Breaking News

210 की स्पीड से भागा आ रहा 'तूफान कोगुमा', 48 घंटों तक बरसेगी मॉनसूनी आफत, घर-बिजली-सड़कें कुछ नहीं बचेगा!



समुद्र में उठता एक शक्तिशाली तूफान जब अपनी पूरी ताकत हासिल करता है तो उसकी हवाएं सैकड़ों किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं। हाल ही में टाइफून कोगुमा ने पश्चिमी प्रशांत महासागर के खुले समुद्री क्षेत्र में इसी तरह की खतरनाक ताकत दिखाई। अंतरराष्ट्रीय आपदा निगरानी रिकॉर्ड के मुताबिक कोगुमा की अधिकतम हवा की रफ्तार करीब 222 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंची और यह अपने चरम पर कैटेगरी-4 स्तर का तूफान था। हालांकि, इसका सबसे खतरनाक चरण खुले समुद्र में रहा और बाद में तूफान तेजी से कमजोर होता गया।

अब कहानी का दूसरा हिस्सा कंबोडिया से जुड़ा है। यहां कोगुमा का सीधा लैंडफॉल होने की स्थिति नहीं थी, लेकिन इस सिस्टम ने दक्षिण-पश्चिम मानसून को प्रभावित किया। कंबोडिया के जल संसाधन एवं मौसम विज्ञान मंत्रालय ने अक्टूबर के मध्य तक बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी थी। मंत्रालय के मुताबिक 9 से 15 अक्टूबर के बीच देश के कई हिस्सों में बादल, बिखरी बारिश, आंधी-तूफान और तेज हवाओं की स्थिति बन सकती है, जबकि समुद्री लहरों की ऊंचाई करीब 0.50 से 1.75 मीटर तक रहने की संभावना जताई गई थी।

यानी खतरा यह नहीं है कि 210 किलोमीटर प्रति घंटे की हवाएं सीधे कंबोडिया में दस्तक दे रही हैं, बल्कि असली चिंता यह है कि तूफानी सिस्टम के प्रभाव से मानसूनी मौसम ज्यादा सक्रिय हो सकता है।

खुले समुद्र में कितना ताकतवर था टाइफून कोगुमा?

कोगुमा का सबसे खतरनाक चरण तब आया जब यह पश्चिमी प्रशांत महासागर के खुले समुद्र में था। GDACS के रिकॉर्ड के अनुसार इसकी अधिकतम हवा की रफ्तार करीब 222 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंची थी। इस स्तर की ताकत पर इसे कैटेगरी-4 के स्तर का तूफान माना गया। उस समय तूफान की दिशा और स्थिति ऐसी थी कि आबादी वाले क्षेत्रों पर इसका सीधा प्रभाव सीमित रहा।

इसके बाद कोगुमा लगातार कमजोर होता गया। 12 अक्टूबर तक इसकी ताकत कैटेगरी-2 तक आ गई, 13 अक्टूबर तक यह कैटेगरी-1 स्तर पर पहुंच गया और 14 अक्टूबर तक इसकी हवाएं और कमजोर हो गईं। उपलब्ध नवीनतम मौसम रिकॉर्ड के मुताबिक 14 अक्टूबर को कोगुमा जापान के काफी पूर्व में था और उसकी अधिकतम निरंतर हवा लगभग 83 से 93 किलोमीटर प्रति घंटे के स्तर पर दर्ज की जा रही थी।

दक्षिण कोरिया के मौसम विभाग के रिकॉर्ड में भी 14 अक्टूबर को कोगुमा के कमजोर होकर आगे बढ़ने और उसके बाद अतिरिक्त-उष्णकटिबंधीय प्रणाली में बदलने की जानकारी दी गई है।

फिर कंबोडिया में क्यों बढ़ी चिंता?

यही वह सवाल है जिसने मौसम की इस पूरी स्थिति को महत्वपूर्ण बना दिया है। कोगुमा का केंद्र कंबोडिया के ऊपर से गुजरने वाला नहीं था, लेकिन तूफान और अन्य मौसम प्रणालियों ने क्षेत्रीय मानसूनी गतिविधियों को प्रभावित किया।

कंबोडिया के मंत्रालय ने 9 अक्टूबर को लोगों को चेतावनी दी थी कि स्टॉर्म नंबर 28 नोलो और स्टॉर्म नंबर 29 कोगुमा दक्षिण-पश्चिम मानसून को प्रभावित कर रहे हैं। देश सीधे इन तूफानों के रास्ते में नहीं था, लेकिन इसके बावजूद 9 से 15 अक्टूबर के बीच कई इलाकों में बारिश, गरज, बिजली और तेज हवाओं की स्थिति बन सकती थी।

इसका मतलब साफ है कि मौसम का खतरा तूफान के केंद्र से हमेशा तय नहीं होता। किसी बड़े समुद्री सिस्टम का प्रभाव उससे काफी दूर स्थित क्षेत्रों के मानसून और बारिश के पैटर्न पर भी पड़ सकता है।

समुद्री इलाकों में सबसे ज्यादा सावधानी

कंबोडिया के तटीय इलाकों के लिए समुद्री मौसम विशेष चिंता का विषय रहा। मंत्रालय ने समुद्र में 0.50 से 1.75 मीटर तक लहरों की संभावना जताई थी। ऐसे हालात में छोटी नावों, मछुआरों और समुद्र में यात्रा करने वालों के लिए जोखिम बढ़ जाता है।

