पुतिन के घर के बाहर अचानक बढ़ा पहरा! 50 से ज्यादा एयर डिफेंस टावर देखकर दुनिया हैरान, उधर अफ्रीका में रूस ने शुरू किया ‘गुप्त’ भर्ती अभियान
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब केवल युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है। इस संघर्ष का असर रूस की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था, सैन्य भर्ती और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी दिखाई दे रहा है। इसी बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सुरक्षा को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट ने नई चर्चा छेड़ दी है। रिपोर्ट के अनुसार, रूस के नोवगोरोद क्षेत्र में वाल्दाई स्थित पुतिन के आवास के आसपास एयर डिफेंस यानी हवाई रक्षा व्यवस्था को काफी मजबूत किया गया है। बताया जा रहा है कि इस इलाके में एयर डिफेंस टावरों की संख्या बढ़कर 50 से ज्यादा हो गई है।
दूसरी ओर, यूक्रेन युद्ध के लिए सैनिकों की जरूरत पूरी करने के उद्देश्य से रूस का भर्ती अभियान अब अफ्रीकी देशों तक फैलता दिखाई दे रहा है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि जिम्बाब्वे, बुरुंडी, सिएरा लियोन और अन्य अफ्रीकी देशों के नागरिकों को रूस में नौकरी और बेहतर वेतन का लालच देकर भर्ती किया गया और बाद में उन्हें सैन्य गतिविधियों में शामिल किए जाने के आरोप सामने आए हैं।
इन दोनों घटनाक्रमों को एक साथ देखा जाए तो रूस के सामने सुरक्षा और सैन्य मानव संसाधन से जुड़ी दो बड़ी चुनौतियां दिखाई देती हैं।
पुतिन के वाल्दाई आवास के आसपास बढ़ी एयर डिफेंस सुरक्षा
रेडियो लिबर्टी की एक रिपोर्ट के अनुसार, नोवगोरोद क्षेत्र के वाल्दाई में स्थित राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आवास के आसपास हाल के महीनों में एयर डिफेंस व्यवस्था को मजबूत किया गया है। रिपोर्ट में सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण का हवाला देते हुए कहा गया है कि इलाके में 16 नए एयर डिफेंस टावर बनाए गए हैं।
इससे आसपास मौजूद ऐसे रक्षा ठिकानों की कुल संख्या 50 से ज्यादा होने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर में ली गई सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण करने पर पुतिन के आवास से करीब 50 मील यानी लगभग 80 किलोमीटर के दायरे में बड़ी संख्या में नए शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस पोजीशन दिखाई दिए।
यह विश्लेषण रेडियो लिबर्टी ने एक ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस विश्लेषक के साथ मिलकर किया। हालांकि, इन सभी ठिकानों पर वास्तव में कौन-से हथियार तैनात हैं, इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना मुश्किल है।
रिपोर्ट में संभावना जताई गई है कि इनमें पैंटसिर या टोर जैसे कम दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम लगाए जा सकते हैं। इन प्रणालियों का इस्तेमाल ड्रोन, क्रूज मिसाइल और अन्य कम ऊंचाई वाले हवाई खतरों से महत्वपूर्ण सैन्य या रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा के लिए किया जाता है।
यूक्रेन की दिशा में बनाए गए बाहरी सुरक्षा घेरे
रिपोर्ट के मुताबिक, नए रक्षा टावरों में से कई पुतिन के आवास के दक्षिणी हिस्से में बनाए गए हैं। यह क्षेत्र यूक्रेन की दिशा की ओर पड़ता है। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि रूस संभावित ड्रोन या अन्य हवाई हमलों से राष्ट्रपति के आवास को बचाने के लिए एक विस्तृत सुरक्षा घेरा तैयार कर रहा है।
कुछ रक्षा ठिकानों के व्यशनेवोलोत्स्क जलाशय के आसपास बनाए जाने की भी बात सामने आई है। रिपोर्ट में लिसी द्वीप के पास दो रक्षा ठिकानों का उल्लेख किया गया है। इस क्षेत्र में एक प्रयोगशाला परिसर भी मौजूद बताया जाता है।
