बंगाल की खाड़ी में तूफानों की लगी कतार! 1970 से जुड़े इस राज ने वैज्ञानिकों को भी चौंकाया
बंगाल की खाड़ी में मौसम एक बार फिर करवट लेने लगा है। बेहद गंभीर चक्रवाती तूफान अर्णब के कमजोर पड़ने के तुरंत बाद अब दक्षिण अंडमान सागर और उससे सटे अंडमान-निकोबार क्षेत्र में एक नया निम्न दबाव क्षेत्र सक्रिय हो गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार यह सिस्टम पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ सकता है और 31 अक्टूबर के आसपास दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी तथा आसपास के क्षेत्र में डिप्रेशन में बदलने की संभावना है। इसके बाद इसके अगले दो दिनों में आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ने का अनुमान है।
हालांकि, मौजूदा सिस्टम को अभी अर्णब जैसी शक्तिशाली स्थिति वाला तूफान नहीं बताया गया है। फिलहाल यह निम्न दबाव क्षेत्र है और इसके आगे कितना मजबूत होगा, यह आने वाले मौसम संबंधी बदलावों पर निर्भर करेगा। लेकिन एक तूफानी सिस्टम के कमजोर पड़ने के तुरंत बाद दूसरे सिस्टम का सक्रिय होना जरूर मौसम वैज्ञानिकों और तटीय राज्यों के लिए निगरानी का विषय है।
अर्णब के बाद फिर सक्रिय हुआ समुद्र
अर्णब का असर अब काफी कमजोर हो चुका है। IMD के अनुसार अर्णब के अवशेष वाला निम्न दबाव क्षेत्र 30 अक्टूबर को उत्तर छत्तीसगढ़ और उससे सटे पूर्वी मध्य प्रदेश के ऊपर बना हुआ था। इसके साथ जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण भी ऊपरी वायुमंडल में सक्रिय था।
इसी बीच दक्षिण अंडमान सागर में नया निम्न दबाव क्षेत्र बना। 30 अक्टूबर की शाम तक यह दक्षिण अंडमान सागर, उत्तर अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के आसपास सक्रिय था। इसके साथ जुड़ा परिसंचरण करीब 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ था। IMD ने इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने और 31 अक्टूबर के आसपास डिप्रेशन में बदलने की संभावना जताई है।
इसके बाद सिस्टम के आंध्र प्रदेश तट की तरफ बढ़ने की संभावना है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में तटीय आंध्र प्रदेश के मौसम पर विशेष नजर रखी जा रही है।
आंध्र प्रदेश में बढ़ सकती है बारिश की गतिविधि
मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान में तटीय आंध्र प्रदेश के लिए 31 अक्टूबर को गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी है। इसके बाद 1 नवंबर को भारी बारिश और 2-3 नवंबर को बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। 4 नवंबर को भी कुछ इलाकों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है।
रायलसीमा में भी 31 अक्टूबर और 1 नवंबर को गरज-चमक तथा तेज हवाओं की संभावना जताई गई है, जबकि 2 नवंबर को भारी बारिश की चेतावनी है।
समुद्र में सक्रिय सिस्टम के कारण तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों, मछुआरों और समुद्री गतिविधियों से जुड़े लोगों को मौसम विभाग के अपडेट पर लगातार नजर रखने की जरूरत है।
क्या नया सिस्टम अर्णब जैसा खतरनाक होगा?
फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। मौजूदा सिस्टम अभी निम्न दबाव क्षेत्र है। IMD का पूर्वानुमान इसे पहले डिप्रेशन में बदलने की संभावना बताता है, लेकिन इसके आगे चक्रवाती तूफान में बदलने की निश्चित भविष्यवाणी फिलहाल नहीं की गई है।
इसलिए सोशल मीडिया पर अगर इसे तुरंत 'अगला बड़ा चक्रवात' या 'अर्णब से भी खतरनाक तूफान' बताया जा रहा है, तो ऐसी जानकारी को सावधानी से देखना चाहिए।
मौसम प्रणालियां समुद्र के ऊपर तेजी से मजबूत या कमजोर हो सकती हैं। इसलिए अगले कुछ बुलेटिन इस सिस्टम की दिशा और ताकत को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर देंगे।
बंगाल की खाड़ी क्यों बनती है चक्रवातों का बड़ा केंद्र?