तेज हवाओं के साथ ऊंची लहरें समुद्र में नावों को अस्थिर कर सकती हैं। इसलिए स्थानीय प्रशासन की चेतावनी को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। खासकर खराब मौसम के दौरान समुद्र में जाने से बचना जरूरी होता है।

पहाड़ी इलाकों में बारिश बढ़ाएगी परेशानी

कंबोडिया के पहाड़ी और ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बारिश का असर अलग तरह से दिखाई दे सकता है। तेज बारिश होने पर पहाड़ी रास्तों पर मिट्टी खिसकने, छोटे भूस्खलन और सड़क संपर्क बाधित होने का खतरा बढ़ सकता है।

वहीं निचले इलाकों में पानी जमा होने से यातायात प्रभावित हो सकता है। शहरों में भारी बारिश के दौरान सड़क पर जलभराव, पेड़ गिरने और बिजली व्यवस्था में व्यवधान जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर पूरे देश में विनाशकारी सुपर साइक्लोन जैसी स्थिति बताना सही नहीं होगा। वर्तमान खतरा मुख्य रूप से मानसून, गरज-चमक, तेज हवाओं और स्थानीय भारी बारिश से जुड़ा है।

210 किमी प्रति घंटे की हवा कितनी खतरनाक होती है?

यह समझना भी जरूरी है कि 210 या 220 किलोमीटर प्रति घंटे की हवा किस स्तर की ताकत रखती है। इतनी तेज हवा में पेड़ उखड़ सकते हैं, बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हो सकते हैं और कमजोर ढांचे को भारी नुकसान पहुंच सकता है।

समुद्र में ऐसी हवाएं ऊंची और खतरनाक लहरें पैदा कर सकती हैं। तटीय इलाकों में तूफानी लहरों का खतरा भी बढ़ जाता है।

लेकिन कोगुमा के मामले में यह ताकत कंबोडिया के ऊपर दर्ज हवा की रफ्तार नहीं थी। यह इसकी चरम स्थिति के दौरान खुले समुद्र में दर्ज की गई अधिकतम ताकत थी। यही अंतर समझना बेहद जरूरी है।

कंबोडिया में कब तक रह सकता है मौसम का असर?

कंबोडिया के मौसम मंत्रालय की 9 अक्टूबर की चेतावनी में 9 से 15 अक्टूबर के बीच मौसम संबंधी सावधानी बरतने को कहा गया था। इसके बाद 10 अक्टूबर को कंबोडिया की सरकारी समाचार एजेंसी ने बताया कि देश में बारिश का मौसम अक्टूबर के तीसरे सप्ताह तक समाप्त होने की उम्मीद है और दक्षिण-पश्चिम मानसून धीरे-धीरे कमजोर होकर उत्तर-पूर्वी मानसून में बदलने लगेगा।

इस बदलाव के साथ सामान्य तौर पर बारिश में कमी आने की उम्मीद है, हालांकि मंत्रालय ने यह भी कहा कि गरज, बिजली और तेज हवाओं जैसी स्थानीय मौसमी घटनाएं अभी भी हो सकती हैं।

इसलिए आने वाले दिनों में मौसम पूरी तरह शांत होने के बजाय धीरे-धीरे संक्रमण के दौर में जा सकता है।

लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

मौसम खराब होने की स्थिति में लोगों को खुले स्थानों से बचना चाहिए। बिजली चमकने के दौरान पेड़ों, बिजली के खंभों और खुले मैदानों से दूरी बनाना जरूरी है।

समुद्री इलाकों में रहने वाले लोगों और नाव संचालकों को स्थानीय प्रशासन की सलाह के अनुसार ही गतिविधियां करनी चाहिए। पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचना बेहतर है।

बिजली गिरने और तेज हवाओं की स्थिति में घर के अंदर सुरक्षित स्थान पर रहना चाहिए। अगर स्थानीय प्रशासन किसी क्षेत्र को खाली करने या सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह देता है, तो उसे गंभीरता से लेना चाहिए।

इमरजेंसी में इन नंबरों पर करें संपर्क

कंबोडिया में आधिकारिक आपातकालीन नंबरों के अनुसार पुलिस के लिए 117, फायर सर्विस के लिए 118 और एंबुलेंस के लिए 119 डायल किया जा सकता है।

तूफान कमजोर हुआ, लेकिन मौसम की चुनौती अभी खत्म नहीं

टाइफून कोगुमा ने भले ही खुले समुद्र में 220 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की ताकत दिखाई हो, लेकिन 14 अक्टूबर तक यह काफी कमजोर हो चुका था और कंबोडिया पर सीधे सुपर साइक्लोन के रूप में इसका खतरा नहीं था।

फिर भी कंबोडिया में मानसूनी गतिविधि के कारण बारिश, गरज-चमक, तेज हवाओं और समुद्री लहरों को लेकर सावधानी जरूरी बनी हुई है। मौसम का यह दौर एक बार फिर दिखाता है कि किसी तूफान का खतरा सिर्फ उसके केंद्र से नहीं मापा जाता। कई बार दूर समुद्र में बना एक शक्तिशाली सिस्टम भी हजारों किलोमीटर दूर मानसूनी परिस्थितियों को प्रभावित कर सकता है।

फिलहाल सबसे जरूरी बात यही है कि लोग अफवाहों के बजाय स्थानीय मौसम विभाग और प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियों पर भरोसा करें और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक जोखिम लेने से बचें।

कोई टिप्पणी नहीं