पति-पत्नी के रिश्ते से जुड़ी एक ऐसी सलाह, जिसे जानकर आप भी सोच में पड़ जाएंगे! प्रसव से पहले इस मसाज पर डॉक्टरों की नजर
गर्भावस्था के दौरान हर परिवार की सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि मां और बच्चा दोनों सुरक्षित रहें और प्रसव के समय किसी तरह की गंभीर परेशानी न हो। जैसे-जैसे डिलीवरी की तारीख नजदीक आती है, परिवार में तरह-तरह की सलाह भी मिलने लगती है। कोई खान-पान को लेकर सुझाव देता है तो कोई चलने-फिरने, एक्सरसाइज और आराम को लेकर सलाह देता है। इसी बीच प्रसव से पहले की तैयारी से जुड़ी एक ऐसी तकनीक भी चर्चा में रहती है, जिसके बारे में बहुत से लोगों को जानकारी नहीं होती—पेरिनियल मसाज।
नाम सुनकर कई लोगों को यह विषय निजी या असहज लग सकता है, लेकिन चिकित्सा की भाषा में पेरिनियम शरीर का वह हिस्सा है जो योनि और गुदा के बीच स्थित होता है। प्रसव के दौरान बच्चे के बाहर आने के समय इस हिस्से के ऊतकों पर काफी खिंचाव पड़ सकता है। कुछ महिलाओं में यहां प्राकृतिक रूप से चोट या फटने की स्थिति हो सकती है और कुछ मामलों में चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार एपिजियोटॉमी यानी चीरा भी लगाया जा सकता है।
शोध में यह सवाल लंबे समय से देखा गया है कि क्या गर्भावस्था के अंतिम चरण में पेरिनियल मसाज करने से प्रसव के दौरान होने वाली चोट या एपिजियोटॉमी की संभावना को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। उपलब्ध Cochrane समीक्षा में पाया गया कि गर्भावस्था के अंतिम हफ्तों में की गई एंटीनैटल पेरिनियल मसाज से कुछ महिलाओं में पेरिनियल ट्रॉमा और बाद में होने वाले दर्द में कमी देखी गई। इसका फायदा उन महिलाओं में ज्यादा स्पष्ट था, जिनका पहले vaginal birth नहीं हुआ था।
आखिर क्या है पेरिनियल मसाज?
पेरिनियल मसाज का मतलब प्रसव से पहले पेरिनियम के आसपास के ऊतकों को हल्के तरीके से तैयार करना है। इसका उद्देश्य यह माना जाता है कि प्रसव के दौरान जब बच्चे का सिर नीचे की ओर आता है, तब इस क्षेत्र के ऊतक खिंचाव को बेहतर तरीके से सहन कर सकें।
यह कोई सामान्य बॉडी मसाज नहीं है। यह शरीर के बेहद संवेदनशील हिस्से से जुड़ी तकनीक है और इसे करने से पहले गर्भवती महिला को अपने डॉक्टर या प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी से सलाह लेनी चाहिए।
Cochrane की समीक्षा में चार क्लिनिकल ट्रायल शामिल किए गए थे, जिनमें करीब 2,497 महिलाएं शामिल थीं। समीक्षा के अनुसार, गर्भावस्था के अंतिम महीने में महिला स्वयं या उसका पार्टनर पेरिनियल मसाज कर सकता था और इससे पेरिनियल ट्रॉमा, खासकर एपिजियोटॉमी, की संभावना में कुछ कमी देखी गई।
क्या इससे प्रसव आसान हो जाता है?
यहीं सबसे ज्यादा सावधानी की जरूरत है।
पेरिनियल मसाज को यह कहकर प्रचारित करना सही नहीं होगा कि इससे हर महिला का प्रसव आसान या सामान्य हो जाएगा। प्रसव कई अलग-अलग कारकों पर निर्भर करता है। बच्चे की स्थिति, उसका आकार, मां का स्वास्थ्य, गर्भावस्था की स्थिति, प्रसव की प्रगति और कई अन्य चिकित्सकीय कारण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसलिए पेरिनियल मसाज को प्रसव की गारंटी या किसी जटिलता से बचने का निश्चित उपाय नहीं माना जाना चाहिए।
उपलब्ध शोध मुख्य रूप से पेरिनियल ट्रॉमा और एपिजियोटॉमी जैसे परिणामों पर केंद्रित है। Cochrane समीक्षा में पेरिनियल मसाज करने वाली महिलाओं में टांके की जरूरत वाले ट्रॉमा और एपिजियोटॉमी की संभावना में कमी पाई गई, खासकर उन महिलाओं में जिन्होंने पहले vaginal birth नहीं किया था।
क्या पति भी कर सकते हैं पत्नी की मदद?
