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नेपाल में फिर कुदरत का कहर! अचानक नदी का रौद्र रूप देख भागे लोग, 35 से ज्यादा घर तबाह… आखिर कहां से आया इतना पानी?



नेपाल अभी अगस्त में आई विनाशकारी बाढ़ की त्रासदी से पूरी तरह उबर भी नहीं पाया था कि रविवार की सुबह एक बार फिर कुदरत ने अपना रौद्र रूप दिखा दिया। देश के गोरखा जिले में बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक आई बाढ़ ने कुछ ही समय में भारी तबाही मचा दी। नदी का पानी और मलबा इतनी तेजी से नीचे की ओर आया कि नदी किनारे रहने वाले लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कई परिवार जान बचाने के लिए अपने घरों से निकलकर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर भागे।

स्थानीय इलाकों से सामने आई तस्वीरों और वीडियो में नदी का तेज बहाव, बहते मलबे और क्षतिग्रस्त पुलों के दृश्य दिखाई दे रहे हैं। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक कई दर्जन मकान प्रभावित हुए हैं, जबकि कई पुल भी बह गए। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। अलग-अलग शुरुआती रिपोर्टों में लापता लोगों की संख्या अलग बताई गई है; कुछ स्थानीय रिपोर्टों में चार-पांच लोगों के लापता होने की बात कही गई, जबकि बाद की रिपोर्टों में संख्या बढ़ने की जानकारी सामने आई।

सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि बाढ़ का पानी अचानक इतनी तेजी से बढ़ा कि लोगों को पहले से तैयारी करने का पर्याप्त समय नहीं मिला। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी है।

सुबह करीब चार बजे सुनाई देने लगी तेज आवाज

रिपोर्टों के अनुसार रविवार तड़के करीब चार बजे उत्तरी गोरखा के चुमनुब्री इलाके में लोगों ने नदी और आसपास की धाराओं से तेज आवाजें सुनीं। इसके बाद बूढ़ी गंडकी नदी का बहाव अचानक बढ़ने लगा। कुछ ही समय में पानी आसपास के इलाकों तक पहुंच गया।

स्थानीय लोगों ने बताया कि नदी के पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा भी नीचे की ओर आया। इससे नदी किनारे बने मकानों और बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान हुआ। कई लोग अंधेरे में ही अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए। काठमांडू पोस्ट के मुताबिक जगत इलाके में पांच से सात मकानों के बह जाने की शुरुआती सूचना सामने आई थी।

प्रशासन ने स्थिति को गंभीर देखते हुए नदी किनारे रहने वाले लोगों को लाउडस्पीकर और अन्य माध्यमों से चेतावनी देना शुरू किया। बाद में डाउनस्ट्रीम इलाकों के लिए भी अलर्ट जारी किया गया।

तीन गांवों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर

बाढ़ से उत्तरी गोरखा के कई इलाकों में भारी नुकसान की खबर है। सल्लेरी, पायू और जगत जैसे इलाकों में नदी का पानी और मलबा पहुंचने के बाद कई घरों को नुकसान हुआ।

काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अलग-अलग बस्तियों में दर्जनों मकान या तो बह गए या बाढ़ के पानी की चपेट में आ गए। कुछ स्थानों पर मकान अभी भी खतरे में बताए गए। एक आपदा स्थिति रिपोर्ट में शुरुआती आंकड़ों के आधार पर कम से कम 35 मकानों के बहने तथा कई अन्य मकानों के खतरे में होने की जानकारी दी गई है।

इसका असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं रहा। सड़क, पुल, बिजली और संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई। पहाड़ी इलाकों में पहले से ही सीमित कनेक्टिविटी के कारण राहत और बचाव टीमों के लिए प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

