4 साल तक पति की लाश के साथ एक ही बिस्तर पर सोती रही महिला, बच्चों को दी खौफनाक धमकी… घर का राज खुला तो मचा हड़कंप
मॉस्को/सेंट पीटर्सबर्ग: रूस से सामने आई एक बेहद हैरान करने वाली घटना ने लोगों को स्तब्ध कर दिया। रिपोर्टों के मुताबिक, लेनिनग्राद क्षेत्र के एक गांव में एक महिला ने अपने पति की मौत के बाद उसके शव को लगभग चार साल तक घर में छिपाकर रखा। दावा है कि महिला उसी कमरे में रहती थी और मृत पति के ममीकृत हो चुके अवशेषों के साथ एक ही बिस्तर पर सोती थी।
मामला उस समय सामने आया जब सामाजिक कार्यकर्ता परिवार के बच्चों की स्थिति जानने के लिए घर पहुंचे। घर की जांच के दौरान उन्हें मृत व्यक्ति के अवशेष मिले। रिपोर्टों के अनुसार, महिला के चार बच्चे भी उसी घर में रहते थे। इनमें 17 और 8 साल की दो बेटियां तथा 11 साल के जुड़वां बेटे शामिल थे।
इस घटना ने इसलिए भी लोगों का ध्यान खींचा क्योंकि रिपोर्टों में दावा किया गया कि महिला ने बच्चों को पिता की मौत के बारे में किसी को बताने से रोक दिया था। कथित तौर पर उसने बच्चों को डराया था कि अगर उन्होंने किसी के सामने यह बात बताई तो उन्हें अनाथालय या मानसिक स्वास्थ्य संस्थान भेज दिया जाएगा।
2020 में हुई थी पति की मौत
रूसी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, महिला के पति व्लादिमीर की दिसंबर 2020 में मौत हुई थी। उस समय उनकी उम्र करीब 49 वर्ष बताई गई। रिपोर्टों के मुताबिक, पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था और इसी दौरान व्लादिमीर अचानक गिर पड़े।
शुरुआती रिपोर्टों में कहा गया कि महिला ने पहले यह समझा कि उसका पति केवल बेहोश होने का नाटक कर रहा है। कुछ घंटों बाद परिवार की बड़ी बेटी को शक हुआ कि मामला गंभीर है। इसके बाद कथित तौर पर महिला ने शव को कंबल में लपेटकर अपने कमरे में पहुंचा दिया।
इसके बाद परिवार के भीतर इस घटना को छिपाकर रखने की कोशिश की गई। रिपोर्टों के मुताबिक, बच्चों को अपने पिता के बारे में किसी से बात नहीं करने के लिए कहा गया।
हालांकि, पति की मौत के वास्तविक कारण को लेकर भी जांच की गई। रूस की जांच एजेंसियों ने कहा था कि मामले में शव की फोरेंसिक जांच और अन्य सत्यापन प्रक्रियाओं के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इसलिए मौत की परिस्थितियों को लेकर सामने आए अलग-अलग दावों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
चार साल तक घर में रखा रहा शव
पति की मौत के बाद आम तौर पर अंतिम संस्कार किया जाना था, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार ऐसा नहीं हुआ। महिला ने शव को अपने घर के एक कमरे में रखा और समय बीतने के साथ शव सूखकर ममीकृत अवस्था में पहुंच गया।
सबसे हैरान करने वाली बात यह बताई गई कि महिला उस शव को अपने पास रखती थी और उसके साथ ही बिस्तर पर सोती थी। करीब चार वर्षों तक यह स्थिति बनी रही।
एक रूसी रिपोर्ट के हवाले से बताया गया कि महिला अपने पति को खोना नहीं चाहती थी और उसे उम्मीद थी कि वह किसी दिन दोबारा जाग सकता है। रिपोर्टों में उसके हवाले से यह भी कहा गया कि वह चाहती थी कि उसका पति उसके करीब रहे, ताकि वह उसे देख सके।
यह दावा घटना के भावनात्मक पहलू को सामने लाता है, लेकिन महिला की वास्तविक मानसिक स्थिति का आकलन केवल इन बयानों के आधार पर नहीं किया जा सकता।
सामाजिक कार्यकर्ताओं के पहुंचने पर खुला राज
कई वर्षों तक शव घर में होने के बावजूद यह मामला सामने नहीं आया। रिपोर्टों के अनुसार, सामाजिक कार्यकर्ता परिवार के नाबालिग बच्चों की स्थिति की जांच के लिए घर पहुंचते थे।
बताया गया कि सामाजिक कार्यकर्ता पहले भी कई बार परिवार के घर जा चुके थे, लेकिन उन्हें उस समय शव के बारे में पता नहीं चला। बाद में एक निरीक्षण के दौरान घर की स्थिति पर संदेह हुआ और जांच आगे बढ़ी।
इसके बाद अधिकारियों को घर के अंदर मृत व्यक्ति के अवशेष मिले। इस खोज के साथ ही कई सालों से छिपा यह रहस्य सामने आ गया।
घर की तलाशी में मिलीं रहस्यमय चीजें
शव मिलने के बाद जब घर की तलाशी ली गई तो अधिकारियों को कई ऐसी वस्तुएं मिलीं, जिनका संबंध कथित तौर पर तंत्र-मंत्र या गूढ़ अनुष्ठानों से जोड़ा गया।
रिपोर्टों के अनुसार, घर में टैरो कार्ड, ताबीज, जानवरों की खोपड़ी से संबंधित तस्वीरें और अन्य रहस्यमय वस्तुएं मिलीं। शव के पास मिस्र से जुड़ा एक क्रॉस भी होने की बात कही गई है। इसके अलावा एक कमरे में प्राचीन मिस्र के देवता अनुबिस से जुड़ा एक तरह का पूजा स्थल या वेदी होने की जानकारी भी सामने आई।
