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सोना-चांदी में ऐसा भूचाल कि बाजार रह गया दंग! एक झटके में ₹10,000 टूटी चांदी, क्या अभी और गिरेगा भाव?



भारतीय कमोडिटी मार्केट में शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में अचानक जोरदार गिरावट देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना एक साल के निचले स्तर तक फिसल गया, जबकि चांदी भी 50 डॉलर प्रति औंस के नीचे चली गई। घरेलू बाजार में भी इसका सीधा असर दिखाई दिया और MCX पर चांदी में करीब 10 हजार रुपये तक की गिरावट दर्ज की गई। सोने के भाव में भी 4 हजार रुपये से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली।

यह गिरावट ऐसे समय आई है जब देश में त्योहारी सीजन चल रहा है और लोग धनतेरस तथा दिवाली के लिए सोने-चांदी की खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं। कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट ने उन ग्राहकों की उम्मीदें जरूर बढ़ा दी हैं जो लंबे समय से सोने और चांदी के भाव नीचे आने का इंतजार कर रहे थे।

लेकिन सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि सोना और चांदी सस्ता हो गया है। असली सवाल यह है कि क्या यह गिरावट यहीं रुक जाएगी या आने वाले दिनों में कीमती धातुओं की कीमतें और नीचे जा सकती हैं?

रात में अचानक बदला बाजार का रुख

शुक्रवार 30 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी पर भारी बिकवाली देखने को मिली। अमेरिकी बाजार में सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे चला गया और करीब 3,900 डॉलर के आसपास पहुंच गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार के कारोबार में सोना करीब 3.3 फीसदी गिरकर 3,900 डॉलर के नीचे चला गया और लगभग 3,885.70 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। यह अक्टूबर 2025 के बाद इसका सबसे निचला क्लोजिंग स्तर बताया गया है। वहीं चांदी करीब 5.9 फीसदी टूटकर 49 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई।

घरेलू MCX बाजार में भी बिकवाली का असर देखने को मिला। उपलब्ध बाजार आंकड़ों में MCX गोल्ड करीब 1.38 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और सिल्वर करीब 1.79 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास दिखाई दी। कुछ कॉन्ट्रैक्ट में दिन के दौरान सोने में करीब 4,000 रुपये और चांदी में करीब 10,000 रुपये तक की गिरावट दर्ज की गई।

चांदी में 10 हजार रुपये तक की गिरावट

सोने के मुकाबले चांदी में बिकवाली ज्यादा तेज रही। MCX के अलग-अलग कॉन्ट्रैक्ट में चांदी की कीमतों में करीब 5 फीसदी की गिरावट देखी गई।

NDTV Profit की बाजार रिपोर्ट के अनुसार, MCX दिसंबर सिल्वर फ्यूचर में करीब 9,976 रुपये की गिरावट आई और कीमत लगभग 1,79,477 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। वहीं MCX गोल्ड फ्यूचर में करीब 4,206 रुपये की गिरावट दर्ज हुई और भाव लगभग 1,36,762 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया।

इस तेज गिरावट ने बाजार में हलचल बढ़ा दी है। खासकर चांदी के निवेशकों के लिए यह गिरावट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चांदी पहले ही काफी ऊंचे स्तरों से नीचे आ चुकी है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी टूटा अहम स्तर

सिर्फ भारत में ही सोने-चांदी की कीमतें नहीं गिरी हैं। वैश्विक बाजार में भी शुक्रवार को कीमती धातुओं पर भारी दबाव रहा।

सोना 4,000 डॉलर के स्तर से नीचे आने के बाद लगभग 3,900 डॉलर के आसपास पहुंच गया। वहीं चांदी 50 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से भी नीचे फिसल गई।

अमेरिकी बाजार में सोने का फ्यूचर करीब 3,898.90 डॉलर प्रति औंस पर सेटल हुआ। इस गिरावट के साथ सोना अक्टूबर 2025 के बाद सबसे निचले क्लोजिंग स्तर पर पहुंच गया। चांदी भी नवंबर 2025 के बाद अपने सबसे कमजोर स्तरों में रही।

यानी मौजूदा गिरावट को केवल भारतीय बाजार की कमजोरी नहीं माना जा सकता। इसका असर वैश्विक बुलियन मार्केट में भी दिखाई दे रहा है।

भारत में IBJA के नए रेट क्या हैं?

भारत में सोने और चांदी के बेंचमार्क रेट के लिए इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन यानी IBJA के आंकड़े काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

30 अक्टूबर 2026 के IBJA PM रेट के मुताबिक 999 शुद्धता वाले 24 कैरेट सोने की कीमत 1,40,054 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। 22 कैरेट यानी 916 शुद्धता वाले सोने का भाव 1,28,289 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

18 कैरेट यानी 750 शुद्धता वाले सोने का भाव 1,05,041 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। वहीं 999 शुद्धता वाली चांदी का IBJA रेट 1,81,344 रुपये प्रति किलोग्राम रहा।

ध्यान देने वाली बात यह है कि IBJA के ये बेंचमार्क रेट 3 फीसदी GST और ज्वैलरी की मेकिंग चार्ज के बिना होते हैं। इसलिए दुकान पर आभूषण खरीदते समय ग्राहक को वास्तविक भुगतान इससे ज्यादा करना पड़ सकता है।

आखिर अचानक इतनी बड़ी बिकवाली क्यों हुई?