कई पुल बाढ़ में बह गए

बूढ़ी गंडकी नदी के उफान ने कई महत्वपूर्ण पुलों को भी नुकसान पहुंचाया। काठमांडू पोस्ट के मुताबिक दो पैदल झूला पुल और एक स्टील पुल बाढ़ के तेज बहाव में बह गए। इसके अलावा दूसरे पुलों के क्षतिग्रस्त होने की भी जानकारी सामने आई है।

पुलों के बहने से स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। जिन इलाकों में पुल ही आने-जाने का मुख्य साधन थे, वहां लोगों के लिए बाहर निकलना और राहत सामग्री पहुंचाना मुश्किल हो गया है।

आपदा की स्थिति रिपोर्ट में कम से कम छह पुलों के क्षतिग्रस्त या बह जाने की शुरुआती जानकारी दी गई है। हालांकि नुकसान का अंतिम आंकड़ा राहत और सर्वेक्षण पूरा होने के बाद ही सामने आएगा।

हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को भी बड़ा नुकसान

बाढ़ की चपेट में हाइड्रोपावर परियोजना का निर्माण क्षेत्र भी आया है। रिपोर्टों के अनुसार परियोजना के निर्माण कैंप और कुछ उपकरण पानी और मलबे में बह गए।

नेपाल में पहाड़ी नदियों के किनारे कई जलविद्युत परियोजनाएं संचालित या निर्माणाधीन हैं। ऐसे में अचानक आने वाली बाढ़ से इन परियोजनाओं को नुकसान होने पर स्थानीय बुनियादी ढांचे के साथ-साथ बिजली उत्पादन से जुड़ी योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है।

ताजा रिपोर्टों के अनुसार 341 मेगावाट की बूढ़ी गंडकी जलविद्युत परियोजना के निर्माण से जुड़े क्षेत्र को भी नुकसान पहुंचा है।

आखिर अचानक कैसे आई इतनी भयानक बाढ़?

इस पूरी घटना का सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बूढ़ी गंडकी नदी में पानी अचानक इतनी तेजी से कैसे बढ़ गया?

शुरुआती जांच में भूस्खलन को संभावित वजह माना जा रहा है। नेपाल के जल एवं मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारियों ने सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर चुमचेत इलाके में बड़े भूस्खलन की संभावना जताई है। आशंका है कि भूस्खलन से नदी की किसी सहायक धारा का रास्ता अस्थायी रूप से बंद हो गया होगा। इसके बाद पानी जमा होता गया और जब प्राकृतिक अवरोध टूटा तो जमा पानी अचानक तेज बहाव के साथ नीचे की ओर चला गया।

स्थानीय लोगों ने भी पानी के अचानक रुकने और फिर तेज आवाज के साथ बहने की बात कही है। हालांकि, अधिकारियों ने अभी इसे अंतिम कारण के रूप में घोषित नहीं किया है।

यानी फिलहाल सबसे मजबूत आशंका यह है कि यह सामान्य बारिश से आई बाढ़ नहीं, बल्कि भूस्खलन से बने अस्थायी अवरोध के टूटने के बाद पैदा हुई फ्लैश फ्लड हो सकती है।

नदी का पानी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर

बाढ़ का खतरा सिर्फ उस इलाके तक सीमित नहीं है जहां से पानी आया। अधिकारियों ने बूढ़ी गंडकी और उससे जुड़ी नदी प्रणालियों के निचले क्षेत्रों को भी सतर्क रहने को कहा है।

नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के अनुसार अरुगाट क्षेत्र में नदी का जलस्तर खतरे के स्तर से ऊपर पहुंच गया था। इसके बाद गोरखा के साथ-साथ धादिंग, तनाहुन, चितवन और नवलपरासी के पूर्वी तथा पश्चिमी हिस्सों तक अलर्ट जारी किया गया।

प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से पानी के करीब नहीं जाने और ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की है।

49 लोगों को बचाया गया

बाढ़ के बाद नेपाल सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को राहत और बचाव अभियान में लगाया गया। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक करीब 49 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जिनमें एक विदेशी नागरिक भी शामिल था। बचाव अभियान में हेलीकॉप्टर और जमीनी टीमों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

