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10 दिन की नवरात्रि ने बढ़ाया रहस्य! अष्टमी-नवमी एक दिन या अलग-अलग? जानें व्रत, कन्या पूजन और दशहरे की सही तारीख



नई दिल्ली: शारदीय नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की आराधना के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व में भक्त मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं। नवरात्रि के दौरान अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इन दिनों बड़ी संख्या में श्रद्धालु कन्या पूजन करते हैं और अपने व्रत का पारण भी करते हैं।

हालांकि, इस बार अष्टमी और नवमी की तारीख को लेकर भक्तों के बीच असमंजस की स्थिति बन रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह सप्तमी तिथि का दो दिनों तक रहना बताई जा रही है। अलग-अलग पंचांगों में तिथियों की गणना के आधार पर अष्टमी और नवमी को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि आखिर अष्टमी का व्रत किस दिन रखा जाए, नवमी कब होगी, कन्या पूजन के लिए कौन सा दिन सही रहेगा और दशहरा किस तारीख को मनाया जाएगा।

ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, तिथियों की गणना और सूर्योदय के समय मौजूद तिथि को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष अष्टमी और नवमी के व्रत को लेकर स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।

इस बार 10 दिनों की होगी नवरात्रि

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष शारदीय नवरात्रि 10 दिनों की मानी जा रही है। इसका प्रमुख कारण तिथियों की स्थिति है। सप्तमी तिथि दो दिनों तक रहने के कारण नवरात्रि की आगे की तिथियों में भी बदलाव दिखाई दे रहा है।

बताया गया है कि सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर की सुबह से शुरू होकर 18 अक्टूबर की सुबह करीब 9 बजे तक रहेगी। धार्मिक व्रतों में सूर्योदय के समय मौजूद तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी वजह से सप्तमी का व्रत 17 अक्टूबर को रखना उचित माना जा रहा है।

तिथियों के इसी क्रम के कारण इस बार अष्टमी और नवमी को लेकर अलग-अलग पंचांगों में अलग-अलग गणना देखने को मिल रही है।

18 अक्टूबर को रखा जाएगा अष्टमी व्रत

अष्टमी तिथि को नवरात्रि की सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक माना जाता है। इस दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है और बड़ी संख्या में भक्त उपवास रखते हैं।

दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर 2026, रविवार को सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर शुरू होगी। यह तिथि अगले दिन यानी 19 अक्टूबर, सोमवार को सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक रहेगी।

धार्मिक मान्यताओं और तिथि के नियमों के अनुसार इस बार 18 अक्टूबर को अष्टमी व्रत रखना शुभ माना गया है। बताया जाता है कि सप्तमी युक्त अष्टमी व्रत की स्थिति को ध्यान में रखते हुए 18 अक्टूबर को अष्टमी के लिए उपयुक्त दिन माना गया है।

इस दिन मां दुर्गा की पूजा करने के साथ भक्त अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार कन्या पूजन भी कर सकते हैं।

19 अक्टूबर को नवमी का व्रत

अष्टमी के बाद नवमी तिथि आती है और नवरात्रि के समापन से पहले इस दिन भी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

पंचांग के अनुसार नवमी तिथि 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजकर 51 मिनट के बाद शुरू होगी और 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगी।

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, अष्टमी युक्त नवमी व्रत की परंपरा को ध्यान में रखते हुए 19 अक्टूबर को नवमी का व्रत रखना मान्य रहेगा।

नवमी के दिन भक्त मां सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं। कई परिवारों में इसी दिन नवरात्रि व्रत का समापन किया जाता है और कन्या पूजन के बाद व्रत खोला जाता है।

क्या 19 अक्टूबर को एक साथ रखा जा सकता है अष्टमी-नवमी व्रत?

यही वह सवाल है जिसे लेकर इस बार सबसे ज्यादा भ्रम देखने को मिल रहा है। कुछ पंचांगों में तिथियों की गणना के आधार पर अष्टमी और नवमी दोनों का व्रत 19 अक्टूबर को रखने की बात कही गई है।

ऐसे में जो भक्त अपनी पारिवारिक या स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार अष्टमी और नवमी का व्रत एक ही दिन रखना चाहते हैं, वे 19 अक्टूबर को दोनों व्रत रख सकते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और नियमपूर्वक मां दुर्गा की पूजा करने में तिथि की गणना के साथ-साथ परिवार की परंपरा का भी महत्व होता है। इसलिए अलग-अलग पंचांगों में अंतर होने की स्थिति में भक्त अपने क्षेत्र में मान्य पंचांग अथवा विद्वान ज्योतिषाचार्य की सलाह के अनुसार पूजा कर सकते हैं।

