सऊदी में मचा हड़कंप! हूतियों ने दागीं मिसाइलें, अदन के राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा हमला… अब भारत ने क्यों लिया बड़ा फैसला?
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब एक और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब समर्थित यमनी सरकारी बलों के बीच तनाव तेजी से बढ़ रहा है। हाल के दिनों में हूतियों ने सऊदी अरब के महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने के साथ-साथ यमन के अदन शहर में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के केंद्र पर भी मिसाइल हमला किया है। इस हमले ने साफ कर दिया है कि संघर्ष अब केवल सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक केंद्र भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि इस बढ़ते तनाव का असर आम नागरिकों, हवाई सेवाओं और खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले विदेशी नागरिकों पर भी पड़ रहा है। भारत ने भी अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर ताजा सलाह जारी की है। वहीं एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए सऊदी अरब से जुड़ी कुछ उड़ानों के संचालन पर अस्थायी रोक बढ़ाई है।
अदन के राष्ट्रपति भवन पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला
यमन के अदन शहर में स्थित राष्ट्रपति भवन परिसर को हूती विद्रोहियों ने निशाना बनाया। रिपोर्टों के मुताबिक हमले में कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। उस समय प्रधानमंत्री शाया अल-जिंदानी और सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी परिसर में मौजूद थे। हालांकि प्रधानमंत्री और अन्य शीर्ष अधिकारी सुरक्षित बच गए।
हमले के बाद राष्ट्रपति भवन परिसर और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया गया। इस हमले में कई लोगों के मारे जाने और घायल होने की खबर सामने आई। मृतकों में सुरक्षा कर्मियों के शामिल होने की बात भी कही गई है।
हूतियों ने दावा किया कि उनका निशाना केवल राष्ट्रपति भवन नहीं था। संगठन के अनुसार परिसर के आसपास मौजूद सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य अभियान से जुड़े कमांड सेंटर को भी निशाना बनाया गया। यही वजह है कि इस हमले को केवल एक राजनीतिक हमले के तौर पर नहीं, बल्कि सऊदी अरब समर्थित यमनी सरकार के खिलाफ सीधे सैन्य संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
हूतियों ने खोला दूसरा मोर्चा?
यमन में लंबे समय से हूती विद्रोहियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के बीच संघर्ष चला आ रहा है। सऊदी अरब यमनी सरकार का समर्थन करता रहा है और हूतियों के खिलाफ लड़ने वाले सरकारी बलों को सैन्य सहायता भी देता है।
इसी वजह से हूती नेतृत्व सऊदी अरब को अपने संघर्ष का प्रमुख पक्ष मानता है। अब जब अदन में यमनी सरकार के मुख्य परिसर पर हमला हुआ है, तो माना जा रहा है कि हूती रणनीति में बड़ा बदलाव आया है।
संगठन सऊदी अरब पर दबाव बनाने के साथ-साथ उसके सहयोगी यमनी सरकारी ढांचे को भी सीधे चुनौती दे रहा है। इससे यमन के भीतर संघर्ष के और ज्यादा गंभीर होने की आशंका पैदा हो गई है।
अदन पर हमला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शहर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार का प्रमुख केंद्र है। इसके अलावा अदन का बंदरगाह और हवाई अड्डा रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं।
सऊदी अरब में भी बढ़ी मिसाइल और ड्रोन हमलों की चिंता
दूसरी तरफ सऊदी अरब भी हूती हमलों की चपेट में है। हाल के दिनों में सऊदी अरब के महत्वपूर्ण शहरों और रणनीतिक ठिकानों को मिसाइल तथा ड्रोन के जरिए निशाना बनाने की कोशिशों ने सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी है।
सऊदी अरब के लिए सबसे बड़ी चिंता उसके महत्वपूर्ण एयरपोर्ट, सैन्य प्रतिष्ठान और ऊर्जा ढांचा है। यदि इन स्थानों पर लगातार हमले होते हैं तो इसका असर केवल सुरक्षा पर ही नहीं बल्कि विमान सेवाओं और तेल आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की ओर से भी हूती हमलों को रोकने के लिए जवाबी कार्रवाई की जाती रही है। इस तरह दोनों पक्षों के बीच हमले और जवाबी हमले का सिलसिला एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है।
हूतियों की मिसाइल क्षमता ने बढ़ाई चिंता
हूतियों की सैन्य क्षमता को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बनी हुई है। लंबे समय से उन पर ईरान से तकनीकी और सैन्य समर्थन हासिल करने के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि ईरान इन आरोपों को लेकर अलग-अलग मौकों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करता रहा है।
हूतियों के पास बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन जैसी क्षमताएं मौजूद हैं। संगठन लगातार अपनी सैन्य तकनीक को मजबूत करने की कोशिश करता रहा है।
रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि हूती लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसी क्षमता विकसित होने पर सऊदी अरब के अलावा इजराइल जैसे दूर स्थित लक्ष्यों तक हमला करने की उनकी क्षमता बढ़ सकती है।
हालांकि मिसाइलों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्रत्येक पुर्जे और तकनीकी स्रोत से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि हर मामले में नहीं हुई है।
