नेपाल की बाढ़ अपने साथ क्या बहा लाई? बिहार की नदी में मिली विशाल मछली, सरकार बोली- इसे बिल्कुल मत खाना!
नेपाल में आई भीषण बाढ़ का असर अब बिहार के कई इलाकों में भी दिखाई देने लगा है। बाढ़ का पानी अपने साथ सिर्फ मलबा और गाद ही नहीं, बल्कि अलग-अलग जलस्रोतों में मौजूद जलीय जीवों को भी बहाकर नीचे की ओर ले आया है। इसी बीच बिहार की गंडक नदी और उसके आसपास के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में असामान्य रूप से बड़ी मछलियां दिखाई देने की खबरों ने लोगों का ध्यान खींचा है।
पश्चिम चंपारण और गोपालगंज समेत कई इलाकों से ऐसी तस्वीरें और वीडियो सामने आने का दावा किया जा रहा है, जिनमें मछुआरों के जाल में सामान्य से काफी बड़ी मछलियां फंसी नजर आ रही हैं। कुछ वीडियो में मछलियों का आकार देखकर लोग हैरान हैं और सोशल मीडिया पर इनके वजन तथा प्रजाति को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं।
लेकिन इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बिहार के मत्स्य विभाग ने लोगों को ऐसी अज्ञात और असामान्य मछलियों को खाने या बेचने से बचने की सलाह दी है।
सरकार की यह सलाह सुनकर लोगों के मन में सबसे पहला सवाल यही उठ रहा है कि आखिर बाढ़ के पानी के साथ ऐसी बड़ी मछलियां बिहार की नदियों में कहां से पहुंच गईं और क्या ये मछलियां इंसानों के लिए खतरनाक हैं?
नेपाल की बाढ़ से गंडक तक पहुंचीं मछलियां?
नेपाल में जब पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति बनती है, तो नदियों का जलस्तर और बहाव अचानक बढ़ सकता है। तेज बहाव कई छोटे-बड़े जलाशयों, तालाबों और नदी क्षेत्रों को प्रभावित करता है।
ऐसी स्थिति में वहां रहने वाली मछलियां भी पानी के तेज प्रवाह के साथ दूसरे क्षेत्रों में पहुंच सकती हैं। यही वजह मानी जा रही है कि नेपाल से आने वाली गंडक नदी और बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों में इस बार कुछ बड़ी मछलियां दिखाई दे रही हैं।
पश्चिम चंपारण और गोपालगंज के कुछ क्षेत्रों से बड़ी मछलियों के जाल में फंसने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हर वीडियो में दिखाई देने वाली मछली का वास्तविक वजन और प्रजाति अभी स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं है।
यानी अगर किसी वीडियो में मछली को 80, 100 या 200 किलो का बताया जा रहा है, तो सिर्फ वीडियो के आधार पर उस दावे को सच नहीं माना जा सकता।
गूंछ कैटफिश का नाम क्यों हो रहा वायरल?
इन बड़ी मछलियों की चर्चा के बीच गूंछ कैटफिश यानी Goonch Catfish का नाम भी सामने आ रहा है। गूंछ दक्षिण एशिया की नदियों में पाई जाने वाली बड़ी मीठे पानी की शिकारी कैटफिश है।
इसे वैज्ञानिक रूप से Bagarius bagarius के नाम से जाना जाता है। यह आम तौर पर तेज बहाव वाली नदियों और नदी से जुड़े जल क्षेत्रों में पाई जाती है।
गंडक जैसी नदी, जो हिमालयी क्षेत्र से निकलकर बिहार की ओर आती है, इस तरह की नदीय मछलियों के लिए उपयुक्त आवास प्रदान कर सकती है। इसलिए कुछ विशेषज्ञों ने वायरल तस्वीरों में दिखाई दे रही कुछ मछलियों को गूंछ कैटफिश होने की संभावना से जोड़ा है।
हालांकि यहां भी सावधानी जरूरी है। हर वायरल तस्वीर या वीडियो में दिखाई देने वाली बड़ी मछली को गूंछ कैटफिश कहना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा।
मछली की प्रजाति की सही पहचान उसके शारीरिक लक्षणों, आकार, पंखों और अन्य विशेषताओं की जांच के बाद ही की जा सकती है।
क्या सच में इंसानों को खा जाती है गूंछ मछली?
सोशल मीडिया पर गूंछ मछली को लेकर सबसे ज्यादा सनसनीखेज दावे किए जा रहे हैं। कुछ पोस्ट्स में इसे "आदमखोर मछली" तक बताया जा रहा है।
यहीं से मामला और ज्यादा डरावना बन जाता है।
गूंछ निश्चित रूप से एक बड़ी शिकारी मछली है। यह अपने प्राकृतिक वातावरण में छोटी मछलियों, क्रस्टेशियंस जैसे केकड़ों और अन्य जलीय जीवों का शिकार करती है। इसका आकार बड़ा होने के कारण इसे देखकर लोगों में डर पैदा होना स्वाभाविक है।
लेकिन इसे सीधे तौर पर "आदमखोर मछली" कहना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है।
इंटरनेट पर गूंछ मछली से जुड़ी कई कहानियां और सनसनीखेज दावे वर्षों से घूमते रहे हैं। लेकिन किसी वायरल पोस्ट या डरावनी कहानी के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि यह मछली आम तौर पर इंसानों का शिकार करती है।
इसलिए लोगों को सोशल मीडिया पर चल रही ऐसी बातों को बिना प्रमाण आगे बढ़ाने से बचना चाहिए।
फिर सरकार ने मछली खाने से क्यों किया मना?
