न गर्लफ्रेंड, न रिश्ता… फिर भी घंटों के लिए मिलती है लड़की! इन देशों में चलता है ‘Rent-a-Girlfriend’ का हैरान करने वाला खेल
आज के समय में दुनिया तेजी से बदल रही है। तकनीक ने जहां लोगों के बीच दूरी कम कर दी है, वहीं रिश्तों और सामाजिक व्यवहार के तरीके भी पहले की तुलना में काफी बदल गए हैं। खासकर जनरेशन Z यानी Gen Z के दौर में डेटिंग, रिलेशनशिप और सोशल इंटरैक्शन को लेकर कई नए ट्रेंड सामने आए हैं। डेटिंग ऐप्स से लेकर वर्चुअल रिलेशनशिप तक, युवाओं के बीच रिश्तों को लेकर सोच लगातार बदल रही है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि किसी व्यक्ति को अपनी गर्लफ्रेंड बनाने के बजाय कुछ घंटों या एक दिन के लिए किराए पर भी लिया जा सकता है? सुनने में यह बात भले ही किसी फिल्म की कहानी जैसी लगे, लेकिन एशिया के कुछ देशों में 'Rent-a-Girlfriend' जैसी सेवाएं लंबे समय से चर्चा में रही हैं।
जापान से जुड़े इस तरह के सर्विस मॉडल ने चीन, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड जैसे देशों में भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। इन सेवाओं का उद्देश्य पारंपरिक प्रेम संबंध बनाना नहीं, बल्कि एक निर्धारित समय के लिए सोशल कंपनी, बातचीत और साथ जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
आखिर क्या है 'Rent-a-Girlfriend' का कॉन्सेप्ट?
'Rent-a-Girlfriend' नाम सुनते ही सबसे पहले लोगों के मन में रोमांटिक रिलेशनशिप का ख्याल आता है। हालांकि, इस तरह की सेवाओं का मूल कॉन्सेप्ट उससे काफी अलग बताया जाता है।
इन सेवाओं में ग्राहक एक निश्चित समय के लिए किसी महिला साथी को बुक कर सकता है। यह मुलाकात पहले से तय नियमों और शर्तों के तहत होती है। इसका उद्देश्य अक्सर साथ समय बिताना, बातचीत करना, डिनर पर जाना, शॉपिंग करना, मूवी देखना या किसी सामाजिक कार्यक्रम में साथ जाना हो सकता है।
यानी इसे वास्तविक प्रेम संबंध के बजाय एक पेड सोशल-कंपेनियनशिप सर्विस के तौर पर समझना ज्यादा सही होगा।
जापान में इस तरह की सेवाओं ने खास तौर पर ध्यान आकर्षित किया है। वहां कुछ कंपनियां ऐसी महिलाओं को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़ती हैं, जिन्हें ग्राहकों के साथ निर्धारित समय बिताने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।
ऐप या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से होती है बुकिंग
इस पूरे सिस्टम की सबसे दिलचस्प बात यह है कि कई मामलों में ग्राहक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए साथी का चुनाव कर सकते हैं।
ग्राहक उपलब्ध प्रोफाइल देखता है। प्रोफाइल में व्यक्ति की तस्वीर के अलावा उसकी पसंद, रुचियां, बातचीत का अंदाज, भाषा और अन्य सामान्य जानकारी दी जा सकती है। इसके बाद ग्राहक अपनी जरूरत और पसंद के मुताबिक प्रोफाइल चुन सकता है।
चयन के बाद समय और मिलने की जगह तय की जाती है। निर्धारित समय पर दोनों की मुलाकात होती है और तय गतिविधि के अनुसार समय बिताया जाता है।
हालांकि, ऐसी सेवाओं में कंपनी की शर्तों का पालन करना जरूरी होता है। यह जरूरी नहीं कि बुक की गई महिला वास्तव में ग्राहक की प्रेमिका हो। वह केवल तय समय के लिए कंपनी या सोशल इंटरैक्शन उपलब्ध कराने वाली प्रोफेशनल हो सकती है।
डेटिंग से लेकर फैमिली फंक्शन तक, क्या-क्या होता है?
