न टिकट, न पहचान पत्र, न कोई सुराग… बरेली जंक्शन पर मिले 28 शवों का रहस्य अब भी बरकरार
बरेली: रेलवे स्टेशनों और उनके आसपास कई बार ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, जहां किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसके पास पहचान से जुड़ा कोई दस्तावेज नहीं मिलता। ऐसे मामलों में शव की पहचान पुलिस और रेलवे प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। बरेली जंक्शन के जीआरपी क्षेत्र से सामने आए आंकड़े भी इसी गंभीर समस्या की तस्वीर पेश करते हैं।
जानकारी के मुताबिक, इस वर्ष बरेली जंक्शन जीआरपी क्षेत्र में 40 अज्ञात शव मिले। इनमें पुलिस और रेलवे की कोशिशों के बाद 12 शवों की पहचान हो सकी, लेकिन 28 शवों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। इन 28 मामलों में 18 लोगों की मौत ट्रेन से कटकर हुई, जबकि 10 लोगों की मौत बीमारी के कारण होने की जानकारी सामने आई है।
इन मृतकों की पहचान न हो पाने की वजह से पुलिस के सामने कई सवाल हैं। मृतकों के पास न तो रेलवे टिकट मिला और न ही ऐसा कोई पहचान पत्र या अन्य दस्तावेज, जिससे उनके परिवार या स्थायी पते तक पहुंचा जा सके।
अब रेलवे पुलिस ने इन अज्ञात शवों की पहचान के लिए दोबारा प्रयास तेज करने के निर्देश दिए हैं।
40 अज्ञात शव मिले, 12 की हो सकी पहचान
बरेली जंक्शन जीआरपी क्षेत्र में इस वर्ष मिले 40 अज्ञात शवों में से 12 की पहचान पुलिस की जांच और विभिन्न माध्यमों से हो गई। पहचान होने के बाद पुलिस और प्रशासन के लिए आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करना आसान हुआ।
लेकिन बाकी 28 मामलों में अभी भी मृतकों की पहचान एक चुनौती बनी हुई है।
इनमें 18 ऐसे मामले हैं, जिनमें व्यक्ति की मौत ट्रेन से कटने के कारण हुई। रेलवे ट्रैक और उसके आसपास मिलने वाले शवों की स्थिति कई बार ऐसी होती है कि मौके पर मौजूद व्यक्ति की तत्काल पहचान नहीं हो पाती। अगर उसके पास मोबाइल फोन, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, रेलवे टिकट या कोई अन्य दस्तावेज न हो, तो जांच और कठिन हो जाती है।
दूसरी ओर, 10 लोगों की मौत बीमारी के कारण होने की बात सामने आई है। ऐसे मामलों में भी अगर व्यक्ति अकेला हो और उसके पास पहचान का कोई दस्तावेज नहीं मिले तो पुलिस को परिवार तक पहुंचने में काफी परेशानी होती है।
शवों के पास नहीं मिला टिकट या पहचान पत्र
जीआरपी के सामने सबसे बड़ी समस्या यही है कि इन अज्ञात शवों के पास पहचान स्थापित करने वाला कोई ठोस दस्तावेज नहीं मिला।
रेलवे स्टेशन पर सफर करने वाले यात्रियों के पास आमतौर पर टिकट, मोबाइल फोन, पहचान पत्र या सामान जैसी चीजें होती हैं। इन चीजों के माध्यम से पुलिस व्यक्ति की पहचान तक पहुंच सकती है। लेकिन जब मृतक के पास इनमें से कुछ भी नहीं मिलता, तो जांच का दायरा सीमित हो जाता है।
पुलिस के मुताबिक, अज्ञात शव मिलने के बाद सबसे पहले मृतक के कपड़ों और सामान की जांच की जाती है। इसके बाद मोबाइल फोन, पहचान पत्र, टिकट, पर्स या अन्य वस्तुओं की तलाश की जाती है। यदि इनमें से कोई चीज मिलती है तो उससे मृतक की पहचान करने की कोशिश की जाती है।
मोबाइल फोन से जल्दी मिल सकती है पहचान
जीआरपी के मुताबिक, आज के समय में मोबाइल फोन अज्ञात शव की पहचान का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।
अगर किसी मृतक के पास मोबाइल फोन मिलता है और वह चालू हालत में है या उसमें संपर्क नंबर और अन्य जानकारी उपलब्ध है, तो पुलिस उसके परिवार या परिचितों तक पहुंचने का प्रयास कर सकती है।
कई मामलों में फोन की संपर्क सूची, कॉल डिटेल या अन्य उपलब्ध जानकारी जांच में मददगार साबित हो सकती है। हालांकि, इन प्रक्रियाओं के लिए निर्धारित कानूनी नियमों और जांच प्रक्रिया का पालन करना होता है।
इसके अलावा मृतक के कपड़ों, सामान और अन्य व्यक्तिगत वस्तुओं से भी पहचान के सुराग तलाशे जाते हैं।
कानूनी प्रक्रिया के बाद भी नहीं हो सकी पहचान
अज्ञात शव मिलने के बाद रेलवे पुलिस द्वारा निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाता है। शव को सुरक्षित रखा जाता है और उसकी पहचान कराने के लिए प्रयास किए जाते हैं।
पुलिस की ओर से शव की तस्वीर और उपलब्ध जानकारी के आधार पर पहचान की कोशिश की जाती है। आसपास के थानों और संबंधित क्षेत्रों को भी सूचना दी जा सकती है, ताकि अगर किसी व्यक्ति की गुमशुदगी दर्ज हो तो उसका मिलान किया जा सके।
इसके बावजूद 28 मामलों में अभी तक मृतकों की पहचान नहीं हो पाई है।
यह स्थिति इस बात को भी सामने लाती है कि रेलवे क्षेत्र में मिलने वाले अज्ञात शवों की पहचान के लिए पुलिस को कई स्तरों पर काम करना पड़ता है।
18 लोगों की ट्रेन से कटकर मौत
