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तिरंगा यात्रा से पहले अभिजीत दिपके हिरासत में, बोले- “आखिर मेरा कसूर क्या है? मैं तो अकेला हूं…”



नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले राजनीतिक और सुरक्षा गतिविधियां तेज हो गईं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पुलिस की यह कार्रवाई उस समय हुई जब दिपके कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निकल रहे थे। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने पहले ही उन्हें कार्यक्रम को लेकर नोटिस दिया था और कनॉट प्लेस क्षेत्र में लागू निषेधाज्ञा का हवाला देते हुए मार्च नहीं निकालने की चेतावनी दी थी।

इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली के सबसे व्यस्त इलाकों में से एक कनॉट प्लेस और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई। अधिकारियों के मुताबिक, नई दिल्ली इलाके में 6,000 से अधिक दिल्ली पुलिसकर्मियों के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 220 कंपनियां तैनात की गईं। इसके अलावा बड़े पैमाने पर सीसीटीवी नेटवर्क और बैरिकेडिंग के जरिए निगरानी की व्यवस्था की गई।

घर से निकलते ही पुलिस ने रोका

रिपोर्टों के अनुसार, अभिजीत दिपके जब अपने ठहरने के स्थान से बाहर निकले तो पुलिस अधिकारियों ने उन्हें रोककर समझाने की कोशिश की। पुलिस की ओर से उन्हें बताया गया कि कनॉट प्लेस क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू हैं।

दिपके और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान बातचीत भी हुई। मीडिया रिपोर्टों में सामने आया कि दिपके ने पुलिस से सवाल किया कि उन्होंने ऐसा क्या उल्लंघन किया है, जबकि वह अकेले हैं। पुलिस की ओर से जवाब दिया गया कि उनके पीछे काफी संख्या में लोग मौजूद हैं। इस दौरान दिपके ने वहां मौजूद लोगों को मीडिया का हिस्सा बताया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

बाद की रिपोर्टों में बताया गया कि दिपके को एनसीपी-एससीपी प्रवक्ता अनीश गावंडे के आवास से निकलते समय हिरासत में लिया गया।

पुलिस पहले ही दे चुकी थी नोटिस

‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर दिल्ली पुलिस और CJP के बीच विवाद अचानक सामने नहीं आया। कार्यक्रम से पहले पुलिस की ओर से दिपके को नोटिस दिए जाने की जानकारी सामने आई थी।

पुलिस ने कनॉट प्लेस और आसपास के क्षेत्र में लागू निषेधाज्ञा का हवाला दिया। प्रशासन का कहना था कि निर्धारित क्षेत्र में बिना अनुमति बड़ी संख्या में लोगों का एकत्र होना कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती पैदा कर सकता है।

पुलिस का यह भी कहना रहा कि तिरंगा फहराना या राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करना अपने आप में प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन ऐसे क्षेत्र में बिना अनुमति मार्च या बड़ी सभा करना लागू प्रतिबंधों का उल्लंघन हो सकता है।

कनॉट प्लेस में क्यों बढ़ाई गई सुरक्षा?

कनॉट प्लेस दिल्ली का प्रमुख व्यावसायिक और सार्वजनिक क्षेत्र है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग खरीदारी, कारोबार, मेट्रो और अन्य कामों के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में किसी बड़े प्रदर्शन या मार्च की स्थिति में यातायात और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहती है।

इसी वजह से पुलिस ने कनॉट प्लेस, राजीव चौक, सेंट्रल पार्क, पालिका बाजार, जंतर-मंतर, संसद मार्ग और आसपास के संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाई। कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए गए हैं और प्रवेश तथा निकास मार्गों पर निगरानी की जा रही है।

पुलिस और प्रशासन की कोशिश है कि प्रदर्शन की स्थिति में आम लोगों की आवाजाही पूरी तरह बाधित न हो। इसके लिए अलग-अलग रास्तों पर यातायात नियंत्रण और संभावित डायवर्जन की व्यवस्था की गई है।

6 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी और CAPF की 220 कंपनियां

‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर सुरक्षा व्यवस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नई दिल्ली क्षेत्र में 6,000 से अधिक दिल्ली पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। इसके साथ ही केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 220 कंपनियां भी सुरक्षा ड्यूटी में लगाई गईं।

प्रशासन ने सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी का दायरा भी बढ़ाया है। इसका उद्देश्य भीड़ की गतिविधियों पर नजर रखना और किसी अप्रिय स्थिति की स्थिति में तुरंत कार्रवाई करना बताया गया है।

