नेपाल की बाढ़ में बिछड़ गई पत्नी, पति के सामने लौटकर आई तो छलक पड़े आंसू… फिर जो हुआ, उसे चमत्कार कह रहे लोग
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने हजारों परिवारों को तबाह कर दिया। कहीं पूरा गांव बह गया तो कहीं लोग अपने ही परिवार के सदस्यों से बिछड़ गए। इसी भयावह आपदा के बीच एक परिवार की कहानी सामने आई है, जिसने पहले उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन करीब ढाई दिन बाद ऐसा चमत्कार हुआ कि मां-बाप की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।
यह कहानी नेपाल के रसुवा जिले के तिमुरे इलाके की है, जहां बाढ़ ने देखते ही देखते घरों और बस्तियों को मलबे में बदल दिया। इसी इलाके में रहने वाले लोक बहादुर उचाई मगर और उनकी पत्नी गीता के लिए 26 अगस्त की सुबह किसी डरावने सपने से कम नहीं थी। उनकी पांच साल की बेटी मनीषा उस समय घर में थी। बाढ़ का पानी और मलबा इतनी तेजी से आया कि परिवार को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
अचानक आई पानी की दीवार और बिखर गया परिवार
लोक बहादुर ने बताया कि बाढ़ किसी सामान्य नदी के उफान जैसी नहीं थी। उन्हें ऐसा लगा जैसे पहाड़ की तरफ से पानी की एक विशाल दीवार उनकी ओर आ रही हो। वह अपनी जान बचाने के लिए भागे, लेकिन महज कुछ सेकंड में उनका घर ढह गया और पानी के तेज बहाव में बह गया।
लोक ने अपनी बेटी को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन वह उसे नहीं बचा सके। कुछ ही पलों में परिवार एक-दूसरे से अलग हो गया।
लोक जंगल की ओर भाग निकले। इसी दौरान उनकी पत्नी गीता भी किसी तरह वहां पहुंचीं। करीब दोपहर दो बजे दोनों की मुलाकात हुई। लेकिन पति को देखते ही पत्नी ने सबसे पहले यही सवाल किया—बच्ची कहां है?
जब लोक ने बताया कि उन्हें मनीषा के बारे में कोई जानकारी नहीं है, तो गीता फूट-फूटकर रोने लगीं। वह कुछ मिनटों के लिए बेहोश तक हो गईं। दोनों को लगने लगा था कि शायद उनकी पांच साल की बेटी बाढ़ की चपेट में आ चुकी है।
लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनकी बेटी अभी जिंदा है।
करीब 60 घंटे तक मलबे में फंसी रही पांच साल की बच्ची
बाढ़ के बाद राहत और बचाव दल तबाह हो चुके इलाके में लगातार खोज अभियान चला रहे थे। हर तरफ कीचड़, पत्थर, टूटे मकान और मलबा फैला हुआ था।
इसी मलबे के बीच बचावकर्मियों को अचानक किसी बच्चे के रोने जैसी आवाज सुनाई दी। शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद कोई बिल्ली फंसी हुई है। लेकिन जब उन्होंने मलबा हटाना शुरू किया तो वहां पांच साल की मनीषा जिंदा मिली।
मनीषा करीब 60 घंटे तक मलबे और तबाही के बीच फंसी रही थी। जब बचावकर्मियों ने उसे बाहर निकाला, तब उसकी हालत बेहद गंभीर थी। उसके शरीर पर चोटें थीं और चेहरे की पहचान करना भी मुश्किल हो गया था। इसके बावजूद वह जिंदा थी।
बचावकर्मियों ने उसे रंग-बिरंगे कंबलों पर लिटाया और धीरे-धीरे खाना खिलाना शुरू किया। बच्ची को एक-एक चम्मच करके भोजन दिया गया, क्योंकि इतने लंबे समय तक मलबे में फंसे रहने के बाद उसकी हालत बेहद कमजोर थी।
बेटी को जिंदा देखकर मां-बाप की खुशी का ठिकाना नहीं रहा
