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स्लीप डिवोर्स के बाद अब ‘फूड डिवोर्स’ की बारी! पति-पत्नी के बीच बढ़ रहा ये नया ट्रेंड, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान



रिश्तों में छोटी-छोटी बातों को लेकर होने वाली नोकझोंक आम बात है। कभी टीवी देखने को लेकर बहस होती है तो कभी घूमने की जगह को लेकर। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि खाने की पसंद भी पति-पत्नी के बीच तनाव की वजह बन सकती है? आज के बदलते समय में कई कपल्स के लिए यह सवाल काफी महत्वपूर्ण हो गया है कि रात के खाने में आखिर क्या बनाया जाए।

इसी तरह की रोजमर्रा की परेशानियों से बचने के लिए इन दिनों एक नया रिलेशनशिप ट्रेंड चर्चा में है, जिसे ‘Food Divorce’ यानी फूड डिवोर्स कहा जा रहा है। नाम सुनते ही ऐसा लगता है जैसे पति-पत्नी के बीच रिश्ता खत्म हो गया हो, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। फूड डिवोर्स का वास्तविक तलाक से कोई लेना-देना नहीं है। इसमें कपल्स एक साथ रहते हैं, लेकिन अपनी पसंद, डाइट, स्वास्थ्य जरूरत और समय के हिसाब से अलग-अलग खाना चुन सकते हैं।

आखिर क्या होता है ‘Food Divorce’?

फूड डिवोर्स का सीधा मतलब है कि पति-पत्नी को हर दिन एक ही खाना खाने या एक ही समय पर भोजन करने की मजबूरी नहीं होती। दोनों अपनी-अपनी पसंद के अनुसार खाना खरीद सकते हैं, बना सकते हैं और खा सकते हैं।

उदाहरण के तौर पर अगर पति वजन कम करने के लिए हाई-प्रोटीन और कम कैलोरी वाली डाइट ले रहा है, जबकि पत्नी को सामान्य घरेलू खाना पसंद है, तो दोनों को एक ही भोजन करने के लिए मजबूर होने की जरूरत नहीं है।

इसी तरह अगर एक पार्टनर को रात में जल्दी खाना पसंद है और दूसरा देर रात खाना खाता है, तो वे अपने समय के हिसाब से भोजन कर सकते हैं।

हाल की रिपोर्टों में फूड डिवोर्स को ऐसे कपल्स की व्यवस्था के तौर पर बताया गया है जो अलग-अलग डाइट, काम के समय या खाने की पसंद के कारण नियमित रूप से अलग भोजन करते हैं।

नाम में ‘डिवोर्स’ लेकिन रिश्ता बिल्कुल कायम

फूड डिवोर्स नाम थोड़ा चौंकाने वाला जरूर है, लेकिन इसका मतलब पति-पत्नी का अलग होना नहीं है। वास्तव में यह एक तरह का समझौता हो सकता है, जिसमें दोनों पार्टनर एक-दूसरे की खान-पान की पसंद का सम्मान करते हैं।

हर व्यक्ति की पसंद अलग होती है। किसी को मसालेदार खाना पसंद हो सकता है तो किसी को हल्का भोजन। किसी को शाकाहारी खाना पसंद हो सकता है तो दूसरा नॉन-वेज खाना पसंद कर सकता है।

ऐसे में हर दिन एक व्यक्ति की पसंद को दूसरे पर थोपना कई बार तनाव पैदा कर सकता है। फूड डिवोर्स का विचार इसी दबाव को कम करने पर केंद्रित है।

कपल्स क्यों अपना रहे हैं यह ट्रेंड?

इसके पीछे सबसे बड़ा कारण बदलती जीवनशैली और अलग-अलग डाइट प्लान बताए जा रहे हैं। आज बहुत से लोग अपनी फिटनेस और स्वास्थ्य को लेकर पहले की तुलना में अधिक जागरूक हैं।

कोई वजन कम करने के लिए कैलोरी नियंत्रित कर रहा है, कोई हाई-प्रोटीन डाइट ले रहा है, कोई शाकाहारी या वीगन भोजन पसंद करता है, जबकि किसी को सामान्य घरेलू भोजन पसंद है।

