बिजनौर धमाके में दलित किशोर की मौत के बाद उठे सवाल: अवैध बारूद नेटवर्क, आरोपियों की भूमिका और सियासी प्रतिक्रिया पर क्यों छिड़ी चर्चा?
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में पटाखा निर्माण और विस्फोटक सामग्री से जुड़ा मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। शेरकोट थाना क्षेत्र के वाजिदपुर गांव में पटाखा फैक्ट्री के अवशेषों में हुए विस्फोट ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। इस हादसे में गंभीर रूप से झुलसे 12 वर्षीय रोहन की दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। उसका भाई रोहित अभी उपचाराधीन है। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है और कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
पटाखा फैक्ट्री के अवशेष में हुआ था जोरदार धमाका
जानकारी के मुताबिक, 20 सितंबर को बिजनौर के शेरकोट क्षेत्र के वाजिदपुर गांव में एक बंद पड़े ईंट-भट्ठे के पास पटाखा फैक्ट्री से निकला कचरा और विस्फोटक अवशेष पड़े थे। इसी स्थान के पास से 12 वर्षीय रोहन और उसका 16 वर्षीय भाई रोहित गुजर रहे थे। दोनों कथित तौर पर बकरियों के लिए घास काटने गए थे।
इसी दौरान वहां पड़े आतिशबाजी के अवशेष में अचानक विस्फोट हो गया। धमाका इतना तेज था कि आसपास के ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। दोनों किशोर गंभीर रूप से झुलस गए। ग्रामीणों ने तत्काल उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां से हालत गंभीर होने पर उन्हें बेहतर उपचार के लिए रेफर किया गया।
इलाज के दौरान रोहन की हालत लगातार गंभीर बनी रही। आखिरकार 26 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उसकी मौत हो गई। रोहन की मौत की खबर गांव पहुंचते ही परिवार में मातम छा गया। उसका भाई रोहित अभी अस्पताल में भर्ती है और उसका उपचार जारी है।
पिता की शिकायत पर कई लोगों के खिलाफ मुकदमा
हादसे के बाद मृतक के पिता चंद्रवीर सिंह की तहरीर के आधार पर पुलिस ने कई लोगों को नामजद करते हुए प्राथमिकी दर्ज की। रिपोर्ट के अनुसार, नहटौर निवासी यूसुफ, गुफरान, खुर्शीद और रिजवान तथा नूरपुर छीपरी निवासी मुकेश को नामजद किया गया है। इसके अलावा दस अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है।
पुलिस की कार्रवाई में यह भी सामने आया कि नामजद किए गए यूसुफ और गुफरान पहले से ही एक अन्य मामले में जेल में हैं। दोनों पर चौकपुरी स्थित पटाखा फैक्ट्री में निर्धारित सीमा से अधिक आतिशबाजी और विस्फोटक सामग्री रखने का आरोप है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फैक्ट्री से निकलने वाले अवशेषों को घटनास्थल तक कैसे पहुंचाया गया और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।
जांच में सामने आया अवैध पटाखा और कारतूस नेटवर्क
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू बिजनौर में कुछ दिन पहले सामने आया अवैध पटाखा फैक्ट्री का मामला है। 14 सितंबर को चौकपुरी गांव में स्थित बजरंग फायर वर्क्स पर पुलिस, राजस्व विभाग, फायर सेफ्टी टीम और फील्ड यूनिट ने संयुक्त कार्रवाई की थी।
रिपोर्टों के मुताबिक, वहां लाइसेंस में निर्धारित सीमा से अधिक विस्फोटक सामग्री मिली थी। कार्रवाई के दौरान लगभग 130 किलोग्राम एल्युमीनियम पाउडर, 559 किलोग्राम गंधक और 548 किलोग्राम पोटेशियम नाइट्रेट के अलावा बड़ी मात्रा में तैयार सुतली बम बरामद किए गए थे। पुलिस को कारतूस और कारतूस बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी मिले थे।
पुलिस ने इस कार्रवाई के बाद मोहम्मद यूसुफ और गुफरान अहमद अंसारी को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कच्चा माल कहां से आता था, तैयार पटाखे और कथित कारतूस कहां भेजे जाते थे और इस नेटवर्क से कितने लोग जुड़े हुए थे।
यूसुफ उर्फ ‘मुल्ला बारूद’ का नाम जांच में आया
मीडिया रिपोर्टों में गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद यूसुफ का नाम ‘मुल्ला बारूद’ उपनाम के साथ भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार, वह पटाखे बनाने के काम में लंबे समय से सक्रिय बताया जा रहा है। जांच में उसके कथित संपर्कों और कारोबार से जुड़े दूसरे लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
हालांकि, जांच पूरी होने और अदालत में आरोप साबित होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। अभी पुलिस की कार्रवाई और आरोपों की जांच चल रही है। मामले में आगे की कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों, फोरेंसिक जांच और आरोपितों से पूछताछ के आधार पर होगी।
