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हॉस्टल में 38 छात्राएं थीं मौजूद, फिर भी 10 की चोटियां कट गईं… जांच में सामने आया चौंकाने वाला एंगल



आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम जिले से छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। भीमुनिपटनम मंडल के कृष्णापुरम स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) के हॉस्टल में कक्षा 9 की 10 छात्राओं की चोटियां रात में काटे जाने की घटना ने स्कूल प्रशासन से लेकर अभिभावकों तक को चिंता में डाल दिया है। बताया जा रहा है कि छात्राएं हॉस्टल के कमरों में सो रही थीं और सुबह जब उनकी नींद खुली तो उन्हें अपने बाल कटे हुए मिले। घटना सामने आने के बाद कुछ समय के लिए हॉस्टल में डर और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर रात के समय छात्राओं के बाल किसने और किस वजह से काटे।

रिपोर्टों के मुताबिक घटना 16 सितंबर की देर रात की बताई जा रही है। उस समय कक्षा 9 की करीब 38 छात्राएं दो कमरों में सो रही थीं। इनमें से एक कमरे में छह छात्राओं और दूसरे कमरे में चार छात्राओं के बाल कटे मिले। सुबह इस घटना का पता चलने के बाद छात्राओं ने हॉस्टल प्रबंधन को जानकारी दी। शुरुआती तौर पर यह मामला इतना रहस्यमय था कि स्कूल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो गए।

सुबह उठते ही छात्राओं ने देखा बदला हुआ नजारा

रात में सोते समय किसी छात्रा को इस घटना का पता नहीं चला। सुबह उठने के बाद जब छात्राओं ने अपने बालों को देखा तो उन्हें पता चला कि उनकी चोटियां काटी जा चुकी हैं। घटना की जानकारी मिलने के बाद हॉस्टल में मौजूद कर्मचारियों और स्कूल प्रशासन को सूचित किया गया।

एक कमरे में छह और दूसरे कमरे में चार छात्राओं के साथ ऐसा होने की जानकारी सामने आई है। खास बात यह है कि दोनों कमरे छात्राओं से भरे हुए थे, फिर भी बाल काटे जाने के दौरान किसी को घटना का स्पष्ट रूप से पता नहीं चला। यही सवाल अब पुलिस की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।

घटना सामने आने के बाद छात्राओं और उनके अभिभावकों में स्वाभाविक रूप से चिंता बढ़ गई। आवासीय स्कूल होने के कारण छात्राओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल और हॉस्टल प्रशासन पर होती है। ऐसे में रात के समय हुई इस घटना ने निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए।

शुरुआत में बाहरी व्यक्ति पर गया शक

जब छात्राओं ने अपने बाल कटे हुए पाए तो शुरुआती आशंका यह थी कि कोई बाहरी व्यक्ति रात में हॉस्टल परिसर में घुसा होगा। यदि ऐसा हुआ होता तो मामला छात्राओं की सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर माना जाता।

इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने हॉस्टल और स्कूल परिसर का निरीक्षण किया। उपलब्ध सुरक्षा व्यवस्था, प्रवेश और निकास के रास्तों तथा रात के समय मौजूद कर्मचारियों के बारे में जानकारी जुटाई गई।

हालांकि, प्रारंभिक जांच में अधिकारियों को ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि कोई बाहरी व्यक्ति हॉस्टल परिसर में प्रवेश करके छात्राओं के बाल काट गया था। भीमुनिपटनम के विधायक घंटा श्रीनिवास राव ने भी स्कूल का दौरा कर छात्राओं, अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन से बातचीत की। उन्होंने कहा कि परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है और बाहरी व्यक्ति के प्रवेश की संभावना कम दिखाई देती है।

जांच में सामने आया एक और एंगल

बाहरी व्यक्ति की आशंका कमजोर पड़ने के बाद जांच का रुख हॉस्टल के अंदर की परिस्थितियों की ओर भी गया। अधिकारियों को संदेह है कि इस घटना में स्कूल की कुछ छात्राओं की भूमिका हो सकती है। हालांकि, यह अभी जांच का हिस्सा है और किसी छात्रा को अंतिम रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।

पुलिस छात्राओं से बातचीत कर रही है और यह समझने की कोशिश कर रही है कि घटना के समय दोनों कमरों में क्या स्थिति थी। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि बाल काटने के लिए इस्तेमाल किया गया कोई उपकरण या अन्य सामग्री वहां उपलब्ध थी या नहीं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि घटना हॉस्टल के अंदर मौजूद किसी व्यक्ति ने की, तो ऐसा करने का उद्देश्य क्या था। क्या यह किसी तरह की शरारत थी, आपसी विवाद का परिणाम था या इसके पीछे कोई अन्य कारण था—इसका जवाब अभी जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

