नंदीग्राम में अचानक पलटा पूरा खेल! ममता के समर्थन के कुछ घंटे बाद कांग्रेस उम्मीदवार गिरफ्तार, कपिल सिब्बल के बयान से मचा सियासी बवाल
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर चुनाव आयोग और सरकार की भूमिका को लेकर सवाल खड़े किए। शनिवार, 19 सितंबर को एएनआई से बातचीत में सिब्बल ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और सरकार के बीच ऐसी 'जुगलबंदी' लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने पूछा कि ऐसे फैसले आखिर कब तक चलते रहेंगे।
हालांकि, इस मामले में पुलिस का पक्ष भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े पुराने मामलों में लंबित गैर-जमानती वारंट के आधार पर की गई। इसलिए गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक दलों के आरोपों और पुलिस द्वारा बताए गए कानूनी आधार को अलग-अलग समझना जरूरी है।
पहले नामांकन वापसी ने बढ़ाया था सस्पेंस
नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर पहला बड़ा घटनाक्रम तब सामने आया, जब ममता बनर्जी गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया। उन्होंने यह फैसला नामांकन वापसी की अंतिम तारीख से एक दिन पहले किया।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, संचिता प्रधान डे ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। इसके बाद उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में सवाल खड़े कर दिए। हालांकि संचिता प्रधान डे ने अपनी नामांकन वापसी के पीछे सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत कारण नहीं बताया है।
नामांकन वापस लेने के बाद ममता बनर्जी के गुट ने नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया। इसके कुछ ही घंटों बाद मिलन प्रधान की गिरफ्तारी हो गई। घटनाओं के इस क्रम ने पूरे मामले को और अधिक राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना दिया।
कौन हैं मिलन प्रधान और क्यों हुई गिरफ्तारी?
मिलन प्रधान नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। पुलिस के अनुसार, उनके खिलाफ 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए कई पुराने मामले लंबित थे।
रिपोर्टों के अनुसार, उनके खिलाफ कम से कम चार मामलों में गैर-जमानती वारंट लंबित थे। इन मामलों में दंगा, हत्या, आपराधिक धमकी और हथियार कानून से जुड़े आरोप शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि उन्हें पूर्व मेदिनीपुर जिले के चंडीपुर इलाके से गिरफ्तार किया गया। उनके साथ कांग्रेस से जुड़े एक अन्य व्यक्ति को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी राजनीतिक कारणों से नहीं, बल्कि लंबे समय से लंबित वारंट के अनुपालन में की गई कार्रवाई है। वहीं कांग्रेस ने गिरफ्तारी के समय और परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक कार्रवाई बताया है।
ममता के समर्थन के कुछ घंटे बाद गिरफ्तारी
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात की हो रही है, वह है गिरफ्तारी का समय।
संचिता प्रधान डे के चुनावी मैदान से हटने के बाद ममता बनर्जी ने 18 सितंबर को कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया। इसके कुछ घंटे बाद ही मिलन प्रधान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ममता बनर्जी के समर्थन की घोषणा शाम करीब 4:30 बजे हुई, जबकि मिलन प्रधान की गिरफ्तारी शाम करीब 6:30 बजे हुई।
इसी घटनाक्रम को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले उम्मीदवार की गिरफ्तारी का समय गंभीर सवाल पैदा करता है। दूसरी तरफ पुलिस का कहना है कि कार्रवाई पुराने मामलों और अदालत से जारी वारंट के आधार पर की गई।
कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने नंदीग्राम की घटनाओं को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि 7 सितंबर को चुनाव आयोग ने नंदीग्राम और रेजीनगर समेत पश्चिम बंगाल की कुछ सीटों पर उपचुनाव की घोषणा की थी।
सिब्बल के मुताबिक, 13 सितंबर को उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए। इसके बाद 17 सितंबर की शाम चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न से संबंधित अंतरिम व्यवस्था की। सिब्बल ने इस घटनाक्रम के क्रम पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव की घोषणा और नामांकन प्रक्रिया के बाद पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर फैसला कई सवाल खड़े करता है।
