गर्भावस्था में ब्रश करते ही मसूड़ों से खून? इसे सामान्य समझने की भूल न करें, कहीं ये बड़ी परेशानी का संकेत तो नहीं!
गर्भावस्था किसी भी महिला के जीवन का बेहद महत्वपूर्ण दौर होता है। इस दौरान शरीर में तेजी से कई बदलाव होते हैं। हार्मोन का स्तर बदलने से वजन, त्वचा, बाल, नींद और पाचन पर असर पड़ सकता है। लेकिन गर्भावस्था का असर केवल शरीर के इन हिस्सों तक सीमित नहीं रहता। इस दौरान मुंह और दांतों की सेहत में भी कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
कई गर्भवती महिलाओं को ब्रश करते समय या खाना खाते हुए अचानक मसूड़ों से खून आने की शिकायत होती है। कुछ महिलाओं को मसूड़ों में सूजन, लालिमा, दर्द या संवेदनशीलता भी महसूस हो सकती है। ऐसी स्थिति में अक्सर सवाल उठता है कि क्या गर्भावस्था में मसूड़ों से खून आना सामान्य है या यह किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव मसूड़ों को प्लाक और बैक्टीरिया के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकते हैं। इसी वजह से गर्भावस्था में जिंजिवाइटिस यानी मसूड़ों में सूजन और खून आने की समस्या ज्यादा दिखाई दे सकती है। अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन के अनुसार, गर्भावस्था में मसूड़ों में सूजन और रक्तस्राव आम हो सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह नजरअंदाज करना सही नहीं है।
हार्मोन बढ़ने से क्यों संवेदनशील हो जाते हैं मसूड़े?
गर्भावस्था के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन का स्तर काफी बदलता है। इन बदलावों का प्रभाव मसूड़ों के ऊतकों पर भी पड़ सकता है। मसूड़े पहले की तुलना में ज्यादा संवेदनशील हो सकते हैं और प्लाक में मौजूद बैक्टीरिया के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया बढ़ सकती है।
इसके कारण मसूड़े लाल, सूजे हुए या नरम दिखाई दे सकते हैं। ब्रश करते समय हल्का खून आना भी इसी वजह से हो सकता है। इस स्थिति को आमतौर पर प्रेग्नेंसी जिंजिवाइटिस कहा जाता है।
लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। अगर गर्भावस्था में मसूड़ों से खून आ रहा है तो इसका मतलब यह नहीं कि हर बार इसकी वजह सिर्फ हार्मोनल बदलाव ही है। दांतों पर जमा प्लाक, खराब ओरल हाइजीन या पहले से मौजूद मसूड़ों की बीमारी भी रक्तस्राव का कारण हो सकती है।
क्या मसूड़ों से खून आने पर ब्रश करना बंद कर दें?
कई महिलाओं को मसूड़ों से खून आने के बाद लगता है कि ब्रश करने से समस्या और बढ़ रही है। इस वजह से वे ब्रश करना कम कर देती हैं या मसूड़ों के आसपास सफाई करना छोड़ देती हैं। लेकिन ऐसा करना समस्या को और बढ़ा सकता है।
दांतों पर प्लाक जमा रहने से मसूड़ों में सूजन और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए मसूड़ों से हल्का खून आने के बावजूद नियमित रूप से दांतों की सफाई जरूरी है।
अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन गर्भावस्था के दौरान दिन में दो बार फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से दांतों को साफ करने और दांतों के बीच की जगह की भी नियमित सफाई करने की सलाह देता है। संवेदनशील मसूड़ों के लिए मुलायम ब्रिसल वाला टूथब्रश इस्तेमाल किया जा सकता है।
उल्टी से भी दांतों को पहुंच सकता है नुकसान
गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में मॉर्निंग सिकनेस यानी जी मिचलाने और उल्टी की समस्या आम हो सकती है। बार-बार उल्टी होने से पेट का एसिड मुंह तक पहुंचता है। यह एसिड दांतों की बाहरी परत यानी इनेमल को नुकसान पहुंचा सकता है।
यही कारण है कि उल्टी के तुरंत बाद जोर से ब्रश करने से बचने की सलाह दी जाती है। इसके बजाय पहले पानी से अच्छी तरह कुल्ला करना बेहतर हो सकता है। अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन भी उल्टी के बाद मुंह को पानी से कुल्ला करने और तुरंत ब्रश न करने की सलाह देता है, क्योंकि उस समय एसिड के कारण इनेमल अस्थायी रूप से अधिक संवेदनशील हो सकता है।
बार-बार मीठा खाने से भी बढ़ सकती है परेशानी
गर्भावस्था के दौरान कई महिलाओं की खाने की आदतों में बदलाव आता है। कुछ महिलाओं को बार-बार कुछ खाने की इच्छा होती है, जबकि कुछ को मीठी चीजें ज्यादा पसंद आने लगती हैं।
बार-बार मीठे या चिपचिपे खाद्य पदार्थ खाने से दांतों पर प्लाक बनने का खतरा बढ़ सकता है। अगर दांतों की नियमित सफाई न हो तो बैक्टीरिया की गतिविधि बढ़ सकती है और कैविटी तथा मसूड़ों की समस्या का खतरा बढ़ सकता है।
इसलिए गर्भावस्था के दौरान संतुलित भोजन के साथ पर्याप्त पानी पीना और मीठे खाद्य पदार्थों की बार-बार होने वाली आदत को नियंत्रित रखना दांतों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
मसूड़ों में सूजन के साथ ये लक्षण हों तो सावधान
अगर कभी-कभार ब्रश करते समय थोड़ा खून आता है तो हर स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं होती। लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
अगर मसूड़ों से बार-बार या ज्यादा खून आता है, मसूड़े बहुत अधिक सूज जाते हैं, लगातार दर्द रहता है, पस दिखाई देती है, मुंह से लगातार बदबू आती है या दांत ढीले महसूस होने लगते हैं तो डेंटिस्ट से जांच कराना जरूरी है।
प्लाक और मसूड़ों की बीमारी अगर लंबे समय तक अनदेखी की जाए तो समस्या बढ़ सकती है। इसलिए गर्भावस्था को दांतों की जांच टालने का कारण नहीं बनाना चाहिए।
क्या गर्भावस्था में डेंटिस्ट के पास जाना सुरक्षित है?
