14 हजार फीट नीचे गिरा विमान, कॉकपिट में पायलट पर चाकू से हमला… आखिर किसने बचाई 180 यात्रियों की जान?
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 बुधवार को उस समय अचानक सुर्खियों में आ गई, जब उड़ान के दौरान कॉकपिट में दोनों पायलटों के बीच हिंसक झड़प की खबर सामने आई। विमान में करीब 180 यात्री सवार थे और घटना के बाद विमान को अपने निर्धारित गंतव्य तेल अवीव के बजाय सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर उतारना पड़ा।
शुरुआती जानकारी सामने आने के बाद विमान के हाईजैक होने की आशंका ने यात्रियों और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी थी। स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब विमान से हाईजैक से जुड़े इमरजेंसी कोड के प्रसारित होने की जानकारी सामने आई।
लेकिन इसके बाद जो घटनाक्रम सामने आया, उसने इस पूरे मामले को और रहस्यमय बना दिया। बताया गया कि कॉकपिट में एक पायलट ने दूसरे पायलट पर चाकू से हमला कर दिया और विमान के नियंत्रण को अपने हाथ में लेने की कोशिश की। इसी दौरान विमान की ऊंचाई में अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई।
कॉकपिट में अचानक शुरू हुई हिंसक झड़प
फ्लाइट FZ1073 दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट के लिए रवाना हुई थी। विमान बोइंग 737 मैक्स 8 था और शुरुआत में उड़ान सामान्य तरीके से आगे बढ़ रही थी।
लेकिन उड़ान के दौरान अचानक कॉकपिट से शोर और संघर्ष की आवाजें आने लगीं। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों पायलटों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ और स्थिति इतनी बिगड़ गई कि एक पायलट ने दूसरे पायलट पर चाकू से हमला कर दिया।
बताया गया कि हमले में मुख्य पायलट घायल हो गए। इसके बाद विमान के नियंत्रण को लेकर स्थिति बेहद गंभीर हो गई। यात्रियों को भी इस घटना की भनक लगने लगी और विमान के अंदर तनाव का माहौल बन गया।
इजरायली अधिकारियों ने इस बात की जांच शुरू की कि क्या हमला करने वाले पायलट ने इसके बाद विमान को जानबूझकर दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश की थी।
14 हजार फीट की तेज गिरावट ने मचाई दहशत
घटना की गंभीरता का अंदाजा विमान की उड़ान से भी लगाया जा सकता है। फ्लाइट ट्रैकिंग से जुड़ी जानकारी के अनुसार विमान करीब 33 से 34 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था।
इसके बाद विमान अचानक तेजी से नीचे आने लगा।
कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि विमान ने बेहद कम समय में लगभग 14 हजार फीट की ऊंचाई गंवा दी। इस अचानक गिरावट ने विमान में बैठे यात्रियों के बीच दहशत पैदा कर दी।
हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे विमान का इतनी तेजी से नीचे आना सामान्य स्थिति नहीं मानी जाती। इस दौरान यात्रियों को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर विमान के साथ क्या हो रहा है।
हालांकि कुछ समय बाद विमान को स्थिर किया गया और उसका रास्ता बदलकर सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट की तरफ कर दिया गया।
7700 के बाद 7500 कोड ने बढ़ाई चिंता
इस घटना में विमान से प्रसारित किए गए इमरजेंसी कोड ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विमान ने पहले 7700 इमरजेंसी कोड भेजा। विमानन क्षेत्र में यह कोड सामान्य आपात स्थिति का संकेत माना जाता है।
इसके बाद विमान से 7500 कोड प्रसारित होने की जानकारी सामने आई। विमानन क्षेत्र में 7500 कोड का इस्तेमाल विमान के हाईजैक या किसी तरह के गैरकानूनी हस्तक्षेप की स्थिति में किया जाता है।
यही वजह थी कि विमान की स्थिति को लेकर सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया।
शुरुआत में आशंका जताई गई कि विमान को हाईजैक कर लिया गया है। हालांकि बाद में सामने आई जानकारी से पता चला कि मामला कॉकपिट के अंदर पायलटों के बीच हुई हिंसक घटना से जुड़ा हो सकता है।
कॉकपिट के अंदर बिखरा था खून
विमान में मौजूद कुछ यात्रियों ने घटना के बाद बेहद डरावने अनुभव साझा किए।
बताया गया कि कॉकपिट का दरवाजा खुलने के बाद वहां खून दिखाई दे रहा था और एक पायलट घायल अवस्था में था।
कुछ यात्रियों ने चालक दल के सदस्यों के साथ मिलकर स्थिति को संभालने में मदद की। घटना के दौरान यात्रियों में भी भारी घबराहट फैल गई थी।
किसी को यह पता नहीं था कि विमान किस दिशा में जा रहा है और आगे क्या होने वाला है।
एक तरफ कॉकपिट में पायलट घायल था, दूसरी तरफ विमान हजारों फीट नीचे जा चुका था और इमरजेंसी कोड प्रसारित हो चुके थे।
ऐसे समय में विमान को नियंत्रित करना सबसे बड़ी चुनौती बन गया।
भारतीय पायलट की भूमिका की भी चर्चा
इस पूरे मामले में एक भारतीय पायलट की भूमिका की भी चर्चा सामने आई है।
रिपोर्टों के अनुसार, विमान में कुछ अतिरिक्त या ऑफ-ड्यूटी पायलट मौजूद थे। बताया गया कि एक भारतीय मूल के पायलट ने स्थिति को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और विमान को सुरक्षित रूप से जमीन पर उतारने में मदद की।
कुछ रिपोर्टों में इस भारतीय पायलट की पहचान स्मिथ मछार के रूप में बताई गई है।
बताया गया कि उन्होंने हमलावर पायलट को काबू करने में मदद की और विमान के नियंत्रण को सुरक्षित करने में भूमिका निभाई।
हालांकि, घटना के शुरुआती चरण में पायलटों की राष्ट्रीयता और उनकी भूमिका को लेकर अलग-अलग जानकारियां सामने आई थीं। इसलिए इस मामले में आधिकारिक जांच पूरी होने तक हर दावे को अंतिम सत्य मानना उचित नहीं होगा।
हमला करने वाला पायलट कौन था?
