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293 करोड़ से सीधे 108 करोड़ लीटर! रेलवे में आखिर क्या हुआ ऐसा कि 2030 तक डीजल खत्म करने की तैयारी? अमित शाह के ऐलान से मचा हलचल



भारतीय रेलवे में पिछले एक दशक से अधिक समय के दौरान विद्युतीकरण, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा तकनीक और वैकल्पिक ईंधन को लेकर कई बदलाव किए गए हैं। इसी क्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान रेलवे से जुड़े कई आंकड़े साझा किए। उन्होंने खास तौर पर डीजल की खपत में आई कमी और रेलवे के तेजी से हो रहे विद्युतीकरण का उल्लेख किया।

27 सितंबर 2026 को साबरमती रेलवे स्टेशन पर आयोजित कार्यक्रम में अमित शाह ने देश की पहली LNG-डीजल डुअल-फ्यूल ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। इसके साथ गुजरात में रेलवे से जुड़ी कई परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और शुभारंभ भी किया गया।

2015-16 में 293 करोड़ लीटर डीजल की खपत

अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि वित्त वर्ष 2015-16 में भारतीय रेलवे में करीब 293 करोड़ लीटर डीजल की खपत होती थी। उनके अनुसार वर्ष 2024-25 तक यह आंकड़ा घटकर 108 करोड़ लीटर रह गया।

इन आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में रेलवे की वार्षिक डीजल खपत में लगभग 185 करोड़ लीटर की कमी आई। अमित शाह ने डीजल की खपत में इस गिरावट को रेलवे के बढ़ते विद्युतीकरण और डीजल आधारित ट्रैक्शन पर कम होती निर्भरता से जोड़ा।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक रेलवे में डीजल की खपत को शून्य करने का है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए रेलवे के बाकी डीजल आधारित परिचालन को इलेक्ट्रिक या अन्य वैकल्पिक ईंधन प्रणालियों में बदलना होगा।

रेलवे का 99.6 फीसदी विद्युतीकरण

रेलवे के विद्युतीकरण को लेकर भी कार्यक्रम में महत्वपूर्ण आंकड़े सामने रखे गए। अमित शाह के अनुसार वर्ष 2010-11 में एक साल के दौरान लगभग 75 किलोमीटर रेलवे लाइन का विद्युतीकरण किया जाता था।

इसके मुकाबले वर्ष 2023-24 में एक साल में करीब 7,188 किलोमीटर रेलवे लाइन का विद्युतीकरण किया गया।

अमित शाह ने कहा कि भारतीय रेलवे के नेटवर्क का करीब 99.6 फीसदी विद्युतीकरण हो चुका है। बाकी हिस्से में भी विद्युतीकरण का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

रेलवे में विद्युतीकरण बढ़ने का सीधा प्रभाव डीजल इंजन की जरूरत पर पड़ता है। जैसे-जैसे अधिक रेल मार्ग इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर आते हैं, वैसे-वैसे उन मार्गों पर डीजल इंजन के इस्तेमाल की आवश्यकता कम होती जाती है।

देश की पहली LNG-डीजल डुअल-फ्यूल ट्रेन

अहमदाबाद के कार्यक्रम में सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक देश की पहली LNG आधारित ट्रेन को हरी झंडी दिखाना रहा।

यह ट्रेन पूरी तरह केवल LNG पर निर्भर नहीं है। इसमें LNG और डीजल दोनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी वजह से इसे LNG-डीजल डुअल-फ्यूल ट्रेन कहा जा रहा है।

इस परियोजना के तहत साबरमती इंटीग्रेटेड कोचिंग डिपो में दो 1,400 हॉर्सपावर वाले Driving Power Cars को डीजल-LNG डुअल-फ्यूल सिस्टम में परिवर्तित किया गया है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह तकनीक करीब 40 फीसदी तक डीजल को LNG से बदलने की क्षमता रखती है। इसका उद्देश्य डीजल की खपत कम करना और वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।

रेलवे के लिए यह प्रयोग इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि देश में परिवहन क्षेत्र में वैकल्पिक ईंधन को लेकर लगातार तकनीकी प्रयोग किए जा रहे हैं।

