31 साल बाद अचानक थाने पहुंचा शख्स, बोला- मैं राजू हूं… मां ने 3 निशान देखकर पहचान लिया, अब DNA टेस्ट खोलेगा सबसे बड़ा राज!
गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने पुलिसकर्मियों से लेकर परिवार तक सभी को भावुक कर दिया। करीब 31 साल पहले सात साल की उम्र में लापता हुआ एक बच्चा अचानक एक दिन पुलिस स्टेशन पहुंच गया। उसके शरीर पर फटे कपड़े थे, पैरों में जूते नहीं थे और वह अपने घर का पता तक ठीक से नहीं बता पा रहा था। उसने पुलिस से सिर्फ इतनी गुहार लगाई कि वह अपने परिवार तक पहुंचना चाहता है।
खुद को राजू बताने वाले इस शख्स ने पुलिस को बताया कि बचपन में उसका अपहरण कर लिया गया था। इसके बाद उसे राजस्थान ले जाया गया, जहां कथित तौर पर उससे मजदूरी कराई गई और उसे बंधक बनाकर रखा गया। वर्षों तक वह अपने परिवार से दूर रहा। वक्त बीतता गया और सात साल का बच्चा कब करीब 38 साल का हो गया, इसका उसे खुद भी अंदाजा नहीं रहा।
लेकिन कहानी का सबसे भावुक हिस्सा तब आया, जब पुलिस की मदद और मीडिया में खबर सामने आने के बाद राजू के परिवार को उसके जिंदा होने की जानकारी मिली। परिवार जब थाने पहुंचा तो मां ने बेटे को देखते ही गले लगा लिया। हालांकि परिवार अभी पूरी तरह आश्वस्त होने के लिए डीएनए जांच कराने की बात कह रहा है।
31 साल पहले अचानक गायब हो गया था राजू
बताया जा रहा है कि राजू वर्ष 1993 में साहिबाबाद इलाके से लापता हुआ था। उस समय उसकी उम्र महज सात साल थी। परिवार के लिए यह घटना किसी सदमे से कम नहीं थी। सरकारी रिकॉर्ड में भी उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी।
राजू के मुताबिक, जिस दिन वह गायब हुआ था, वह अपनी बहन के साथ स्कूल से घर लौट रहा था। इसी दौरान कथित तौर पर उसका अपहरण कर लिया गया। इसके बाद उसे राजस्थान ले जाया गया।
सात साल की उम्र में परिवार से बिछड़ने के बाद राजू की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। उसका दावा है कि राजस्थान में उसे कथित तौर पर मारपीट का सामना करना पड़ा और उससे दिनभर काम कराया जाता था।
एक रोटी और दिनभर काम का दावा
राजू ने पुलिस को अपनी आपबीती बताते हुए दावा किया कि जिस जगह उसे रखा गया था, वहां उसे आजादी नहीं थी। वह दिनभर काम करता था और कथित तौर पर शाम को उसे सिर्फ एक रोटी खाने के लिए दी जाती थी।
उसके मुताबिक, रात में उसे बांध दिया जाता था ताकि वह भाग न सके।
राजू की कहानी सुनकर पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए। इतने लंबे समय तक एक बच्चा अपने परिवार से दूर कैसे रहा और किन परिस्थितियों में उसकी जिंदगी गुजरी, यह अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।
हालांकि राजू द्वारा बताए गए घटनाक्रम और कथित अपहरण से जुड़े सभी पहलुओं की पुलिस जांच कर रही है। इसलिए उसके दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।
छोटी बच्ची ने बताया हनुमान जी की भक्ति का रास्ता
राजू ने पुलिस को बताया कि जिस परिवार के यहां उसे रखा गया था, वहां की एक छोटी बच्ची उसे हनुमान जी की उपासना करने के लिए प्रेरित करती थी। मुश्किल हालात में वह बच्ची उसे हिम्मत देती थी।
राजू के मुताबिक, लंबे समय तक बंधक जैसी जिंदगी जीने के बाद उसे एक दिन भागने का मौका मिला। उसने मौका देखकर वहां से निकलने की कोशिश की और एक ट्रक पर सवार हो गया।
कथित तौर पर इसी तरह वह राजस्थान से दिल्ली पहुंचा।
दिल्ली आने के बाद भी नहीं मिला घर का रास्ता
राजू के लिए मुश्किल सिर्फ आजाद होना नहीं था। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि वह अपने घर का पता भूल चुका था।
सात साल की उम्र में जिस इलाके और घर से वह गायब हुआ था, वहां से 31 साल का लंबा वक्त गुजर चुका था। इस दौरान शहर बदल चुके थे, इलाके बदल चुके थे और उसकी यादों में मौजूद बचपन की तस्वीरें भी धुंधली हो चुकी थीं।
राजू का कहना है कि दिल्ली पहुंचने के बाद उसने कई पुलिस थानों में जाकर मदद मांगने की कोशिश की। लेकिन उसे अपने परिवार का सही पता याद नहीं था। इसलिए वह पुलिस को भी ऐसी जानकारी नहीं दे पा रहा था, जिसके आधार पर उसके परिवार तक आसानी से पहुंचा जा सके।
22 नवंबर को पहुंचा खोड़ा थाना
