दिवाली से पहले यूपी में बिजली को लेकर बड़ा खेल! गांव से शहर तक होगी रोशनी, सरकार ने अचानक क्यों बढ़ाई निगरानी?
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में त्योहारों का मौसम शुरू हो चुका है और इसी के साथ बिजली विभाग ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। दशहरा, दीपावली और छठ जैसे बड़े पर्वों के दौरान घरों, बाजारों और धार्मिक स्थलों पर रोशनी के लिए बिजली की मांग बढ़ जाती है। इसे देखते हुए प्रदेश में बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। गांवों से लेकर शहरों तक निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
इसके लिए उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी यूपीपीसीएल की टीमें प्रदेश के सभी प्रमुख डिस्कॉम क्षेत्रों में लगातार काम कर रही हैं। बिजली लाइनों की मरम्मत से लेकर ट्रिपिंग रोकने और पेड़ों की शाखाओं की छंटाई तक का काम किया जा रहा है।
त्योहारों पर बिजली कटौती से राहत देने की तैयारी
त्योहारों के दौरान बिजली की मांग सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ सकती है। घरों में सजावट, दुकानों और बाजारों में रोशनी, धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के कारण बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ऐसे में किसी बड़े फॉल्ट या ट्रिपिंग की स्थिति में त्योहार का माहौल प्रभावित न हो, इसके लिए विभाग पहले से ही जरूरी तैयारियां कर रहा है।
सरकार की योजना सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। गांव, कस्बे, तहसील, नगर पालिका और नगर निगम क्षेत्रों तक बिजली व्यवस्था की निगरानी बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों और कर्मचारियों को स्थानीय स्तर पर सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं।
विभाग की कोशिश है कि त्योहारों के दौरान बिजली की आपूर्ति में किसी तरह की बड़ी बाधा न आए और उपभोक्ताओं को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े।
बिजली लाइनों के आसपास पेड़ों की कटाई-छंटाई
त्योहारों के दौरान बिजली आपूर्ति में बाधा का एक बड़ा कारण कई बार बिजली लाइनों के संपर्क में आने वाली पेड़ों की शाखाएं बनती हैं। तेज हवा, बारिश या किसी अन्य कारण से शाखाओं के तारों से टकराने पर फॉल्ट और ट्रिपिंग की समस्या पैदा हो सकती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के विभिन्न इलाकों में बिजली लाइनों के आसपास पेड़ों की शाखाओं की कटाई-छंटाई कराई जा रही है। इसका उद्देश्य यह है कि त्योहारों के दौरान बिजली की लाइनें सुरक्षित रहें और अचानक होने वाली ट्रिपिंग को कम किया जा सके।
इसके अलावा बिजली के पोल, तार और अन्य जरूरी उपकरणों की भी जांच की जा रही है। जहां कहीं मरम्मत की जरूरत है, वहां त्योहारों से पहले काम पूरा करने की कोशिश की जा रही है।
22,540 मेगावाट बिजली की मांग पूरी
बिजली की मांग और उपलब्धता को लेकर भी विभाग लगातार निगरानी कर रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 18 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश में करीब 22,540 मेगावाट बिजली की मांग के अनुरूप आपूर्ति की गई।
इससे पहले 17 अक्टूबर को करीब 23,738 मेगावाट और 16 अक्टूबर को करीब 23,372 मेगावाट की मांग पूरी की गई थी।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि प्रदेश में बिजली की बढ़ती जरूरत को पूरा करने के लिए विभाग लगातार व्यवस्था पर नजर रख रहा है। त्योहारों के दौरान मांग में अचानक बढ़ोतरी होने की संभावना को देखते हुए भी आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत रखने पर जोर दिया जा रहा है।
पांचों डिस्कॉम क्षेत्रों में तेज हुआ काम
उत्तर प्रदेश में बिजली वितरण व्यवस्था अलग-अलग डिस्कॉम क्षेत्रों के माध्यम से संचालित होती है। त्योहारों से पहले इन क्षेत्रों में मेंटेनेंस और निगरानी का काम तेज किया गया है।
पूर्वांचल, मध्यांचल, पश्चिमांचल और दक्षिणांचल समेत संबंधित डिस्कॉम क्षेत्रों में बिजली लाइनों और बुनियादी ढांचे की देखरेख की जा रही है। साथ ही स्थानीय टीमों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
इसका मकसद यह है कि किसी क्षेत्र में तकनीकी समस्या आने पर उसे जल्द से जल्द ठीक किया जा सके और लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित न हो।
दशहरा पर गांवों में भी 24 घंटे बिजली