महाराष्ट्र और दूसरे राज्यों तक कनेक्शन की जांच
जांच के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर ऐसे संपर्कों का भी पता लगाया है जिनके तार उत्तर प्रदेश से बाहर तक जुड़ते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, महाराष्ट्र के उस्मानाबाद निवासी अमजद पर कच्चा माल उपलब्ध कराने का आरोप सामने आया है। वहीं सऊदी अरब में रह रहे रिजवान पर कथित तौर पर कारोबार में पैसा लगाने की बात जांच में सामने आई है।
पुलिस अब इस नेटवर्क में कथित सप्लाई चैन और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है। कुछ रिपोर्टों में तैयार पटाखों और कथित कारतूसों को दूसरे स्थानों तक भेजे जाने की बात भी सामने आई है। इन दावों की अंतिम पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
खुले में विस्फोटक अवशेष फेंकने पर उठे सवाल
इस घटना ने सबसे बड़ा सवाल पटाखा निर्माण के बाद निकलने वाले विस्फोटक अवशेषों के सुरक्षित निस्तारण को लेकर खड़ा किया है। आरोप है कि फैक्ट्री से निकला कचरा और आतिशबाजी के अवशेष खुले स्थान पर फेंके गए थे। इसी मलबे में विस्फोट होने से दोनों किशोर इसकी चपेट में आ गए।
घटना के बाद पुलिस और दमकल विभाग ने मौके पर पहुंचकर वहां पड़े आतिशबाजी के कचरे को पानी से ठंडा किया और उसे जमीन में दबाया। अधिकारियों ने कहा है कि घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
त्योहारों से पहले सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
सितंबर के अंत में हुई इस घटना ने आने वाले त्योहारों के दौरान अवैध पटाखा निर्माण और विस्फोटक भंडारण को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताओं को भी बढ़ाया है। पटाखों के निर्माण, भंडारण और बिक्री के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही भी जान-माल के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
बिजनौर में हुई पुलिस कार्रवाई से यह भी स्पष्ट है कि प्रशासन अवैध रूप से अधिक मात्रा में विस्फोटक सामग्री रखने और बिना अनुमति उसके इस्तेमाल की जांच कर रहा है। चौकपुरी की फैक्ट्री के अलावा वाजिदपुर में हुई घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि बंद या निष्क्रिय हो चुकी इकाइयों के आसपास छोड़े गए विस्फोटक अवशेषों की निगरानी कैसे की जा रही थी।
सांसद चंद्रशेखर आजाद को लेकर दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी
घटना को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद की भूमिका और कथित प्रतिक्रिया को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। चंद्रशेखर आजाद नगीना लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं और अतीत में दलित मुद्दों से जुड़े मामलों पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देते रहे हैं। जुलाई 2026 में भी उन्होंने मेरठ में एक दलित छात्र की मौत से जुड़े मामले में परिवार के समर्थन और निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
हालांकि, बिजनौर के इस विशेष विस्फोट मामले में उनकी कथित ‘खामोशी’ या किसी विशेष समुदाय के कारण प्रतिक्रिया नहीं देने जैसे दावों की स्वतंत्र और विश्वसनीय पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं होती। इसलिए इन दावों को तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
अब पुलिस जांच पर टिकी निगाहें
बिजनौर के इस मामले में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही हैं कि विस्फोटक अवशेष घटनास्थल पर किसने डाले, उन्हें सुरक्षित तरीके से क्यों नहीं नष्ट किया गया, अवैध पटाखा निर्माण का नेटवर्क कितना बड़ा था और कथित रूप से बरामद विस्फोटक सामग्री तथा कारतूस बनाने की गतिविधियों से कौन-कौन लोग जुड़े थे।
पुलिस ने नामजद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है और कुछ आरोपी पहले से जेल में हैं। साथ ही घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि वाजिदपुर विस्फोट और चौकपुरी में पकड़े गए अवैध पटाखा कारोबार के बीच किस स्तर का संबंध था।
रोहन की मौत ने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। त्योहारों से पहले अवैध विस्फोटक सामग्री का निर्माण, भंडारण या खुले में उसका निस्तारण न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है। अब जांच एजेंसियों के सामने जिम्मेदारी है कि हादसे के वास्तविक कारणों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका को साक्ष्यों के आधार पर सामने लाया जाए, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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