जिस बेटे के जन्म पर बांटी थी मिठाई, उसी ने बुढ़ापे में पिता को बना दिया बेबस! कमरे में बंद मिले 80 साल के बुजुर्ग, टूटी थी जांघ की हड्डी
मैनपुरी। जिस इकलौते बेटे के जन्म पर कभी परिवार में खुशियां मनाई गई थीं और मिठाइयां बांटी गई थीं, वही बेटा बुढ़ापे में अपने पिता का सहारा बनने के बजाय कथित तौर पर उनके लिए परेशानी का कारण बन गया। मैनपुरी के खरपरी मोहल्ले से सामने आए इस मामले ने बुजुर्गों की सुरक्षा और पारिवारिक रिश्तों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 80 वर्षीय वीरेंद्र सिंह के परिजनों ने उनके बेटे राजपाल सिंह और पोते पर बुजुर्ग को प्रताड़ित करने तथा उनके साथ मारपीट करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
परिजनों का कहना है कि वीरेंद्र सिंह ने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा अपने इकलौते बेटे के भविष्य को संवारने में लगा दिया। पत्नी की मौत के बाद उन्होंने बेटे की परवरिश के लिए अपनी नौकरी तक छोड़ दी। पहले वह फौज में रहे और बाद में अमीन की नौकरी भी की, लेकिन बेटे को अच्छी तरह पालने और पढ़ाने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला किया। उन्हें उम्मीद थी कि जिस बेटे के लिए उन्होंने अपनी जिंदगी की खुशियां और सुविधाएं त्याग दीं, वही बेटा उनके बुढ़ापे में उनका सहारा बनेगा। आरोप है कि समय बीतने के साथ परिस्थितियां ऐसी बदल गईं कि बुजुर्ग पिता खुद को अपने ही घर में असहाय महसूस करने लगे।
बेटे के जन्म पर बांटी थी मिठाई
बताया जाता है कि वीरेंद्र सिंह जब युवा थे, तब परिवार में इकलौते बेटे राजपाल सिंह के जन्म को लेकर बेहद खुशी का माहौल था। बेटे के जन्म पर मिठाइयां बांटी गई थीं और परिवार ने भविष्य के कई सपने संजोए थे। वीरेंद्र सिंह ने कथित तौर पर बेटे को बेहतर जिंदगी देने के लिए अपनी जरूरतों को पीछे रखा।
पत्नी की मृत्यु के बाद बेटे की जिम्मेदारी उनके कंधों पर और बढ़ गई। परिजनों के अनुसार, बेटे की पढ़ाई-लिखाई और परवरिश के लिए उन्होंने अपने रोजगार तक से समझौता किया। उनका सपना था कि बेटा बड़ा होकर योग्य बने और भविष्य में परिवार की जिम्मेदारियां संभाले।
लेकिन आज वही बुजुर्ग गंभीर शारीरिक परेशानी से जूझ रहे हैं और उनके नाती का आरोप है कि उनके साथ मारपीट की गई है।
जमा पूंजी खत्म कराने का आरोप
परिजनों के मुताबिक, उम्र बढ़ने के साथ वीरेंद्र सिंह ने अपनी जिंदगी भर की मेहनत से कुछ रकम जमा की थी। आरोप है कि बेटे ने धीरे-धीरे उनकी जमा पूंजी भी खत्म करा दी। इसके बाद बुजुर्ग की आर्थिक स्थिति कमजोर होती चली गई।
परिवार का आरोप है कि पिछले दिनों वीरेंद्र सिंह को डराया-धमकाया गया और उनसे उनका घर भी पोते के नाम करा लिया गया। परिजनों का कहना है कि बुजुर्ग को घर का मालिक होने के बावजूद कथित तौर पर बोझ की तरह महसूस कराया जाने लगा।
हालांकि संपत्ति हस्तांतरण किस परिस्थिति में हुआ और उसमें बुजुर्ग की सहमति किस प्रकार ली गई, यह जांच का विषय है। इस संबंध में सामने आए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
जांघ की हड्डी टूटने के बाद कमरे में बंद करने का आरोप
मामले का सबसे गंभीर पहलू बुजुर्ग की शारीरिक हालत से जुड़ा है। परिजनों का आरोप है कि पिछले सप्ताह वीरेंद्र सिंह की बाईं जांघ की हड्डी टूट गई। उनका दावा है कि यह चोट गिरने से नहीं, बल्कि किसी प्रहार के कारण लगी है।
इसके बाद बुजुर्ग को कथित तौर पर कमरे में बंद कर दिया गया। परिजनों के अनुसार, कमरे में पंखा तक नहीं था और बुजुर्ग दर्द से कराहते रहे। उन्हें समय पर समुचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाने का भी आरोप लगाया गया है।
बुजुर्ग की ऐसी हालत का पता तब चला जब ग्रेटर नोएडा में रहने वाली उनकी बेटी और दिल्ली में रहने वाला नाती छह सितंबर को उनसे मिलने मैनपुरी पहुंचे।
कमरे का मंजर देखकर परिजन रह गए हैरान
छह सितंबर को जब बेटी और नाती वीरेंद्र सिंह से मिलने पहुंचे तो उन्होंने उन्हें कथित तौर पर बंद कमरे में बेहद खराब हालत में पाया। परिजनों के मुताबिक, बुजुर्ग बिना पंखे के कमरे में पड़े थे और तेज दर्द से कराह रहे थे।