यही इस विषय का सबसे दिलचस्प पहलू है।
पतियों के लिए एक सुझाव है। सिर्फ यह मानने के बजाय कि प्रसव आसान बनाने के लिए बार-बार शारीरिक संबंध बनाना जरूरी है, वे प्रसव से पहले पेरिनियल मसाज के बारे में भी जानकारी ले सकते हैं। इसका उद्देश्य प्रसव के दौरान योनि के आसपास के ऊतकों को लचीला बनाने और फटने की आशंका कम करने में मदद करना है। लेकिन सवाल यह है कि कितने पति ऐसा करने की हिम्मत करेंगे?
— Rock X (@TheRockX38) October 10, 2026
शोध में पेरिनियल मसाज महिला स्वयं या उसके पार्टनर द्वारा किए जाने का उल्लेख मिलता है। यानी अगर गर्भवती महिला सहज महसूस करती है और डॉक्टर इसे उचित मानते हैं, तो पति भी इस प्रक्रिया में सहयोगी बन सकते हैं।
लेकिन यहां एक बात बेहद महत्वपूर्ण है—यह पति की जिम्मेदारी या वैवाहिक कर्तव्य नहीं है।
अगर महिला असहज महसूस करती है, दर्द होता है या वह ऐसा नहीं चाहती, तो किसी तरह का दबाव नहीं होना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान महिला की सहमति और आराम सबसे महत्वपूर्ण हैं।
पति के लिए इसे किसी यौन गतिविधि की तरह देखने के बजाय गर्भावस्था के दौरान पत्नी की देखभाल और सहयोग के रूप में समझना ज्यादा उचित है।
क्या बार-बार शारीरिक संबंध बनाना इसका विकल्प है?
सोशल मीडिया और आम बातचीत में अक्सर यह दावा सुनने को मिलता है कि गर्भावस्था के अंतिम दिनों में बार-बार शारीरिक संबंध बनाने से प्रसव आसान हो सकता है। लेकिन ऐसी बातों को बिना चिकित्सकीय आधार के निश्चित सलाह के रूप में नहीं लेना चाहिए।
पेरिनियल मसाज और यौन संबंध दो अलग-अलग चीजें हैं। दोनों को एक ही उद्देश्य से जोड़ना सही नहीं है।
पेरिनियल मसाज का अध्ययन विशेष रूप से प्रसव के दौरान पेरिनियल क्षेत्र में होने वाले ट्रॉमा और बाद के दर्द के संदर्भ में किया गया है। इसे यौन गतिविधि का विकल्प या प्रसव शुरू कराने की गारंटी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पहली बार मां बनने वाली महिलाओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण?
उपलब्ध शोध में पेरिनियल मसाज का प्रभाव उन महिलाओं में ज्यादा स्पष्ट पाया गया जिनका पहले vaginal birth नहीं हुआ था।
Cochrane समीक्षा में मसाज करने वाली महिलाओं में टांके की जरूरत वाले पेरिनियल ट्रॉमा और एपिजियोटॉमी की संभावना में कमी देखी गई। हालांकि, पहली या दूसरी डिग्री के सामान्य पेरिनियल tear में स्पष्ट अंतर नहीं पाया गया।
इसका मतलब यह नहीं है कि हर पहली बार मां बनने वाली महिला को यह जरूर करना चाहिए। इसका मतलब केवल इतना है कि डॉक्टर से चर्चा करते समय यह एक विकल्प हो सकता है, खासकर अगर महिला vaginal birth की योजना बना रही हो और चिकित्सक इसे उपयुक्त समझें।
इसे कब शुरू किया जाता है?
वैज्ञानिक समीक्षा में गर्भावस्था के अंतिम महीने में पेरिनियल मसाज का अध्ययन किया गया है। कुछ अध्ययनों में इसे लगभग 35वें सप्ताह से शुरू किया गया और सप्ताह में एक या दो बार करने की जानकारी मिली।
लेकिन हर गर्भावस्था एक जैसी नहीं होती।
किसी महिला को प्लेसेंटा से जुड़ी समस्या, रक्तस्राव, समय से पहले प्रसव का जोखिम, संक्रमण या कोई अन्य चिकित्सकीय जटिलता हो सकती है। ऐसी स्थिति में खुद से कोई तकनीक शुरू करना उचित नहीं है।
इसलिए 34वें, 35वें या किसी भी सप्ताह में इसे शुरू करने से पहले अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
मसाज करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
सबसे पहले महिला की सहमति और आराम जरूरी है। अगर मसाज के दौरान तेज दर्द, जलन, रक्तस्राव या असामान्य परेशानी हो तो इसे रोककर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
इसका उद्देश्य दबाव डालना या किसी ऊतक को जबरदस्ती खींचना नहीं है। यह एक बेहद संवेदनशील क्षेत्र है और गलत तरीके से की गई प्रक्रिया नुकसान पहुंचा सकती है।
इसी वजह से स्वास्थ्यकर्मी से सही तकनीक सीखना अधिक सुरक्षित विकल्प है।
Cochrane के अनुसार, उपलब्ध अध्ययनों में डिजिटल यानी उंगलियों से की जाने वाली पेरिनियल मसाज का अध्ययन किया गया था।
प्रसव के दौरान होने वाली हर चोट को रोकना संभव नहीं
यह भी समझना जरूरी है कि पेरिनियल मसाज करने के बावजूद किसी महिला को tear या अन्य चोट हो सकती है।
प्रसव एक प्राकृतिक लेकिन जटिल प्रक्रिया है। बच्चे का आकार, उसकी स्थिति, प्रसव की गति और अन्य परिस्थितियां पेरिनियल क्षेत्र पर असर डाल सकती हैं।
एक अन्य Cochrane समीक्षा में प्रसव के दूसरे चरण के दौरान पेरिनियल तकनीकों का अध्ययन किया गया। इसमें मसाज और गर्म सेक जैसी कुछ तकनीकों से गंभीर पेरिनियल ट्रॉमा को कम करने की संभावना के संकेत मिले, लेकिन अलग-अलग परिणामों के लिए प्रमाण समान रूप से मजबूत नहीं थे।
इसलिए किसी एक तकनीक को प्रसव के दौरान होने वाली सभी चोटों का समाधान बताना सही नहीं होगा।
पति के लिए असली भूमिका क्या होनी चाहिए?