जब दोनों पार्टनर की जरूरत अलग हो तो एक ही भोजन तैयार करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में अलग-अलग खाना बनाना कई कपल्स को ज्यादा आसान विकल्प लग सकता है।

इसके अलावा कामकाजी जीवन भी इसका एक कारण है। पति और पत्नी दोनों नौकरी करते हैं तो संभव है कि उनके ऑफिस के समय अलग हों। किसी की सुबह की शिफ्ट हो सकती है तो किसी की देर शाम तक ड्यूटी।

ऐसी स्थिति में एक-दूसरे का इंतजार करने के बजाय अपनी सुविधा के अनुसार भोजन करना व्यावहारिक लग सकता है। हालिया रिपोर्टों में अलग काम के समय और बदलती डाइट को फूड डिवोर्स की प्रमुख वजहों में गिना गया है।

खाने को लेकर होने वाली बहस से मिल सकती है राहत

पति-पत्नी के बीच कई बार बहस किसी बड़ी समस्या को लेकर नहीं, बल्कि बेहद छोटी चीजों को लेकर शुरू होती है।

“आज क्या बनेगा?”

“मुझे ये नहीं खाना।”

“तुम रोज बाहर का खाना क्यों मंगाते हो?”

“मुझे इतनी देर से खाना पसंद नहीं।”

ऐसी बातें लगातार दोहराई जाएं तो खाने का समय तनाव का कारण बन सकता है।

फूड डिवोर्स का विचार इस तरह के विवाद को कम करने का एक तरीका हो सकता है। अगर दोनों पार्टनर अपनी पसंद के हिसाब से भोजन चुनने के लिए स्वतंत्र हों, तो हर दिन खाने को लेकर समझौता करने की जरूरत कम हो सकती है।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर कपल को अलग खाना ही खाना चाहिए। यह सिर्फ उन लोगों के लिए एक विकल्प है जिनके खान-पान और दिनचर्या में काफी अंतर है।

फिटनेस गोल भी बन सकता है वजह

आजकल फिटनेस को लेकर लोगों की सोच काफी बदल गई है। जिम जाने वाले व्यक्ति की डाइट और सामान्य व्यक्ति की डाइट अलग हो सकती है।

मान लीजिए एक पार्टनर वजन कम करने की कोशिश कर रहा है और उसे कम तेल, कम कैलोरी और अधिक प्रोटीन वाला भोजन चाहिए। वहीं दूसरा पार्टनर अपनी सामान्य डाइट जारी रखना चाहता है।

अगर दोनों को रोज एक ही खाना खाना पड़े तो किसी एक को अपनी पसंद या लक्ष्य से समझौता करना पड़ सकता है।

ऐसे में अलग भोजन तैयार करना दोनों के लिए सुविधाजनक हो सकता है। इससे एक पार्टनर अपने फिटनेस लक्ष्य पर ध्यान दे सकता है और दूसरा अपनी पसंद के अनुसार खाना खा सकता है।

अलग संस्कृति और खान-पान भी बन सकता है कारण

भारत जैसे देश में खान-पान का संबंध केवल भूख से नहीं, बल्कि संस्कृति और परिवार से भी जुड़ा हुआ है।

अलग राज्यों या अलग सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आने वाले दो लोगों की खाने की आदतें काफी अलग हो सकती हैं। किसी को उत्तर भारतीय भोजन पसंद हो सकता है, जबकि दूसरे को दक्षिण भारतीय भोजन।

किसी परिवार में मसालेदार खाना सामान्य हो सकता है तो दूसरे परिवार में बहुत हल्का खाना पसंद किया जा सकता है।

ऐसे में शादी के बाद हर दिन एक ही तरह का खाना खाने की अपेक्षा दोनों की पसंद का सम्मान करना कई बार बेहतर विकल्प हो सकता है।

क्या अलग खाना खाने से प्यार कम हो जाता है?

यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण है। इसका जवाब सीधा ‘हां’ या ‘नहीं’ नहीं है।

अगर पति-पत्नी अलग खाना इसलिए खा रहे हैं क्योंकि उनकी पसंद, डाइट या समय अलग है, तो इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि रिश्ते में दूरी आ रही है। अलग खाना कई लोगों के लिए केवल सुविधा का मामला हो सकता है।

लेकिन समस्या तब पैदा हो सकती है जब खाना अलग करने के साथ-साथ बातचीत, साथ बैठना और एक-दूसरे के साथ समय बिताना भी कम हो जाए।

रिश्ते के विशेषज्ञों ने भी इस बात पर ध्यान देने की जरूरत बताई है कि अलग भोजन सिर्फ सुविधा है या पार्टनर से बचने का तरीका। यदि अलग खाना खाने के कारण बातचीत और साझा समय लगातार कम होता जा रहा है, तो मामला केवल भोजन का नहीं रह जाता।

साथ खाना जरूरी नहीं, साथ समय बिताना जरूरी

कपल्स के लिए यह समझना जरूरी है कि रिश्ते की मजबूती केवल इस बात से तय नहीं होती कि दोनों ने एक ही प्लेट में या एक ही समय पर खाना खाया या नहीं।

अगर दोनों अलग खाना खाते हैं लेकिन दिन में कुछ समय बातचीत करते हैं, साथ घूमते हैं, एक-दूसरे की बात सुनते हैं और अपनी जिंदगी की महत्वपूर्ण बातें साझा करते हैं, तो रिश्ता मजबूत रह सकता है।

इसके उलट अगर दोनों एक ही टेबल पर खाना खाते हैं लेकिन मोबाइल में व्यस्त रहते हैं और एक-दूसरे से बात ही नहीं करते, तो केवल साथ खाना रिश्ते की मजबूती की गारंटी नहीं देता।

इसलिए खाने से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि दोनों पार्टनर एक-दूसरे के लिए समय निकालें।

वीकेंड पर बन सकता है ‘कपल मील’

फूड डिवोर्स अपनाने वाले कपल्स के लिए एक अच्छा तरीका यह हो सकता है कि रोज की डाइट अलग हो, लेकिन सप्ताह में कुछ समय साथ खाने के लिए रखा जाए।

उदाहरण के लिए वीकेंड पर दोनों मिलकर ऐसा खाना बना सकते हैं जो दोनों को पसंद हो। कभी बाहर डिनर पर जा सकते हैं या घर पर अपनी पसंद के अनुसार अलग-अलग डिश ऑर्डर करके एक साथ बैठ सकते हैं।

इससे दोनों को अपनी डाइट और पसंद के साथ समझौता भी नहीं करना पड़ेगा और साथ समय बिताने का मौका भी मिलेगा।

क्या यह ट्रेंड लंबे समय तक चलेगा?

फूड डिवोर्स को फिलहाल एक उभरते रिलेशनशिप और लाइफस्टाइल ट्रेंड के रूप में देखा जा रहा है। इसकी लोकप्रियता के पीछे बदलती डाइट, काम के अलग-अलग समय, फिटनेस लक्ष्य और व्यक्तिगत पसंद जैसे कारण बताए जा रहे हैं।

हालांकि इसे हर रिश्ते के लिए जरूरी या आदर्श व्यवस्था नहीं माना जा सकता। हर कपल की जरूरत अलग होती है।

कुछ लोगों के लिए साथ बैठकर खाना रिश्ते का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है, जबकि कुछ के लिए अलग-अलग खाना कोई समस्या नहीं है।

आखिर में सबसे जरूरी बात

फूड डिवोर्स का असली संदेश शायद अलग खाना खाने से ज्यादा एक-दूसरे की पसंद और स्वतंत्रता का सम्मान करना है।

पति-पत्नी को हर चीज में एक जैसा होना जरूरी नहीं है। दोनों की पसंद अलग हो सकती है, फिटनेस लक्ष्य अलग हो सकते हैं, काम का समय अलग हो सकता है और खाने की आदतें भी अलग हो सकती हैं।

जरूरत इस बात की है कि इन अंतर को लेकर एक-दूसरे पर दबाव न बनाया जाए।

अगर अलग-अलग खाना खाने से रोज की बहस कम होती है और दोनों खुश रहते हैं, तो यह व्यवस्था कुछ कपल्स के लिए काम कर सकती है। लेकिन साथ ही यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि खाना अलग होने के साथ रिश्ता अलग न हो जाए।

क्योंकि आखिरकार रिश्ता एक जैसी प्लेट से नहीं, बल्कि आपसी समझ, सम्मान, बातचीत और साथ से मजबूत होता है।

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