रबी सीजन शुरू होने से पहले किसानों के लिए बड़ा ऐलान! 10 राज्यों को मिला ₹1,200 करोड़ से ज्यादा का फंड, जानिए किसके खाते में पहुंचा सबसे बड़ा हिस्सा
देश में खरीफ सीजन की फसलों की कटाई शुरू होने के साथ ही रबी सीजन की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। गेहूं, चना, मसूर, सरसों और दूसरी रबी फसलों की बुवाई के लिए किसानों को खेत तैयार करने से लेकर बीज, खाद और सिंचाई तक कई तरह की व्यवस्थाएं करनी पड़ती हैं। इसी बीच केंद्र सरकार ने रबी अभियान 2026 की तैयारियों को लेकर 10 राज्यों के लिए बड़ी वित्तीय सहायता को मंजूरी दी है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026 के दौरान 10 राज्यों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना यानी PM-RKVY के तहत ₹1,200 करोड़ से अधिक की वित्तीय मंजूरी के पत्र सौंपे हैं। सरकार का उद्देश्य राज्यों को समय पर कृषि योजनाओं के लिए संसाधन उपलब्ध कराना है, ताकि योजनाओं को जमीन पर लागू करने में देरी न हो।
यह खबर ऐसे समय में आई है जब देश के कई हिस्सों में किसान रबी फसलों की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में बीज, खाद, सिंचाई, मिट्टी की जांच और फसल विविधीकरण जैसे मुद्दों पर सरकार का विशेष जोर है।
इन 10 राज्यों को मिला फंड
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत जिन 10 राज्यों को वित्तीय मंजूरी दी गई है, उनमें पश्चिम बंगाल, हरियाणा, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, मिजोरम, हिमाचल प्रदेश, झारखंड और पंजाब शामिल हैं।
राज्यवार स्वीकृत राशि इस प्रकार है—
| राज्य | मंजूर राशि |
|---|---|
| पश्चिम बंगाल | ₹290 करोड़ |
| हरियाणा | ₹198 करोड़ |
| छत्तीसगढ़ | ₹181 करोड़ |
| अरुणाचल प्रदेश | ₹154 करोड़ |
| बिहार | ₹114 करोड़ |
| कर्नाटक | ₹104 करोड़ |
| मिजोरम | ₹75 करोड़ |
| हिमाचल प्रदेश | ₹64 करोड़ |
| झारखंड | ₹58 करोड़ |
| पंजाब | ₹43 करोड़ |
इस सूची में पश्चिम बंगाल को सबसे अधिक राशि मिली है। इसके बाद हरियाणा और छत्तीसगढ़ का स्थान है। अरुणाचल प्रदेश को भी 154 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण राशि स्वीकृत हुई है।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि यह राशि सीधे हर किसान के खाते में भेजी जाने वाली नकद सहायता नहीं है। यह कृषि विकास योजनाओं के लिए राज्यों को स्वीकृत फंड है, जिसका इस्तेमाल संबंधित योजनाओं और परियोजनाओं के तहत किया जाएगा।
रबी सीजन में क्यों खास है यह मदद?
रबी फसलों की बुवाई आमतौर पर खरीफ फसलों की कटाई के बाद शुरू होती है। गेहूं, चना, मसूर, सरसों और जौ जैसी फसलें रबी मौसम की प्रमुख फसलों में शामिल हैं।
रबी सीजन की शुरुआत में किसानों के सामने कई तरह के खर्च होते हैं। खेत की जुताई, बीज खरीदना, खाद डालना, सिंचाई की व्यवस्था करना और जरूरत के अनुसार कृषि मशीनरी का इस्तेमाल करना किसानों की लागत बढ़ाता है।
ऐसे में राज्य स्तर पर कृषि विकास के लिए उपलब्ध फंड का महत्व बढ़ जाता है। इससे कृषि क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं, बुनियादी सुविधाओं और किसानों तक जरूरी संसाधन पहुंचाने के काम को गति मिल सकती है।
दलहन की खेती पर सरकार का जोर
इस बार कृषि रणनीति में दलहन की खेती को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। तुअर, उड़द और मसूर जैसी दालों का उत्पादन बढ़ाने की दिशा में सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
भारत में दालों की मांग काफी अधिक है। ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ाना महत्वपूर्ण माना जाता है। किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार दलहन की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
दलहन फसलों का एक फायदा यह भी है कि कई दलहन फसलें मिट्टी में नाइट्रोजन की उपलब्धता को बेहतर करने में मदद कर सकती हैं। हालांकि, कौन सी फसल किस क्षेत्र में बेहतर रहेगी, इसका फैसला मिट्टी, पानी, मौसम और बाजार की स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
खरीफ के बाद खाली खेतों पर भी नजर
कई इलाकों में खरीफ फसल की कटाई के बाद खेत कुछ समय के लिए खाली रह जाते हैं। सरकार चाहती है कि उपलब्ध कृषि भूमि का अधिक प्रभावी तरीके से इस्तेमाल किया जाए।
जहां परिस्थितियां अनुकूल हों, वहां किसान रबी सीजन में दूसरी फसल लेकर अपनी कृषि गतिविधि को आगे बढ़ा सकते हैं।
लेकिन किसानों को सिर्फ उत्पादन बढ़ाने के लिए किसी भी फसल की बुवाई नहीं करनी चाहिए। पानी की उपलब्धता, मिट्टी की गुणवत्ता, बाजार की मांग और फसल की लागत को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।
नकली खाद और बीज पर सख्ती
रबी सीजन में बीज, खाद और कीटनाशकों की मांग तेजी से बढ़ती है। इसी वजह से इस दौरान किसानों को नकली या घटिया कृषि सामग्री से सावधान रहने की जरूरत होती है।