इस पूरी चर्चा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यही है।
पति का काम सिर्फ पेरिनियल मसाज करना नहीं है। गर्भावस्था के अंतिम महीनों में पत्नी को भावनात्मक सहयोग देना, डॉक्टर की अपॉइंटमेंट में साथ जाना, अस्पताल की तैयारी करना, पर्याप्त आराम और पोषण का ध्यान रखने में मदद करना और प्रसव को लेकर उसकी चिंताओं को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
अगर डॉक्टर पेरिनियल मसाज की सलाह देते हैं और महिला इसे करना चाहती है, तो पति सहयोग कर सकता है। लेकिन यह तभी होना चाहिए जब पत्नी पूरी तरह सहज हो।
यह किसी तरह की “हिम्मत” दिखाने का मामला नहीं है, बल्कि आपसी विश्वास और सहमति का विषय है।
डॉक्टर से सलाह क्यों जरूरी?
गर्भावस्था में इंटरनेट, सोशल मीडिया और परिवार से मिलने वाली हर सलाह को सही मान लेना जोखिम भरा हो सकता है।
किसी भी नई तकनीक को अपनाने से पहले यह जानना जरूरी है कि वह महिला की वर्तमान गर्भावस्था के लिए सुरक्षित है या नहीं।
American College of Obstetricians and Gynecologists भी गर्भावस्था और प्रसव के दौरान व्यक्तिगत चिकित्सकीय परिस्थितियों के अनुसार देखभाल की जरूरत पर जोर देता है। प्रसव के बाद पेरिनियल चोट की मौजूदगी और उससे जुड़े दर्द की भी चिकित्सकीय निगरानी की जाती है।
सबसे जरूरी बात—महिला की इच्छा सर्वोपरि
पेरिनियल मसाज के बारे में चर्चा करते समय इसे केवल “पति क्या कर सकता है” के नजरिए से देखना अधूरा होगा।
असल केंद्र में गर्भवती महिला होनी चाहिए।
अगर वह इसे नहीं करना चाहती तो उस पर कोई दबाव नहीं होना चाहिए। अगर वह करना चाहती है तो उसे सही जानकारी और चिकित्सकीय मार्गदर्शन मिलना चाहिए।
गर्भावस्था में शरीर पहले ही कई बदलावों से गुजर रहा होता है। ऐसे में किसी भी निजी प्रक्रिया को तभी अपनाना चाहिए जब महिला सुरक्षित, सहज और मानसिक रूप से तैयार महसूस करे।
प्रसव से पहले पेरिनियल मसाज कोई नई सनसनीखेज तकनीक नहीं, बल्कि ऐसी प्रक्रिया है जिस पर चिकित्सा शोध हो चुका है। उपलब्ध Cochrane समीक्षा के अनुसार, गर्भावस्था के अंतिम चरण में पेरिनियल मसाज से पेरिनियल ट्रॉमा, खासकर एपिजियोटॉमी और टांके की जरूरत वाले कुछ मामलों में कमी देखी गई है। इसका लाभ पहली बार vaginal birth वाली महिलाओं में अधिक स्पष्ट दिखाई दिया।
लेकिन इसे प्रसव आसान कराने की गारंटी नहीं माना जा सकता। न ही इसे शारीरिक संबंधों का विकल्प या प्रसव शुरू कराने का निश्चित तरीका समझना चाहिए।
पति अगर पत्नी की मदद करना चाहते हैं तो सबसे जरूरी चीज “हिम्मत” नहीं, बल्कि सहमति, संवेदनशीलता और सही चिकित्सकीय जानकारी है।
और अगर गर्भवती महिला इस प्रक्रिया को लेकर विचार कर रही है, तो सबसे बेहतर कदम यही है कि अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ से पूछे—क्या मेरे लिए पेरिनियल मसाज सुरक्षित और उपयुक्त है?

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