इसके अलावा, बाहरी सुरक्षा घेरे में एक एयर डिफेंस टावर खोतिलोवो सैन्य अड्डे के परिसर में होने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, खोतिलोवो से वाल्दाई स्थित पुतिन के आवास तक सीधी रेल कनेक्टिविटी भी मौजूद है।
इस तरह देखा जाए तो सुरक्षा व्यवस्था केवल आवास के आसपास तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के महत्वपूर्ण इलाकों और संभावित पहुंच मार्गों तक फैली हुई दिखाई देती है।
पहले भी पुतिन के आवास पर ड्रोन हमले का दावा
पुतिन के वाल्दाई आवास की सुरक्षा को लेकर चिंता की एक बड़ी वजह रूस द्वारा पहले किया गया ड्रोन हमले का दावा भी है। रूसी अधिकारियों ने जनवरी में आरोप लगाया था कि यूक्रेन ने वाल्दाई स्थित राष्ट्रपति के आवास को निशाना बनाने की कोशिश की थी।
यूक्रेन ने इस आरोप को खारिज कर दिया था। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने रूसी दावे को सही नहीं माना था।
इस घटनाक्रम के बाद वाल्दाई जैसे संवेदनशील स्थानों पर ड्रोन रोधी और हवाई रक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत रूस के लिए और महत्वपूर्ण हो सकती है।
रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है। दोनों पक्षों ने सैन्य ठिकानों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और अन्य रणनीतिक स्थानों के खिलाफ ड्रोन हमलों का इस्तेमाल किया है। ऐसे में किसी भी महत्वपूर्ण राजनीतिक या सैन्य व्यक्ति के आवास की सुरक्षा के लिए एयर डिफेंस नेटवर्क बढ़ाना स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
मॉस्को की तुलना में वाल्दाई में सुरक्षा पर सवाल
रेडियो लिबर्टी की रिपोर्ट में वाल्दाई क्षेत्र की एयर डिफेंस व्यवस्था की तुलना मॉस्को और उसके आसपास की सुरक्षा व्यवस्था से भी की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वाल्दाई में 50 से ज्यादा एयर डिफेंस टावर होने की संख्या मॉस्को और आसपास के क्षेत्र में मौजूद टावरों की कुल संख्या की लगभग आधी बताई गई है। यह तुलना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मॉस्को और उसके आसपास की आबादी वाल्दाई की तुलना में बहुत अधिक है।
इससे सवाल उठता है कि रूस पुतिन के निजी आवास वाले इलाके को इतनी मजबूत हवाई सुरक्षा क्यों दे रहा है। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था के पीछे वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि रूस की ओर से सार्वजनिक रूप से नहीं की गई है।
अब अफ्रीकी देशों तक पहुंचा रूसी भर्ती अभियान
जहां एक ओर पुतिन की सुरक्षा मजबूत किए जाने की खबर सामने आई है, वहीं दूसरी ओर रूस की सैन्य भर्ती रणनीति भी चर्चा में है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूस अब अफ्रीका के गरीब देशों से ज्यादा लोगों को अपनी सेना में भर्ती करने की कोशिश कर रहा है।
रिपोर्ट में जिम्बाब्वे, बुरुंडी और सिएरा लियोन जैसे देशों का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि कुछ लोगों को रूस में नागरिक नौकरियों का लालच दिया गया। उन्हें परिवहन, खानपान और अन्य क्षेत्रों में काम देने की बात कही गई। कुछ मामलों में अच्छे वेतन, भारी बोनस और रूसी नागरिकता का वादा किए जाने की भी बात कही गई है।
लेकिन आरोप यह है कि रूस पहुंचने के बाद कुछ लोगों को यूक्रेन के युद्धक्षेत्र में भेज दिया गया।
बुरुंडी और जिम्बाब्वे से भर्ती में बड़ा उछाल
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़े इस भर्ती अभियान में तेजी की ओर इशारा करते हैं। बताया गया है कि 1 जनवरी से 30 सितंबर के बीच रूस ने बुरुंडी से 699 लोगों की भर्ती की। इसके मुकाबले पूरे 2025 में यह संख्या सिर्फ 30 बताई गई थी।
इसी अवधि में जिम्बाब्वे से 530 लोगों की भर्ती का दावा किया गया है। वर्ष 2025 में यह संख्या 65 बताई गई थी।
यानी दोनों देशों से भर्ती में उल्लेखनीय वृद्धि का दावा किया गया है। इसके अलावा कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, सिएरा लियोन, सूडान और कैमरून जैसे देशों से भी लोगों की भर्ती बढ़ने की बात सामने आई है।
