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दुकान पर QR Code स्कैन करने से पहले रुक जाइए! एक गलती और पलभर में खाली हो सकता है बैंक अकाउंट



डिजिटल भुगतान ने लोगों की जिंदगी को बेहद आसान बना दिया है। आज बाजार में खरीदारी करनी हो, पेट्रोल भरवाना हो, पार्किंग का भुगतान करना हो या किसी को पैसे भेजने हों, कुछ सेकंड में मोबाइल से पेमेंट किया जा सकता है। लेकिन डिजिटल सुविधा के बढ़ने के साथ साइबर अपराधियों ने भी ठगी के तरीके बदल दिए हैं। अब साइबर ठग केवल फोन कॉल, फर्जी ओटीपी या बैंक अधिकारी बनकर ही लोगों को निशाना नहीं बना रहे, बल्कि QR Code को भी ठगी का हथियार बना रहे हैं।

ग्वालियर पुलिस ने QR Code से होने वाली साइबर ठगी को लेकर लोगों को सतर्क किया है। पुलिस के मुताबिक, इस तरह की धोखाधड़ी का एक मामला साइबर क्राइम विंग तक पहुंच चुका है, जिसमें दुकानदार के लिए किया गया भुगतान गलत QR Code के जरिए ठगों तक पहुंच गया। इस घटना के बाद पुलिस ने लोगों को QR Code स्कैन करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है।

सबसे बड़ी चिंता यह है कि QR Code देखने में बिल्कुल सामान्य लग सकता है। ग्राहक को पता भी नहीं चलता कि जिस कोड को वह दुकानदार का समझकर स्कैन कर रहा है, वह किसी साइबर ठग का हो सकता है।

असली QR Code के ऊपर चिपका देते हैं नकली कोड

साइबर ठगी का यह तरीका बेहद सामान्य दिखाई देने के बावजूद खतरनाक है। पुलिस के मुताबिक, ठग दुकानों, पेट्रोल पंपों, पार्किंग स्थलों या अन्य सार्वजनिक जगहों पर लगे असली QR Code के ऊपर अपना नकली QR Code चिपका सकते हैं।

ठग इसके लिए ऐसी जगह चुन सकते हैं जहां रात में कम आवाजाही हो या दिन के समय इतनी भीड़ हो कि किसी का ध्यान QR Code पर न जाए। ग्राहक जब खरीदारी करने के बाद भुगतान करने पहुंचता है तो वह बिना ज्यादा जांच किए QR Code स्कैन कर देता है।

मोबाइल स्क्रीन पर भुगतान की प्रक्रिया सामान्य दिखाई दे सकती है, लेकिन पैसा दुकानदार के खाते में पहुंचने के बजाय ठग के खाते में जा सकता है।

यानी ग्राहक को लगता है कि उसने दुकानदार को भुगतान कर दिया है, जबकि दूसरी तरफ साइबर अपराधी उसके पैसे को अपने खाते में ट्रांसफर करा चुका होता है।

इनाम और कैशबैक का लालच भी बन रहा हथियार

QR Code से ठगी का दूसरा तरीका लोगों की लालच या उत्सुकता का फायदा उठाना है। साइबर ठग मोबाइल पर ऐसे संदेश भेज सकते हैं जिनमें बड़े इनाम, लॉटरी, कैशबैक या किसी विशेष ऑफर का दावा किया जाता है।

उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति को संदेश मिल सकता है कि उसने हजारों रुपये का इनाम जीता है और रकम प्राप्त करने के लिए दिए गए QR Code को स्कैन करना होगा।

ऐसे संदेश WhatsApp, SMS, ईमेल या अन्य डिजिटल माध्यमों से भेजे जा सकते हैं। संदेश को विश्वसनीय दिखाने के लिए उसमें कंपनी, बैंक, ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म या किसी प्रसिद्ध संस्था का नाम भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

लेकिन असली खतरा QR Code के पीछे छिपा हो सकता है। साइबर अपराधियों का उद्देश्य व्यक्ति को ऐसा कदम उठाने के लिए प्रेरित करना होता है, जिससे उसके खाते से पैसा निकल जाए या उसकी निजी जानकारी उनके हाथ लग जाए।

QR Code स्कैन करने से पहले यह गलती न करें

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पैसे प्राप्त करने के लिए सामान्य तौर पर आपको किसी QR Code को स्कैन करके UPI PIN डालने की जरूरत नहीं होती।

यदि कोई व्यक्ति आपको कहता है कि पैसे पाने के लिए QR Code स्कैन करें और फिर UPI PIN डालें, तो आपको बेहद सावधान हो जाना चाहिए। QR Code को स्कैन करने के बाद मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देने वाली जानकारी को ध्यान से देखना जरूरी है।

पेमेंट करने से पहले यह जांचना चाहिए कि जिस व्यक्ति या दुकान को पैसा भेजा जा रहा है, उसका नाम सही दिखाई दे रहा है या नहीं। जल्दबाजी में भुगतान करना कई बार भारी नुकसान का कारण बन सकता है।

मोबाइल हैक करने के लिए भी इस्तेमाल हो सकता है QR Code

QR Code से जुड़ा खतरा केवल सीधे पैसे कटने तक सीमित नहीं है। पुलिस के मुताबिक, कुछ QR Code लोगों को फर्जी वेबसाइट या खतरनाक लिंक तक पहुंचा सकते हैं।

ऐसे लिंक के जरिए साइबर अपराधी फिशिंग या मालवेयर जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति संदिग्ध वेबसाइट पर अपनी बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड या अन्य निजी जानकारी दर्ज कर देता है, तो उसका दुरुपयोग किया जा सकता है।