शुरुआती रिपोर्टों में हमलावर पायलट की पहचान और राष्ट्रीयता को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आई।
बाद की रिपोर्टों में उसे ओमान का नागरिक बताया गया, जबकि दूसरे पायलट को संयुक्त अरब अमीरात का नागरिक बताया गया।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर कॉकपिट में विवाद क्यों शुरू हुआ।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या चाकू से हमला करने के बाद पायलट ने जानबूझकर विमान को नीचे ले जाने की कोशिश की थी या फिर विमान की ऊंचाई में गिरावट संघर्ष के दौरान नियंत्रण खोने की वजह से हुई।
इस सवाल का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
क्या था विमान को क्रैश कराने का इरादा?
इस घटना की जांच में सबसे गंभीर पहलू विमान को जानबूझकर क्रैश कराने की आशंका है।
विमान की ऊंचाई में अचानक आई भारी गिरावट के कारण जांच अधिकारियों को इस संभावना पर भी विचार करना पड़ा कि कहीं विमान को जानबूझकर नीचे ले जाने की कोशिश तो नहीं की गई।
हालांकि अभी तक इस बात की अंतिम पुष्टि नहीं हुई है।
जांच अधिकारी कॉकपिट रिकॉर्डिंग, फ्लाइट डेटा, पायलटों के मेडिकल रिकॉर्ड, विमान के तकनीकी डेटा और यात्रियों तथा चालक दल के बयानों की मदद से पूरे घटनाक्रम को समझने की कोशिश कर रहे हैं।
आतंकी एंगल की भी जांच
घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने संभावित आतंकी एंगल की संभावना को भी जांच के दायरे में रखा।
विमान में हाईजैक से संबंधित कोड का प्रसारित होना, कॉकपिट में चाकू से हमला और विमान की ऊंचाई में अचानक भारी गिरावट जैसे कई पहलुओं को गंभीरता से देखा जा रहा है।
हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि घटना के पीछे आतंकवादी मकसद था।
जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि हमला व्यक्तिगत विवाद का परिणाम था, मानसिक या व्यक्तिगत कारणों से जुड़ा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश थी।
विमान को तबुक की ओर मोड़ा गया
घटना के बाद विमान को तेल अवीव की दिशा से हटाकर सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट की ओर मोड़ा गया।
विमान की स्थिति को नियंत्रित करने के बाद उसे सुरक्षित रूप से तबुक में उतार लिया गया।
लैंडिंग के बाद यात्रियों को विमान से बाहर निकाला गया और घायल पायलटों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि विमान में सवार यात्रियों की जान बच गई।
जिस स्थिति में विमान पहुंच गया था, उसमें थोड़ी-सी भी अतिरिक्त गलती बेहद गंभीर परिणाम पैदा कर सकती थी।
यात्रियों के लिए जिंदगी का सबसे खौफनाक सफर
विमान में बैठे यात्रियों के लिए यह यात्रा शायद जिंदगी की सबसे डरावनी उड़ानों में से एक रही होगी।
शुरुआत में सब कुछ सामान्य था। यात्री अपने गंतव्य तेल अवीव पहुंचने की उम्मीद कर रहे थे।
लेकिन अचानक कॉकपिट से संघर्ष की आवाजें आने लगीं। फिर एक पायलट के घायल होने की खबर सामने आई। इसके बाद विमान की ऊंचाई तेजी से कम हुई और इमरजेंसी कोड प्रसारित किए गए।
कुछ ही समय में एक सामान्य अंतरराष्ट्रीय उड़ान सुरक्षा संकट में बदल गई।
यात्रियों के लिए सबसे डरावना पल वह रहा होगा जब विमान तेजी से नीचे आने लगा और किसी को यह जानकारी नहीं थी कि कॉकपिट में वास्तव में क्या हो रहा है।
अब जांच से खुलेगा पूरा राज
फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 की घटना से जुड़े कई सवाल अभी भी अनसुलझे हैं।
कॉकपिट में हमला क्यों हुआ?
हमलावर पायलट का वास्तविक उद्देश्य क्या था?
क्या विमान को जानबूझकर क्रैश कराने की कोशिश की गई?
7500 हाईजैक कोड क्यों प्रसारित किया गया?
विमान की ऊंचाई में अचानक इतनी बड़ी गिरावट कैसे हुई?
और भारतीय पायलट समेत विमान में मौजूद अन्य पायलटों ने किस तरह स्थिति को संभाला?
इन सभी सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद सामने आएंगे।
फिलहाल सबसे बड़ी राहत यह है कि विमान सुरक्षित रूप से जमीन पर उतर गया और उसमें सवार यात्रियों की जान बच गई।
लेकिन इस घटना ने विमान सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे विमान में कॉकपिट के अंदर कुछ ही मिनटों में पैदा हुआ विवाद किस तरह एक बड़े विमान हादसे में बदल सकता था, यह पूरा घटनाक्रम उसी खतरे की याद दिलाता है।
जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती उस कॉकपिट के अंदर घटी हर घटना को मिनट-दर-मिनट जोड़कर वास्तविक वजह तक पहुंचना है। जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक हाईजैक, क्रैश की कोशिश या आतंकी साजिश जैसे किसी भी निष्कर्ष को अंतिम नहीं माना जा सकता।

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