2,000 किलोमीटर से ज्यादा हुआ परीक्षण

LNG-डीजल डुअल-फ्यूल तकनीक को ट्रेन में इस्तेमाल करने से पहले इसके परीक्षण किए गए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोनों परिवर्तित Driving Power Cars के साथ 2,000 किलोमीटर से ज्यादा फील्ड ट्रायल पूरे किए गए।

इन परीक्षणों का उद्देश्य नई तकनीक के प्रदर्शन, विश्वसनीयता और वास्तविक परिचालन परिस्थितियों में इसकी उपयोगिता को जांचना था।

डुअल-फ्यूल तकनीक का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ट्रेन केवल एक ईंधन पर निर्भर नहीं रहती। यदि किसी परिस्थिति में LNG की उपलब्धता सीमित हो, तो डीजल का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इससे रेलवे को वैकल्पिक ईंधन तकनीक को चरणबद्ध तरीके से अपनाने में मदद मिल सकती है।

WAG-12 लोकोमोटिव के लिए नया मेंटेनेंस शेड

अहमदाबाद कार्यक्रम में WAG-12 लोकोमोटिव मेंटेनेंस शेड का भी उद्घाटन किया गया।

WAG-12 भारतीय रेलवे के हाई-पावर इलेक्ट्रिक मालगाड़ी लोकोमोटिव में शामिल है। इसकी क्षमता करीब 12,000 हॉर्सपावर बताई जाती है।

हाई-पावर इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव का इस्तेमाल विशेष रूप से भारी माल ढुलाई वाले परिचालन में किया जाता है। इनके लिए आधुनिक रखरखाव सुविधाएं विकसित करने से रेलवे के माल परिवहन नेटवर्क की परिचालन क्षमता को समर्थन मिल सकता है।

रेलवे में माल ढुलाई की मांग बढ़ने के साथ हाई-पावर इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती जा रही है।

रेलवे सुरक्षा में कवच सिस्टम पर जोर

रेलवे में बदलाव केवल ईंधन और विद्युतीकरण तक सीमित नहीं है। सुरक्षा तकनीक को भी आधुनिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

अहमदाबाद डिवीजन के विभिन्न हिस्सों में कवच ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम से संबंधित कार्य भी शुरू किया गया है।

रिपोर्टों के अनुसार अहमदाबाद-पलनपुर और अहमदाबाद-सामाखियाली सेक्शन सहित करीब 404 किलोमीटर के रेल नेटवर्क पर कवच प्रणाली लगाने की योजना है।

कवच एक स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जिसका उद्देश्य निर्धारित परिस्थितियों में ट्रेन की गति को नियंत्रित करने और संभावित टक्कर जैसी परिस्थितियों में सुरक्षा बढ़ाने में सहायता करना है।

इस तरह की तकनीक का उद्देश्य मानवीय गलती से दुर्घटना की संभावना को कम करने और ट्रेन संचालन को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद करना है।

गुजरात में कई रेलवे परियोजनाओं की शुरुआत

साबरमती में आयोजित कार्यक्रम के दौरान गुजरात में रेलवे से संबंधित कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया।

रेलवे लाइन की क्षमता बढ़ाने, सिग्नलिंग व्यवस्था को आधुनिक बनाने और ट्रेनों की आवाजाही को बेहतर बनाने से संबंधित परियोजनाओं पर काम शुरू किया गया।

साबरमती-सर्केज रेलवे लाइन के दोहरीकरण की परियोजना भी इनमें शामिल है। इसके अलावा कुछ रेल सेक्शन में ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम से संबंधित काम शुरू किया गया।

इन परियोजनाओं का उद्देश्य रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना, ट्रेनों की आवाजाही को अधिक व्यवस्थित करना और यात्री तथा माल परिवहन के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा तैयार करना है।

गुजरात के रेलवे बजट का भी किया उल्लेख

अमित शाह ने कार्यक्रम के दौरान गुजरात के रेलवे बजट का भी उल्लेख किया।

उनके अनुसार वर्ष 2009 से 2014 के बीच गुजरात के लिए रेलवे बजट का आवंटन करीब 589 करोड़ रुपये था। वहीं 2026-27 के लिए यह आंकड़ा बढ़कर 17,366 करोड़ रुपये हो गया है।

अमित शाह ने इन आंकड़ों को गुजरात में रेलवे से जुड़े निवेश और विकास के संदर्भ में पेश किया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने पिछली सरकारों की रेलवे से संबंधित नीतियों और मौजूदा सरकार के कार्यों के बीच राजनीतिक तुलना भी की।

इन राजनीतिक टिप्पणियों को अमित शाह के बयान के रूप में देखा जाना चाहिए।

डीजल की खपत कम होने से क्या फायदा?