सोने-चांदी की इस गिरावट के पीछे एक नहीं बल्कि कई कारण बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण अमेरिका से आए मजबूत आर्थिक आंकड़े और महंगाई को लेकर बनी चिंता है।

अमेरिकी अर्थव्यवस्था की तीसरी तिमाही की शुरुआती GDP वृद्धि 3.4 फीसदी रही, जो बाजार की करीब 3.2 फीसदी की उम्मीद से ज्यादा थी। इसके साथ ही सितंबर का PCE महंगाई आंकड़ा भी ऊंचा रहा। हेडलाइन PCE महंगाई सालाना आधार पर 3.6 फीसदी और कोर PCE 3.1 फीसदी रहा।

मजबूत आर्थिक वृद्धि और लगातार बनी महंगाई ने निवेशकों के बीच यह चिंता बढ़ाई कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में जल्दी राहत देने के बजाय मौद्रिक नीति को लंबे समय तक सख्त रख सकता है।

फेड के दो अधिकारियों ने ब्याज दर बढ़ाने के पक्ष में वोट दिया

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने 28 अक्टूबर की बैठक में ब्याज दर को 3.75 से 4 फीसदी के दायरे में बनाए रखा। लेकिन इस फैसले में खास बात यह रही कि दो अधिकारियों ने तत्काल 0.25 फीसदी की दर वृद्धि के पक्ष में वोट दिया।

फेड का फैसला 10-2 रहा। गवर्नर लिसा कुक और क्लीवलैंड फेड की अध्यक्ष बेथ हैमैक ने दर बढ़ाने के पक्ष में मतदान किया।

इससे बाजार में यह संदेश गया कि महंगाई को लेकर फेड अभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। अगर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों जैसे सोने पर दबाव बढ़ सकता है।

महंगा कच्चा तेल भी बना परेशानी

सोने की कीमतों पर एक और बड़ा दबाव कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से आया है। तेल महंगा होने से वैश्विक महंगाई को लेकर चिंता बढ़ती है।

30 अक्टूबर को अमेरिकी कच्चा तेल करीब 104 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड लगभग 117.63 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। ऊंचे तेल भाव से बाजार में महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ी।

ऐसे माहौल में निवेशक अपने पोर्टफोलियो में जोखिम और रिटर्न का दोबारा आकलन करते हैं। इसका असर सोने-चांदी जैसे कमोडिटी एसेट पर भी पड़ सकता है।

टेक शेयरों की बिकवाली ने भी बढ़ाई हलचल

शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार में टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में भी तेज गिरावट आई। Nasdaq करीब 2.9 फीसदी गिरा, जबकि S&P 500 में करीब 1.8 फीसदी की गिरावट रही। टेक सेक्टर में भारी बिकवाली ने बाजार में नकदी की मांग और जोखिम से बचने की भावना को बढ़ाया।

बाजार में जब निवेशक तेजी से पोजीशन कम करते हैं तो कई बार सोने जैसी संपत्तियों में भी मुनाफावसूली या लिक्विडेशन देखने को मिलता है।

क्या सोना और चांदी अभी और सस्ता होगा?

यही वह सवाल है जो इस समय सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है। कीमतों में इतनी तेज गिरावट के बाद कुछ निवेशकों को लग रहा है कि शायद अब खरीदारी का मौका बन रहा है। लेकिन बाजार में किसी निश्चित निचले स्तर की गारंटी नहीं है।

सोने ने 4,000 डॉलर का अहम स्तर तोड़ दिया है और शुक्रवार को करीब 3,900 डॉलर के नीचे बंद हुआ। इससे तकनीकी रूप से बाजार में कमजोरी का संकेत जरूर मिला है।

दूसरी ओर, अगर आने वाले दिनों में अमेरिकी महंगाई के आंकड़े नरम पड़ते हैं, फेड के रुख में बदलाव आता है या डॉलर और ब्याज दरों पर दबाव कम होता है, तो सोने और चांदी में फिर से खरीदारी लौट सकती है।

इसलिए मौजूदा गिरावट को देखकर यह कहना जल्दबाजी होगी कि सोने और चांदी का अंतिम निचला स्तर आ चुका है।

धनतेरस और दिवाली से पहले ग्राहकों के लिए क्या संकेत?

भारत में धनतेरस और दिवाली के समय सोना-चांदी खरीदने की परंपरा बेहद मजबूत है। इस साल कीमतों में आई तेज गिरावट ग्राहकों के लिए आकर्षक जरूर दिखाई दे रही है।

लेकिन अगर कोई ग्राहक केवल कीमत में गिरावट देखकर खरीदारी करने की सोच रहा है तो उसे यह समझना चाहिए कि बाजार अभी काफी अस्थिर है। अंतरराष्ट्रीय कीमत, डॉलर, अमेरिकी ब्याज दरों, कच्चे तेल और वैश्विक घटनाक्रम का असर भारतीय सोने-चांदी के भाव पर पड़ सकता है।

यानी शुक्रवार की गिरावट ने बाजार में एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या सोना और चांदी अब सस्ते स्तर पर पहुंच चुके हैं या असली गिरावट अभी बाकी है?

फिलहाल बाजार में इसका निश्चित जवाब नहीं है। लेकिन इतना जरूर है कि सोने का 4,000 डॉलर के नीचे जाना और चांदी का 50 डॉलर से नीचे फिसलना वैश्विक बुलियन मार्केट के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। आने वाले कारोबारी सत्रों में कीमतों की दिशा इस बात पर काफी हद तक निर्भर करेगी कि निवेशक अमेरिकी महंगाई, ब्याज दरों, डॉलर और वैश्विक जोखिमों को किस तरह देखते हैं।

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