अस्पताल का कमरा बंद कर इलाज के बहाने डाॅक्टर की महिला से घिनौनी हरकत, प्राइवेट पार्ट को किया टच
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अहमदाबाद के मेमनगर इलाके से एक निजी अस्पताल में इलाज कराने पहुंची 25 वर्षीय महिला के साथ कथित छेड़छाड़ का गंभीर मामला सामने आया है। महिला ने अस्पताल के एक डॉक्टर पर जांच के दौरान उसके साथ आपत्तिजनक व्यवहार करने का आरोप लगाया है। शिकायत के आधार पर वस्त्रपुर पुलिस ने आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी को अदालत में पेश किए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
यह पूरा मामला इलाज और मेडिकल जांच के दौरान महिला की सुरक्षा तथा अस्पतालों में मरीजों की जांच के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगी।
अल्सर की समस्या लेकर अस्पताल पहुंची थी महिला
पुलिस शिकायत के मुताबिक, वस्त्रपुर इलाके में रहने वाली 25 वर्षीय महिला पेट से जुड़ी समस्या यानी गैस्ट्रिक अल्सर से परेशान थी। वह अहमदाबाद के मेमनगर स्थित एक निजी गैस्ट्रो एंड लिवर अस्पताल में इलाज के लिए पहुंची थी।
बताया गया है कि शुरुआती परामर्श के दौरान आरोपी डॉक्टर व्रज सतीशकुमार पटेल ने महिला की जांच की थी। इस दौरान सोनोग्राफी सहित कुछ चिकित्सकीय जांच कराई गईं और महिला को दवाएं दी गईं।
महिला ने डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं का कोर्स पूरा किया, लेकिन उसकी तबीयत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसके बाद वह आगे के इलाज के लिए अपने परिवार के साथ अस्पताल पहुंची।
पुलिस के अनुसार, महिला 1 अक्टूबर की शाम को अस्पताल में भर्ती हुई थी। यहीं से मामले में लगाए गए गंभीर आरोप सामने आए।
पहली रात जांच के दौरान क्या हुआ?
शिकायत में महिला ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद उसी रात करीब 8 बजे डॉक्टर उसके पास आया। महिला के अनुसार, डॉक्टर ने उसे कुछ कपड़े उतारने के लिए कहा और उसके शरीर की जांच की।
महिला ने पुलिस को दिए बयान में आरोप लगाया कि इस दौरान डॉक्टर ने कथित तौर पर बिना दस्ताने के जांच की। शिकायत के मुताबिक, जांच के दौरान वहां कोई महिला मेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं थी।
महिला ने इस कथित व्यवहार को असामान्य बताया और बाद में अपने परिवार के सदस्यों को इसकी जानकारी दी। हालांकि, पुलिस के अनुसार अगले दिन भी डॉक्टर द्वारा कथित रूप से ऐसी ही हरकत किए जाने का आरोप लगाया गया है।
दूसरे दिन फिर कमरे में ले जाने का आरोप
पुलिस शिकायत के अनुसार, 2 अक्टूबर की शाम करीब 6:30 बजे डॉक्टर कथित तौर पर महिला को अस्पताल के एक कमरे में लेकर गया। बताया गया है कि यह कमरा नंबर 5 था।
महिला का आरोप है कि डॉक्टर ने उससे कहा कि उसके पेट की जांच करनी है। शिकायत के मुताबिक, उस समय भी कोई महिला स्टाफ सदस्य वहां मौजूद नहीं थी।
महिला ने आरोप लगाया कि डॉक्टर ने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और जांच के नाम पर उसके कपड़े उतरवाए। इसके बाद डॉक्टर द्वारा उसके साथ कथित तौर पर आपत्तिजनक और अनुचित व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया गया है।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की।
परिवार को बताई पूरी बात
घटना के बाद महिला ने कथित रूप से अपने परिवार के सदस्यों को पूरी जानकारी दी। परिवार की मदद से महिला वस्त्रपुर पुलिस स्टेशन पहुंची और डॉक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।
पुलिस ने मामले में BNS की धारा 64(1) और धारा 74 के तहत FIR दर्ज किए जाने की जानकारी दी है। पुलिस के अनुसार, धारा 64(1) बलात्कार से संबंधित है, जबकि धारा 74 महिला के कपड़े उतारने के इरादे से हमला या आपराधिक बल के इस्तेमाल से संबंधित है।
इन धाराओं में मामला दर्ज होना आरोपों की गंभीरता को दर्शाता है, लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।