रेलवे में डीजल की खपत कम होने का संबंध ऊर्जा लागत, ईंधन पर निर्भरता और पर्यावरणीय प्रभाव से भी है।

इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन बढ़ने से रेलवे को बड़ी संख्या में डीजल इंजनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। इससे डीजल खरीद की आवश्यकता कम हो सकती है।

इसके अलावा यदि रेलवे के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ती है तो इलेक्ट्रिक रेलवे के पर्यावरणीय लाभ भी बढ़ सकते हैं।

हालांकि इलेक्ट्रिक ट्रेन को पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त कहना उचित नहीं होगा। इसका पर्यावरणीय प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करता है कि इस्तेमाल की जाने वाली बिजली किस स्रोत से उत्पन्न हो रही है।

इसी कारण रेलवे में विद्युतीकरण के साथ-साथ LNG और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा विकल्पों पर भी प्रयोग किए जा रहे हैं।

2030 तक डीजल खत्म करने की चुनौती

2015-16 में 293 करोड़ लीटर से 2024-25 में 108 करोड़ लीटर तक पहुंची डीजल खपत रेलवे में डीजल आधारित ट्रैक्शन की निर्भरता में कमी को दर्शाती है।

हालांकि 108 करोड़ लीटर से शून्य तक पहुंचना अभी एक बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए बाकी डीजल आधारित रेल मार्गों का विद्युतीकरण, वैकल्पिक ईंधन तकनीक का विस्तार और परिचालन व्यवस्था में बदलाव जरूरी होगा।

अमित शाह ने वर्ष 2030 तक रेलवे में डीजल की खपत को शून्य करने का लक्ष्य बताया है। यदि यह लक्ष्य हासिल होता है तो रेलवे की ऊर्जा जरूरतों और ईंधन आयात पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।

रेलवे में बदलाव की बड़ी तस्वीर

अहमदाबाद में सामने आए आंकड़े भारतीय रेलवे में चल रहे बदलाव के कई पहलुओं को सामने रखते हैं। एक ओर रेलवे का विद्युतीकरण लगभग पूरा होने के स्तर पर पहुंच चुका है, वहीं दूसरी ओर डीजल की खपत में भी उल्लेखनीय कमी बताई गई है।

इसके साथ LNG-डीजल डुअल-फ्यूल ट्रेन, WAG-12 जैसे हाई-पावर इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव, कवच सुरक्षा प्रणाली, ऑटोमेटिक सिग्नलिंग और रेल लाइन दोहरीकरण जैसी परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।

आने वाले वर्षों में रेलवे के सामने विद्युतीकरण को पूरी तरह पूरा करने के साथ सुरक्षा, यात्री सुविधाओं, माल ढुलाई क्षमता, समयबद्धता और परिचालन दक्षता को बेहतर करने की चुनौती भी रहेगी।

फिलहाल अमित शाह द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार भारतीय रेलवे में डीजल की खपत 293 करोड़ लीटर से घटकर 108 करोड़ लीटर रह गई है और वर्ष 2030 तक इसे शून्य करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी दिशा में देश की पहली LNG-डीजल डुअल-फ्यूल ट्रेन की शुरुआत को रेलवे के वैकल्पिक ईंधन प्रयोगों के एक हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।

 इस खबर में कार्यक्रम के दौरान अमित शाह द्वारा बताए गए आंकड़ों और उनके बयानों को उनके कथन के रूप में प्रस्तुत किया गया है। राजनीतिक टिप्पणियों और तुलना को स्वतंत्र निष्कर्ष के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।

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