संधि पूजा का भी है विशेष महत्व

नवरात्रि में संधि पूजा को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पूजा अष्टमी और नवमी तिथि के संधिकाल में की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अष्टमी के अंतिम 24 मिनट और नवमी के शुरुआती 24 मिनट को मिलाकर संधि काल बनता है।

इस बार दिए गए समय के अनुसार 19 अक्टूबर को सुबह 10:27 बजे से 11:15 बजे तक संधि पूजा की जा सकेगी।

इस दौरान मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। कई स्थानों पर मंदिरों में विशेष अनुष्ठान भी आयोजित किए जाते हैं। भक्त अपनी स्थानीय परंपरा के अनुसार संधि पूजा में शामिल हो सकते हैं।

18 अक्टूबर को कन्या पूजन का शुभ समय

नवरात्रि में कन्या पूजन की परंपरा विशेष रूप से अष्टमी और नवमी के दिन निभाई जाती है। भक्त छोटी कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका पूजन करते हैं और भोजन कराते हैं।

18 अक्टूबर को अष्टमी के अवसर पर कन्या पूजन करने वाले भक्तों के लिए दिए गए विवरण के अनुसार दो शुभ समय बताए गए हैं।

अमृत काल: सुबह 8:49 बजे से 10:32 बजे तक।

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक।

भक्त इन समयों में अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार कन्या पूजन कर सकते हैं।

कन्याओं को भोजन कराने के बाद उन्हें दक्षिणा, फल या उपहार देने की भी परंपरा है। कई परिवारों में कन्या पूजन के साथ एक बालक को भी भैरव स्वरूप मानकर पूजा जाता है।

19 अक्टूबर को कन्या पूजन का समय

जो भक्त नवमी के दिन कन्या पूजन करना चाहते हैं, उनके लिए भी शुभ मुहूर्त बताए गए हैं।

अमृत काल: सुबह 9:57 बजे से 11:42 बजे तक।

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक।

19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी दोनों व्रत रखने वाले भक्त भी अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार कन्या पूजन कर सकते हैं।

कन्या पूजन के दौरान स्वच्छता और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखने की परंपरा है। परिवार अपनी सुविधा और मान्य पंचांग के अनुसार शुभ समय का चयन कर सकते हैं।

दशहरा किस दिन मनाया जाएगा?

अष्टमी और नवमी की तारीख को लेकर भले ही इस बार कुछ भ्रम की स्थिति बनी हुई हो, लेकिन दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार दशहरा यानी विजयादशमी 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा।

दशहरा हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था। इसके अलावा मां दुर्गा द्वारा महिषासुर का संहार भी शक्ति और धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है।

देश के अलग-अलग हिस्सों में विजयादशमी के दिन रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। वहीं कई जगहों पर दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ नवरात्रि और दुर्गा पूजा का समापन होता है।

भक्त किस बात का रखें ध्यान?

इस बार तिथियों की स्थिति सामान्य वर्षों की तुलना में थोड़ी अलग होने के कारण भक्तों को पूजा और व्रत की तारीख तय करते समय अपने स्थानीय पंचांग और परंपरा को प्राथमिकता देनी चाहिए।

खासकर अष्टमी और नवमी के व्रत तथा कन्या पूजन को लेकर यदि अलग-अलग जानकारी मिल रही हो, तो परिवार जिस पंचांग को वर्षों से मानता आ रहा है, उसके अनुसार पूजा करना उचित रहेगा।

कुल मिलाकर दिए गए विवरण के अनुसार 18 अक्टूबर को अष्टमी व्रत, 19 अक्टूबर को नवमी व्रत और 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा। वहीं कन्या पूजन अष्टमी यानी 18 अक्टूबर या नवमी यानी 19 अक्टूबर को शुभ मुहूर्त में किया जा सकता है।

इस बार नवरात्रि की तिथियों में बदलाव के कारण भले ही भक्तों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हो, लेकिन धार्मिक दृष्टि से यह पर्व मां दुर्गा की आराधना, शक्ति, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देता है। भक्त अपनी परंपरा, पंचांग और आस्था के अनुसार पूजा-अर्चना कर मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

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