सरकार की चिंता इस बात से ज्यादा जुड़ी है कि बाढ़ के पानी से पकड़ी गई अज्ञात मछली सुरक्षित है या नहीं।
बाढ़ के दौरान नदी और तालाबों का पानी सामान्य परिस्थितियों जैसा नहीं रहता। पानी में सीवेज, गंदगी, कचरा, मृत पशु और दूसरे दूषित पदार्थ मिल सकते हैं। इससे पानी की गुणवत्ता प्रभावित होती है और उसमें मौजूद जलीय जीव भी दूषित वातावरण के संपर्क में आ सकते हैं।
ऐसे में किसी अपरिचित मछली को सिर्फ इसलिए खाना सुरक्षित नहीं माना जा सकता क्योंकि वह दिखने में सामान्य मछली जैसी है।
बाढ़ के दौरान पकड़ी गई मछली में रोगजनकों या अन्य दूषित पदार्थों का जोखिम परिस्थितियों पर निर्भर कर सकता है। इसलिए विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि जब तक मछली की पहचान और उसकी सुरक्षा की पुष्टि न हो जाए, तब तक ऐसी असामान्य मछलियों को खाने से बचें।
सिर्फ खाने पर नहीं, बेचने पर भी रोक की सलाह
सरकारी चेतावनी का दायरा सिर्फ मछली खाने तक सीमित नहीं है। बाढ़ के पानी से पकड़ी गई अज्ञात मछलियों की खरीद-बिक्री को लेकर भी सावधानी बरतने की बात कही गई है।
इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई ऐसी मछली बाजार तक न पहुंच जाए जिसकी प्रजाति या सुरक्षा को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध न हो।
अगर किसी मछुआरे को जाल में कोई असामान्य रूप से बड़ी या अपरिचित मछली मिलती है, तो उसे स्थानीय मत्स्य विभाग या प्रशासन को इसकी जानकारी देने की सलाह दी गई है।
मछली खाने के बाद ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
अगर किसी व्यक्ति ने बाढ़ के पानी से पकड़ी गई मछली खा ली है और उसके बाद तबीयत खराब होने लगती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
उल्टी, दस्त, पेट में दर्द, चक्कर, कमजोरी या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देने पर जल्द से जल्द डॉक्टर या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करना उचित है।
हालांकि इन लक्षणों के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में दूषित भोजन और पानी से होने वाली बीमारियों का जोखिम देखते हुए सावधानी जरूरी है।
सोशल मीडिया पर 100-200 किलो के दावे
बड़ी मछलियों के वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इनके वजन को लेकर भी खूब दावे किए जा रहे हैं।
कहीं इन्हें 80 किलो से ज्यादा बताया जा रहा है तो कहीं 100 और यहां तक कि 200 किलो तक के दावे किए जा रहे हैं।
लेकिन किसी मछली का वास्तविक वजन केवल तस्वीर या वीडियो देखकर तय नहीं किया जा सकता। इसी तरह वीडियो में दिखाई देने वाले आकार से उसकी प्रजाति की पुष्टि भी नहीं हो सकती।
इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे आंकड़ों को फिलहाल अपुष्ट दावे मानना ही बेहतर है।
बड़ी मछली पकड़ने के चक्कर में नदी में उतरना पड़ सकता है भारी
इस पूरे मामले में एक और गंभीर खतरा है।
बड़ी मछली देखने या पकड़ने के लालच में लोग बाढ़ से उफनती नदी में उतरने की कोशिश कर सकते हैं। यह बेहद खतरनाक हो सकता है।
बाढ़ के दौरान नदी की गहराई, बहाव और नदी के अंदर मौजूद गड्ढों का अनुमान लगाना मुश्किल होता है। पानी के नीचे पेड़, मलबा और अन्य वस्तुएं भी हो सकती हैं। तेज बहाव किसी व्यक्ति को कुछ ही सेकंड में बहा सकता है।
इसलिए बड़ी मछली के लालच में बाढ़ के तेज बहाव वाले पानी में उतरना जानलेवा हो सकता है।
फिलहाल क्या करें?
नेपाल की भीषण बाढ़ के बाद बिहार की नदियों में दिखाई दे रही बड़ी और असामान्य मछलियों ने निश्चित रूप से लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है। गूंछ कैटफिश को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं, लेकिन सोशल मीडिया के हर दावे को सच मानना सही नहीं होगा।
फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि अगर बाढ़ के पानी से कोई अज्ञात या असामान्य मछली मिलती है, तो उसे खाने या बेचने से बचें। उसकी पहचान और सुरक्षा की जानकारी के लिए स्थानीय मत्स्य विभाग या प्रशासन से संपर्क करें।
नेपाल की बाढ़ ने पहले ही भारी तबाही मचाई है। अब उसके तेज पानी के साथ बहकर आई जलीय प्रजातियों ने बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है। आखिर इन विशाल मछलियों में कौन-कौन सी प्रजातियां हैं और वे कितनी दूर से बहकर गंडक तक पहुंची हैं—इसका जवाब वैज्ञानिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

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