इस तरह की सर्विस के पीछे सबसे बड़ा आकर्षण यही है कि ग्राहक अपनी जरूरत के मुताबिक अनुभव चुन सकता है।
कुछ लोग केवल बातचीत के लिए साथी बुक करते हैं। कुछ लोग डिनर या कॉफी के लिए साथ चाहते हैं। कुछ मामलों में मूवी देखने, शॉपिंग या शहर घूमने जैसी गतिविधियां भी शामिल हो सकती हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा उस स्थिति की होती है, जब कोई व्यक्ति अपने परिवार या रिश्तेदारों के सामने किसी महिला को अपनी पार्टनर के रूप में पेश करता है।
जापान जैसे देशों में शादी को लेकर परिवार की अपेक्षाएं कई युवाओं के लिए दबाव का कारण बन सकती हैं। ऐसे में कुछ लोग अस्थायी तौर पर किसी महिला साथी को पारिवारिक कार्यक्रम में साथ ले जाने जैसी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं।
हालांकि, हर कंपनी की सेवा और नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए इसे एक सामान्य डेटिंग सर्विस समझना सही नहीं होगा।
कितना होता है किराया?
इस सेवा की कीमत कई बातों पर निर्भर करती है। साथी का अनुभव, बुकिंग की अवधि, गतिविधि और कंपनी के नियमों के आधार पर शुल्क अलग-अलग हो सकता है।
उपलब्ध रिपोर्टों में जापान के कुछ रेंटल डेटिंग मॉडल के लिए प्रति घंटे लगभग 4,000 से 10,000 जापानी येन तक की शुरुआती कीमतों का उल्लेख मिलता रहा है। भारतीय मुद्रा में यह रकम विनिमय दर के अनुसार बदलती रहती है।
अगर कोई व्यक्ति लंबे समय के लिए सेवा लेना चाहता है तो शुल्क कई गुना बढ़ सकता है। इसके अलावा खाना, यात्रा, मूवी टिकट, शॉपिंग या किसी अन्य गतिविधि का खर्च अलग से ग्राहक को उठाना पड़ सकता है।
इसलिए केवल बुकिंग फीस देखकर पूरी लागत का अंदाजा लगाना सही नहीं होगा।
आखिर लोग गर्लफ्रेंड किराए पर क्यों लेते हैं?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कोई व्यक्ति वास्तविक रिलेशनशिप के बजाय कुछ घंटों के लिए पार्टनर क्यों बुक करेगा?
इसके पीछे कई सामाजिक और व्यक्तिगत कारण बताए जाते हैं।
अकेलापन हो सकता है एक बड़ी वजह
आधुनिक शहरों में अकेलापन एक गंभीर सामाजिक मुद्दा बनता जा रहा है। कई लोग परिवार और दोस्तों से दूर रहते हैं। उनके पास बातचीत करने या अपनी भावनाएं साझा करने वाला कोई करीबी व्यक्ति नहीं होता।
ऐसे में कुछ लोग केवल किसी के साथ समय बिताने और बातचीत करने के लिए ऐसी सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं।
ब्रेकअप के बाद भावनात्मक सहारा
किसी रिश्ते के खत्म होने के बाद व्यक्ति को अकेलापन महसूस होना सामान्य है। कुछ लोग दोस्तों या परिवार के बजाय प्रोफेशनल सोशल कंपनी का विकल्प चुन सकते हैं।
हालांकि, ऐसी सेवा को मानसिक स्वास्थ्य उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
शादी का पारिवारिक दबाव
कुछ एशियाई समाजों में युवाओं पर शादी करने का पारिवारिक दबाव आज भी देखा जाता है। खासकर जब किसी युवक की शादी की उम्र निकलती हुई मानी जाती है, तो परिवार और रिश्तेदार लगातार सवाल पूछ सकते हैं।
ऐसी स्थिति में कोई व्यक्ति अस्थायी महिला साथी को परिवार से मिलाने या किसी कार्यक्रम में साथ ले जाने का विकल्प चुन सकता है।
क्या इससे शादी का दबाव कम हो जाता है?
यह इस बात पर निर्भर करता है कि परिवार इस स्थिति को किस तरह देखता है। कुछ मामलों में परिवार को लगता है कि व्यक्ति रिलेशनशिप में है और वे शादी के लिए कम दबाव डाल सकते हैं।
लेकिन अगर परिवार को बाद में पता चलता है कि रिश्ता वास्तविक नहीं था, तो स्थिति उलटी भी हो सकती है।
यही कारण है कि ऐसी सेवाओं को केवल मनोरंजन या डेटिंग के नजरिए से देखना पर्याप्त नहीं है। इसके पीछे सामाजिक और भावनात्मक पहलू भी जुड़े हुए हैं।
क्या यह वास्तविक रिलेशनशिप का विकल्प है?
