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70 रुपये किलो वाली चीनी अचानक 44 पर आई! सरकार के एक फैसले से पलटा पूरा खेल, अब दुकानों पर भी घटेगा भाव?



चीनी की कीमतों को लेकर पिछले करीब डेढ़ महीने से चल रही हलचल अब एक बड़े बदलाव के दौर में पहुंच गई है। जुलाई और अगस्त के दौरान जिस चीनी का एक्स-मिल भाव करीब 44 रुपये प्रति किलो के आसपास था, उसकी कीमत अचानक बढ़कर लगभग 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी। इस तेज उछाल ने चीनी उद्योग से लेकर थोक कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं तक सभी की चिंता बढ़ा दी थी। लेकिन अब बाजार ने अचानक करवट ली है और चीनी के एक्स-मिल भाव में तेज गिरावट देखने को मिली है।

सरकारी सख्ती, बाजार में जमा अतिरिक्त स्टॉक के निकलने, थोक खरीदारों की नई खरीद कमजोर पड़ने और आयात के फैसले के बाद चीनी के दाम तेजी से नीचे आए हैं। हालात यह हैं कि एक्स-मिल भाव एक बार फिर 44-45 रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंच गया है। यानी तेजी के दौरान जितनी बढ़ोतरी हुई थी, उसका लगभग पूरा हिस्सा अब खत्म हो चुका है।

हालांकि, इसका फायदा अभी सीधे आम उपभोक्ताओं को पूरी तरह नहीं मिला है। खुदरा बाजार में चीनी अभी भी करीब 60 से 63 रुपये प्रति किलो के आसपास बिक रही है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि जब मिल स्तर पर चीनी के भाव इतनी तेजी से गिर गए हैं तो दुकानों पर इसकी कीमत अभी भी इतनी ज्यादा क्यों है?

एक्स-मिल भाव गिरा, लेकिन दुकानों पर चीनी अभी महंगी

चीनी उद्योग से जुड़े कारोबारियों के मुताबिक एक्स-मिल कीमत और खुदरा कीमत के बीच तुरंत समानता नहीं आती। मिल से निकलने के बाद चीनी कई स्तरों से गुजरती है। सबसे पहले यह थोक कारोबारी के पास पहुंचती है, फिर वितरक और उसके बाद खुदरा दुकानदार तक जाती है।

यही वजह है कि मिल स्तर पर कीमत घटने के बावजूद उसका असर बाजार के अंतिम छोर तक पहुंचने में कुछ समय लगता है। इसके अलावा तेजी के दौरान कारोबारियों ने जिस कीमत पर चीनी खरीदी थी, उसका पुराना स्टॉक भी अभी बाजार में मौजूद है।

महंगे भाव पर खरीदी गई चीनी को कारोबारी तुरंत कम कीमत पर बेचने से बचते हैं, क्योंकि ऐसा करने पर उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए पुराना स्टॉक बाजार में पुराने लागत भाव के आसपास ही बिकता रहता है। यही कारण है कि एक्स-मिल भाव में आई भारी गिरावट के बावजूद खुदरा बाजार में कीमतें उसी अनुपात में नीचे नहीं आई हैं।

उद्योग से जुड़े लोगों का अनुमान है कि एक्स-मिल भाव में गिरावट का असर खुदरा बाजार में पूरी तरह दिखाई देने में करीब 7 से 10 दिन लग सकते हैं। आने वाले दिनों में थोक बाजार में कीमतों की नरमी और ज्यादा स्पष्ट हो सकती है।

70 रुपये से फिर 44-45 रुपये किलो पर पहुंचा भाव

चीनी के बाजार में आई यह गिरावट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ समय पहले तक कीमतों में असाधारण तेजी देखी गई थी। करीब डेढ़ महीने पहले शुरू हुई तेजी के दौरान एक्स-मिल भाव लगभग 44 रुपये प्रति किलो से बढ़कर करीब 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था।

यानी कीमत में लगभग 26-27 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई थी। इस तेजी ने चीनी की उपलब्धता को लेकर बाजार में चिंता पैदा कर दी थी। थोक उपभोक्ताओं और कारोबारियों को आशंका होने लगी कि आने वाले समय में चीनी की कमी हो सकती है।

इसी डर के कारण कई खरीदारों ने अपनी वास्तविक जरूरत से ज्यादा चीनी खरीदकर स्टॉक करना शुरू कर दिया। जब बड़ी संख्या में कारोबारी और थोक उपभोक्ता अतिरिक्त खरीद करने लगते हैं तो बाजार में उपलब्ध तत्काल स्टॉक कम हो जाता है। इससे मांग और उपलब्धता के बीच असंतुलन पैदा हुआ और कीमतों पर दबाव बढ़ने लगा।

लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।

सरकार की सख्ती के बाद बदला बाजार का रुख

चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए। इनमें सबसे महत्वपूर्ण कदम थोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक की सीमा तय करना रहा।

1 सितंबर से थोक उपभोक्ताओं के लिए चीनी का स्टॉक अधिकतम 15 दिन की जरूरत तक सीमित कर दिया गया। इसका सीधा असर उन कारोबारियों पर पड़ा, जिन्होंने तेजी की आशंका में अपनी जरूरत से काफी ज्यादा चीनी खरीदकर रख ली थी।

जब अतिरिक्त स्टॉक रखने की गुंजाइश कम हुई तो ऐसे कारोबारियों को जमा माल बाजार में निकालना पड़ा। अचानक बाजार में अतिरिक्त चीनी की उपलब्धता बढ़ने लगी। दूसरी तरफ नई खरीद के लिए मांग कमजोर पड़ गई। मांग कम और उपलब्धता ज्यादा होने से कीमतों पर दबाव बढ़ा और चीनी का भाव तेजी से नीचे आने लगा।