जिस बच्ची को उसके माता-पिता मृत समझ चुके थे, वही करीब ढाई दिन बाद जिंदा मिल गई।
मनीषा को बाद में काठमांडू के एक बच्चों के अस्पताल में ले जाया गया। वहां उसकी हालत में सुधार हुआ। इसके बाद उसकी तस्वीरें सामने आईं, जिसमें वह चोटों के बावजूद जिंदा दिखाई दे रही थी।
जब मनीषा अपने माता-पिता के पास पहुंची तो परिवार के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था।
मनीषा ने अपनी मां को बताया कि बाढ़ का पानी उसे बहाकर ले गया था। उसने मां और पिता को पुकारा था और सवाल किया कि वे उसे बचाने क्यों नहीं आए।
मां गीता के लिए बेटी की ये बातें सुनना बेहद भावुक कर देने वाला था। जिस बच्ची के जिंदा होने की उम्मीद परिवार ने लगभग छोड़ दी थी, वह अब उनके सामने थी।
पति-पत्नी की मुलाकात भी बनी दर्दनाक याद
इस कहानी में एक और बेहद भावुक पल तब आया था जब बाढ़ के तुरंत बाद लोक बहादुर अपनी पत्नी गीता से मिले थे।
दोनों अपनी जान बचाकर जंगल की ओर पहुंचे थे, लेकिन उनके बीच सबसे बड़ा सवाल उनकी पांच साल की बेटी मनीषा को लेकर था। पत्नी ने पति से बेटी के बारे में पूछा और जब जवाब नहीं मिला तो वह रोते-रोते बेहोश हो गईं।
उस वक्त दोनों को यह नहीं पता था कि उनकी बेटी पानी के बहाव में दूर जाने के बाद भी किसी जगह मलबे के बीच फंसी हुई है और बचाव दल उसे खोजने वाला है।
नेपाल मे आई खौफनाक बाढ के बाद पत्नी आखिरकार अपने पति के पास लौट आई।
— Ajay (@Ajaykumaarji) September 2, 2026
उसे सामने देखते ही पति अपने आसू नही रोक पाया और फूट-फूटकर रोने लगा
कई दिनो से उसे पत्नी की सलामती की कोई खबर नही थी, अचानक उसके लौटने की खुशी आखो से छलक पड़े।
लेकिन सबसे दुखद यह है कि बच्चे अभी भी...Read news pic.twitter.com/QjP303Lfdb
करीब 60 घंटे बाद जब बच्ची मिली तो परिवार की कहानी ने पूरी तरह नया मोड़ ले लिया। लोक बहादुर के लिए बेटी का जिंदा मिलना उस भयानक बाढ़ के बीच सबसे बड़ी खुशी थी।
घर और सामान सब खत्म, लेकिन परिवार बच गया
इस परिवार के पास अब पहले जैसा घर नहीं बचा है। बाढ़ ने उनके घर और लगभग पूरी संपत्ति को तबाह कर दिया। लेकिन जिस चीज की कीमत किसी संपत्ति से कहीं ज्यादा है, वह उनके पास है—उनकी बेटी की जिंदगी।
नेपाल में आई इस बाढ़ ने बड़ी संख्या में परिवारों को इसी तरह तोड़ दिया है। कई लोग अब भी अपने पति, पत्नी, बच्चों और माता-पिता की तलाश कर रहे हैं। राहत और खोज अभियान लगातार जारी है।
इस आपदा के बीच मनीषा की कहानी इसलिए खास है क्योंकि जहां परिवार पहले अपनी बच्ची को खो चुका मानकर रो रहा था, वहीं करीब ढाई दिन बाद मलबे के नीचे से उसकी जिंदगी की आवाज सुनाई दी।
एक तरफ मां-बाप को लगा था कि उनका बच्चा हमेशा के लिए उनसे दूर हो गया। दूसरी तरफ एक छोटी सी बच्ची मौत और जिंदगी के बीच करीब 60 घंटे तक जूझती रही।
और आखिरकार जब बचावकर्मियों ने उसे मलबे से बाहर निकाला, तो नेपाल की इस भयानक त्रासदी के बीच एक परिवार को दोबारा अपनी दुनिया मिल गई।
बाढ़ ने उनका घर छीन लिया, सामान छीन लिया, जिंदगी को तहस-नहस कर दिया… लेकिन उनकी पांच साल की बेटी को उनसे नहीं छीन पाई।

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