कई महिलाएं गर्भावस्था के दौरान डेंटिस्ट के पास जाने से इसलिए डरती हैं कि कहीं दांतों का इलाज बच्चे के लिए नुकसानदायक न हो। लेकिन उपलब्ध चिकित्सा मार्गदर्शन के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान नियमित दंत चिकित्सा देखभाल और जरूरत पड़ने पर उपचार किया जा सकता है।
अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन के अनुसार, निवारक, जांच संबंधी और आवश्यक दंत उपचार गर्भावस्था के दौरान किए जा सकते हैं। आपात स्थिति में दांतों का जरूरी उपचार टालना भी उचित नहीं माना जाता, क्योंकि इलाज में अनावश्यक देरी से समस्या अधिक जटिल हो सकती है।
हालांकि, गर्भवती महिला को अपने डेंटिस्ट को यह जरूर बताना चाहिए कि वह कितने सप्ताह की गर्भवती है और गर्भावस्था सामान्य है या हाई-रिस्क। इससे डॉक्टर उपचार और दवाओं से जुड़े निर्णय अधिक सावधानी से ले सकते हैं।
मसूड़ों को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
गर्भावस्था के दौरान ओरल हेल्थ को बेहतर रखने के लिए कुछ आसान आदतों पर ध्यान दिया जा सकता है।
पहला, दिन में दो बार मुलायम ब्रिसल वाले टूथब्रश से धीरे-धीरे ब्रश करें।
दूसरा, फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें।
तीसरा, दांतों के बीच फंसी गंदगी को हटाने के लिए फ्लॉस या उपयुक्त इंटरडेंटल क्लीनर का इस्तेमाल करें।
चौथा, बहुत ज्यादा मीठे और चिपचिपे खाद्य पदार्थों को बार-बार खाने से बचें।
पांचवां, पर्याप्त पानी पीते रहें।
छठा, उल्टी होने के बाद पहले पानी से कुल्ला करें और तुरंत जोर से ब्रश करने से बचें।
सातवां, मसूड़ों से बार-बार खून आने पर खुद से दवा लेने के बजाय डेंटिस्ट से सलाह लें।
क्या मसूड़ों की बीमारी का गर्भावस्था पर असर पड़ सकता है?
मसूड़ों की गंभीर बीमारी और गर्भावस्था के कुछ प्रतिकूल परिणामों के बीच संबंध को लेकर शोध हुआ है। अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन के अनुसार, कुछ अध्ययनों और व्यवस्थित समीक्षाओं में पीरियोडोंटाइटिस तथा प्रीटर्म बर्थ, कम जन्म वजन और प्री-एक्लेम्पसिया जैसे परिणामों के बीच संबंध पाया गया है। हालांकि, इन संबंधों को पूरी तरह कारण-परिणाम के रूप में स्थापित करने के लिए अभी और शोध की जरूरत है।
इसलिए डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन मसूड़ों की गंभीर समस्या को लंबे समय तक अनदेखा करना भी सही नहीं है। नियमित दांतों की सफाई और जरूरत पड़ने पर समय पर उपचार महत्वपूर्ण है।
कब तुरंत डॉक्टर या डेंटिस्ट से संपर्क करें?
यदि मसूड़ों से लगातार या अधिक मात्रा में खून आ रहा है, बहुत ज्यादा सूजन या दर्द है, पस दिखाई दे रही है, दांत हिल रहे हैं या मुंह की समस्या खाने-पीने में परेशानी पैदा कर रही है तो डेंटिस्ट से संपर्क करना चाहिए।
साथ ही यदि गर्भावस्था के दौरान किसी भी दंत उपचार या दवा को लेकर संदेह हो तो अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ और डेंटिस्ट दोनों को जानकारी देना बेहतर है।
गर्भावस्था में मसूड़ों से हल्का खून आना कई महिलाओं में हार्मोनल बदलाव के कारण हो सकता है और इसे प्रेग्नेंसी जिंजिवाइटिस से जोड़ा जा सकता है। लेकिन हर बार रक्तस्राव को केवल गर्भावस्था का सामान्य हिस्सा मानकर छोड़ देना सही नहीं है।
दांतों पर प्लाक, खराब ओरल हाइजीन, उल्टी के कारण बढ़ी एसिडिटी और खाने की आदतों में बदलाव भी मुंह की सेहत को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए गर्भावस्था के दौरान ब्रश करना बंद करने के बजाय सही तरीके से दांतों की सफाई करना, दांतों के बीच की सफाई रखना, संतुलित भोजन करना और जरूरत पड़ने पर डेंटिस्ट से जांच कराना जरूरी है।
सबसे अहम बात यह है कि गर्भावस्था के दौरान अपनी ओरल हेल्थ को भी उतना ही महत्व दें जितना शरीर के बाकी हिस्सों को। समय रहते छोटी समस्या पर ध्यान देने से उसे गंभीर होने से रोकने में मदद मिल सकती है।

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