4 अक्टूबर को आरोपी डॉक्टर गिरफ्तार
शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी डॉक्टर व्रज सतीशकुमार पटेल को हिरासत में लिया।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी अहमदाबाद के थलतेज इलाके में रहता है। उसे 4 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को अदालत के सामने पेश किया।
अदालत में पेशी के बाद आरोपी डॉक्टर को केंद्रीय जेल भेज दिया गया है। आगे की कार्रवाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया के तहत जारी है।
अस्पताल में महिला स्टाफ की मौजूदगी पर भी सवाल
इस मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल मेडिकल जांच के दौरान महिला स्टाफ की मौजूदगी को लेकर भी उठ रहा है। महिला ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि कथित जांच के दौरान कोई महिला स्टाफ सदस्य मौजूद नहीं थी।
विशेषकर महिला मरीज की ऐसी शारीरिक जांच, जिसमें निजी अंगों या संवेदनशील हिस्सों की जांच की आवश्यकता हो सकती है, उसमें मरीज की सहमति, जांच की जरूरत और उचित मेडिकल प्रोटोकॉल बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।
हालांकि, किसी भी मेडिकल जांच में वास्तव में क्या प्रक्रिया अपनाई गई थी और डॉक्टर के पास उस जांच को करने का चिकित्सकीय आधार क्या था, इसका निर्धारण पुलिस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया में किया जाएगा।
डॉक्टर पर लगे आरोपों की होगी जांच
मामले में पुलिस अब महिला के बयान सहित उपलब्ध अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही होगी। अस्पताल में भर्ती से संबंधित रिकॉर्ड, मेडिकल रिपोर्ट, डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन, जांच से जुड़े दस्तावेज और अस्पताल में मौजूद अन्य लोगों की जानकारी जांच का हिस्सा बन सकती है।
इसके अलावा अस्पताल में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग भी महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकती है, खासकर यह पता लगाने के लिए कि महिला को संबंधित कमरे में कब ले जाया गया और उस समय आसपास कौन-कौन लोग मौजूद थे।
हालांकि किसी भी CCTV या मेडिकल रिकॉर्ड के बारे में तभी निश्चित जानकारी सामने आएगी, जब जांच एजेंसी इसकी पुष्टि करे।
मरीज की सहमति मेडिकल जांच का अहम हिस्सा
यह मामला एक बार फिर इस बात को सामने लाता है कि मेडिकल जांच के दौरान मरीज की सहमति और गरिमा का सम्मान कितना महत्वपूर्ण है। मरीज को यह समझने का अधिकार होता है कि किस प्रकार की जांच की जा रही है और उसकी आवश्यकता क्यों है।
संवेदनशील जांच की स्थिति में अस्पतालों में पारदर्शिता और उचित मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन मरीज के भरोसे के लिए बेहद जरूरी होता है।
महिला मरीजों के मामले में कई अस्पतालों में महिला मेडिकल स्टाफ की मौजूदगी जैसी व्यवस्थाएं भी अपनाई जाती हैं, हालांकि किसी विशेष जांच में लागू होने वाले नियम परिस्थितियों और मेडिकल आवश्यकता पर निर्भर करते हैं।
आरोप साबित होना अभी बाकी
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज की है और आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी और FIR का मतलब यह नहीं है कि आरोप अदालत में साबित हो चुके हैं।
आरोपी को अदालत में अपना पक्ष रखने और कानूनी बचाव का पूरा अधिकार है। मामले में अंतिम निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों, जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
फिलहाल पुलिस की कार्रवाई के बाद यह मामला अहमदाबाद में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ महिला की शिकायत ने अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और मेडिकल जांच की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं दूसरी ओर अब सबकी नजर पुलिस जांच और अदालत की आगे की कार्रवाई पर है।

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