इतनी बड़ी सुरक्षा तैनाती इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कनॉट प्लेस के आसपास मेट्रो स्टेशन, बाजार, सरकारी कार्यालय और महत्वपूर्ण मार्ग मौजूद हैं। किसी भी बड़े जमावड़े का असर आसपास के पूरे इलाके में पड़ सकता है।

सेंट्रल पार्क दो दिन बंद

इस पूरे घटनाक्रम के बीच नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) की ओर से सेंट्रल पार्क को शुक्रवार और शनिवार को आम लोगों के लिए बंद रखने की जानकारी भी सामने आई। प्रशासन ने इसके पीछे प्रशासनिक कारणों का हवाला दिया है।

सेंट्रल पार्क को बंद रखने का फैसला उस समय आया है जब CJP की ओर से इसी स्थान पर ‘लहरा दो तिरंगा’ कार्यक्रम का आह्वान किया गया था। इससे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन की सतर्कता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

पुलिस ने मार्च की अनुमति देने से किया इनकार

पुलिस के अनुसार, कनॉट प्लेस में लागू BNSS की धारा 163 के कारण बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध है। इसी आधार पर प्रस्तावित मार्च को अनुमति नहीं दी गई।

रिपोर्टों के मुताबिक, प्रशासन की ओर से सीमित संख्या में लोगों को किसी वैकल्पिक स्थान पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने की अनुमति देने का विकल्प रखा गया था। हालांकि, CJP की ओर से प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर विवाद जारी रहा।

यहां यह समझना जरूरी है कि निषेधाज्ञा का उद्देश्य किसी खास व्यक्ति या संगठन के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि प्रशासन के अनुसार कानून-व्यवस्था बनाए रखना होता है। किसी भी सार्वजनिक सभा या मार्च के मामले में स्थानीय प्रशासन की अनुमति और लागू प्रतिबंधों का पालन करना आवश्यक होता है।

दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंचा था मामला

‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक भी पहुंचा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने मार्च पर सीधे रोक लगाने का आदेश नहीं दिया था। वहीं दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही थी।

इसके बाद प्रशासन और पुलिस ने कार्यक्रम से पहले सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी। यही वजह है कि शुक्रवार को कनॉट प्लेस के आसपास बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी दिखाई दिए।

दिपके की हिरासत से बढ़ा सियासी तापमान

अभिजीत दिपके की हिरासत के बाद इस पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। CJP की ओर से इसे लेकर प्रतिक्रिया सामने आई, जबकि पुलिस का पक्ष कानून-व्यवस्था और लागू निषेधाज्ञा के पालन पर केंद्रित रहा।

दिपके की हिरासत के समय पुलिस और उनके बीच हुई बातचीत का वीडियो भी सामने आया है। इसमें वह पुलिस से सवाल करते दिखाई देते हैं कि आखिर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों की जा रही है। पुलिस अधिकारियों की ओर से उन्हें क्षेत्र में लागू प्रतिबंधों की जानकारी दी गई।

ट्रैफिक पर भी पड़ सकता है असर

कनॉट प्लेस और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाए जाने का असर यातायात पर भी पड़ने की संभावना है। पुलिस ने संभावित संवेदनशील मार्गों पर बैरिकेडिंग की है और कुछ स्थानों पर यातायात को नियंत्रित करने की तैयारी की गई है।

कनॉट प्लेस के अलावा पटेल चौक, संसद मार्ग और अन्य महत्वपूर्ण मार्गों पर भी सुरक्षा बढ़ाई गई है। ऐसे में शुक्रवार को इन इलाकों से गुजरने वाले लोगों को अतिरिक्त समय लेकर चलने और पुलिस के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

आगे क्या होगा?

अभिजीत दिपके की हिरासत और ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर दिल्ली में स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। एक तरफ CJP अपने कार्यक्रम को लेकर सक्रिय है, वहीं दूसरी ओर पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रस्तावित मार्च के दौरान स्थिति किस दिशा में जाती है और क्या प्रदर्शनकारी वैकल्पिक स्थान या प्रशासन की ओर से सुझाए गए विकल्प को स्वीकार करते हैं। कनॉट प्लेस जैसे संवेदनशील और व्यस्त इलाके में किसी भी बड़े जमावड़े की स्थिति में आम नागरिकों की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।

अभिजीत दिपके की हिरासत ने इस पूरे मामले को और ज्यादा सुर्खियों में ला दिया है। पुलिस कार्रवाई, निषेधाज्ञा, प्रस्तावित तिरंगा मार्च और भारी सुरक्षा तैनाती के बीच अब दिल्ली की नजर इस घटनाक्रम के अगले कदम पर है।

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