उन्होंने चुनाव आयोग और सरकार के बीच कथित 'जुगलबंदी' का आरोप लगाते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर चिंता जताई। सिब्बल के ये बयान उनके राजनीतिक आकलन और आरोप हैं; चुनाव आयोग और सरकार की ओर से इन आरोपों को स्वीकार किए जाने का कोई आधार इन रिपोर्टों में नहीं दिया गया है।
TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर भी विवाद
नंदीग्राम उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा संगठनात्मक विवाद भी चुनावी घटनाक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
चुनाव आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच विवाद के बीच अंतरिम व्यवस्था के तहत अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, ममता बनर्जी के गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिह्न दिया गया है, जबकि दूसरे गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चिह्न आवंटित किया गया। यह व्यवस्था फिलहाल अंतरिम प्रकृति की है।
कपिल सिब्बल ने इसी घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव की घोषणा के बाद पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर फैसला किया जाना महत्वपूर्ण सवाल पैदा करता है।
6 अक्टूबर को होना है नंदीग्राम उपचुनाव
नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव 6 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित है। यह चुनाव शुभेंदु अधिकारी के विधानसभा सीट छोड़ने के बाद आवश्यक हुआ। अधिकारी ने नंदीग्राम सीट खाली की थी और बाद में भवानीपुर सीट को बरकरार रखा।
नंदीग्राम पश्चिम बंगाल की राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण सीट रही है। 2021 के विधानसभा चुनाव में यहां ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच सीधा और बेहद चर्चित मुकाबला हुआ था। ऐसे में इस उपचुनाव पर भी राजनीतिक दलों और समर्थकों की नजर बनी हुई है।
कांग्रेस ने कहा- चुनाव से पीछे नहीं हटेंगे
मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह नंदीग्राम उपचुनाव से पीछे नहीं हटेगी। पश्चिम बंगाल कांग्रेस के नेताओं ने कहा है कि उम्मीदवार जेल में रहें तब भी पार्टी कार्यकर्ता उनके लिए प्रचार जारी रखेंगे।
कांग्रेस की ओर से गिरफ्तारी को राजनीतिक कार्रवाई बताया गया है। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया है कि विपक्षी उम्मीदवार को चुनाव से पहले निशाना बनाया गया। वहीं भाजपा की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया है और मामले को पुराने आपराधिक मामलों तथा लंबित वारंट से जोड़कर देखा गया है।
पुलिस ने क्या कहा?
पुलिस के अनुसार मिलन प्रधान के खिलाफ 2007 से जुड़े चार मामलों में अदालतों द्वारा गैर-जमानती वारंट जारी किए गए थे। इन मामलों में कार्रवाई लंबे समय से लंबित थी। पुलिस का कहना है कि विशेष अभियान के तहत लंबित वारंटों को लागू किया जा रहा था और इसी प्रक्रिया में मिलन प्रधान को गिरफ्तार किया गया।
यानी एक तरफ कांग्रेस और विपक्षी नेता गिरफ्तारी के समय को लेकर राजनीतिक सवाल उठा रहे हैं, वहीं पुलिस इसे कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई कार्रवाई बता रही है। इन दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग रखना जरूरी है।
अब आगे क्या?
नंदीग्राम उपचुनाव से पहले घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। एक तरफ TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद है, दूसरी तरफ ममता गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे के नामांकन वापस लेने और फिर कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
कपिल सिब्बल के बयान ने इस विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में ला दिया है। उन्होंने चुनाव आयोग, सरकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। हालांकि उनके आरोप राजनीतिक हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि मिलन प्रधान की गिरफ्तारी पुराने मामलों में लंबित वारंट के आधार पर हुई है। इसलिए इस मामले की पूरी तस्वीर अदालत की कार्यवाही, पुलिस जांच और चुनावी प्रक्रिया के आगे बढ़ने के साथ ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल नंदीग्राम उपचुनाव से पहले सबसे बड़ा सवाल यही है कि आने वाले दिनों में राजनीतिक दल इस घटनाक्रम को किस तरह उठाते हैं और क्या गिरफ्तारी तथा नामांकन वापसी का असर चुनाव प्रचार और उम्मीदवारों की रणनीति पर पड़ता है। 6 अक्टूबर को होने वाले मतदान से पहले नंदीग्राम की राजनीति में अभी कई और मोड़ आने की संभावना बनी हुई है।

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