पहाड़ी इलाकों में कई जगह सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण हेलीकॉप्टर से बचाव अभियान चलाना जरूरी हो गया है। अधिकारियों की कोशिश है कि नदी के आसपास फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित जगह पहुंचाया जाए।

लापता लोगों की तलाश जारी

बाढ़ के बाद कई लोगों के लापता होने की खबर सामने आई है। शुरुआती स्थानीय रिपोर्टों में चार लोगों के संपर्क से बाहर होने की जानकारी थी। बाद की रिपोर्टों में यह संख्या पांच बताई गई। वहीं कुछ बाद के समाचार अपडेट में इससे अधिक लोगों के लापता होने का दावा भी किया गया है। इसलिए अंतिम संख्या अभी स्पष्ट नहीं मानी जा सकती।

प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां प्रभावित इलाकों में तलाश अभियान चला रही हैं। मलबे, टूटे रास्तों और तेज नदी प्रवाह के कारण अभियान बेहद कठिन है।

फिलहाल राहत और बचाव एजेंसियों की प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित निकालना और संभावित दूसरी बाढ़ की स्थिति से बचाना है।

अगस्त की बाढ़ की त्रासदी अभी भी ताजा

इस नई आपदा ने नेपाल के उन परिवारों की चिंता और बढ़ा दी है जो कुछ ही सप्ताह पहले विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित हुए थे। 26 अगस्त 2026 को भोटेकोशी नदी क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने नेपाल में भारी तबाही मचाई थी।

नेपाल सरकार के हालिया आंकड़ों के अनुसार उस आपदा में कम से कम 1,455 लोगों की मौत हुई और 5,285 लोग लापता बताए गए। हजारों घर और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे क्षतिग्रस्त हुए। सरकार ने हाल ही में सक्रिय खोज एवं बचाव अभियान को समाप्त कर पुनर्वास और पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया है।

ऐसे समय में गोरखा में आई नई बाढ़ ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।

अभी खत्म नहीं हुआ खतरा

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अधिकारियों के अनुसार नदी का बहाव अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है। जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी रहने के कारण निचले इलाकों में खतरा बना हुआ है।

यही वजह है कि प्रशासन लोगों को नदी किनारे वापस नहीं जाने और सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर बने रहने की सलाह दे रहा है।

इस पूरी घटना ने एक बार फिर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में अचानक आने वाली फ्लैश फ्लड के खतरे को सामने ला दिया है। भूस्खलन, अस्थायी नदी अवरोध और उसके बाद अचानक पानी निकलने की स्थिति कुछ ही मिनटों में बड़े इलाके को प्रभावित कर सकती है।

फिलहाल गोरखा में राहत और बचाव अभियान जारी है। नुकसान का वास्तविक आंकड़ा सामने आने में अभी समय लगेगा। प्रशासन लापता लोगों की तलाश के साथ-साथ क्षतिग्रस्त पुलों, मकानों और जलविद्युत परियोजनाओं का आकलन कर रहा है।

लेकिन इस त्रासदी का सबसे बड़ा सबक यही है कि पहाड़ी नदियों के किनारे रहने वाले इलाकों में अचानक आने वाली बाढ़ के लिए शुरुआती चेतावनी और समय पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचना कितनी बड़ी भूमिका निभाता है। इस बार भी कई लोगों को चेतावनी मिलने के बाद ऊंचे स्थानों पर जाने का मौका मिला, जिससे बड़े पैमाने पर जनहानि को टालने में मदद मिली।

नेपाल में रविवार की यह बाढ़ भले ही अगस्त की त्रासदी से अलग घटना हो, लेकिन उसने एक बार फिर दिखा दिया है कि पहाड़ों में नदी का शांत दिखने वाला पानी कितनी तेजी से विनाशकारी रूप ले सकता है।

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