'4 महीने में 27 बार अलग अलग बंदे ने नंगा करके..' बताते हुए रो पड़ी 33 साल की एक्ट्रेस
नई दिल्ली: पंजाबी अभिनेत्री, कंटेंट क्रिएटर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर संदीपा विर्क इन दिनों अपनी फिल्मों या सोशल मीडिया गतिविधियों से ज्यादा अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं। करीब 6 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार होने के बाद उन्होंने तिहाड़ जेल में चार महीने से ज्यादा समय बिताया। दिसंबर 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आईं और अब अलग-अलग पॉडकास्ट और इंटरव्यू में जेल के दौरान के अपने अनुभव साझा कर रही हैं।
सितंबर 2026 में सामने आए एक पॉडकास्ट से जुड़े इंटरव्यू में संदीपा ने जेल में प्रवेश से लेकर वहां रहने तक की कई परेशानियों का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि जेल की प्रक्रिया उनके लिए मानसिक और भावनात्मक रूप से बेहद कठिन रही। खासतौर पर महिलाओं की तलाशी, अस्पताल में मेडिकल प्रक्रिया, जेल की साफ-सफाई, भोजन और रहने की परिस्थितियों को लेकर उन्होंने गंभीर बातें कहीं।
6 करोड़ रुपये के मामले में हुई थी गिरफ्तारी
संदीपा विर्क को प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने 12 अगस्त 2025 को PMLA के तहत गिरफ्तार किया था। ED ने अपनी प्रेस रिलीज में कहा था कि जांच एक ऐसे मामले से जुड़ी थी जिसमें लोगों से कथित तौर पर गलत वादों और भ्रामक जानकारी के जरिए पैसा लिए जाने का आरोप था। एजेंसी के अनुसार, जांच में संपत्तियों और कथित फर्जी ई-कॉमर्स वेबसाइट से जुड़े लेन-देन की भी जांच की गई थी।
दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल मामले के रिकॉर्ड के मुताबिक अभियोजन पक्ष का आरोप था कि एक शिकायतकर्ता और उसके परिवार से करीब 6 करोड़ रुपये इस आश्वासन पर लिए गए कि शिकायतकर्ता को एक फिल्म में मुख्य भूमिका दी जाएगी। ED का आरोप था कि कथित तौर पर प्राप्त रकम को बैंक खातों और संपत्तियों से जुड़े लेन-देन के जरिए इस्तेमाल किया गया। अदालत के रिकॉर्ड में ये आरोप अभियोजन पक्ष के मामले के रूप में दर्ज हैं, न कि संदीपा के खिलाफ साबित तथ्य के रूप में।
संदीपा ने इन आरोपों से इनकार किया है और अपने हालिया इंटरव्यू में दावा किया कि उन्हें इस मामले में फंसाया गया। सितंबर 2026 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने अपने पूर्व बॉयफ्रेंड पर भी उन्हें मामले में फंसाने का आरोप लगाया है।
तिहाड़ के चार महीने याद कर भावुक हुईं संदीपा
जेल से बाहर आने के बाद संदीपा ने अपने अनुभव को कई बार सार्वजनिक रूप से साझा किया है। फरवरी-मार्च 2026 में दिए एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि जेल में रहने का अनुभव उनके लिए इतना कठिन था कि कई बार उन्होंने मौत की कामना तक की। उन्होंने यह भी कहा था कि परिवार के लोगों को जेल में उनसे मिलने आते देखना उनके लिए सबसे ज्यादा भावुक करने वाला समय होता था।
उन्होंने जेल की भीड़, खराब भोजन, साफ-सफाई की स्थिति और मानसिक तनाव का भी जिक्र किया था। उनके मुताबिक जेल में रहने के दौरान उनकी सेहत पर भी बुरा असर पड़ा और तनाव के कारण वह शारीरिक रूप से काफी कमजोर महसूस करती थीं। हालांकि ये उनके व्यक्तिगत अनुभव और दावे हैं, जिन्हें स्वतंत्र रूप से जेल प्रशासन की ओर से सत्यापित किए जाने की जानकारी इन रिपोर्टों में नहीं दी गई है।
महिलाओं की तलाशी को लेकर क्या बोलीं संदीपा?