कुछ मामलों में संदिग्ध लिंक मोबाइल डिवाइस में खतरनाक सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कराने की कोशिश भी कर सकते हैं। इससे फोन में मौजूद निजी जानकारी और अन्य संवेदनशील डेटा के खतरे में पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।

यही वजह है कि किसी अनजान व्यक्ति, संदेश या ईमेल में मिले QR Code को केवल इसलिए स्कैन नहीं करना चाहिए क्योंकि उसमें इनाम या पैसे मिलने का दावा किया गया है।

दुकानदारों को भी रहना होगा सतर्क

QR Code से होने वाली ठगी का खतरा केवल ग्राहकों तक सीमित नहीं है। दुकानदार भी इसका शिकार हो सकते हैं। खासकर उन दुकानों में जहां QR Code काउंटर, दीवार या किसी सार्वजनिक स्थान पर चिपका रहता है।

दुकानदारों को समय-समय पर अपने QR Code की जांच करनी चाहिए। यदि कोई नया स्टीकर दिखाई दे या मूल QR Code के ऊपर दूसरा कोड चिपका हुआ नजर आए तो तुरंत उसकी जांच करनी चाहिए।

दुकानदारों के लिए यह भी जरूरी है कि ग्राहक से भुगतान प्राप्त होने के बाद केवल ग्राहक के मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देने वाले सफल भुगतान संदेश पर निर्भर न रहें। अपने बैंकिंग ऐप या उपलब्ध भुगतान प्रणाली में राशि की पुष्टि करना अधिक सुरक्षित तरीका हो सकता है।

भारी भीड़ में ज्यादा सावधानी जरूरी

साइबर ठग अक्सर ऐसी परिस्थितियों का फायदा उठाते हैं जहां लोगों के पास जांच करने का समय कम होता है। भीड़भाड़ वाली दुकान, पेट्रोल पंप, पार्किंग स्थल या किसी बड़े आयोजन में लोग जल्दी भुगतान करके आगे बढ़ना चाहते हैं।

ऐसे में QR Code की जांच किए बिना स्कैन करने की संभावना बढ़ जाती है।

इसलिए भुगतान करते समय कुछ सेकंड अतिरिक्त लगाना किसी बड़े नुकसान से बचा सकता है। QR Code कहां लगा है, उस पर कोई दूसरा स्टीकर तो नहीं चिपका है और भुगतान किस नाम पर जा रहा है—इन बातों की जांच जरूर करनी चाहिए।

फर्जी इनाम के संदेश से रहें दूर

अगर आपके मोबाइल पर अचानक कोई ऐसा संदेश आए कि आपने बड़ी रकम जीत ली है या आपको कैशबैक मिलने वाला है, तो तुरंत विश्वास न करें।

खास तौर पर ऐसे संदेशों में दिए गए QR Code, लिंक या निर्देशों का पालन करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंकिंग ऐप खोलना, स्क्रीन शेयर करना, QR Code स्कैन करना या UPI PIN डालना नुकसानदायक हो सकता है।

याद रखें कि UPI PIN पैसा प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि भुगतान को अधिकृत करने के लिए इस्तेमाल होता है।

पुलिस ने जारी की सतर्क रहने की अपील

राज्य साइबर पुलिस के डीएसपी संजीव नयन शर्मा के अनुसार, हाल के समय में QR Code से जुड़े धोखाधड़ी के नए तरीके सामने आए हैं। उन्होंने लोगों को विशेष रूप से दुकानों के बाहर लगाए गए QR Code और लुभावने डिजिटल संदेशों से सावधान रहने की सलाह दी है।

पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधी अब केवल एक तरीके पर निर्भर नहीं हैं। वे लोगों की आदतों और डिजिटल भुगतान की सुविधा का फायदा उठाकर नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।

ठगी हो जाए तो तुरंत करें शिकायत

यदि किसी व्यक्ति को संदेह है कि उसके साथ डिजिटल भुगतान से जुड़ी धोखाधड़ी हुई है, तो उसे घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। भुगतान से संबंधित जानकारी, ट्रांजैक्शन आईडी, बैंक संदेश, संदिग्ध नंबर, QR Code या लिंक से जुड़े स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखने चाहिए।

साइबर ठगी के मामले में देरी करने से नुकसान बढ़ सकता है। इसलिए घटना की जानकारी संबंधित बैंक और साइबर अपराध शिकायत व्यवस्था को जल्द से जल्द देना महत्वपूर्ण है।

एक छोटी सी सावधानी बचा सकती है पूरी कमाई

QR Code ने भुगतान को बेहद आसान बना दिया है, लेकिन सुविधा के साथ सावधानी भी जरूरी है। किसी भी दुकान पर भुगतान करने से पहले QR Code को ध्यान से देखें। अनजान व्यक्ति या संदेश से मिले QR Code को स्कैन न करें। इनाम, लॉटरी या कैशबैक के लालच में जल्दबाजी न करें और किसी भी संदिग्ध प्रक्रिया में UPI PIN साझा न करें।

डिजिटल भुगतान करते समय कुछ सेकंड की सावधानी आपकी मेहनत की कमाई को साइबर ठगों के हाथों में जाने से बचा सकती है। ग्वालियर पुलिस की एडवाइजरी का संदेश साफ है—QR Code दिखे तो तुरंत स्कैन न करें, पहले जांचें कि पैसा आखिर किसके खाते में जा रहा है।

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