कई कोशिशों के बाद राजू खोड़ा थाना पहुंचा। यहां उसने पुलिस अधिकारियों को अपनी पूरी कहानी बताई।
पुलिस ने उसकी स्थिति को देखते हुए उसे अपने संरक्षण में रखा। बताया गया कि उसके पास पहनने के लिए उचित जूते तक नहीं थे। पुलिस ने उसके लिए जूते उपलब्ध कराए और खाने-पीने की व्यवस्था भी की।
इसके बाद पुलिस ने उसके परिवार की तलाश शुरू की।
जब कोई व्यक्ति अपने परिवार का पता नहीं बता पा रहा हो, तब उसके रिश्तेदारों तक पहुंचना पुलिस के लिए आसान नहीं होता। ऐसे में पुलिस ने सोशल मीडिया और मीडिया का सहारा लिया।
सोशल मीडिया की खबर ने बदल दी जिंदगी
राजू की तस्वीर और उसकी कहानी सामने आने के बाद यह खबर उसके संभावित परिवार तक पहुंची। इसी दौरान उसके चाचा को जानकारी मिली कि राजू नाम का एक व्यक्ति वर्षों पहले लापता हुआ था और अब पुलिस के पास है।
चाचा ने जब यह जानकारी परिवार के अन्य सदस्यों को दी तो घर में जैसे हलचल मच गई।
परिवार के लोग तुरंत राजू से मिलने पहुंचे। इसके बाद राजू की पहचान को लेकर परिवार के सामने बचपन की यादें और पुराने निशान सबसे महत्वपूर्ण बन गए।
माथे का निशान और सीने का तिल बना पहचान का आधार
राजू की मां ने उसे देखने के बाद उसके शरीर पर कुछ ऐसे निशान देखे, जिन्हें वह अपने बेटे से जोड़ रही हैं।
परिवार के मुताबिक, राजू के माथे पर चोट का निशान था। इसके अलावा उसकी छाती पर एक तिल भी मौजूद था। मां ने इन निशानों को देखकर उसे अपना बेटा माना।
एक मां के लिए 31 साल बाद अपने बेटे को सामने देखना कितना भावुक पल रहा होगा, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बेटे को देखते ही उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े और उन्होंने उसे गले लगा लिया।
लेकिन परिवार ने पूरी तरह वैज्ञानिक पुष्टि के लिए डीएनए टेस्ट कराने का फैसला किया है।
मां बोलीं- 31 साल कैसे बीते, सिर्फ मैं जानती हूं
राजू की मां ने बताया कि पिछले 31 साल उनके लिए बेहद मुश्किल रहे। बेटे के अचानक गायब होने के बाद उन्होंने न जाने कितनी उम्मीदों के साथ उसकी तलाश की होगी।
उन्होंने कहा कि इतने वर्षों का दर्द वही समझ सकती हैं। अब जब बेटा वापस सामने है तो परिवार में खुशी का माहौल है।
राजू की बहन के लिए भी यह मिलन बेहद भावुक है। परिवार के मुताबिक, पिछले कई वर्षों से रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बांधने वाला कोई नहीं था। अब अचानक भाई के वापस आने से पुरानी यादें फिर से ताजा हो गई हैं।
पहचान की अंतिम पुष्टि डीएनए टेस्ट से होगी
फिलहाल परिवार राजू को अपना बेटा मान रहा है, लेकिन मां की ओर से डीएनए टेस्ट कराने की बात कही गई है। इसकी वजह यह है कि राजू के व्यवहार को लेकर परिवार को कुछ संदेह भी हैं और वह कथित तौर पर बार-बार वहां से जाने की कोशिश कर रहा है।
ऐसे में परिवार चाहता है कि भावनात्मक पहचान के साथ-साथ वैज्ञानिक तरीके से भी यह सुनिश्चित किया जाए कि 31 साल पहले लापता हुआ बच्चा और अब वापस लौटा व्यक्ति वास्तव में एक ही है।
डीएनए जांच के बाद इस मामले में तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
पुलिस जांच में सामने आएंगे कई सवाल
राजू के परिवार तक पहुंचने के बाद अब पुलिस के सामने इस पूरे मामले की कई कड़ियां जोड़ने की चुनौती है। यदि उसके अपहरण का दावा सही पाया जाता है तो यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि सात साल के बच्चे को कौन लोग राजस्थान लेकर गए, उसे इतने वर्षों तक कहां रखा गया और उससे किस तरह काम कराया गया।
इसके अलावा यह भी जांच का विषय होगा कि राजू इतने वर्षों तक किन परिस्थितियों में रहा और उसने अब अपने घर तक पहुंचने के लिए किन रास्तों का सहारा लिया।
फिलहाल 31 साल बाद परिवार से मिलना इस कहानी का सबसे भावुक पहलू है। एक तरफ मां को अपना खोया बेटा वापस मिलने की उम्मीद जगी है, तो दूसरी तरफ डीएनए जांच इस रिश्ते की वैज्ञानिक पुष्टि करेगी।
सात साल की उम्र में घर से गायब हुआ राजू अगर वास्तव में वही बच्चा है, तो 31 साल बाद उसकी घर वापसी सिर्फ एक परिवार के लिए मिलन नहीं, बल्कि उस लंबे इंतजार का अंत होगी, जिसमें एक मां हर रक्षाबंधन और हर गुजरते साल अपने बेटे के लौटने की उम्मीद करती रही।

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