अनुबिस को प्राचीन मिस्र की धार्मिक परंपरा में मृत्यु और अंतिम संस्कार से जुड़े देवता के रूप में जाना जाता है। इसी वजह से घर में उससे जुड़ी वस्तुओं की मौजूदगी ने मामले को और रहस्यमय बना दिया।
शव को सुरक्षित रखने के लिए किए जाते थे कथित अनुष्ठान
रिपोर्टों में दावा किया गया कि महिला अपने पति के शव को संरक्षित रखने के लिए कथित तौर पर कुछ अनुष्ठान करती थी। उसका मानना था कि ऐसा करना उसके पति की इच्छा के अनुरूप था।
हालांकि इन कथित अनुष्ठानों के बारे में अलग-अलग रिपोर्टों में अलग विवरण सामने आए हैं। इसलिए इनके वास्तविक स्वरूप और उद्देश्य को लेकर आधिकारिक जांच के निष्कर्ष का इंतजार करना जरूरी है।
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि किसी धार्मिक या गूढ़ वस्तु की मौजूदगी अपने आप में किसी अपराध का प्रमाण नहीं होती। मामले में पुलिस की जांच और फोरेंसिक रिपोर्ट ही यह स्पष्ट कर सकती है कि वास्तव में क्या हुआ था।
पड़ोसियों को बताया था कि पति इलाज के लिए बाहर है
रिपोर्टों के अनुसार, महिला ने आसपास के लोगों को यह बताया था कि उसका पति वैकल्पिक इलाज के लिए तिब्बत गया हुआ है। इस दावे की वजह से लंबे समय तक लोगों को उसके पति की वास्तविक स्थिति के बारे में पता नहीं चला।
रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि व्लादिमीर को पैरों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्या थी और वह कथित तौर पर ठंड के मौसम में भी जूते पहनने से बचता था। इस वजह से महिला द्वारा इलाज के लिए बाहर जाने की बात कहे जाने पर कुछ लोगों को तत्काल संदेह नहीं हुआ।
बच्चों की सुरक्षा भी बनी चिंता
मामले के सामने आने के बाद सबसे बड़ी चिंता परिवार के चार बच्चों को लेकर थी। रिपोर्टों के अनुसार, सभी बच्चों को चिकित्सकीय मूल्यांकन के लिए भेजा गया। अधिकारियों ने बच्चों की परिस्थितियों और उनकी सुरक्षा को भी जांच का हिस्सा बनाया।
बच्चों को कथित तौर पर पिता की मौत के बारे में किसी को बताने से रोका गया था। अगर यह दावा जांच में सही पाया जाता है, तो यह बच्चों पर पड़े मानसिक और भावनात्मक प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
महिला का भी कराया गया मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शव मिलने के बाद महिला को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मूल्यांकन के लिए अस्पताल ले जाया गया। कुछ रिपोर्टों में उसके पहले से मनोवैज्ञानिक निगरानी में रहने और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी आनुवंशिक जोखिम का दावा किया गया है। हालांकि यह बेहद संवेदनशील चिकित्सकीय जानकारी है और इसे महिला की वर्तमान मानसिक स्थिति का निश्चित प्रमाण नहीं माना जा सकता।
किसी व्यक्ति की मानसिक स्वास्थ्य स्थिति का निर्धारण केवल मीडिया रिपोर्ट या उसके असामान्य व्यवहार को देखकर नहीं किया जा सकता। इसके लिए विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत चिकित्सकीय मूल्यांकन आवश्यक होता है।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी पूरी सच्चाई
रूस की जांच एजेंसियों के अनुसार, मामले में शव की फोरेंसिक जांच और अन्य सत्यापन प्रक्रियाओं के बाद ही यह तय किया जाना था कि घटना की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और आगे कोई कानूनी कार्रवाई बनती है या नहीं।
इसलिए पति की मौत के कारण, महिला की भूमिका और घर में किए गए कथित अनुष्ठानों से जुड़े सभी पहलुओं को जांच के अंतिम निष्कर्ष से पहले निश्चित तथ्य के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
रूस के लेनिनग्राद क्षेत्र से सामने आई यह घटना कई स्तरों पर हैरान करने वाली है। एक महिला द्वारा कथित तौर पर अपने पति के शव को लगभग चार वर्षों तक घर में रखना, बच्चों को इस बारे में चुप रहने के लिए कहना और घर में कथित गूढ़ वस्तुओं का मिलना मामले को बेहद असामान्य बनाता है।
सबसे अहम सवाल अब यही है कि व्लादिमीर की मौत वास्तव में किन परिस्थितियों में हुई, महिला ने शव को इतने लंबे समय तक क्यों रखा और परिवार के बच्चों पर इस पूरे घटनाक्रम का क्या प्रभाव पड़ा। इन सवालों का अंतिम जवाब जांच और फोरेंसिक रिपोर्ट से ही सामने आ सकता है।
यह खबर 2024 में प्रकाशित रूसी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। घटना से जुड़े कुछ दावे जांच के दौरान सामने आए थे और उन्हें अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित किसी भी दावे को चिकित्सकीय निदान के रूप में न लिया जाए।

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