यही बाजार की दिशा बदलने की सबसे बड़ी वजहों में से एक मानी जा रही है।

डीलरों पर भी घटने वाली है स्टॉक लिमिट

सरकार ने केवल थोक उपभोक्ताओं पर ही स्टॉक संबंधी नियंत्रण नहीं लगाया है। 15 सितंबर से डीलरों के लिए भी चीनी की स्टॉक सीमा कम की जा रही है।

मौजूदा व्यवस्था में डीलरों को 4,000 क्विंटल तक स्टॉक रखने की अनुमति थी, जिसे घटाकर 2,000 क्विंटल किया जा रहा है।

इस फैसले का असर भी बाजार में चीनी की उपलब्धता और कारोबारियों की खरीद रणनीति पर पड़ सकता है। बड़ी मात्रा में स्टॉक रखने वाले कारोबारियों के लिए अतिरिक्त माल को बाजार में निकालना जरूरी हो जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में बाजार में सप्लाई बढ़ सकती है और इससे कीमतों पर और दबाव बनने की संभावना है।

सरकार के चीनी आयात के फैसले ने भी बदली तस्वीर

चीनी की कीमतों में आई तेजी के बीच सरकार ने करीब 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात का फैसला भी किया है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में उपलब्धता को लेकर पैदा हुई आशंकाओं को कम करना और सप्लाई को संतुलित रखना है।

अब जबकि घरेलू बाजार में ही चीनी के भाव तेजी से नीचे आ चुके हैं, हो सकता है कि आयात की पूरी मात्रा की तत्काल जरूरत उतनी महसूस न हो। लेकिन बाजार पर इस फैसले का मनोवैज्ञानिक प्रभाव जरूर पड़ा है।

कारोबारियों को यह संकेत मिला कि सरकार बाजार में चीनी की कमी नहीं होने देना चाहती। ऐसे में भविष्य में कीमतों में बड़ी तेजी की उम्मीद कमजोर हुई है। नतीजा यह हुआ कि जिन कारोबारियों ने ऊंचे भाव की उम्मीद में स्टॉक जमा कर रखा था, उन पर भी माल निकालने का दबाव बढ़ गया।

पेराई सत्र जल्द शुरू कराने की तैयारी

सरकार ने प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों से पेराई सत्र जल्द शुरू करने का आग्रह भी किया है। नई पेराई शुरू होने का मतलब है कि बाजार में घरेलू चीनी की नई सप्लाई आने की उम्मीद बढ़ेगी।

हालांकि, चीनी उद्योग इस मुद्दे को लेकर कुछ सावधानी बरतने की बात करता है। बहुत जल्दी पेराई शुरू करने पर गन्ने की रिकवरी प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसके अलावा शुरुआती दौर में गन्ने के वजन में भी 10 से 15 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।

इसलिए चीनी मिलों के सामने भी संतुलन बनाने की चुनौती है। एक तरफ बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ गन्ने की गुणवत्ता और रिकवरी को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

महाराष्ट्र और कर्नाटक में क्या रहा भाव?

5 सितंबर को महाराष्ट्र में एम-ग्रेड चीनी का एक्स-मिल भाव करीब 4,350 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि कर्नाटक में यह करीब 4,380 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया।

ये आंकड़े बताते हैं कि बाजार में तेजी का दौर अब काफी हद तक पीछे छूट चुका है। जिस समय चीनी के दाम तेजी से बढ़ रहे थे, उस समय कारोबारियों और थोक खरीदारों में भविष्य की कीमतों को लेकर चिंता थी। लेकिन अब सरकारी हस्तक्षेप और स्टॉक की उपलब्धता बढ़ने के बाद बाजार का रुख उलट गया है।

आम आदमी को सस्ती चीनी कब मिलेगी?

सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि एक्स-मिल भाव गिरने के बाद आम उपभोक्ता को इसका फायदा कब मिलेगा।

फिलहाल खुदरा बाजार में चीनी करीब 60-63 रुपये किलो के आसपास बिक रही है, जबकि मिल स्तर पर भाव 44-45 रुपये किलो तक आ गया है। इस अंतर की बड़ी वजह पुराना महंगा स्टॉक और सप्लाई चेन में शामिल अलग-अलग स्तर हैं।

अगर बाजार में पुराना महंगा स्टॉक धीरे-धीरे खत्म होता है और नई चीनी कम कीमत पर बाजार में आती है, तो खुदरा कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है। उद्योग से जुड़े अनुमानों के मुताबिक इसका असर आने वाले 7 से 10 दिनों में ज्यादा स्पष्ट दिखाई दे सकता है।

कुल मिलाकर चीनी बाजार में पिछले डेढ़ महीने में एक असाधारण उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। करीब 44 रुपये किलो से शुरू हुई तेजी 70 रुपये तक पहुंची और अब भाव फिर 44-45 रुपये के आसपास आ गया है। सरकार की स्टॉक लिमिट, अतिरिक्त स्टॉक की निकासी, कमजोर नई खरीद, आयात का फैसला और आगामी पेराई सत्र—इन सभी कारकों ने मिलकर बाजार की दिशा बदल दी है।

अब नजर इस बात पर होगी कि एक्स-मिल भाव में आई गिरावट कितनी तेजी से थोक और खुदरा बाजार तक पहुंचती है। अगर पुराना महंगा स्टॉक तेजी से निकलता है और नई सप्लाई बेहतर होती है, तो आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को भी चीनी की कीमत में राहत मिल सकती है।

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