जिस तूफान को खत्म मान लिया था, उसने अचानक बदली चाल! अब 100 KM की रफ्तार वाले दावे से मचा हड़कंप
दक्षिण चीन सागर में इस समय ट्रॉपिकल स्टॉर्म ‘सौडेल’ को लेकर मौसम विशेषज्ञों की नजर बनी हुई है। कुछ समय पहले कमजोर पड़ चुका यह सिस्टम समुद्र के ऊपर दोबारा सक्रिय हुआ है। इसके बाद इसकी दिशा और ताकत में बदलाव देखने को मिला है, जिससे हांगकांग और दक्षिण चीन के कुछ तटीय इलाकों में मौसम को लेकर सतर्कता बढ़ गई है।
सोशल मीडिया पर सौडेल को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। कुछ पोस्ट में इसे 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तबाही मचाने वाला तूफान बताया जा रहा है। हालांकि आधिकारिक मौसम आंकड़ों के मुताबिक मौजूदा समय में इसकी स्थिति इससे अलग है। सौडेल फिलहाल ट्रॉपिकल स्टॉर्म के रूप में दर्ज है और इसकी ताकत पर लगातार नजर रखी जा रही है।
हांगकांग में फिलहाल स्टैंडबाय सिग्नल नंबर-1 लागू है। इसका मतलब है कि चक्रवाती सिस्टम हांगकांग के आसपास के क्षेत्र में मौजूद है और इसके कारण मौसम में बदलाव हो सकता है।
कमजोर होने के बाद फिर कैसे जिंदा हुआ सौडेल?
सौडेल की सबसे खास बात यही है कि यह पहले काफी कमजोर पड़ चुका था। अगस्त के अंतिम दिनों में यह एक मजबूत टाइफून के रूप में चीन के पूर्वी तट की तरफ बढ़ा था। उस समय इसकी ताकत काफी ज्यादा थी।
इसके बाद यह चीन के झेजियांग क्षेत्र की ओर पहुंचा और जमीन से टकराने के बाद इसकी शक्ति तेजी से कम होने लगी। जमीन पर पहुंचने के बाद तूफान को समुद्र से मिलने वाली गर्मी और नमी का सहारा नहीं मिल पाता। साथ ही जमीन का घर्षण भी तूफान की ताकत को कम करता है।
इसी कारण सौडेल कमजोर होकर ट्रॉपिकल डिप्रेशन और फिर कम दबाव वाले सिस्टम में बदल गया।
ऐसा लग रहा था कि तूफान का प्रभाव अब लगभग खत्म हो गया है।
लेकिन इसके बाद मौसम ने अचानक करवट ली।
सौडेल के कमजोर अवशेष फिर से गर्म समुद्री पानी के ऊपर पहुंच गए। समुद्र से मिली गर्मी और नमी के कारण सिस्टम दोबारा संगठित होने लगा। धीरे-धीरे इसमें फिर से चक्रवाती गतिविधियां बढ़ीं और यह दोबारा ट्रॉपिकल सिस्टम के रूप में मजबूत होने लगा।
यही वजह है कि मौसम वैज्ञानिक इसके व्यवहार पर विशेष नजर रख रहे हैं।
हांगकांग के पास पहुंचा तूफानी सिस्टम
सौडेल के दोबारा सक्रिय होने के बाद हांगकांग में मौसम का मिजाज भी बदलता दिखाई दे रहा है। आसमान में बादल छाए हुए हैं और कई इलाकों में बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिल रहा है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पूरा हांगकांग किसी भयंकर तूफान की चपेट में आ चुका है। मौजूदा स्थिति में हांगकांग के लिए सबसे ऊंचा तूफानी अलर्ट लागू नहीं है।
फिर भी समुद्र के आसपास रहने वाले लोगों और नावों से जुड़े लोगों के लिए सावधानी जरूरी है, क्योंकि समुद्र में हवा और लहरों की स्थिति जमीन की तुलना में ज्यादा खराब हो सकती है।
100 किलोमीटर प्रति घंटे की हवा का दावा कितना सही?
सोशल मीडिया पर सौडेल को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसकी हवा की रफ्तार को लेकर हो रही है। कई पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि तूफान 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तबाही मचाने वाला है।
लेकिन किसी भी तूफान की वास्तविक ताकत उसके केंद्र के पास दर्ज की गई लगातार हवाओं और उसके झोंकों के आधार पर निर्धारित की जाती है। अलग-अलग इलाकों में हवा की रफ्तार अलग हो सकती है।
इसलिए सोशल मीडिया पर बताए गए किसी एक आंकड़े को देखकर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि पूरे प्रभावित क्षेत्र में 100 किलोमीटर प्रति घंटे की हवाएं चलेंगी।
मौसम विभाग की ताजा चेतावनी और स्थानीय परिस्थितियां ही सबसे महत्वपूर्ण होती हैं।
समुद्र में बढ़ सकता है खतरा
सौडेल से फिलहाल समुद्री इलाकों में ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। चक्रवाती सिस्टम के आसपास तेज हवाएं चल सकती हैं और समुद्र की स्थिति खराब हो सकती है।
छोटी नावों और मछली पकड़ने वाली नौकाओं के लिए ऐसी परिस्थितियां खतरनाक हो सकती हैं। तेज हवाओं के साथ ऊंची लहरें उठने पर नावों का संतुलन बिगड़ सकता है।
यही कारण है कि तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को समुद्र के करीब जाने से बचने और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है।
नंबर-3 सिग्नल का क्या मतलब है?
