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उत्तर प्रदेश सहित 5 राज्यों में चुनाव की डेट हुई फाइनल? कब होगा तरीखों का एलान, EVM पर आया बड़ा अपडेट



देश की राजनीति में इस समय SIR यानी Special Intensive Revision को लेकर घमासान मचा हुआ है। विपक्षी दल लगातार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने इन राजनीतिक विवादों के बीच अपना ध्यान अगले साल होने वाले बड़े विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर केंद्रित कर दिया है।

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं और अब इन चुनावों को लेकर आयोग की तैयारियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारी राज्यों का दौरा कर चुनावी तैयारियों का जमीनी जायजा ले रहे हैं। 13 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम उत्तराखंड का दौरा कर रही थी, जबकि पंजाब और मणिपुर के दौरे भी प्रस्तावित थे।

यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में अब सबसे बड़ा सवाल यह उठने लगा है कि 2027 के विधानसभा चुनावों का ऐलान आखिर कब होगा?

पांच राज्यों में चुनाव की तैयारी तेज

2027 में जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, उनमें उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा राज्य है। इसके अलावा पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर भी चुनावी मैदान में उतरेंगे।

चुनाव आयोग के सामने इन राज्यों में शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए बड़ी प्रशासनिक तैयारी करनी होगी। इनमें मतदाता सूची, मतदान केंद्र, सुरक्षा व्यवस्था, ईवीएम-वीवीपैट, चुनाव कर्मचारियों की तैनाती और लॉजिस्टिक व्यवस्था जैसी कई महत्वपूर्ण चीजें शामिल हैं।

आयोग के वरिष्ठ अधिकारी राज्यों का दौरा करके इन तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, अधिकारियों के स्तर पर समीक्षा का सिलसिला पहले ही शुरू हो चुका है।

इसका सीधा संकेत यह है कि चुनाव आयोग अब चुनावी प्रक्रिया के अगले चरणों की तरफ बढ़ रहा है।

सबसे बड़ा सवाल- कब होगा चुनाव का ऐलान?

चुनाव आयोग ने अभी 2027 के इन पांच राज्यों के लिए आधिकारिक चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं किया है। इसलिए फिलहाल किसी निश्चित तारीख का दावा करना जल्दबाजी होगी।

हालांकि, मौजूदा तैयारियों और आयोग के प्रस्तावित दौरों को देखते हुए राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि दिसंबर के मध्य के बाद चुनाव कार्यक्रम कभी भी सामने आ सकता है।

कुछ रिपोर्टों में यह संकेत दिया गया है कि आयोग का राज्यों का व्यापक दौरा 15 दिसंबर तक पूरा हो सकता है और उसके बाद चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की संभावना बन सकती है।

लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि चुनाव की तारीखों का अंतिम फैसला केवल निर्वाचन आयोग ही करेगा।

क्यों महत्वपूर्ण है 15 दिसंबर?

दरअसल, चुनाव आयोग आम तौर पर विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले संबंधित राज्यों की चुनावी तैयारियों का व्यापक जायजा लेता है। वरिष्ठ अधिकारी पहले प्रशासनिक और तकनीकी तैयारियों को देखते हैं। इसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के स्तर पर भी राज्यों की समीक्षा की जाती है।

2027 के चुनावों को लेकर भी इसी तरह की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

रिपोर्टों के अनुसार अधिकारियों की शुरुआती समीक्षा नवंबर के मध्य तक पूरी करने की योजना है। उत्तर प्रदेश में अधिकारियों की टीम का दौरा नवंबर के शुरुआती या दूसरे सप्ताह में होने की संभावना बताई गई है। इसके बाद आयोग का व्यापक दौरा दिसंबर में हो सकता है।

ऐसे में अगर यह प्रक्रिया तय कार्यक्रम के मुताबिक आगे बढ़ती है तो दिसंबर के मध्य के बाद चुनावी बिगुल बजने की संभावना पर नजर बनी रहेगी।

पांचों राज्यों में अलग-अलग समय पर खत्म हो रहा विधानसभा का कार्यकाल

इन चुनावों की टाइमिंग समझने के लिए विधानसभा के कार्यकाल की तारीखें भी महत्वपूर्ण हैं।

निर्वाचन आयोग के दस्तावेज के अनुसार, मणिपुर विधानसभा का कार्यकाल 13 मार्च 2027, गोवा का 14 मार्च, पंजाब का 16 मार्च और उत्तराखंड का 28 मार्च 2027 को समाप्त होना है। वहीं उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त होगा।

इसका मतलब है कि इन सभी राज्यों में संवैधानिक समयसीमा के भीतर नई विधानसभा का गठन करना होगा।

उत्तर प्रदेश का चुनाव बाकी चार राज्यों की तुलना में अलग समयसीमा में आता है, लेकिन पांचों राज्यों को लेकर चुनाव आयोग अभी से तैयारी कर रहा है।

EVM और VVPAT की जांच भी शुरू

चुनावी तैयारियों का एक बड़ा हिस्सा EVM और VVPAT मशीनों की जांच है। 2027 के चुनावों को देखते हुए कुछ राज्यों में फर्स्ट लेवल चेक यानी FLC की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी सामने आई है।

