अक्टूबर के आखिरी दिन आसमान से आफत! 31 अक्टूबर को कई राज्यों में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट
देश के कई हिस्सों में अक्टूबर का आखिरी दिन मौसम में बड़ा बदलाव लेकर आ सकता है। दक्षिण अंडमान सागर के ऊपर बना निम्न दबाव क्षेत्र लगातार सक्रिय है और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार इसके 31 अक्टूबर के आसपास दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी तथा आसपास के अंडमान-निकोबार क्षेत्र में डिप्रेशन में तब्दील होने की संभावना है। इसके बाद यह सिस्टम पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ सकता है।
हालांकि सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में 31 अक्टूबर को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार समेत 23 राज्यों में 90 से 95 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने का दावा किया जा रहा है, लेकिन 30 अक्टूबर को जारी IMD के आधिकारिक बुलेटिन में ऐसा कोई व्यापक 90-95 किमी/घंटे का अलर्ट नहीं दिया गया है। इसलिए मौसम की खबर को आधिकारिक पूर्वानुमान के आधार पर ही समझना जरूरी है।
बंगाल की खाड़ी में फिर बनने लगा मौसम का सिस्टम
IMD के मुताबिक दक्षिण अंडमान सागर और उससे सटे अंडमान-निकोबार क्षेत्र में 30 अक्टूबर की सुबह निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ था। शाम तक भी यह सिस्टम दक्षिण अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय रहा। मौसम विभाग ने बताया कि इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने और 31 अक्टूबर के आसपास दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी तथा आसपास के क्षेत्रों में डिप्रेशन में बदलने की संभावना है।
इसके बाद यह सिस्टम अगले दो दिनों में आंध्र प्रदेश के तट की तरफ बढ़ सकता है। इस वजह से दक्षिणी और पूर्वी तटीय क्षेत्रों के मौसम पर नजर रखी जा रही है।
मौसम विभाग ने तटीय आंध्र प्रदेश में 2 और 3 नवंबर को भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना भी जताई है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में तेज हवाओं के कारण मछुआरों के लिए भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
यूपी में बारिश को लेकर क्या है अपडेट?
उत्तर प्रदेश में मौसम का असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। IMD के 30 अक्टूबर के पूर्वानुमान के अनुसार पूर्वी उत्तर प्रदेश में 31 अक्टूबर से 2 नवंबर के बीच अलग-अलग स्थानों पर बारिश की संभावना बनी हुई है। वहीं 30 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश में भारी बारिश की संभावना जताई गई थी।
इससे पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भी बारिश दर्ज की गई। IMD के आंकड़ों के अनुसार 30 अक्टूबर की सुबह तक पिछले 24 घंटे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 7 से 11 सेंटीमीटर तक बारिश दर्ज की गई थी। बिजनौर में 10 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।
किसानों के लिए मौसम में यह बदलाव महत्वपूर्ण है। खेतों में अगर फसल या कृषि उपज कटाई के बाद खुले में रखी है तो उसे सुरक्षित स्थान पर रखने या तिरपाल से ढकने की सलाह दी गई है। गन्ने, धान और सब्जियों वाले खेतों में जल निकासी की व्यवस्था बनाए रखने को भी कहा गया है।
दिल्ली-NCR में 31 अक्टूबर को कैसा रहेगा मौसम?
दिल्ली-एनसीआर को लेकर वायरल हो रहे 90-95 किलोमीटर प्रति घंटे की हवा वाले दावे को आधिकारिक पूर्वानुमान से अलग रखना जरूरी है।
IMD के 30 अक्टूबर के दिल्ली-एनसीआर पूर्वानुमान के अनुसार 31 अक्टूबर को दिल्ली में आसमान आंशिक रूप से बादल छाए रह सकता है। अधिकतम तापमान करीब 26 से 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 15 से 17 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान था। मौसम विभाग ने 31 अक्टूबर के लिए 90-95 किलोमीटर प्रति घंटे की हवाओं का अलर्ट जारी नहीं किया था।
यानी दिल्ली में मौसम सुहावना और अपेक्षाकृत ठंडा रह सकता है, लेकिन इसे किसी बड़े तूफान की स्थिति के रूप में पेश करना फिलहाल सही नहीं होगा।
बिहार में बारिश और फ्लैश फ्लड का खतरा
बिहार में भी मौसम को लेकर लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। IMD के 30 अक्टूबर के बुलेटिन में बिहार में 31 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच अलग-अलग स्थानों पर बारिश की संभावना बताई गई थी।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 31 अक्टूबर की सुबह तक कुछ इलाकों में कम से मध्यम फ्लैश फ्लड का जोखिम भी बताया गया था। IMD ने विशेष रूप से पूर्वी चंपारण और सीतामढ़ी जिलों के कुछ जलग्रहण क्षेत्रों और आसपास के इलाकों को संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों में रखा था।
ऐसे में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को बारिश के दौरान स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखनी चाहिए।
झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी बदलेगा मौसम
झारखंड में 30 अक्टूबर को भारी बारिश का प्रभाव देखा गया था और IMD ने 31 अक्टूबर से 5 नवंबर तक कुछ इलाकों में बारिश जारी रहने की संभावना जताई थी।
पश्चिम बंगाल के उप-हिमालयी हिस्सों और सिक्किम में भी 30 और 31 अक्टूबर को बारिश की गतिविधियां बनी रहने का अनुमान था। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में पहले ही भारी बारिश दर्ज होने की जानकारी दी थी। दार्जिलिंग सहित पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश होने पर स्थानीय स्तर पर सड़क और ढलान संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं।
छत्तीसगढ़ में भी मौसम रहेगा सक्रिय
चक्रवाती तूफान अर्नब का अवशेष अब कमजोर होकर निम्न दबाव क्षेत्र में बदल चुका है। 30 अक्टूबर की सुबह यह सिस्टम उत्तर छत्तीसगढ़ और उससे सटे पूर्वी मध्य प्रदेश के ऊपर था। इससे पहले छत्तीसगढ़ में बेहद भारी बारिश दर्ज की गई थी।
IMD के अनुसार पिछले 24 घंटे में छत्तीसगढ़ में 21 सेंटीमीटर या उससे अधिक अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की गई। बलरामपुर जिले के कुसमी में 28 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई, जबकि सुकमा में 7 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई।
मौसम विभाग ने छत्तीसगढ़ में 30 और 31 अक्टूबर को व्यापक बारिश की संभावना जताई थी। इसके अलावा 30 अक्टूबर से 1 नवंबर तक कुछ स्थानों पर गरज-चमक और बिजली गिरने की गतिविधियां भी हो सकती हैं।
ओडिशा और आंध्र प्रदेश पर सबसे ज्यादा नजर
मौसम का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र इस समय बंगाल की खाड़ी और उससे जुड़े तटीय क्षेत्र हैं। ओडिशा में पिछले 24 घंटे में 12 से 20 सेंटीमीटर तक भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई। भोगराई में 19 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई।
IMD ने ओडिशा में 30 अक्टूबर से 3 नवंबर के बीच कुछ स्थानों पर गरज, बिजली और तेज हवाओं की संभावना जताई है।
दूसरी तरफ आंध्र प्रदेश के लिए आने वाले दिनों में मौसम ज्यादा सक्रिय हो सकता है। दक्षिण अंडमान सागर का नया सिस्टम डिप्रेशन में बदलने के बाद आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ सकता है। IMD ने तटीय आंध्र प्रदेश और यानम में 2-3 नवंबर को भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है।
किसानों के लिए क्या है सलाह?
बारिश और तेज हवाओं के बीच किसानों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। खेत में कटी हुई फसल या खुले में रखा कृषि उत्पाद बारिश से खराब हो सकता है। IMD ने उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ सहित कई क्षेत्रों के लिए कृषि संबंधी सावधानियां जारी की हैं।
उत्तर प्रदेश में कटी हुई उपज को सुरक्षित स्थान पर रखने या प्लास्टिक/पॉलीथिन से ढकने की सलाह दी गई है। खड़े गन्ने, धान और सब्जियों में जल निकासी सुनिश्चित करने को कहा गया है। बिहार में जल्दी तैयार होने वाले धान की कटाई संभव हो तो जल्द करने और पहले से काटी गई उपज को सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है।
पहाड़ी इलाकों में यात्रा करते समय रहें सावधान
बारिश के दौरान पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, मलबा आने और सड़क पर फिसलन का खतरा बढ़ सकता है। IMD ने भारी बारिश की स्थिति में निचले इलाकों में जलभराव और स्थानीय स्तर पर भूस्खलन जैसी परिस्थितियों की संभावना को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी है।
इसलिए पहाड़ी क्षेत्रों में जाने वाले लोगों को यात्रा से पहले स्थानीय मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।
मौसम का सबसे बड़ा अपडेट क्या है?
फिलहाल सबसे बड़ा मौसम सिस्टम दक्षिण अंडमान सागर के ऊपर बना निम्न दबाव क्षेत्र है। इसके 31 अक्टूबर के आसपास डिप्रेशन में बदलने और फिर आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ने की संभावना है। इसके कारण 2 और 3 नवंबर को तटीय आंध्र प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश का खतरा बढ़ सकता है।
वहीं उत्तर भारत में 31 अक्टूबर को मौसम पूरी तरह साफ नहीं रहेगा। उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना बनी हुई है, जबकि उत्तराखंड में 31 अक्टूबर को गरज-चमक और बिजली की गतिविधियां हो सकती हैं। दिल्ली में हालांकि 31 अक्टूबर को बड़े तूफान जैसा 90-95 किमी प्रति घंटे की हवा का आधिकारिक अलर्ट नहीं है।
इसलिए लोगों को वायरल मौसम संदेशों के बजाय IMD के ताजा अपडेट को प्राथमिकता देनी चाहिए। मौसम सिस्टम तेजी से बदल सकते हैं और नए बुलेटिन के साथ चेतावनियों में बदलाव संभव है।
मौसम का पूर्वानुमान समय के साथ बदल सकता है। ऊपर दी गई जानकारी 30 अक्टूबर 2026 को जारी IMD के आधिकारिक बुलेटिन पर आधारित है। स्थानीय स्तर पर मौसम विभाग की ताजा चेतावनी और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

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