यह सवाल सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। रेंटल पार्टनर सर्विस और वास्तविक प्रेम संबंध में जमीन-आसमान का अंतर होता है।
वास्तविक रिश्ते में भावनात्मक जुड़ाव, विश्वास, जिम्मेदारी और लंबे समय की प्रतिबद्धता होती है। वहीं रेंटल सर्विस में मुलाकात की अवधि पहले से तय होती है और संबंध व्यावसायिक शर्तों पर आधारित होता है।
इसलिए इसे प्रेम या शादी का विकल्प कहना सही नहीं होगा।
क्या इस सिस्टम में जोखिम भी हैं?
किसी भी ऑनलाइन सेवा की तरह यहां भी सावधानी जरूरी है। ग्राहक को कंपनी की विश्वसनीयता, नियम और सुरक्षा नीतियों की जानकारी लेनी चाहिए।
व्यक्तिगत जानकारी साझा करने, निजी स्थान पर मिलने या कंपनी के नियमों के बाहर किसी तरह का व्यवहार करने से जोखिम बढ़ सकता है।
इसी तरह, सर्विस लेने वाले व्यक्ति को यह समझना जरूरी है कि सामने वाला व्यक्ति भी एक प्रोफेशनल भूमिका में है। उसकी व्यक्तिगत सीमाओं और सहमति का सम्मान करना जरूरी है।
बदलते समाज की एक तस्वीर
'Rent-a-Girlfriend' का कॉन्सेप्ट भले ही पहली नजर में अजीब लगे, लेकिन यह आधुनिक समाज में बदलती सामाजिक जरूरतों की एक तस्वीर भी दिखाता है।
जहां एक तरफ इंटरनेट ने लोगों को पहले से कहीं ज्यादा जोड़ दिया है, वहीं दूसरी तरफ कई लोग वास्तविक जीवन में अकेलेपन का सामना कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर हजारों दोस्तों और फॉलोअर्स के बावजूद किसी करीबी व्यक्ति की कमी महसूस होना आज असामान्य नहीं है।
ऐसे में कंपनियां लोगों की इस जरूरत को एक व्यावसायिक सेवा में बदलने की कोशिश कर रही हैं।
क्या भारत में भी ऐसा ट्रेंड आ सकता है?
भारत में डेटिंग ऐप्स और ऑनलाइन सोशल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है, लेकिन 'Rent-a-Girlfriend' जैसा कॉन्सेप्ट सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से काफी अलग और संवेदनशील विषय हो सकता है।
भारत में परिवार, शादी और रिश्तों को लेकर सामाजिक सोच कई मामलों में पारंपरिक है। इसलिए इस तरह की सेवा को स्वीकार्यता मिलने की स्थिति जापान या दूसरे एशियाई देशों से अलग हो सकती है।
फिर भी बदलती युवा संस्कृति, शहरी अकेलापन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार के कारण आने वाले समय में इस तरह की सोशल-कंपेनियनशिप सेवाओं पर चर्चा बढ़ सकती है
'Rent-a-Girlfriend' का कॉन्सेप्ट सुनने में जितना अजीब लगता है, उसके पीछे की कहानी उतनी ही दिलचस्प है। यह केवल किसी महिला को कुछ घंटों के लिए बुक करने का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे अकेलापन, सामाजिक दबाव, भावनात्मक जरूरतें और बदलती जीवनशैली जैसे कई पहलू जुड़े हुए हैं।
जापान में सामने आया यह मॉडल चीन, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड जैसे देशों में भी अलग-अलग रूपों में चर्चा में रहा है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ऐसी सेवाओं के नियम, उपलब्धता और स्वरूप हर देश तथा कंपनी में अलग हो सकते हैं।
आखिरकार सवाल यह नहीं है कि कोई व्यक्ति गर्लफ्रेंड किराए पर ले सकता है या नहीं, बल्कि यह है कि आधुनिक समाज में लोग भावनात्मक जुड़ाव और साथ पाने के लिए किस-किस तरह के नए रास्ते तलाश रहे हैं। यही वजह है कि 'Rent-a-Girlfriend' जैसी सेवाएं आज भी लोगों के बीच जिज्ञासा और बहस का विषय बनी हुई हैं।

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