हांगकांग में तूफानों के दौरान अलग-अलग नंबर के सिग्नल जारी किए जाते हैं। इनमें नंबर-1 सिग्नल शुरुआती चेतावनी का संकेत है।
अगर स्थिति गंभीर होती है और हवाओं की ताकत बढ़ती है, तो नंबर-3 स्ट्रॉन्ग विंड सिग्नल जैसे उच्च स्तर के संकेत जारी किए जा सकते हैं।
नंबर-3 सिग्नल का अर्थ होता है कि क्षेत्र में तेज हवाओं का खतरा बढ़ गया है। ऐसी स्थिति में खुले इलाकों, समुद्र के किनारे और कमजोर संरचनाओं के आसपास अतिरिक्त सावधानी जरूरी हो जाती है।
हालांकि मौजूदा स्थिति में केवल संभावना के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि नंबर-3 सिग्नल निश्चित रूप से जारी किया जाएगा।
तूफान जमीन पर आएगा या समुद्र के ऊपर रहेगा?
सौडेल की आगे की ताकत इस बात पर काफी हद तक निर्भर करेगी कि इसका सिस्टम किस दिशा में आगे बढ़ता है और कितनी देर तक गर्म समुद्री पानी के ऊपर रहता है।
अगर यह जमीन के ऊपर से गुजरता है तो जमीन का घर्षण इसकी ताकत कम कर सकता है। इसके विपरीत अगर यह समुद्र के ऊपर बना रहता है, तो उसे लगातार गर्म पानी और नमी से ऊर्जा मिल सकती है।
यही वजह है कि मौसम विशेषज्ञ इसके रास्ते और संरचना में होने वाले हर बदलाव पर नजर बनाए हुए हैं।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
किसी चक्रवाती सिस्टम का कमजोर होने के बाद दोबारा सक्रिय होना बेहद असामान्य जरूर है, लेकिन मौसम विज्ञान में ऐसा पूरी तरह असंभव नहीं है।
2018 में ‘सोन-तिन्ह’ नाम का तूफान भी इसी तरह की स्थिति के कारण चर्चा में आया था। वह कमजोर होने के बाद दोबारा समुद्र के ऊपर पहुंचा और फिर से मजबूत हुआ था।
ऐसी घटनाएं यह बताती हैं कि उष्णकटिबंधीय चक्रवातों का व्यवहार हमेशा सीधा और अनुमान के मुताबिक नहीं होता।
बाहर निकलने से पहले मौसम की जानकारी जरूर लें
अगर किसी क्षेत्र में तेज हवाओं और भारी बारिश की चेतावनी जारी हो तो लोगों को अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए।
तेज हवाओं में कमजोर पेड़, होर्डिंग, बिजली के खंभे या अन्य वस्तुएं गिर सकती हैं। सड़कों पर पानी भरने की स्थिति में वाहन चलाना भी मुश्किल हो सकता है।
समुद्र के आसपास जाने से विशेष रूप से बचना चाहिए। समुद्र शांत दिखाई देने के बावजूद अचानक बड़ी लहरें और तेज धाराएं खतरनाक साबित हो सकती हैं।
फिलहाल सौडेल पर बनी हुई है नजर
सौडेल के दोबारा सक्रिय होने ने निश्चित रूप से मौसम वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा है। पहले कमजोर पड़ने और फिर समुद्र के ऊपर दोबारा संगठित होने के कारण इसकी दिशा और ताकत पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
फिलहाल हांगकांग में स्टैंडबाय सिग्नल नंबर-1 लागू है और दक्षिण चीन सागर के कुछ हिस्सों में तेज हवाओं तथा खराब समुद्री परिस्थितियों का खतरा बना हुआ है।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सोशल मीडिया पर चल रहे सनसनीखेज दावों के बजाय आधिकारिक मौसम अपडेट पर भरोसा किया जाए।
एक समय कमजोर होकर खत्म होता दिखाई देने वाला सौडेल दोबारा सक्रिय जरूर हुआ है, लेकिन इसकी मौजूदा स्थिति को लेकर अतिरंजित दावों से बचना जरूरी है। आने वाले समय में इसकी दिशा और ताकत में होने वाला बदलाव ही तय करेगा कि यह सिस्टम कितना प्रभाव डालेगा।

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