बंगाल की खाड़ी लंबे समय से उत्तर हिंद महासागर के सबसे सक्रिय चक्रवाती क्षेत्रों में से एक रही है। वर्ष 1982 से 2022 के बीच के आंकड़ों पर आधारित 2026 में प्रकाशित Scientific Reports के एक अध्ययन के अनुसार, उत्तर हिंद महासागर में बनने वाले उष्णकटिबंधीय चक्रवातों में लगभग 75 प्रतिशत बंगाल की खाड़ी में विकसित होते हैं।
अध्ययन में 1982 से 2022 के बीच बंगाल की खाड़ी में उन 116 निम्न दबाव प्रणालियों का विश्लेषण किया गया जो कम से कम चक्रवाती तूफान की श्रेणी तक पहुंचीं। इनमें 75 सिस्टम यानी करीब 64.6 प्रतिशत मानसून के बाद अक्टूबर से दिसंबर के बीच सक्रिय हुए।
यानी अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर बंगाल की खाड़ी के लिए बेहद महत्वपूर्ण महीने हैं। यही वह समय है जब मानसून की वापसी के बाद समुद्र और वातावरण की परिस्थितियां कई बार चक्रवात बनने के लिए अनुकूल हो जाती हैं।
समुद्र का बढ़ता तापमान क्यों है चिंता की बात?
चक्रवातों को ऊर्जा समुद्र की ऊपरी परत से मिलती है। गर्म समुद्र से वाष्पीकरण बढ़ता है और वातावरण में नमी की उपलब्धता बढ़ सकती है। जब यह नम हवा ऊपर उठती है और संघनित होती है तो उससे निकलने वाली ऊर्जा तूफानी परिसंचरण को मजबूत करने में योगदान देती है।
Scientific Reports में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक 1982 से 2022 के दौरान बंगाल की खाड़ी के समुद्री सतह तापमान में करीब 0.66 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई। इसी अवधि में समुद्र की ऊपरी 100 मीटर परत का औसत तापमान करीब 0.54 डिग्री सेल्सियस बढ़ा।
अध्ययन में यह भी बताया गया है कि बंगाल की खाड़ी में सतह का औसत समुद्री तापमान 1982-2022 के दौरान करीब 28.84 डिग्री सेल्सियस रहा और तापमान में लगातार बढ़ती प्रवृत्ति दिखाई दी।
गंगा-ब्रह्मपुत्र का मीठा पानी भी बनाता है अलग परिस्थिति
बंगाल की खाड़ी की भौगोलिक और समुद्री बनावट भी इसे दूसरे समुद्री क्षेत्रों से अलग बनाती है। गंगा-ब्रह्मपुत्र जैसी बड़ी नदियों से भारी मात्रा में मीठा पानी समुद्र में पहुंचता है।
इससे समुद्र की ऊपरी परत में खारेपन की मात्रा कम रहती है और पानी की परतों के बीच मिश्रण प्रभावित हो सकता है। वैज्ञानिक अध्ययन के मुताबिक ऐसी स्थितियां ऊपरी समुद्री परत में गर्मी को बनाए रखने में भूमिका निभा सकती हैं।
यही कारण है कि समुद्र की सतह के साथ-साथ उसके नीचे की गर्म परत को भी चक्रवात के अध्ययन में महत्वपूर्ण माना जाता है।
सिर्फ चक्रवातों की संख्या नहीं, तेजी से मजबूत होना भी चुनौती
बंगाल की खाड़ी को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात केवल यह नहीं है कि कितने चक्रवाती सिस्टम बनते हैं। वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार पिछले दशकों में चक्रवातों के तेजी से मजबूत होने यानी rapid intensification की प्रवृत्ति में वृद्धि देखी गई है। अध्ययन में बताया गया है कि 2000 के बाद उत्तर हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी में rapid intensification की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है।
इसका मतलब यह है कि किसी सिस्टम को लगातार कई दिनों तक मजबूत होने का इंतजार जरूरी नहीं होता। अनुकूल समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियों में उसकी ताकत अपेक्षाकृत कम समय में बदल सकती है।
यही कारण है कि मौसम विभाग लगातार समुद्र के तापमान, हवा की दिशा, नमी, वायुमंडलीय दबाव और ऊपरी समुद्री गर्मी पर नजर रखता है।
आंध्र प्रदेश और ओडिशा पर क्यों रहती है ज्यादा नजर?