यूक्रेन के मुताबिक, उसने 151 देशों के 45,959 विदेशी नागरिकों की पहचान की है जिन्होंने रूसी सेना के साथ अनुबंध किया है। इनमें 5,451 लोग अफ्रीकी देशों से बताए गए हैं।
29 देशों के नागरिकों की भर्ती का आरोप
यूक्रेन पर बनी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की 26 अक्टूबर की रिपोर्ट में भी इस मुद्दे को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, रूसी अधिकारियों ने 29 देशों के नागरिकों को धोखे या दबाव के जरिए रूसी सेना में भर्ती किया।
आयोग के अनुसार, अफ्रीकी देशों से भर्ती किए गए कुछ लोगों को सीधे फ्रंट लाइन पर भेजे जाने और हमले करने वाले अभियानों में इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कुछ विदेशी नागरिकों ने युद्ध में जाने से इनकार किया तो उन्हें हिरासत, मारपीट और जान से मारने की धमकी जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
हालांकि, ऐसे आरोपों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना कठिन है और रूस की ओर से इन सभी दावों पर समान रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
मेडागास्कर तक पहुंचा भर्ती अभियान
रूस के भर्ती अभियान के विस्तार को लेकर एक और महत्वपूर्ण दावा मेडागास्कर से जुड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस ने पहली बार मेडागास्कर से लड़ाकों की भर्ती शुरू की है।
इस संदर्भ में 2025 में मेडागास्कर में हुए राजनीतिक बदलाव और मॉस्को के साथ बढ़ते संबंधों का भी उल्लेख किया गया है।
यदि अफ्रीकी देशों से रूसी सेना में विदेशी नागरिकों की भर्ती लगातार बढ़ती है तो यह रूस की युद्ध रणनीति के अंतरराष्ट्रीय विस्तार का संकेत हो सकता है। साथ ही इससे अफ्रीकी देशों और रूस के बीच कूटनीतिक संबंधों पर भी असर पड़ने की संभावना है।
अफ्रीकी सरकारों ने नागरिकों को किया सावधान
रूसी भर्ती अभियान को लेकर कई अफ्रीकी देशों की सरकारों ने अपने नागरिकों को सावधान किया है।
बोत्सवाना और दक्षिण अफ्रीका ने रूस में आकर्षक नौकरी के प्रस्तावों को लेकर अपने नागरिकों को चेतावनी दी है। जिम्बाब्वे में भी रूस के लिए सैन्य भर्ती से जुड़े संदेह में दो रूसी नागरिकों की गिरफ्तारी की बात सामने आई है।
केन्या और घाना ने भी कथित भर्ती गतिविधियों को रोकने की अपील की है। केन्या के कुछ नेताओं ने दावा किया है कि उनके देश से कम से कम एक हजार लोगों की भर्ती की गई है।
इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि रूस-यूक्रेन युद्ध का प्रभाव अब यूरोप की सीमाओं से काफी आगे तक पहुंच चुका है। विदेशी नागरिकों की कथित भर्ती ने कई विकासशील देशों के लिए अपने नागरिकों की सुरक्षा और रोजगार के नाम पर होने वाली भर्तियों की निगरानी को बड़ी चुनौती बना दिया है।
रूस के सामने दोहरी चुनौती
पुतिन के वाल्दाई आवास के आसपास एयर डिफेंस टावरों की संख्या बढ़ना और अफ्रीकी देशों में सैन्य भर्ती अभियान का विस्तार—दोनों घटनाएं रूस की मौजूदा युद्ध परिस्थितियों की अलग-अलग तस्वीर पेश करती हैं।
एक ओर रूस महत्वपूर्ण नेताओं और रणनीतिक ठिकानों को ड्रोन और हवाई हमलों से बचाने के लिए अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर रहा है। दूसरी ओर लंबे समय से जारी युद्ध के लिए अतिरिक्त सैनिकों की जरूरत को पूरा करने के लिए विदेशों तक भर्ती नेटवर्क फैलाने की कोशिशों की खबरें सामने आ रही हैं।
हालांकि, इन रिपोर्टों में किए गए सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। फिर भी यदि सामने आए आंकड़े और आरोप सही साबित होते हैं, तो यह संकेत होगा कि रूस-यूक्रेन युद्ध अब केवल सैन्य मोर्चे पर नहीं, बल्कि सुरक्षा, भर्ती, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के स्तर पर भी लगातार नया रूप ले रहा है।

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