यह दृश्य देखकर बेटी और नाती के होश उड़ गए। उन्होंने तत्काल बुजुर्ग को चिकित्सा सहायता दिलाने की कोशिश शुरू की। अस्पताल ले जाकर जांच कराई गई तो उनकी जांघ की हड्डी टूटी होने की जानकारी सामने आई।
नाती अभिषेक का दावा है कि उनके नाना की जांघ की हड्डी सामान्य रूप से गिरने की वजह से नहीं टूटी है। उनका आरोप है कि बुजुर्ग पर प्रहार किया गया था, जिसके कारण उन्हें गंभीर चोट आई।
हालांकि चोट की वास्तविक वजह का अंतिम निर्धारण चिकित्सकीय रिपोर्ट और जांच के आधार पर ही हो सकेगा।
मैनपुरी से नोएडा ले आए नाती
स्थानीय स्तर पर उपचार के बाद जब परिवार को लगा कि बुजुर्ग को बेहतर चिकित्सा सुविधा की आवश्यकता है, तो सात सितंबर को नाती उन्हें अपने साथ नोएडा ले आए। फिलहाल वीरेंद्र सिंह का उपचार नोएडा सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल में चल रहा है।
परिजनों के अनुसार, बुजुर्ग की उम्र अधिक होने के कारण चिकित्सकों ने सर्जरी को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। नाती अभिषेक का कहना है कि परिवार अब दिल्ली के एम्स या किसी अन्य बेहतर अस्पताल में बुजुर्ग का उपचार कराने का प्रयास कर रहा है।
80 वर्ष की उम्र में गंभीर चोट के कारण वीरेंद्र सिंह को चलने-फिरने में परेशानी हो रही है। परिवार के सामने अब उनके इलाज और देखभाल की बड़ी जिम्मेदारी है।
बेटी और नाती ने लगाए गंभीर आरोप
बुजुर्ग के नाती अभिषेक ने अपने मामा राजपाल सिंह और उनके बेटे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बुजुर्ग को लंबे समय से परेशान किया जा रहा था और उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया।
अभिषेक के मुताबिक, जिस व्यक्ति ने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा बेटे की परवरिश में लगा दिया, उसी बुजुर्ग को बुढ़ापे में इस स्थिति से गुजरना पड़ा। उनका आरोप है कि संपत्ति अपने नाम कराने के बाद भी बुजुर्ग के साथ कथित तौर पर अच्छा व्यवहार नहीं किया गया।
परिवार अब आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है।
कई सवालों के जवाब अभी बाकी
इस पूरे मामले में कई सवाल ऐसे हैं, जिनका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। बुजुर्ग की जांघ की हड्डी आखिर किस परिस्थिति में टूटी? क्या वह गिरने से घायल हुए या जैसा नाती आरोप लगा रहा है, उनके साथ मारपीट हुई? उन्हें कमरे में क्यों बंद रखा गया? घर किस परिस्थिति में पोते के नाम किया गया? और यदि बुजुर्ग की तबीयत खराब थी तो उन्हें तत्काल अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया?
इन सभी सवालों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप गंभीर हैं, लेकिन आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी। बुजुर्ग की मेडिकल रिपोर्ट, चिकित्सकों की राय, परिजनों के बयान और यदि उपलब्ध हों तो अन्य साक्ष्य इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कार्रवाई की मांग
अभिषेक ने आरोपित राजपाल सिंह और उनके बेटे के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। परिवार चाहता है कि बुजुर्ग के साथ कथित तौर पर हुई प्रताड़ना और मारपीट की निष्पक्ष जांच हो तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
यह मामला केवल एक परिवार के विवाद तक सीमित नहीं है। यह सवाल भी उठाता है कि उम्र के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुके बुजुर्गों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है। जिस पिता ने बेटे को पालने के लिए अपनी नौकरी और निजी जीवन की सुविधाओं तक का त्याग किया, अगर वही व्यक्ति अपने बुढ़ापे में असहाय हो जाए तो समाज और परिवार दोनों के सामने गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
फिलहाल वीरेंद्र सिंह नोएडा में उपचार करा रहे हैं। परिवार उनकी हालत में सुधार की उम्मीद कर रहा है और बेहतर इलाज के लिए दिल्ली ले जाने की तैयारी में है। दूसरी ओर, परिजन पूरे मामले की जांच और आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अब यह जांच और चिकित्सकीय साक्ष्य ही स्पष्ट करेंगे कि बुजुर्ग की चोट कैसे लगी और उनके साथ वास्तव में क्या हुआ था।

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