केंद्र सरकार ने राज्यों को कृषि सामग्री की गुणवत्ता पर निगरानी बढ़ाने और नकली खाद, घटिया बीज तथा निम्न गुणवत्ता वाले कीटनाशकों के खिलाफ कार्रवाई करने पर जोर दिया है।
किसानों को भी कृषि सामग्री खरीदते समय सावधानी बरतनी चाहिए। किसी अधिकृत या विश्वसनीय विक्रेता से सामान खरीदना बेहतर होता है।
बीज या खाद खरीदते समय किसान को पक्का बिल जरूर लेना चाहिए।
इसके अलावा पैकेट पर कंपनी का नाम, बैच नंबर, निर्माण और वैधता संबंधी जानकारी भी जांचनी चाहिए।
फोर्स टैगिंग पर भी नजर
कृषि सामग्री की खरीद के दौरान किसानों के सामने फोर्स टैगिंग की समस्या भी आ सकती है। इसमें किसी जरूरी उत्पाद के साथ कोई दूसरा उत्पाद खरीदने के लिए ग्राहक को मजबूर किया जाता है।
अगर कोई दुकानदार किसान को जबरदस्ती अतिरिक्त सामान खरीदने के लिए कहता है तो किसान को खरीद का बिल और अन्य दस्तावेज संभालकर रखने चाहिए।
किसी भी तरह की शिकायत होने पर संबंधित कृषि विभाग या प्रशासन के सामने मामला उठाया जा सकता है।
मिट्टी की जांच से बचेगा पैसा
रबी की फसल लगाने से पहले मिट्टी की जांच करना किसानों के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है।
मिट्टी परीक्षण से यह पता लगाया जा सकता है कि खेत में कौन से पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में हैं और किनकी कमी है। इसके आधार पर किसान खाद और उर्वरक का इस्तेमाल कर सकता है।
अंधाधुंध खाद डालने से उत्पादन बढ़ेगा, यह जरूरी नहीं है। जरूरत से ज्यादा खाद डालने पर खेती की लागत बढ़ सकती है और लंबे समय में मिट्टी की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।
इसलिए मिट्टी की जरूरत के अनुसार संतुलित उर्वरक इस्तेमाल करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
किसान क्रेडिट कार्ड भी अहम
रबी सीजन में किसानों को खेती के लिए अतिरिक्त कार्यशील पूंजी की जरूरत होती है। बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई जैसे खर्चों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड महत्वपूर्ण वित्तीय साधन हो सकता है।
सरकार की ओर से पात्र किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।
किसानों को अपने क्षेत्र में उपलब्ध KCC सुविधाओं और संबंधित नियमों की जानकारी बैंक या कृषि विभाग से लेनी चाहिए।
फसल बीमा को न भूलें किसान
खेती में मौसम सबसे बड़ा जोखिम होता है। बारिश, सूखा, ओलावृष्टि, बाढ़ या अन्य प्राकृतिक परिस्थितियों से फसल प्रभावित हो सकती है।
ऐसे में पात्र किसानों के लिए फसल बीमा आर्थिक सुरक्षा का एक माध्यम हो सकता है।
किसानों को अपने क्षेत्र में लागू फसल बीमा योजना, प्रीमियम, फसल कवरेज और दावा प्रक्रिया के बारे में समय पर जानकारी लेनी चाहिए।
किसानों को क्या करना चाहिए?
रबी सीजन की तैयारी कर रहे किसानों को अभी से कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने चाहिए।
सबसे पहले खेत की मिट्टी की जांच कराएं। इसके बाद स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह से फसल और बीज का चुनाव करें।
प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण बीज खरीदें। खाद और कीटनाशक खरीदते समय पक्का बिल जरूर लें। पैकेट की जानकारी अच्छी तरह जांचें।
सिंचाई की उपलब्धता के हिसाब से फसल का चुनाव करें और जरूरत से ज्यादा उर्वरक डालने से बचें।
इसके अलावा किसान क्रेडिट कार्ड, फसल बीमा और अपने क्षेत्र में चल रही कृषि योजनाओं की जानकारी संबंधित विभाग से जरूर लें।
अब असली नजर होगी जमीन पर
रबी सीजन से पहले 10 राज्यों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत ₹1,200 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता की मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य कृषि योजनाओं को गति देना और राज्यों में कृषि क्षेत्र के लिए जरूरी संसाधनों को मजबूत करना है।
अब इस पूरी योजना की असली परीक्षा जमीन पर होगी। किसानों तक कृषि सामग्री, तकनीकी सहायता, योजनाओं की जानकारी और दूसरी सुविधाएं कितनी तेजी से पहुंचती हैं, यह आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा।
रबी सीजन में बीज, खाद, सिंचाई, मिट्टी की जांच, दलहन की खेती, नकली कृषि सामग्री पर कार्रवाई और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने जैसे मुद्दे सबसे महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि किसान किसी भी सरकारी योजना के नाम पर किसी अनधिकृत व्यक्ति को पैसे न दें और किसी भी कृषि सामग्री की खरीद में बिल जरूर लें।
रबी की अच्छी पैदावार केवल ज्यादा खाद और महंगे बीज से नहीं, बल्कि सही फसल चयन, स्वस्थ मिट्टी, गुणवत्तापूर्ण बीज, संतुलित उर्वरक, पर्याप्त सिंचाई और वैज्ञानिक खेती के सही तालमेल से तय होती है।

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