकार को नहीं खोया, बल्कि एक असाधारण इंसान और अपना करीबी दोस्त खो दिया।
मुंढे ने नाना के व्यक्तित्व के उस पहलू को सामने रखा, जिसे आम दर्शक अक्सर पर्दे पर नजर आने वाले उनके किरदारों के पीछे नहीं देख पाते थे। नाना अपनी बेबाक बातचीत, स्पष्ट विचारों और दमदार व्यक्तित्व के लिए जाने जाते थे। लेकिन अपने करीबी लोगों के लिए उनका व्यवहार बेहद आत्मीय और स्नेहपूर्ण था।
मुंढे की श्रद्धांजलि में नाना के इसी मानवीय पक्ष की झलक दिखाई दी। उन्होंने बताया कि नाना की गर्मजोशी और अपनापन लोगों को आसानी से अपनी ओर खींच लेता था।
मुंढे के लिए नाना केवल फिल्मों में दिखाई देने वाला चेहरा नहीं थे। वह ऐसे दोस्त थे, जिनकी मौजूदगी जिंदगी का हिस्सा बन चुकी थी। इसलिए उनका अचानक चले जाना उनके लिए व्यक्तिगत क्षति भी है।
आठ दिन पहले हुई बातचीत क्यों बन गई सबसे बड़ी याद?
अक्सर किसी व्यक्ति के निधन के बाद उसकी कही छोटी-छोटी बातें अचानक बेहद महत्वपूर्ण लगने लगती हैं। तुकाराम मुंढे के साथ भी यही हुआ।
आठ दिन पहले हुई सामान्य-सी बातचीत अब उनके लिए आखिरी बातचीत बन चुकी है। उस बातचीत में नाना ने जिस सहजता से ‘लव यू, बाला’ कहा था, उस समय उसके पीछे छिपे भाव का अंदाजा किसी को नहीं था।
लेकिन अब वही शब्द नाना की याद का हिस्सा बन गए हैं।
तुकाराम मुंढे ने अपनी पोस्ट में इसी भाव को व्यक्त करते हुए लिखा कि कुछ लोग केवल यादें छोड़कर जाते हैं, जबकि कुछ लोग हमारी जिंदगी में अपना एक हिस्सा छोड़ जाते हैं। नाना पाटेकर उनके लिए ऐसे ही इंसान थे।
नाना पाटेकर के निधन की खबर से मचा शोक
75 वर्षीय नाना पाटेकर का निधन 8 अक्टूबर 2026 को गोवा में हुआ। रिपोर्टों के मुताबिक, वह डोना पाउला स्थित अपने घर पर थे, जहां सुबह उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। अस्पताल ने कार्डियक अरेस्ट को मौत का कारण बताया।
रिपोर्टों के अनुसार, नाना ने रात करीब 2:30 बजे एक दोस्त को संदेश भेजकर तबीयत खराब होने की जानकारी दी थी। करीब 4 बजे उनका दोस्त उनके घर पहुंचा। इसके बाद उनकी हालत गंभीर देखकर मदद बुलाई गई और उन्हें बचाने की कोशिश की गई।
अस्पताल में भी डॉक्टरों ने उन्हें बचाने के लिए प्रयास किए, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस खबर के सामने आते ही हिंदी और मराठी फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई।
दोस्त को आखिरी विदाई देने पहुंचे मुंढे
नाना पाटेकर के निधन के बाद तुकाराम मुंढे ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद वह अपने करीबी दोस्त को अंतिम विदाई देने पुणे पहुंचे।
नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार पुणे के डोणजे गांव स्थित उनके फार्महाउस पर किया गया। महाराष्ट्र सरकार की ओर से उन्हें पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। अंतिम संस्कार में परिवार के सदस्यों के अलावा फिल्म जगत, राजनीति और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई लोग मौजूद रहे।
तुकाराम मुंढे भी वहां पहुंचे और अपने दोस्त को आखिरी विदाई दी। इस दौरान उनका भावुक होना स्वाभाविक था, क्योंकि जिस व्यक्ति के साथ कुछ दिन पहले सामान्य बातचीत हुई थी, उसे अब हमेशा के लिए विदा करना पड़ रहा था।
एयर एंबुलेंस से पुणे लाया गया पार्थिव शरीर
नाना पाटेकर के निधन के बाद उनका पार्थिव शरीर गोवा से पुणे लाया गया। इसके बाद डोणजे स्थित उनके फार्महाउस पर अंतिम संस्कार की तैयारियां की गईं।
उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। प्रशंसक अपने पसंदीदा अभिनेता को आखिरी बार देखने और श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचे। कई लोगों के लिए नाना केवल अभिनेता नहीं थे, बल्कि उनके जीवन और सिनेमा की यादों का हिस्सा थे।
पर्दे के सख्त कलाकार के पीछे था भावुक इंसान
नाना पाटेकर ने अपने लंबे करियर में ऐसे कई किरदार निभाए, जिन्होंने दर्शकों के मन पर गहरी छाप छोड़ी। उनकी आवाज, संवाद बोलने का अंदाज और चेहरे के भाव उन्हें दूसरे कलाकारों से अलग बनाते थे।
उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा के अलावा थिएटर में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई। ‘सलाम बॉम्बे’, ‘परिंदा’, ‘अग्निपथ’, ‘क्रांतिवीर’ और ‘अब तक छप्पन’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब पसंद किया। उनके अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार सहित कई सम्मान मिले।
लेकिन तुकाराम मुंढे की भावुक पोस्ट ने नाना के उस निजी पक्ष को सामने ला दिया, जो पर्दे पर नजर नहीं आता था। एक तरफ वह अपने दमदार और गंभीर अभिनय के लिए पहचाने जाते थे, तो दूसरी तरफ अपने करीबी दोस्तों के साथ उनका रिश्ता बेहद आत्मीय था।
‘लव यू, बाला’ अब बन गया आखिरी संदेश
नाना पाटेकर और तुकाराम मुंढे के बीच आठ दिन पहले हुई बातचीत शायद सामान्य बातचीत थी। लेकिन नाना के निधन के बाद उसका महत्व पूरी तरह बदल गया।
फोन रखने से पहले बोले गए ‘लव यू, बाला’ जैसे कुछ शब्द अब मुंढे के लिए नाना की आखिरी निशानी बन चुके हैं। यही इस पूरी कहानी का सबसे भावुक पहलू है।
किसी करीबी व्यक्ति के जाने के बाद उसकी आवाज, उसके शब्द और उसके साथ बिताए छोटे-छोटे पल ही सबसे बड़ी याद बन जाते हैं। तुकाराम मुंढे के लिए भी नाना की वह आखिरी बातचीत अब सिर्फ एक फोन कॉल नहीं रही, बल्कि जिंदगीभर उनके साथ रहने वाली एक भावनात्मक स्मृति बन गई है।
नाना पाटेकर अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके अभिनय, उनके किरदार, उनकी आवाज और उन्हें चाहने वाले लोगों की यादों में वह हमेशा मौजूद रहेंगे। और तुकाराम मुंढे की उस भावुक पोस्ट ने यह बता दिया कि पर्दे के इस दिग्गज कलाकार के पीछे एक ऐसा दोस्त भी था, जिसकी कमी शायद जिंदगीभर महसूस होती रहेगी।

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