बंगाल की खाड़ी में बनने वाले सिस्टम की दिशा के आधार पर भारत के पूर्वी तट के कई राज्यों पर प्रभाव पड़ सकता है। वैज्ञानिक अध्ययन में आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटों को तेजी से मजबूत होने वाले चक्रवातों के लिए विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में बताया गया है।
मानसून के बाद बनने वाले कई सिस्टम पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हैं। अध्ययन के अनुसार 1982-2022 के दौरान मानसून बाद के 75 चक्रवातों में से 58 यानी 77.33 प्रतिशत ने भारत में लैंडफॉल किया। भारत में ऐसे चक्रवातों के लैंडफॉल के मामले में आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु प्रमुख प्रभावित राज्यों में रहे।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर नया सिस्टम इन राज्यों में ही लैंडफॉल करेगा। हर सिस्टम की दिशा और ताकत अलग होती है।
तापमान के पुराने आंकड़े क्या बताते हैं?
बंगाल की खाड़ी के तापमान में लंबे समय के बदलाव को लेकर उपलब्ध पुराने आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। दिए गए आंकड़ों के अनुसार समुद्र की औसत सतह का तापमान अलग-अलग दशकों में इस तरह रहा:
| अवधि | औसत तापमान |
|---|---|
| 1970-1979 | 28.39°C |
| 1980-1989 | 28.86°C |
| 1990-1999 | 29.31°C |
| 2000-2010 | 29.39°C |
इन आंकड़ों में भी लंबे समय के दौरान तापमान बढ़ने की प्रवृत्ति दिखाई देती है। हालांकि अलग-अलग अध्ययनों में समय अवधि और गणना की पद्धति अलग हो सकती है, इसलिए इन आंकड़ों को नए 1982-2022 अध्ययन के आंकड़ों के साथ सीधे मिलाते समय सावधानी जरूरी है।
अभी क्या है सबसे बड़ा अपडेट?
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि दक्षिण अंडमान सागर का निम्न दबाव क्षेत्र 31 अक्टूबर के आसपास डिप्रेशन में बदल सकता है। इसके बाद इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए आंध्र प्रदेश तट की ओर जाने का अनुमान है।
तटीय आंध्र प्रदेश में 1 नवंबर से बारिश बढ़ने और 2-3 नवंबर को बहुत भारी बारिश की संभावना को देखते हुए मौसम विभाग ने चेतावनियां जारी की हैं।
फिलहाल इसे अर्णब जैसा शक्तिशाली चक्रवात कहना सही नहीं होगा। लेकिन बंगाल की खाड़ी में एक के बाद एक मौसम प्रणालियों की सक्रियता यह जरूर दिखाती है कि मानसून बाद का चक्रवाती मौसम अभी खत्म नहीं हुआ है।
अर्णब के कमजोर पड़ने के बाद बंगाल की खाड़ी में नए निम्न दबाव क्षेत्र का बनना मौसम के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। IMD के मुताबिक यह सिस्टम 31 अक्टूबर के आसपास डिप्रेशन में बदल सकता है और आगे आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ सकता है।
वहीं वैज्ञानिक शोध यह संकेत देता है कि बंगाल की खाड़ी में समुद्र की ऊपरी परतों के गर्म होने और समुद्री-वायुमंडलीय परिस्थितियों में बदलाव से चक्रवातों की तीव्रता और तेजी से मजबूत होने की घटनाओं को समझना भविष्य में और महत्वपूर्ण होगा।
इसलिए आने वाले दिनों में आंध्र प्रदेश और आसपास के तटीय क्षेत्रों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। हालांकि मौजूदा सिस्टम की वास्तविक ताकत और प्रभाव का आकलन अगले कुछ मौसम बुलेटिनों के आधार पर ही अधिक स्पष्ट होगा।
डिस्क्लेमर: मौसम संबंधी प्रणालियों की दिशा और तीव्रता तेजी से बदल सकती है। किसी भी यात्रा या समुद्री गतिविधि से पहले IMD की ताजा चेतावनी और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों को प्राथमिकता दें।

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