आसमान में दो सिस्टम आमने-सामने! 17 राज्यों में भारी बारिश और तूफानी हवाओं का अलर्ट, IMD ने जारी की चेतावनी
नई दिल्ली। देश के बड़े हिस्से में मानसून एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाने की तैयारी में है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, 5 सितंबर को कई राज्यों में मौसम तेजी से बदल सकता है। बारिश के साथ तेज हवाएं, आकाशीय बिजली और कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश जैसी स्थिति बनने की आशंका जताई गई है।
मौसम की इस स्थिति को और गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि एक साथ दो मौसमी प्रणालियां सक्रिय हैं। दक्षिणी गुजरात से लेकर झारखंड तक एक ट्रफ रेखा बनी हुई है, जबकि आंतरिक कर्नाटक से मन्नार की खाड़ी तक निम्न दबाव का क्षेत्र सक्रिय बताया गया है। इन मौसमी परिस्थितियों के कारण देश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है।
मौसम विभाग की चेतावनी के बाद प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को संवेदनशील इलाकों में सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
17 राज्यों पर मौसम की नजर
मानसून की सक्रियता का असर देश के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई दे सकता है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, गुजरात, महाराष्ट्र, असम, मेघालय और केरल समेत कई राज्यों में बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है।
कुछ क्षेत्रों में हवा की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है। स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर कुछ जगहों पर इससे अधिक तेज हवाएं भी चल सकती हैं।
ऐसे में खुले इलाकों में रहने वाले लोगों, वाहन चालकों और किसानों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी।
दिल्ली-NCR से यूपी तक बारिश का असर
दिल्ली-एनसीआर में दिनभर बादल छाए रहने और बारिश होने की संभावना है। बारिश के साथ तेज हवाएं चलने से तापमान में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मौसम खराब रहने का अनुमान है। मेरठ, आगरा, प्रयागराज, गोरखपुर और लखनऊ समेत अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा होने की आशंका रहती है। ऐसे में लोगों को अनावश्यक रूप से जलभराव वाले रास्तों पर जाने से बचने की सलाह दी जाती है।
राज्य के ग्रामीण इलाकों में भी मौसम पर नजर रखने की जरूरत होगी, क्योंकि बारिश के साथ आकाशीय बिजली का खतरा कुछ स्थानों पर बढ़ सकता है।
बिहार और झारखंड में बिजली का खतरा
बिहार और झारखंड के लिए भी मौसम की चेतावनी महत्वपूर्ण है। पटना, मुजफ्फरपुर, गया और भागलपुर समेत कई इलाकों में बारिश के साथ गरज-चमक की स्थिति बन सकती है।
झारखंड के रांची, गिरिडीह और बोकारो समेत कई जिलों में भी बारिश के दौरान वज्रपात का खतरा रह सकता है।
आकाशीय बिजली के दौरान सबसे जरूरी सावधानी यह है कि लोग खुले मैदान में न रहें। पेड़ के नीचे खड़े होने या बिजली के खंभों और धातु की संरचनाओं के पास जाने से भी बचना चाहिए।
बारिश के दौरान अगर कोई व्यक्ति खेत या खुले इलाके में है तो सुरक्षित पक्के भवन में शरण लेना सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है।
पहाड़ों में बढ़ सकती है परेशानी
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के साथ मौसम ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। लगातार बारिश होने की स्थिति में भूस्खलन और अचानक नदियों-नालों का जलस्तर बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है।
पहाड़ी इलाकों में सड़कें भी बारिश और मलबे से प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में यात्रियों को मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों पर नजर रखने की जरूरत है।
विशेष रूप से उन रास्तों पर अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए जहां पहले से भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। भारी बारिश के दौरान पहाड़ी नदियों और छोटे नालों के बेहद करीब जाना भी जोखिम भरा हो सकता है।
गुजरात से झारखंड तक सक्रिय ट्रफ
मौसम की मौजूदा स्थिति में दक्षिणी गुजरात से लेकर झारखंड तक बनी ट्रफ रेखा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके कारण इस लंबे क्षेत्र में बारिश की गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
दूसरी तरफ आंतरिक कर्नाटक से मन्नार की खाड़ी तक निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। दक्षिण भारत से लेकर मध्य और पूर्वी हिस्सों तक इसकी वजह से मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।
दोनों प्रणालियों की सक्रियता के कारण कई राज्यों में एक साथ बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।
किसानों के लिए भी जरूरी चेतावनी
बारिश और वज्रपात की संभावना को देखते हुए किसानों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। खेत में काम करते समय अगर अचानक गरज-चमक शुरू हो जाए तो खुले खेत में रुकने के बजाय सुरक्षित स्थान पर चले जाना चाहिए।
पेड़, बिजली के खंभे, ट्रांसफॉर्मर और धातु की संरचनाएं वज्रपात के दौरान सुरक्षित स्थान नहीं मानी जातीं।
किसानों को मौसम की स्थिति देखकर खेती से जुड़े जरूरी काम करने की सलाह दी जाती है। बारिश और तेज हवाओं के दौरान खेतों में मौजूद उपकरणों तथा अन्य सामान को भी सुरक्षित स्थान पर रखने की जरूरत हो सकती है।
यात्रियों के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
पहाड़ी राज्यों में मौसम खराब होने पर सबसे ज्यादा परेशानी यात्रियों को हो सकती है। भारी बारिश के कारण सड़क पर मलबा आने, रास्ते बंद होने या यातायात प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है।
ऐसे में गैर-जरूरी यात्रा को टालना बेहतर होगा। जो लोग पहले से यात्रा पर हैं, उन्हें स्थानीय प्रशासन की सलाह और सड़क की स्थिति की जानकारी लेते रहना चाहिए।
नदियों, झरनों और पहाड़ी नालों के आसपास घूमने वाले पर्यटकों को विशेष सतर्कता बरतनी होगी। बारिश के दौरान ऊपर के क्षेत्रों में पानी बढ़ने से नीचे के इलाकों में अचानक तेज बहाव आ सकता है।
अगले कुछ घंटे अहम
मौसम की मौजूदा परिस्थितियों में अगले कुछ घंटे कई राज्यों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। बारिश के साथ तेज हवाएं और बिजली गिरने की घटनाएं स्थानीय स्तर पर परेशानी बढ़ा सकती हैं।
प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है और लोगों से मौसम संबंधी चेतावनियों को गंभीरता से लेने की अपील की जा रही है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सक्रिय दोनों मौसमी सिस्टम आने वाले घंटों में किस तरह का असर दिखाते हैं। एक तरफ मैदानी राज्यों में बारिश और तेज हवाओं का खतरा है, तो दूसरी तरफ पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और अचानक जलस्तर बढ़ने की आशंका चिंता बढ़ा रही है।
इसलिए लोगों को सलाह दी जाती है कि मौसम बिगड़ने पर खुले स्थानों से दूर रहें, बिजली चमकने के दौरान विशेष सावधानी बरतें और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी किसी भी चेतावनी या निर्देश का पालन करें।

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