28 अज्ञात शवों में से 18 लोगों की मृत्यु ट्रेन से कटकर हुई। रेलवे ट्रैक पर होने वाली दुर्घटनाओं में मृतक की पहचान तत्काल नहीं हो पाना कई बार गंभीर समस्या बन जाता है।
ट्रेन की चपेट में आने से व्यक्ति के पास मौजूद सामान दूर जा सकता है या दस्तावेज सुरक्षित नहीं रह पाते। ऐसे मामलों में पुलिस को घटनास्थल के आसपास काफी सावधानी से तलाशी लेनी पड़ती है।
जीआरपी यह पता लगाने की कोशिश करती है कि मृतक रेलवे ट्रैक तक कैसे पहुंचा और घटना किन परिस्थितियों में हुई। इसके साथ ही आसपास के स्टेशनों और थानों से भी जानकारी जुटाई जाती है।
यदि किसी व्यक्ति की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होती है तो उसका विवरण अज्ञात शव से मिलाने का प्रयास किया जाता है।
10 लोगों की बीमारी से मौत
बाकी 10 अज्ञात लोगों की मौत बीमारी के कारण होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे मामलों में भी मृतक की पहचान न होने पर पुलिस के सामने चुनौती बनी रहती है।
कई बार रेलवे स्टेशन या उसके आसपास रहने वाले ऐसे लोग बीमार पड़ जाते हैं, जिनके साथ कोई परिजन या परिचित नहीं होता। हालत गंभीर होने पर उनकी मौत हो सकती है। यदि उनके पास पहचान पत्र या मोबाइल फोन नहीं हो तो परिवार तक सूचना पहुंचाना मुश्किल हो जाता है।
ऐसे मामलों में पुलिस स्थानीय स्तर पर पूछताछ और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर पहचान की कोशिश करती है।
आईजी रेलवे ने दिए पहचान के प्रयास बढ़ाने के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी रेलवे आरके भारद्वाज ने जीआरपी को अज्ञात शवों की पहचान के लिए और अधिक प्रयास करने के निर्देश दिए हैं।
निर्देश के बाद पुलिस ऐसे मामलों में उपलब्ध सभी संभावित सुरागों को दोबारा खंगालने पर जोर दे रही है। पुराने रिकॉर्ड, गुमशुदगी की रिपोर्ट और मृतकों से जुड़ी उपलब्ध जानकारी को मिलाने की कोशिश की जा सकती है।
इसका उद्देश्य केवल शव की पहचान करना ही नहीं बल्कि मृतक के परिवार तक सूचना पहुंचाना भी है, ताकि परिजनों को अपने परिवार के सदस्य के बारे में जानकारी मिल सके और अंतिम संस्कार जैसी जरूरी प्रक्रिया पूरी हो सके।
परिवार के लिए पहचान क्यों है इतनी जरूरी?
किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसकी पहचान होना सिर्फ पुलिस की कानूनी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इससे एक परिवार को भी अपने सदस्य के बारे में जानकारी मिलती है।
किसी परिवार का सदस्य अगर अचानक लापता हो जाए और लंबे समय तक उसका कोई पता न चले तो परिजन मानसिक परेशानी से गुजरते हैं। अगर वह व्यक्ति किसी दुर्घटना में मौत का शिकार हो चुका हो और शव की पहचान न हो पाए, तो परिवार को लंबे समय तक अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है।
इसलिए अज्ञात शवों की पहचान की प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत
रेलवे में सफर करने वाले यात्रियों के लिए यह घटना एक महत्वपूर्ण संदेश देती है। यात्रा के दौरान अपने साथ कोई न कोई पहचान पत्र रखना चाहिए। मोबाइल फोन में परिवार के किसी सदस्य का नंबर भी आपात स्थिति के लिए उपलब्ध होना उपयोगी हो सकता है।
इसके अलावा परिवार के बुजुर्गों या अकेले यात्रा करने वाले लोगों के पास जरूरी संपर्क जानकारी रखना भी मददगार हो सकता है।
यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से लापता है तो परिवार को संबंधित पुलिस थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करानी चाहिए। इससे भविष्य में किसी अज्ञात शव या अस्पताल में मिले अज्ञात व्यक्ति की जानकारी से मिलान करने में मदद मिल सकती है।
28 शवों की पहचान अब भी चुनौती
बरेली जंक्शन जीआरपी क्षेत्र में इस वर्ष मिले 40 अज्ञात शवों में से 12 की पहचान हो चुकी है, लेकिन 28 मामलों में यह प्रक्रिया अभी बाकी है। इनमें 18 लोगों की मौत ट्रेन से कटकर और 10 की बीमारी से होने की जानकारी सामने आई है।
अब आईजी रेलवे के निर्देश के बाद इन शवों की पहचान के लिए पुलिस द्वारा नए सिरे से प्रयास किए जाने की उम्मीद है। मोबाइल फोन, दस्तावेज, टिकट, गुमशुदगी के रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध सुरागों को आधार बनाकर मृतकों की पहचान तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी।
इन 28 अज्ञात शवों के पीछे आखिर कौन लोग थे, वे कहां से आए थे और उनके परिवार उनसे कब से संपर्क में नहीं थे—इन सवालों का जवाब उनकी पहचान होने के बाद ही मिल सकेगा। फिलहाल बरेली जीआरपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि इन 28 मृतकों की पहचान कर उनके परिवारों तक उनकी मौत की सूचना पहुंचाई जाए।

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