फिर भी इस संभावना ने पश्चिम एशिया के देशों की चिंता बढ़ा दी है। यदि हूती लंबी दूरी की और अधिक सटीक मिसाइलें विकसित करने में सफल होते हैं तो क्षेत्र में सैन्य संतुलन पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।
भारत ने अपने नागरिकों के लिए जारी की एडवाइजरी
बढ़ती सुरक्षा चिंता के बीच भारत ने सऊदी अरब में रह रहे अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। भारतीय दूतावास ने नागरिकों से स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने को कहा है।
हवाई हमले की स्थिति में भारतीय नागरिकों को घर के अंदर रहने और अनावश्यक रूप से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी गई है।
भारतीय नागरिकों से यह भी कहा गया है कि वे सुरक्षा स्थिति को लेकर अफवाहों पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान दें।
इसके अलावा मिसाइल या ड्रोन हमलों से संबंधित संवेदनशील तस्वीरें और वीडियो बनाने तथा उन्हें सोशल मीडिया पर साझा करने से भी बचने की सलाह दी गई है। युद्ध जैसे हालात में ऐसी गतिविधियां सुरक्षा और कानूनी दोनों तरह की परेशानी पैदा कर सकती हैं।
जरूरत पड़ने पर दूसरे देशों के रास्ते निकलने का विकल्प
भारत ने उन नागरिकों के लिए भी वैकल्पिक रास्तों की जानकारी दी है जिन्हें सुरक्षा कारणों से सऊदी अरब छोड़ना जरूरी हो।
ऐसे भारतीय नागरिक बहरीन, कुवैत या कतर के रास्ते बाहर निकलने पर विचार कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए संबंधित देश में प्रवेश करने के लिए जरूरी वीजा और अन्य यात्रा दस्तावेज होना आवश्यक है।
भारतीय दूतावास ने नागरिकों से अपील की है कि वे यात्रा करने से पहले उड़ान और सीमा संबंधी नियमों की जानकारी जरूर लें।
उड़ानों पर भी पड़ा संघर्ष का असर
मिसाइल और ड्रोन हमलों का सीधा असर हवाई सेवाओं पर भी दिखाई दे रहा है। सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने सऊदी अरब के कुछ शहरों से जुड़ी उड़ानों को अस्थायी रूप से रद्द किया है।
रियाद, जेद्दा और दम्माम जैसे प्रमुख शहरों के लिए उड़ानों पर असर पड़ने से यात्रियों की परेशानी बढ़ी है। कई यात्रियों को अपनी यात्रा की तारीख बदलनी पड़ रही है, जबकि कुछ यात्रियों को रिफंड का विकल्प भी दिया जा रहा है।
हवाई सेवाओं में इस तरह का व्यवधान बताता है कि संघर्ष का प्रभाव केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है। इसका असर आम लोगों की आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय संपर्क पर भी पड़ रहा है।
भारतीय नागरिक भी सुरक्षा चिंता के बीच सतर्क
सऊदी अरब में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं। ऐसे में वहां बढ़ता सैन्य तनाव भारत के लिए भी चिंता का विषय है।
भारतीय नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे अपने आसपास के सुरक्षा हालात पर नजर रखें और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन तथा भारतीय मिशन के निर्देशों का पालन करें।
खास तौर पर जिन इलाकों में सैन्य या रणनीतिक प्रतिष्ठान मौजूद हैं, वहां रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
क्या और तेज हो सकती है जंग?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आने वाले दिनों में हूती हमले और ज्यादा तेज होंगे। अदन के राष्ट्रपति भवन पर हमला और सऊदी अरब के महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिशें संकेत देती हैं कि संघर्ष एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है।
यदि मिसाइल और ड्रोन हमले लगातार बढ़ते हैं तो इसका असर खाड़ी क्षेत्र के हवाई मार्ग, समुद्री व्यापार, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और तेल बाजार पर भी पड़ सकता है।
सऊदी अरब के लिए चुनौती यह है कि उसे अपने शहरों और महत्वपूर्ण आर्थिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करनी होगी। वहीं हूतियों के लिए लंबी दूरी की मिसाइल और ड्रोन क्षमता उनके सैन्य दबाव को बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।
दुनिया की नजर अब सऊदी अरब और यमन पर
अदन में सरकारी प्रतिष्ठानों पर हमला और सऊदी अरब के खिलाफ लगातार हमलों ने पश्चिम एशिया की स्थिति को और जटिल बना दिया है। इस संघर्ष में क्षेत्रीय शक्तियों की भूमिका पहले से ही महत्वपूर्ण रही है और यदि तनाव और बढ़ता है तो दूसरे देशों के भी प्रभावित होने की संभावना बढ़ सकती है।
भारत फिलहाल अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है। भारतीय नागरिकों को सावधानी बरतने, स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी गई है।
आने वाले दिनों में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही होगा कि क्या दोनों पक्ष सैन्य कार्रवाई को और आगे बढ़ाते हैं या फिर तनाव कम करने के लिए कोई कूटनीतिक रास्ता तलाश किया जाता है।
फिलहाल इतना साफ है कि सऊदी अरब और यमन के बीच बढ़ता तनाव अब केवल दो पक्षों की लड़ाई नहीं रह गया है। इसके प्रभाव की गूंज पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुनाई दे रही है और भारत समेत दुनिया के कई देशों को अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है।

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