FLC का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि चुनाव में इस्तेमाल होने वाली मशीनें तकनीकी रूप से सही स्थिति में हैं।

इस प्रक्रिया में जिला निर्वाचन अधिकारी की निगरानी महत्वपूर्ण होती है। मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी प्रक्रिया की जानकारी दी जाती है और उनकी मौजूदगी में जांच की जाती है।

रिपोर्टों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश और गोवा में EVM तथा VVPAT की फर्स्ट लेवल चेकिंग शुरू होने की जानकारी पहले ही सामने आ चुकी है।

राजनीतिक दलों की मौजूदगी में होती है मशीनों की जांच

EVM की जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी का प्रावधान महत्वपूर्ण है।

मशीनों को रखने वाले वेयरहाउस को खोलने से पहले संबंधित राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को जानकारी दी जाती है। मशीनों की तकनीकी जांच अधिकृत इंजीनियरों द्वारा की जाती है।

EVM व्यवस्था में मुख्य रूप से कंट्रोल यूनिट, बैलेट यूनिट और VVPAT शामिल होते हैं। जांच के दौरान इन उपकरणों की कार्यक्षमता देखी जाती है।

मशीनों की सफाई, तकनीकी जांच और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद मॉक पोल कराया जाता है। इसका उद्देश्य यह देखना होता है कि मशीन मतदान प्रक्रिया के दौरान अपेक्षित तरीके से काम कर रही है या नहीं।

जो मशीनें जांच में सही पाई जाती हैं, उन्हें आगे की चुनावी प्रक्रिया के लिए सुरक्षित तरीके से रखा जाता है।

स्ट्रॉन्ग रूम और सुरक्षा पर भी रहेगा जोर

चुनाव के दौरान EVM की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक रहती है। इसलिए मशीनों को सुरक्षित स्थानों पर रखा जाता है और स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है।

सीसीटीवी निगरानी, सुरक्षा बलों की तैनाती और अधिकृत व्यक्तियों की आवाजाही जैसी व्यवस्थाएं चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं।

इस पूरी प्रक्रिया में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी और रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना होता है।

2022 में 8 जनवरी को हुआ था ऐलान

पांच राज्यों के पिछले विधानसभा चुनावों की बात करें तो 2022 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा जनवरी में की गई थी। निर्वाचन आयोग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2022 में गोवा और पंजाब में 14 फरवरी को मतदान हुआ था, जबकि मणिपुर में फरवरी और मार्च में दो चरणों में मतदान कराया गया था।

इस बार चुनावी कार्यक्रम कब घोषित होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन तैयारियों की रफ्तार देखकर इतना जरूर कहा जा सकता है कि चुनाव आयोग ने प्रक्रिया को लेकर काम तेज कर दिया है।

SIR विवाद के बीच चुनावी तैयारी क्यों अहम?

SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद के बीच 2027 के चुनावों की तैयारी का यह चरण राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।

विपक्षी दल मतदाता सूची की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को अद्यतन और अधिक सटीक बनाने की प्रक्रिया चुनावी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

13 अक्टूबर 2026 की Reuters रिपोर्ट के अनुसार भी SIR को लेकर राजनीतिक विरोध और आगामी 2027 विधानसभा चुनावों के संदर्भ में मतदाता सूची को लेकर चिंताएं चर्चा में हैं।

ऐसे माहौल में चुनाव आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी कि मतदाता सूची से लेकर EVM और मतदान केंद्रों तक पूरी प्रक्रिया को लेकर भरोसा बनाए रखा जाए।

यूपी पर सबसे ज्यादा नजर

इन पांच राज्यों में उत्तर प्रदेश का चुनाव सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 403 विधानसभा सीटों वाला उत्तर प्रदेश देश की राजनीति में बेहद अहम भूमिका रखता है।

राज्य में चुनावी तैयारियों को लेकर आयोग का विस्तृत दौरा नवंबर में होने की संभावना बताई गई है।

यूपी के अलावा पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भी राजनीतिक दल अपनी रणनीति बनाने में जुट चुके हैं।

अभी तारीख घोषित नहीं, लेकिन तैयारी ने बढ़ाया सस्पेंस

फिलहाल चुनाव आयोग ने 2027 के पांच राज्यों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं किया है। इसलिए 15 दिसंबर के बाद ही चुनाव होंगे या उसी समय घोषणा होगी, इसे अभी अंतिम रूप से नहीं कहा जा सकता।

लेकिन अधिकारियों के दौरों, EVM-VVPAT की जांच और चुनावी व्यवस्थाओं की समीक्षा से यह साफ है कि चुनावी मशीनरी ने तैयारियां तेज कर दी हैं।

अब नजर इस बात पर है कि आने वाले हफ्तों में आयोग राज्यों की तैयारियों को किस तरह पूरा करता है और मुख्य चुनाव आयुक्त तथा चुनाव आयुक्तों के स्तर पर समीक्षा कब होती है।

यानी चुनाव की तारीख अभी सामने नहीं आई है, लेकिन तैयारियों ने सस्पेंस जरूर बढ़ा दिया है। दिसंबर का दूसरा पखवाड़ा आते-आते तस्वीर काफी साफ होने की उम्मीद है और इसके बाद पांचों राज्यों में चुनावी बिगुल कभी भी बज सकता है।

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