सितंबर में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक संदीपा ने दावा किया कि जेल में महिलाओं की तलाशी की प्रक्रिया उनके लिए बेहद अपमानजनक और मानसिक रूप से परेशान करने वाली थी। उन्होंने कहा कि कई बार तलाशी के दौरान उन्हें कपड़े उतारने पड़े और महिला सुरक्षाकर्मियों द्वारा जांच की गई। संदीपा ने इसे अपने लिए मानसिक प्रताड़ना जैसा अनुभव बताया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि जेल से कोर्ट की पेशी या अन्य प्रक्रियाओं के बाद लौटने के दौरान सुरक्षा जांच उनके लिए विशेष रूप से असहज होती थी। उनके मुताबिक, तलाशी के दौरान महिला कैदियों की निजता और भावनाओं का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा जाता था।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये बातें संदीपा विर्क द्वारा बताए गए व्यक्तिगत अनुभव और आरोप हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में इन विशिष्ट आरोपों पर तिहाड़ जेल प्रशासन का विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है। इसलिए इन्हें जेल व्यवस्था के बारे में स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
जेल जाने से पहले प्रेग्नेंसी टेस्ट का भी किया जिक्र
संदीपा ने जेल में दाखिल होने की प्रक्रिया के दौरान मेडिकल जांच का भी जिक्र किया। आजतक की सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने बताया कि अस्पताल ले जाने के बाद महिलाओं के लिए प्रेग्नेंसी टेस्ट की प्रक्रिया हुई और उन्होंने वहां के वॉशरूम की स्थिति को बेहद खराब बताया। उन्होंने यह भी कहा कि इसके बाद उन्हें संबंधित विभाग और फिर कोर्ट ले जाया गया।
संदीपा के अनुसार, गिरफ्तारी के शुरुआती दिनों में वह मानसिक तनाव से गुजर रही थीं। उन्होंने दावा किया कि रिमांड के दौरान भी उन्हें काफी परेशानी हुई। उनके द्वारा बताए गए अनुभवों में जेल की स्वच्छता और मेडिकल सुविधाओं को लेकर भी शिकायतें शामिल हैं।
जेल के भोजन और रहने की व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
इससे पहले दिए गए एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में संदीपा ने तिहाड़ के भोजन और रहने की व्यवस्था को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने बताया था कि जेल में भोजन उन्हें पसंद नहीं आता था और वहां की परिस्थितियों के कारण खाना खाने का मन भी नहीं करता था।
उन्होंने बैरक में बड़ी संख्या में लोगों के साथ रहने और फर्श पर सोने की स्थिति का भी जिक्र किया था। उनके मुताबिक, जेल में गर्मी, गंदे वॉशरूम और कीड़े-मच्छरों जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ा। आजतक की रिपोर्ट में भी उनके हवाले से जेल की गंदगी और सोने की परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है।
पुलिसकर्मियों के व्यवहार को लेकर भी दावा
संदीपा ने महिला सुरक्षाकर्मियों के व्यवहार को लेकर भी अपनी नाराजगी व्यक्त की। उनके मुताबिक, जेल में सभी सुरक्षाकर्मी एक जैसा व्यवहार नहीं करते थे। कुछ महिला पुलिसकर्मियों को उन्होंने सहयोगी बताया, जबकि कुछ पर उन्होंने कैदियों के प्रति कठोर व्यवहार करने का आरोप लगाया। उनके इस बयान का उल्लेख भारतीय एक्सप्रेस और अन्य रिपोर्टों में भी किया गया है।
संदीपा ने जेल के अंदर पैसे के इस्तेमाल को लेकर भी एक गंभीर दावा किया था। उनका कहना था कि जेल में पैसे होने पर कई काम आसानी से हो जाते हैं, जबकि पैसे नहीं होने पर व्यक्ति को इंतजार करना पड़ता है। यह भी उनका व्यक्तिगत आरोप है और उपलब्ध रिपोर्टों में इसे जेल व्यवस्था पर आधिकारिक निष्कर्ष के तौर पर स्थापित नहीं किया गया है।
कोर्ट से मिली जमानत के बाद बाहर आईं संदीपा
संदीपा विर्क को दिल्ली हाई कोर्ट ने 27 दिसंबर 2025 को नियमित जमानत दी थी। कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार वह चार महीने से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रह चुकी थीं। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि मामले का मुख्य आरोपी अमित गुप्ता फरार था और ट्रायल के जल्द शुरू होने की संभावना कम थी।
जमानत का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने मामले में अंतिम रूप से आरोपों को खारिज कर दिया है। मामला अपनी कानूनी प्रक्रिया के अधीन है और आरोपों पर अंतिम निर्णय ट्रायल की प्रक्रिया के बाद ही होगा।
जेल से निकलने के बाद बदली जिंदगी
जेल से बाहर आने के बाद संदीपा लगातार अपने अनुभवों के बारे में बात कर रही हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान उनके करियर और व्यक्तिगत रिश्तों पर भी असर पड़ा। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री के कुछ लोगों ने उनसे दूरी बना ली थी। वहीं उन्होंने यह भी बताया कि जेल में मिली कुछ महिलाओं की कानूनी मदद करने की कोशिश उन्होंने बाद में की।
संदीपा की कहानी अब सोशल मीडिया और एंटरटेनमेंट जगत में चर्चा का विषय बनी हुई है। एक तरफ उनके खिलाफ चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले की कानूनी प्रक्रिया जारी है, तो दूसरी तरफ जेल से बाहर आने के बाद उनके द्वारा साझा किए जा रहे अनुभवों ने जेलों में महिलाओं की सुरक्षा, निजता, मेडिकल जांच और मानवीय व्यवहार को लेकर बहस छेड़ दी है।
संदीपा विर्क के जेल अनुभवों को लेकर सामने आए दावे बेहद गंभीर हैं। हालांकि इन दावों को उनके व्यक्तिगत अनुभव के तौर पर देखना जरूरी है और संबंधित जेल प्रशासन या जांच के आधिकारिक पक्ष के बिना इन्हें अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता। दूसरी ओर, 6 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनके खिलाफ जांच और कानूनी प्रक्रिया अलग विषय है, जिसमें अदालत का अंतिम फैसला अभी बाकी है। ऐसे में मामले से जुड़े आरोपों और अभिनेत्री द्वारा किए गए दावों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।

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