CCTV फुटेज पर पुलिस की नजर

मामले में CCTV फुटेज को अहम सबूत माना जा रहा है। पुलिस और स्कूल प्रशासन उपलब्ध फुटेज की जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि रात के दौरान छात्राओं के कमरों के आसपास कौन-कौन मौजूद था और किसी संदिग्ध गतिविधि का रिकॉर्ड कैमरे में आया या नहीं।

कुछ रिपोर्टों में बाहरी व्यक्ति के प्रवेश का सबूत नहीं मिलने की बात कही गई है, जबकि दूसरी रिपोर्टों में CCTV फुटेज की जांच जारी होने की जानकारी दी गई है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि कैमरों से घटना का पूरा रहस्य सुलझ गया है।

पुलिस छात्राओं और हॉस्टल कर्मचारियों के बयान भी दर्ज कर रही है। जांचकर्ताओं का ध्यान खास तौर पर उस समयावधि पर है जब छात्राएं सोने गई थीं और सुबह घटना सामने आई।

विधायक ने स्कूल पहुंचकर ली जानकारी

मामला सामने आने के बाद भीमुनिपटनम के विधायक घंटा श्रीनिवास राव KGBV पहुंचे। उन्होंने स्कूल प्रबंधन और छात्राओं से बातचीत की तथा घटना की जानकारी ली। पुलिस अधिकारियों ने भी परिसर का निरीक्षण किया।

रिपोर्टों के अनुसार विधायक ने मामले की विस्तृत जांच की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि घटना के पीछे जो भी कारण है, उसकी जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी। छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी उन्होंने स्थिति का जायजा लिया।

प्रिंसिपल समेत चार लोगों को नोटिस

घटना के बाद केवल पुलिस जांच ही नहीं, बल्कि स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी को लेकर भी विभागीय स्तर पर सवाल उठे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक KGBV की प्रिंसिपल, उस रात ड्यूटी पर मौजूद दो शिक्षकों और नाइट-वॉच महिला सहित चार लोगों को शो-कॉज नोटिस जारी किए गए हैं।

इनसे यह पूछा गया है कि रात के दौरान छात्राओं की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी और घटना होने के दौरान किसी तरह की लापरवाही तो नहीं हुई। इस कार्रवाई का उद्देश्य यह पता लगाना भी है कि क्या हॉस्टल की रात की निगरानी व्यवस्था में कोई कमी थी।

हालांकि, नोटिस जारी किया जाना अपने आप में किसी व्यक्ति की गलती साबित नहीं करता। विभागीय जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि निगरानी व्यवस्था में वास्तविक रूप से कोई चूक हुई थी या नहीं।

छात्राओं की काउंसलिंग भी कराई जा रही

घटना के बाद छात्राओं के बीच डर का माहौल बनने की खबरों के बीच उनकी काउंसलिंग भी कराई जा रही है। अधिकारियों के लिए यह जरूरी है कि जांच के साथ-साथ छात्राओं को सुरक्षित और सहज महसूस कराया जाए।

रिपोर्टों के अनुसार दो काउंसलरों की मदद से छात्राओं से बातचीत की जा रही है। इसका उद्देश्य घटना के कारण पैदा हुई चिंता को कम करना और छात्राओं से बिना दबाव के जानकारी हासिल करना भी है।

सबसे बड़ा सवाल—आखिर किसने काटे बाल?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल अभी भी यही है कि 10 छात्राओं की चोटियां आखिर किसने काटीं और ऐसा करने का कारण क्या था।

पहले बाहरी व्यक्ति के हॉस्टल में घुसने की आशंका जताई गई थी, लेकिन शुरुआती जांच में ऐसी संभावना कम बताई गई है। इसके बाद कुछ छात्राओं के संभावित रूप से शामिल होने का एंगल सामने आया है, लेकिन पुलिस ने अभी किसी को दोषी घोषित नहीं किया है।

जांच में CCTV फुटेज, छात्राओं के बयान, हॉस्टल कर्मचारियों की जानकारी और रात की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े रिकॉर्ड अहम भूमिका निभा सकते हैं।

फिलहाल यह मामला रहस्य बना हुआ है। पुलिस की जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक किसी बाहरी व्यक्ति या किसी छात्रा को इस घटना के लिए जिम्मेदार बताना उचित नहीं होगा।

इस घटना ने एक बार फिर आवासीय विद्यालयों में छात्राओं की रात के समय सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था और कर्मचारियों की जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर पुलिस और शिक्षा विभाग की जांच पर है कि आखिर उस रात KGBV हॉस्टल के उन दो कमरों में क्या हुआ था और 10 छात्राओं की चोटियां बिना उनकी जानकारी के कैसे काट दी गईं।

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