दशहरा के अवसर पर ग्रामीण क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 20 अक्टूबर को दशहरा के अवसर पर गांवों से लेकर शहरों तक 24 घंटे बिजली आपूर्ति बनाए रखने की तैयारी की गई है।
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि त्योहारों के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिजली की मांग बढ़ जाती है। घरों में सजावट के साथ-साथ बाजारों और धार्मिक स्थलों पर भी अतिरिक्त बिजली की जरूरत होती है।
विभाग की कोशिश है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच बिजली आपूर्ति को लेकर किसी तरह का बड़ा अंतर न रहे।
दीपावली पर बढ़ेगी बिजली की मांग
दशहरा के बाद दीपावली का पर्व आएगा। दीपावली पर घरों, दुकानों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर बड़े स्तर पर रोशनी की जाती है। इसके चलते बिजली की मांग सामान्य दिनों के मुकाबले बढ़ सकती है।
विभाग इस अतिरिक्त मांग को ध्यान में रखते हुए पहले से तैयारी कर रहा है। बिजली आपूर्ति की निगरानी के साथ-साथ लाइनों और उपकरणों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
सरकार की कोशिश है कि दीपावली के दौरान बिजली की कमी या बार-बार ट्रिपिंग जैसी समस्या उपभोक्ताओं को कम से कम परेशान करे।
छठ पर्व को लेकर भी तैयारी
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में छठ पूजा बड़े स्तर पर मनाई जाती है। खासकर पूर्वांचल और आसपास के क्षेत्रों में घाटों तथा धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। ऐसे में छठ के दौरान भी बिजली की जरूरत बढ़ती है।
सरकार की तैयारियां सिर्फ दीपावली तक सीमित नहीं हैं। छठ समेत आगामी त्योहारों के दौरान भी निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने की योजना पर काम चल रहा है।
घाटों और आसपास के क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था की निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में लोग सार्वजनिक स्थानों पर एकत्र होते हैं।
रामलीला और शोभायात्रा वाले इलाकों पर भी नजर
त्योहारों के दौरान बिजली व्यवस्था के साथ सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जा रहा है। रामलीला स्थलों, दशहरा मेलों, शोभायात्रा मार्गों और अन्य सार्वजनिक आयोजनों के आसपास बिजली के तारों और पोलों की स्थिति की जांच की जा रही है।
जहां बिजली के तार ढीले या झुके हुए हैं, उन्हें दुरुस्त करने और संभावित खतरों को पहले से दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य बिजली आपूर्ति बनाए रखने के साथ-साथ विद्युत दुर्घटनाओं की आशंका को भी कम करना है।
स्थानीय फॉल्ट होने पर क्या करें?
सरकार और बिजली विभाग की ओर से निर्बाध आपूर्ति की तैयारी की जा रही है, लेकिन किसी भी बड़े विद्युत नेटवर्क में स्थानीय स्तर पर तकनीकी खराबी की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं की जा सकती।
किसी इलाके में ट्रांसफार्मर, लाइन या अन्य उपकरण में अचानक खराबी आने पर कुछ समय के लिए आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं को घबराने के बजाय अपने स्थानीय बिजली विभाग से जानकारी लेनी चाहिए।
विभागीय टीमें फॉल्ट को जल्द से जल्द दूर करने के लिए सक्रिय रहेंगी। उपभोक्ताओं को भी बिजली के तारों या उपकरणों से छेड़छाड़ करने के बजाय विभाग को सूचना देनी चाहिए।
त्योहारों की रोशनी बरकरार रखने की तैयारी
उत्तर प्रदेश में दशहरा, दीपावली और छठ को देखते हुए बिजली विभाग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। 20 अक्टूबर को दशहरा के अवसर पर गांवों से शहरों तक बिजली आपूर्ति बनाए रखने पर विशेष जोर है।
इसके साथ ही पांचों डिस्कॉम क्षेत्रों में लाइनों, उपकरणों और बिजली के बुनियादी ढांचे की निगरानी की जा रही है। पेड़ों की शाखाओं की छंटाई, लाइनों की मरम्मत और स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ाने जैसे कदम इसी तैयारी का हिस्सा हैं।
18 अक्टूबर को 22,540 मेगावाट की मांग के अनुरूप आपूर्ति किए जाने के बाद विभाग का फोकस अब आने वाले त्योहारों में बढ़ने वाली मांग को संभालने पर है।
कुल मिलाकर इस बार उत्तर प्रदेश में त्योहारों की रोशनी को लगातार बनाए रखने के लिए बिजली विभाग ने पहले से कमर कस ली है। हालांकि किसी भी स्थानीय तकनीकी खराबी की स्थिति में किसी खास क्षेत्र की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसे में उपभोक्ताओं को स्थानीय स्तर पर बिजली विभाग से मिलने वाले अपडेट पर ध्यान देना चाहिए।

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